Media24Media.com: भूकंप

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चार दिन में दूसरी बार दिल्ली में भूकंप के तेज झटके, सहमे लोग

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 Earthquake in Delhi :  दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को एक बार फिर तीन दिन में दूसरी बार भूकंप के तेज झटके लगे हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर इतनी थी कि लोग को बड़ी अनहोनी का डर सताने लगा है। दरअसल, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई है। इससे डरे सहमे लोग घरों और दफ्तरों से निकलकर बाहर आ गए। वहीं, अब लगातार लग रहे भूकंप के तेज झटकों से भूकंप वैज्ञानिकों को भी बड़ी अनहोनी का डर सताने लगा है। 


भूकंप वैज्ञानिक के मुताबिक हिमालय के भूकंप संभावित क्षेत्र में बसा नेपाल उन देशों में है जहां पर भूकंप का सबसे अधिक खतरा है और इसमें भी पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में बड़े भूकंप आने की आशंका है। सरकार की ‘पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेस्मेंट' (पीडीएनए) रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल भूकंप के लिहाज से दुनिया का 11वां सबसे खतरनाक देश है। इसलिए जब नेपाल की पश्चिमी पहाड़ियों में शुक्रवार देर रात 6.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया तो यह इस महीने का पहला भूकंप नहीं था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम नेपाल में शुक्रवार करीब मध्य रात्रि आया भूकंप 2023 में आए 70 भूकंप में से एक है।

नेपाल स्थित राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र में वरिष्ठ भूकंप वैज्ञानिक भरत कोइराला ने बताया, ‘‘भारतीय और यूरेशिया टेक्टॉनिक प्लेटों में लगातार टक्कर हो रही है जिससे बहुत ही अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।'' उन्होंने कहा कि नेपाल इन दोनों प्लेटों की सीमा पर है जो भूकंप के मामले में अतिसक्रिय इलाकों में आता है और इसलिए नेपाल में भूंकप आना सामान्य है। कोइराला ने कहा, ‘‘पश्चिमी नेपाल में बड़े भूकंप आने का खतरा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी नेपाल में पिछले 520 सालों से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। इसलिए बहुत सारी ऊर्जा एकत्रित हो गई है और भूकंप उस ऊर्जा को मुक्त करने का एकमात्र माध्यम है।''


Earthquake : दिल्‍ली-एनसीआर सहित देश के कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके

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 Earthquake : देश के कई इलाकों में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र अफगानिस्‍तान के हिंदू कुश में था. दिल्‍ली-एनसीआर  सहित उत्तर भारत के कई इलाकों विशेषकर जम्मू कश्मीर और पंजाब के कुछ इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. 


हिंदूकुश का इलाका पहाड़ी इलाका है, जहां पर आबादी बेहद कम है. साथ ही भूकंप की गहराई ज्‍यादा होने के चलते नुकसान की बेहद कम आशंका जताई जा रही है. भूकंप के कारण फिलहाल किसी भी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है. 


नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी एक ट्वीट के दौरान जानकारी दी है कि अफगानिस्‍तान के हिंदू कुश इलाके में 9 बजकर 31 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसकी तीव्रता 5.8 आंकी गई है. भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 181 किमी नीचे था.

अधिकारियों ने बताया कि अब तक कहीं से किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। इससे पहले शनिवार सुबह 8.36 बजे रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र पाकिस्तान क्षेत्र में था। भूकंप विज्ञान की दृष्टि से कश्मीर भूकंप प्रवण क्षेत्र में स्थित है।

8 अक्टूबर 2005 को जम्मू-कश्मीर में रिक्टर पैमाने पर 7.6 की तीव्रता वाले भूकंप के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों किनारों पर 80,000 से अधिक लोग मारे गए थे।


छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में भूकंप के झटके

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सरगुजा। संभाग के सूरजपुर जिले में आज दोपहर करीब बारह बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता तीन दशमलव शून्य मापी गई है। ये झटके सूरजपुर जिले से पंद्रह किलोमीटर दूर महसूस किए गए। हालांकि, भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। लेकिन, कुछ दीवारों पर दरारें पड़ने की बात कही जा रही है। 



यह सामान्य श्रेणी का भूकंप था, जो बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता नहीं रखता  फिर भी केंद्र के पास जहां कंपन अधिक होती है, वहां यह प्रभावकारी हो सकता है। सूरजपुर में भूकंप के झटके आने के बाद जिला प्रशासन ने आज स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी। इससे पहले, बीते ग्यारह और उनतीस जुलाई को भी सरगुजा संभाग के ही कोरिया और अंबिकापुर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

छत्तीसगढ़ में भूकंप के झटके, नागरिक चिंतित

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कोरिया। जिले के चरचा कालरी क्षेत्र में बीती रात करीब एक बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। मौसम विज्ञान के भूकंप अनुभाग ने रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता चार दशमलव छह बताई है। भूकंप के इस झटके से एसईसीएल के चरचा ईस्ट खदान के एक सौ एक नंबर पैनल में एयर ब्लास्ट हुआ। इस घटना में वहां काम कर रहे तीन कर्मचारी घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई है। इन सभी श्रमिकों को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बीती रात आए भूकंप का केन्द्र भू-सतह से लगभग सोलह किलोमीटर जमीन के भीतर बताया गया है। यह भूकंप मोडरेट श्रेणी का था, जिससे कच्चे मकान और भू-सतह पर बने कमजोर बनावट को क्षति पहुंच सकती थी। गौरतलब है कि बीते ग्यारह जुलाई को भी कोरिया जिला मुख्यालय के पास चार दशमलव तीन रिक्टर तीव्रता वाला भूकंप का झटका महसूस किया गया था।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भूकंप की घटना में घायल कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।



 

 

 

 

 

Earthquake Update: हैती में आए भूकंप से अब तक 1300 लोगों की मौत, कई हजार लोग घायल

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हैती में शनिवार यानी 14 अगस्त को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी ने शनिवार को बताया कि हैती में भूकंप की तीव्रता काफी तेज थी, जिसके कारण कई इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा था। भारतीय समय के मुताबिक हैती में शाम 5:59 बजे भूकंप आया था, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 1300 हो गई है। हैती की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने घोषणा की है कि हैती में आए 7.2 तीव्रता के भीषण भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1300 हो गई है। हैती के सिविल प्रोटेक्शन सर्विस ने एक ट्वीट में कहा कि सूद में 1 हजार 054, निप्स में 122, ग्रैंड एन्से में 119 और नॉर्ड-ऑएस्ट में दो लोग मारे गए हैं।

जानकारी के मुताबिक हैती में भूकंप के बाद दिनभर और रात तक झटके महसूस किए जाते रहे। बेघर हो चुके लोग और वे लोग जिनके मकान ढहने के कगार पर हैं उन्होंने खुले आसमान के नीचे सड़कों पर रात बिताई। शहर तबाह हो चुके हैं और अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। प्रधानमंत्री ने पूरे देश में एक महीने की आपात स्थिति की घोषणा की है और कहा है कि जब तक क्षति का आकलन नहीं हो जाता तब तक वह अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं मांगेंगे।

PM ने की अपील

प्रधानमंत्री एरियल हेनरी ने कहा कि भूकंप के बाद 'बेहद गंभीर स्थिति' का सामना करने के लिए 'एक साथ काम करना' जरूरी है। उन्होंने कहा कि 'मैंने भूकंप पीड़ितों से मुलाकात की। डॉक्टर, बचाव दल और पैरामेडिक्स हवाई अड्डे से सहायता प्रदान करने के लिए पहुंच रहे हैं।' प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर कहा कि 'यह एक कठोर और दुखद वास्तविकता है जिसका हमें साहस के साथ सामना करना चाहिए।' उन्होंने कहा कि विभिन्न टीमें 'पीड़ितों को सहायता देने' के लिए मैदान पर हैं और संकट से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई का आह्वान किया।

कोरोना, भूकंप और तूफान से हालात बदतर

बता दें कि हैती के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में 14 अगस्त को 7.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र पोर्ट-ओ-प्रिंस की राजधानी से लगभग 150 किमी दूर था। भूकंप आने से कई शहर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं और भूस्खलन होने से बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है। कोरोना से पहले ही बुरी तरह प्रभावित हैती के लोगों की पीड़ा भूकंप के कारण और भी बढ़ गई है। संकट और भी बढ़ सकता है क्योंकि तूफान ग्रेस आज हैती पहुंच सकता है।

2010 में हुई थी 3 लाख मौत

आपदाग्रस्त इस कैरेबियाई देश में अक्सर भूकंप और चक्रवाती तूफान तबाही मचाते रहे हैं। 2018 में यहां 5.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 12 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। सबसे ज्यादा तबाही 2010 में हुई थी। 7.1 तीव्रता के इस भूकंप ने 3 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।

भूकंप आने का कारण

पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। दूसरे शब्दों में कहें तो पृथ्वी कई लेयर में बंटी होती है और जमीन के नीचे कई तरह की प्लेट होती है। ये प्लेट्स आपस में फंसी रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये प्लेट्स खिसक जाती है, जिस वजह से भूकंप आता है। 

भोगौलिक हलचल के आधार पर जोन तय 

कई बार इससे ज्यादा कंपन हो जाता है और इसकी तीव्रता बढ़ जाती है। भारत में धरती के भीतर की परतों में होने वाली भोगौलिक हलचल के आधार पर कुछ जोन तय किए गए हैं और कुछ जगह यह ज्यादा होती है तो कुछ जगह कम। इन संभावनाओं के आधार पर भारत को 5 जोन बांटा गया है, जो बताता है कि भारत में कहां सबसे ज्यादा भूकंप आने का खतरा रहता है। इसमें जोन-5 में सबसे ज्यादा भूकंप आने की संभावना रहती है और 4 में उससे कम, 3 उससे कम होती है।

भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

भूकंप आने पर क्या करें 

  • आपको भूकंप के झटके जैसे ही महसूस हों, वैसे ही आप किसी मजबूत टेबल के नीचे बैठ जाएं और कस कर पकड़ लें।
  •  जब तक झटके जारी रहें या आप सुनिश्चित न कर लें कि आप सुरक्षित ढंग से बाहर निकल सकते हैं, तब तक एक ही जगह बैठे रहें।
  •  अगर आप ऊंची इमारत में रहते हैं तो खिड़की से दूर रहें।
  •  आप बिस्‍तर पर हैं तो वहीं रहें और उसे कसकर पकड़ लें। अपने सिर पर तकिया रख लें।
  •  आप बाहर हैं तो किसी खाली स्‍थान पर चले जाएं यानी बिल्डिंग, मकान, पेड़, बिजली के खंभों से दूर।

Earthquake:7.2 तीव्रता के भूकंप के झटकों से दहला हैती, अब तक 304 की मौत, 1800 लोग घायल

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हैती में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी ने शनिवार को बताया कि हैती में भूकंप की तीव्रता काफी तेज थी, जिसके कारण कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। भारतीय समय के मुताबिक हैती में शाम 5:59 बजे भूकंप आया है। भूकंप के झटके काफी तेज थे। 


रिक्टर स्केल पर हैती में आए भूकंप की तीव्रता 7.2 आंकी गई है। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कहा कि शनिवार को हैती में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया है, जिससे आपदाग्रस्त कैरेबियाई राष्ट्र के पश्चिम में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं भूकंप के कारण कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है।


दरअसल, दक्षिण-पश्चिम हैती में शनिवार को 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से इमारतें भरभरा कर गिर गई। इसमें कम से कम 304 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 1800 लोग घायल हो गए हैं। भूकंप के कारण सैकड़ों घर ढह गए हैं। भूकंप के कारण लोग सड़कों पर आ गए और उन्होंने घरों, होटलों और अन्य ढांचों के मलबे में दबे लोगों को निकालने में बचावकर्मियों की मदद की।

 

शनिवार को भूकंप आने से कई शहर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं और भूस्खलन होने से भूकंप से बुरी तरह प्रभावित दो समुदायों के बीच बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है। भूकंप के कारण कोरोना वायरस महामारी से पहले से बुरी तरह प्रभावित हैती के लोगों की पीड़ा और भी बढ़ गई है। देश के राष्ट्रपति की हत्या और गहराती गरीबी से राष्ट्र वैसे ही संकट में है।

भूकंप का केंद्र राजधानी पोर्ट औ प्रिंस से करीब 125 किलोमीटर की दूरी था। अगले हफ्ते की शुरुआत में संकट और भी बढ़ सकता है क्योंकि तूफान ग्रेस सोमवार या मंगलवार तक हैती पहुंच सकता है। भूकंप के बाद दिनभर और रात तक झटके महसूस किए जाते रहे। बेघर हो चुके लोग, वे लोग जिनके घर ढहने के कगार पर हैं उन्होंने खुले में सड़कों पर रात बिताई। प्रधानमंत्री एरियल हेनरी ने कहा कि ऐसे स्थानों पर मदद भिजवा रहे हैं जहां पर शहर तबाह हो चुके हैं और अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। हैती की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के निदेशक जैरी चांडलर की ओर से बताया गया कि मृतक संख्या 304 है और सबसे ज्यादा लोग देश के दक्षिण में हताहत हुए हैं। अस्पतालों में घायलों को लाने का सिलसिला जारी है. कम से कम 860 घर नष्ट हो गए तथा 700 से अधिक क्षतिग्रस्त हो गए।


अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूएसऐड प्रशासक समांथा पॉवर को हैती को अमेरिकी मदद देने के लिए समन्वयक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है। यूएसऐड नुकसान का आकलन करने और पुनर्निर्माण करने में मदद करेगा। अर्जेंटीना, चिली समेत कई देशों ने मदद की पेशकश की है।

2010 में हुई थी 3 लाख मौत

आपदाग्रस्त इस कैरेबियाई देश में अक्सर भूकंप और चक्रवाती तूफान तबाही मचाते रहे हैं। 2018 में यहां 5.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 12 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। सबसे ज्यादा तबाही 2010 में हुई थी। 7.1 तीव्रता के इस भूकंप ने 3 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।

भूकंप आने का कारण

पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। दूसरे शब्दों में कहें तो पृथ्वी कई लेयर में बंटी होती है और जमीन के नीचे कई तरह की प्लेट होती है। ये प्लेट्स आपस में फंसी रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये प्लेट्स खिसक जाती है, जिस वजह से भूकंप आता है। 

भोगौलिक हलचल के आधार पर जोन तय 

कई बार इससे ज्यादा कंपन हो जाता है और इसकी तीव्रता बढ़ जाती है। भारत में धरती के भीतर की परतों में होने वाली भोगौलिक हलचल के आधार पर कुछ जोन तय किए गए हैं और कुछ जगह यह ज्यादा होती है तो कुछ जगह कम। इन संभावनाओं के आधार पर भारत को 5 जोन बांटा गया है, जो बताता है कि भारत में कहां सबसे ज्यादा भूकंप आने का खतरा रहता है। इसमें जोन-5 में सबसे ज्यादा भूकंप आने की संभावना रहती है और 4 में उससे कम, 3 उससे कम होती है।

भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

भूकंप आने पर क्या करें 

  • आपको भूकंप के झटके जैसे ही महसूस हों, वैसे ही आप किसी मजबूत टेबल के नीचे बैठ जाएं और कस कर पकड़ लें।
  •  जब तक झटके जारी रहें या आप सुनिश्चित न कर लें कि आप सुरक्षित ढंग से बाहर निकल सकते हैं, तब तक एक ही जगह बैठे रहें।
  •  अगर आप ऊंची इमारत में रहते हैं तो खिड़की से दूर रहें।
  •  आप बिस्‍तर पर हैं तो वहीं रहें और उसे कसकर पकड़ लें। अपने सिर पर तकिया रख लें।
  •  आप बाहर हैं तो किसी खाली स्‍थान पर चले जाएं यानी बिल्डिंग, मकान, पेड़, बिजली के खंभों से दूर।

Earthquake: राजस्थान और लद्दाख सहित देश के कई हिस्‍सों में महसूस किए गए भूकंप के झटके

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राजस्थान और लद्दाख सहित देश के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। लद्दाख में बुधवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल (Richter Scale) पर इनकी तीव्रता 3.6 मापी गई है। हालांकि भूकंप में किसी के भी हताहत होने या कोई नुकसान होने की खबर नहीं है। इसके राजस्थान और मेघालय में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। राजस्थान के बीकानेर में आज सुबह 5:24 बजे रिक्टर पैमाने पर 5.3 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इस बात की जानकारी दी है। वहीं मेघालय में रात 2 बजकर 10 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल में 4.1 मापी गई है।



बता दें कि इससे पहले बीते शनिवार को पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर भूकंप के झटकों से कांप गया था। शनिवार सुबह करीब 10 बजकर 12 मिनट पर मणिपुर में भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र उखरुल में था। भूकंप के इस झटके से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।


राजधानी दिल्ली में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 2.8 मापी गई तीव्रता

 

भूकंप आने का कारण


पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। दूसरे शब्दों में कहें तो पृथ्वी कई लेयर में बंटी होती है और जमीन के नीचे कई तरह की प्लेट होती है। ये प्लेट्स आपस में फंसी रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये प्लेट्स खिसक जाती है, जिस वजह से भूकंप आता है। कई बार इससे ज्यादा कंपन हो जाता है और इसकी तीव्रता बढ़ जाती है। भारत में धरती के भीतर की परतों में होने वाली भोगौलिक हलचल के आधार पर कुछ जोन तय किए गए हैं और कुछ जगह यह ज्यादा होती है तो कुछ जगह कम। इन संभावनाओं के आधार पर भारत को 5 जोन बांटा गया है, जो बताता है कि भारत में कहां सबसे ज्यादा भूकंप आने का खतरा रहता है। इसमें जोन-5 में सबसे ज्यादा भूकंप आने की संभावना रहती है और 4 में उससे कम, 3 उससे कम होती है।


 भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना


भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।


भूकंप आने पर क्या करें 

  • आपको भूकंप के झटके जैसे ही महसूस हों, वैसे ही आप किसी मजबूत टेबल के नीचे बैठ जाएं और कस कर पकड़ लें।
  •  जब तक झटके जारी रहें या आप सुनिश्चित न कर लें कि आप सुरक्षित ढंग से बाहर निकल सकते हैं, तब तक एक ही जगह बैठे रहें।
  •  अगर आप ऊंची इमारत में रहते हैं तो खिड़की से दूर रहें।
  •  आप बिस्‍तर पर हैं तो वहीं रहें और उसे कसकर पकड़ लें। अपने सिर पर तकिया रख लें।
  •  आप बाहर हैं तो किसी खाली स्‍थान पर चले जाएं यानी बिल्डिंग, मकान, पेड़, बिजली के खंभों से दूर।


भूकंप के प्रकार

 

  1. विवर्तनिक भूकंप: यह भूकंप का सबसे सामान्य रूप है। यह आम तौर पर पृथ्वी की क्रस्ट में मौजूद प्लेटों की गति के कारण होता है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है।
  2. ज्वालामुखीय भूकंप: टेक्टोनिक भूकंप की तुलना में इस प्रकार का भूकंप कम सामान्य है। इस प्रकार के भूकंप ज्वालामुखी के विस्फोट से पहले या बाद में आते हैं। यह आम तौर पर मैग्मा के ज्वालामुखी से निकलने के कारण आता है, जो चट्टानों द्वारा सतह पर धकेला जाता है।
  3. संक्षिप्त भूकंप: इस प्रकार का भूकंप भूमिगत खानों में आता है। मुख्य कारण चट्टानों के भीतर उत्पन्न दबाव हो सकता है।
  4. विस्फोटक भूकंप: इस प्रकार का भूकंप कृत्रिम प्रकृति का होता है, जिसका अर्थ है कि यह मानव निर्मित गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होता है। परमाणु विस्फोट जैसे जमीन पर उच्च-घनत्व विस्फोट, विस्फोटक भूकंप का प्राथमिक कारण हैं। 

Earthquake in Japan- 7.1 तीव्रता के भूकंप के झटकों से दहला जापान, 950,000 घरों की बिजली गुल

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जापान में आज तेज भूकंप के झटकों से हलचल मच गई है। यह भूकंप जापान (Earthquake in Japan) के पूर्वोत्तर इलाके में शाम को आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.1 के आसपास मापी गई है। इस भूकंप का सबसे अधिक प्रभाव फुकुशिमा और मियागी के इलाकों में देखने को मिला है। इस क्षेत्र में साल 2011 में भी भूकंप आने के बाद सुनामी आई थी। जिसके बाद से आपातकालीन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।





यहां जैसे ही आप करेंगे कोई भी अश्लील कंटेट सर्च, तुरंत करेगी पुलिस कार्रवाही, रहें सावधान





सुनामी का खतरा नहीं





जापानी मीडिया एनएचके टीवी के अनुसार, भूकंप के कारण सुनामी का कोई खतरा नहीं है। बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र समुद्र तल से लगभग 60 किलोमीटर नीचे था। इस झटके को राजधानी टोकियो के दक्षिण पश्चिम इलाके में महसूस किया गया है।





फुकुशिमा परमाणु संयंत्र की जांच में जुटे अधिकारी





जापान (Earthquake in Japan) की परमाणु एजेंसिया फुकुशिमा दाई-इचि परमाणु संयंत्र की जांच में जुटे हुए हैं। 2011 में आए भूकंप और सुनामी से इस परमाणु प्लांट ने रेडियोएक्टिव पदार्थों का रिसाव हुआ था, जिससे समुद्र में भी प्रदूषण फैल गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के झटकों से परमाणु संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।





कैबिनेट बिग ब्रेकिंग : 1 लाख नए मकान भी बनेंगे, नवा रायपुर बसाहट की तैयारी, पढ़े पूरे निर्णय





भूकंप उसी क्षेत्र में आया जिनमें मार्च 2011 में सुनामी की त्रासदी आई थी। सरकार के प्रवक्ता कात्सुनोबु काटो ने सरकारी टीवी चैनल एनएचके को बताया कि भूकंप के बाद लगभग 950,000 घरों की बिजली चली गई है। दोनों परमाणु संयंत्रों फुकुशिमा दाई-नी और ओनागावा से किसी गंभीर नुकसान की रिपोर्ट नहीं है।


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