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बड़ी खबर: भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू होने वाली, आर्थिक सहयोग पर होगा बड़ा मंथन

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ वार्ताकार आने वाले दिनों में कई दौर की बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, इस बहु-दिवसीय वार्ता में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देश लंबे समय से आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत सकारात्मक रहती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसर बढ़ सकते हैं, निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और कई क्षेत्रों में नई साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

भारत और अमेरिका दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, और पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में यह वार्ता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

व्यापार जगत की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके नतीजे दोनों देशों के उद्योग, निर्यातकों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

फिलहाल सभी की नज़र इस बात पर है कि क्या दोनों देश व्यापारिक मुद्दों पर नई सहमति बनाकर आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत कर पाएंगे।

फिलहाल के लिए इतना ही, आगे की हर बड़ी अपडेट के लिए जुड़े रहिए।

भारत को जापान से 16,420 करोड़ रुपये की ODA सहायता, चार प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगी गति

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जापान सरकार ने भारत को शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 275.858 बिलियन जापानी येन (लगभग 16,420 करोड़ रुपये) की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। ये परियोजनाएं पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों में लागू की जाएंगी।

24 मार्च 2026 को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव श्री आलोक तिवारी और भारत में जापान के राजदूत केइइची ओनो के बीच नोट्स का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के बीच ऋण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इन परियोजनाओं में “बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना (फेज 3)” (102.480 बिलियन येन), “मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना” (92.400 बिलियन येन), “महाराष्ट्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा एवं नर्सिंग शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ीकरण परियोजना” (62.294 बिलियन येन) और “पंजाब में सतत बागवानी को बढ़ावा देने की परियोजना” (18.684 बिलियन येन) शामिल हैं।

बेंगलुरु मेट्रो परियोजना का उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूत करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण कम कर पर्यावरण सुधार करना है। इसी प्रकार मुंबई मेट्रो लाइन 11 परियोजना भी यातायात जाम कम करने, शहरी विकास को प्रोत्साहित करने और प्रदूषण में कमी लाने में सहायक होगी।

महाराष्ट्र में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी परियोजना का उद्देश्य तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग संस्थानों को सुदृढ़ कर चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाना है, जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब में सतत बागवानी परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित करने, बुनियादी ढांचे के विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

भारत और जापान के बीच 1958 से विकास सहयोग का मजबूत इतिहास रहा है। यह नई पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगी तथा उनके रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाएगी।

डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का याउंडे, कैमरून में शुभारंभ

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विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून की राजधानी याउंडे में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ने की। इस अवसर पर WTO की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद मंत्रियों ने WTO के मूलभूत मुद्दों और उसके सिद्धांतों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि WTO में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-प्रधान प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को केंद्र में रखते हुए संगठन के मूल सिद्धांतों—जैसे भेदभाव-रहित व्यवस्था, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता—को बनाए रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के पहले दिन के दौरान पीयूष गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री महामहिम डायोन नगुटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को मजबूत करने सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने WTO की महानिदेशक से भी मुलाकात कर MC14 के एजेंडे पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी MC14 के दौरान चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मैक्सिको, पेरू, रूस, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडे के साथ-साथ व्यापार संबंधों को बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। चिली और पेरू के साथ भारत-चिली तथा भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं की प्रगति पर बातचीत हुई। वहीं यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ हाल ही में संपन्न FTA वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और रात्रिभोज के साथ हुआ।

भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ: 100 अरब डॉलर की साझेदारी की ओर मजबूत कदम

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नई दिल्ली- भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), दिल्ली परिसर में “Pitch Perfect Australia-India: Perfect Conditions for a $100 Billion Partnership” शीर्षक से भारत–ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस केस स्टडीज़ संकलन का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नीति-निर्माता, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद एकत्र हुए और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के अगले चरण पर विचार-विमर्श किया गया।

यह संकलन भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) और न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक यात्राओं को संकलित किया गया है। प्रकाशन में 30 संगठनों के अनुभव शामिल हैं, जिन्होंने दोनों बाजारों में सफलतापूर्वक प्रवेश किया, विस्तार किया और व्यावसायिक अवसरों का लाभ उठाया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह संकलन नीति, उद्योग और अकादमिक जगत के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा,

“ये केस स्टडीज़ इस बात का प्रमाण हैं कि व्यापार समझौते किस प्रकार वास्तविक अवसरों में बदले हैं और व्यवसायों ने उन्हें अपनी वृद्धि के लिए कैसे उपयोग किया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल भारत–ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) से होने वाले लाभों को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन (OAM) ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अकादमिक, सरकार और उद्योग को एक मंच पर लाने वाली ऐसी पहलें भारत-ऑस्ट्रेलिया के मजबूत रणनीतिक संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

संयुक्त सचिव पेटल ढिल्लन ने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों में बढ़ती गति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आईआईएफटी ने शोध-आधारित अंतर्दृष्टि विकसित करने और ईसीटीए के बेहतर उपयोग को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने वास्तविक व्यावसायिक अनुभवों को सीखने के संसाधनों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग शोध और व्यवहार के बीच सेतु बनाने तथा वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को समर्थन देने के आईआईएफटी के संकल्प को दर्शाते हैं।

न्यू लैंड ग्लोबल ग्रुप, ऑस्ट्रेलिया के संस्थापक एवं सीईओ दीपेन रुघानी ने द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा करने में व्यावसायिक केस स्टडीज़ की भूमिका पर बल दिया। वहीं, कार्यकारी निदेशक नताशा झा भास्कर ने दोनों बाजारों में कार्यरत कंपनियों की सफलता की कहानियां और उनसे मिले सबक प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का समापन सरकार, व्यापार संगठनों और दोनों देशों में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधियों की सहभागिता वाली पैनल चर्चा तथा नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।

राजदूत अनिल वाधवा ने इस केस संकलन की सराहना करते हुए इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में यह संकलन व्यवसायों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए एक व्यावहारिक संसाधन के रूप में कार्य करेगा, जो अवसरों की पहचान, चुनौतियों के समाधान और सफल सीमा-पार सहयोग को उजागर करेगा।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) की स्थापना वर्ष 1963 में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत की गई थी। वर्ष 2002 में इसे डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हुआ। यह संस्थान शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्षमता निर्माण के लिए समर्पित एक प्रमुख संस्था है।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: वित्तीय सेवाओं पर ऐतिहासिक समझौते की वार्ता संपन्न

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने 22 दिसंबर 2025 को भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अंतर्गत वित्तीय सेवाओं पर परिशिष्ट (Financial Services Annex) से संबंधित वार्ताओं को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह उपलब्धि द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को 10 दिसंबर 2025 को आयोजित अंतिम दौर की वार्ताओं के दौरान अंतिम रूप दिया गया।


भारत और न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता साझा करते हैं। इस संबंध के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों देशों ने एक दूरदर्शी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता विकसित करने के लिए सहयोग किया है, जो उनके-अपने वित्तीय सेवा क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोलेगा। यह एफटीए द्विपक्षीय सहयोग को गति देने, बाजार पहुंच को सुगम बनाने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय प्रणालियों के गहन एकीकरण के लिए आवश्यक संस्थागत और नियामक ढांचा प्रदान करेगा।

भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट, सामान्य GATS प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़ते हुए, कुल 18 अनुच्छेदों तक विस्तारित है। इसके प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और रियल-टाइम लेन-देन अवसंरचना:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने घरेलू भुगतान अंतर्संचालनीयता विकसित करने तथा एकीकृत फास्ट पेमेंट सिस्टम (FPS) के माध्यम से रियल-टाइम सीमा-पार रेमिटेंस और व्यापारी भुगतान को समर्थन देने पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह प्रावधान भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम और फिनटेक क्षेत्र को सशक्त करेगा, भारतीय प्रवासी समुदाय से रेमिटेंस प्रवाह को बढ़ाएगा, भारतीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार के अवसर पैदा करेगा और UPI व NPCI जैसी भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा।

वित्तीय प्रौद्योगिकी और नियामक नवाचार:

दोनों देशों ने वित्तीय सेवाओं में नवाचार के लिए सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। समझौते में एक-दूसरे के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स और डिजिटल सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क से सीखने के प्रावधान शामिल हैं, जिनका सीमा-पार अनुप्रयोग संभव होगा। इससे भारत को द्विपक्षीय साझेदारी में एक फिनटेक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी तथा भारतीय फिनटेक कंपनियों के लिए सहयोग के नए अवसर सृजित होंगे।

वित्तीय सूचना का हस्तांतरण और संरक्षण:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने वित्तीय सूचना के हस्तांतरण, प्रसंस्करण और भंडारण से संबंधित प्रत्येक पक्ष के विधायी और नियामक अधिकारों को मान्यता दी है। साथ ही, डेटा संप्रभुता और उपभोक्ता गोपनीयता की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सीमा-पार डिजिटल संचालन को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्रेडिट रेटिंग और गैर-भेदभाव:

इस प्रावधान के तहत भारतीय वित्तीय संस्थानों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में मनमाने या भेदभावपूर्ण क्रेडिट आकलन से सुरक्षा मिलेगी। इससे भारतीय बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार पहुंच सुगम होगी और उनके संचालन पर किसी प्रकार के भेदभावपूर्ण नियामक प्रतिबंध से बचाव होगा।

बैक-ऑफिस और सहायक सेवाएं:

वित्तीय सेवाओं परिशिष्ट के अंतर्गत दोनों देशों ने बैक-ऑफिस और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सहायक गतिविधियों को समर्थन देने पर सहमति जताई है। यह भारत की विश्वस्तरीय आईटी और बिजनेस प्रोसेस सर्विस क्षमताओं का लाभ उठाएगा तथा लागत-कुशल वित्तीय सेवा वितरण को सक्षम बनाएगा, साथ ही भारत के वित्तीय सेवाओं, आईटी और बीपीओ क्षेत्रों की वृद्धि को समर्थन देगा।

एफडीआई सीमा और बैंक शाखाएं:

विशिष्ट प्रतिबद्धताओं की अनुसूचियां बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में बाजार पहुंच और राष्ट्रीय उपचार पर प्रगतिशील सहयोग को दर्शाती हैं। भारत ने बैंकिंग और बीमा में एफडीआई सीमा बढ़ाने तथा चार वर्षों की अवधि में 15 बैंक शाखाएं स्थापित करने की अनुमति देने वाला उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा प्रस्तावित किया है, जो GATS के तहत पहले प्रस्तावित 12 शाखाओं की सीमा से अधिक है। इससे भारतीय वित्तीय सेवा प्रदाताओं को न्यूज़ीलैंड में अपने संचालन का विस्तार करने में मदद मिलेगी और वित्तीय सेवाओं के निर्यात में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट पर वार्ताओं का सफल समापन दोनों सरकारों की आर्थिक संबंधों को गहरा करने और तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय सेवा परिदृश्य में पारस्परिक अवसरों का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह समझौता दूरदर्शी, संतुलित और बेहतर बाजार पहुंच, नियामक स्पष्टता तथा सहयोगी ढांचे प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे दोनों देशों के वित्तीय संस्थानों और सेवा प्रदाताओं को लाभ होगा।

वर्तमान में, भारतीय बैंक—बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया—न्यूज़ीलैंड में चार शाखाओं के साथ सहायक संचालन कर रहे हैं, जबकि न्यूज़ीलैंड की कोई भी बैंकिंग या बीमा इकाई भारत में मौजूद नहीं है और न ही कोई भारतीय बीमा कंपनी न्यूज़ीलैंड में स्थापित है। यह एफटीए स्पष्ट बाजार पहुंच प्रतिबद्धताओं, नियामक पारदर्शिता और द्विपक्षीय सहयोग ढांचे के माध्यम से द्विपक्षीय निवेश, संस्थागत उपस्थिति और सेवाओं के विस्तार को प्रोत्साहित करेगा तथा दोनों देशों के वित्तीय सेवा बाजारों के बीच संबंधों को नई गति देगा।

भारत-जॉर्डन व्यापार फोरम: प्रधानमंत्री मोदी और राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग बढ़ाने पर बल दिया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्डन के महामहिम राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने आज अम्मान में आयोजित इंडिया-जॉर्डन बिजनेस फोरम को संबोधित किया। फोरम में जॉर्डन के क्राउन प्रिंस हुसैन तथा जॉर्डन के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और निवेश मंत्री भी उपस्थित थे। महामहिम और प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को बढ़ाने के महत्व को स्वीकार किया और उद्योग जगत के प्रमुखों से इस संभावनाओं और अवसरों को विकास और समृद्धि में बदलने का आह्वान किया। महामहिम ने उल्लेख किया कि जॉर्डन के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स और भारत की आर्थिक शक्ति को मिलाकर दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया तथा उससे आगे तक एक आर्थिक कॉरिडोर तैयार किया जा सकता है।

फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जॉर्डन और भारत एक जीवंत समकालीन साझेदारी साझा करते हैं, जो उनके गहरे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित है। उन्होंने महामहिम की नेतृत्व क्षमता की सराहना की, जिनके नेतृत्व में जॉर्डन एक ऐसा सेतु बन गया है जो बाजारों और क्षेत्रों को जोड़ता है तथा व्यापार और विकास को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षों में भारत-जॉर्डन द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भारत की तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर होने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जॉर्डन और विश्व भर के साझेदारों के लिए अपार व्यावसायिक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जॉर्डन की कंपनियों को भारत के 1.4 अरब उपभोक्ता बाजार, मजबूत विनिर्माण आधार और स्थिर, पारदर्शी व पूर्वानुमेय नीति परिवेश का लाभ उठाने के लिए भारत के साथ साझेदारी करने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश मिलकर विश्व के लिए भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला साझेदार बन सकते हैं। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की 8% से अधिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उत्पादकता-उन्मुख शासन और नवाचार-उन्मुख नीतियों का परिणाम है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, फिनटेक, हेल्थ-टेक और एग्री-टेक क्षेत्रों में भारत-जॉर्डन व्यापार सहयोग के अवसरों को भी उजागर किया और इन क्षेत्रों में दोनों देशों के स्टार्ट-अप्स को सहयोग करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भारत की ताकत और जॉर्डन का भौगोलिक लाभ एक-दूसरे को पूरक कर सकते हैं और जॉर्डन को पश्चिम एशिया और अफ्रीका के लिए एक विश्वसनीय हब बना सकते हैं। उन्होंने कृषि, कोल्ड चेन, फूड पार्क, उर्वरक, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, हरित गतिशीलता और विरासत एवं सांस्कृतिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापारिक अवसरों को उजागर किया। भारत की हरित पहलों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन फाइनेंसिंग, डिज़लिनेशन और जल पुनर्चक्रण के क्षेत्रों में भारत-जॉर्डन व्यापार सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया।

फोरम में दोनों देशों के व्यापार नेताओं ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, फार्मा, उर्वरक, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, रक्षा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में FICCI और जॉर्डन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जिनके बीच पहले से ही दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए MoU है।

भारत–यूएई सीईपीए संयुक्त समिति की तीसरी बैठक में व्यापार वृद्धि और सहयोग पर जोर

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भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत–यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत संयुक्त समिति की तीसरी बैठक नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भाडू और यूएई के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मामलों के सहायक अवर सचिव ह.E. जुमा अल कैत ने की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि का स्वागत किया, जो वित्त वर्ष 2024–25 में 100.06 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, जो 19.6% की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है और भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार के रूप में यूएई की स्थिति की पुन: पुष्टि करता है। भारत-यूएई संयुक्त आयोग सीईपीए के कार्यान्वयन, प्रगति की समीक्षा और चुनौतियों के समाधान के लिए प्रमुख संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।

दोनों पक्षों ने सीईपीए के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों, डेटा साझाकरण, गोल्ड TRQ आवंटन, एंटी-डंपिंग मामलों, सेवाओं, मूल नियम (Rules of Origin), बीआईएस लाइसेंसिंग आदि पर विस्तृत चर्चा की। भारतीय पक्ष ने यूएई को गोल्ड TRQ को पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित करने के अपने हालिया निर्णय की भी जानकारी दी।

दोनों पक्षों ने हाल के उच्च-स्तरीय संपर्कों की समीक्षा की, जिनमें मुंबई और दुबई में माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ह.E. डॉ. थानी के बीच हुई बैठकें शामिल थीं। उन्होंने 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य की दिशा में गैर-तेल/ गैर-कीमती धातु व्यापार के विस्तार के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चाओं में औषधि क्षेत्र में नियामक सहयोग, मूल प्रमाणपत्र (Certificates of Origin) से संबंधित मुद्दों के समाधान, बीआईएस समन्वय तथा भारत के APEDA और यूएई के MoCCAE के बीच खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर एमओयू के शीघ्र हस्ताक्षर को भी शामिल किया गया।

बैठक का समापन दोनों पक्षों द्वारा व्यापार सुगमता, नियामक सहयोग, डेटा साझाकरण को मजबूत करने और सेवाओं की उपसमिति की बैठक बुलाने पर सहमति के साथ हुआ। यूएई प्रतिनिधिमंडल ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से भी मुलाकात की, जहां सीईपीए के सर्वोत्तम उपयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। यूएई प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा व्यापार संतुलन को गहरा करने, बाजार अवसरों के विस्तार और सीईपीए के तहत सामरिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा: पीयूष गोयल ने क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और एआई में अपार संभावनाएँ बताईं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में इंडो-कनाडियन बिजनेस चैंबर को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, मिनरल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी और सप्लाई-चेन विविधीकरण में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की क्षमता दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और भारत हर वर्ष सबसे बड़ा STEM टैलेंट पूल तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा प्राकृतिक सहयोगी हैं, जिनकी पूरक क्षमताएँ—व्यापार, निवेश और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करती हैं।

भारत–कनाडा के मजबूत संबंध और CEPA पर प्रगति

पीयूष गोयल ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई सकारात्मक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उच्च महत्त्वाकांक्षी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि CEPA दोनों देशों के बीच विश्वास, निवेश सुरक्षा और सम्मानजनक संवाद को मजबूत करेगा।

क्लीन एनर्जी और एआई–ड्रिवन इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत अग्रणी

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की 500 GW की राष्ट्रीय पावर ग्रिड—जिसमें 250 GW नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है—एआई आधारित प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं में शामिल होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था: मजबूती, स्थिरता और वैश्विक विश्वास

उन्होंने बताया कि भारत “Fragile Five” की सूची से आगे बढ़कर आज दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और अगले 2–2.5 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

भारत के पास—

  • कम मुद्रास्फीति,

  • मजबूत बैंकिंग प्रणाली,

  • ऊँचे विदेशी मुद्रा भंडार,

  • तेज़ी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर,

  • और सशक्त कैपिटल मार्केट है।

उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार 4.5 गुना तक बढ़ा है, जो निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।

भारत–कनाडा साझेदारी को मज़बूत करने के लिए पाँच–बिंदु प्रस्ताव

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संबंध को गति देने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दिए—

  1. संवाद को परिणामों में बदलना
    — स्पष्ट रोडमैप, लक्ष्य और मापनीय प्रगति।

  2. सीईओ फोरम को सक्रिय करना
    — उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. कनाडा को भारत के आगामी AI Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रण।

  4. संयुक्त नवाचार को बढ़ावा
    — भारत की मजबूत IPR व्यवस्था, विशाल डेटा सेट और किफायती अनुसंधान माहौल का लाभ उठाना।

  5. प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी
    — क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, एयरोस्पेस, रक्षा और मेक इन इंडिया के तहत निर्माण।

उन्होंने कहा कि कनाडाई नवाचार और भारतीय क्षमताएँ मिलकर दुनिया के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

भारत–कनाडा सहयोग: 2047 के विकसित भारत की यात्रा में साथ

अंत में,पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत की विकसित राष्ट्र 2047 की यात्रा में सहयोगी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत स्थिर, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर वातावरण प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में भारत–कनाडा साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।


भारत–EAEU मुक्त व्यापार समझौता: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मास्को में प्रगति की समीक्षा की

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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मास्को में एक श्रृंखला की बैठकों में भारत–यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने यूरेशियन इकोनॉमिक कमिशन के व्यापार मंत्री आंद्रेई स्लीपनेव, रूसी संघ के उद्योग और व्यापार उपमंत्री मिखाइल यूरीन से मुलाकात की और भारतीय और रूसी उद्योग के सदस्यों के साथ एक व्यवसाय नेटवर्किंग प्लेनरी में भी संबोधित किया।

बैठकें और चर्चा

इन वार्ताओं का आधार भारत–रूस ट्रेड और आर्थिक सहयोग कार्य समूह की निष्कर्षों पर था। चर्चा का मुख्य फोकस बाजार विविधीकरण, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, नियामक पूर्वानुमान सुनिश्चित करना और साझेदारी में संतुलित वृद्धि को बढ़ावा देना था। ये प्रयास दोनों देशों के नेताओं द्वारा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन USD तक पहुँचाने और औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से भारतीय निर्यात का विस्तार करने के लक्ष्य के अनुरूप हैं।

मंत्री आंद्रेई स्लीपनेव के साथ बैठक

वाणिज्य सचिव ने भारत–EAEU FTA (सामान) के अगले चरणों की समीक्षा की। 20 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में 18 महीने की कार्य योजना का उल्लेख है, जिसका उद्देश्य भारतीय व्यवसायों, एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए बाजार विविधीकरण करना है। नेताओं के मार्गदर्शन के अनुसार, सेवाओं और निवेश के क्षेत्रों पर भी आगे की प्रक्रिया में विचार किया जाएगा।

उपमंत्री मिखाइल यूरीन के साथ चर्चा

वाणिज्य सचिव ने व्यापार विविधीकरण, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम उपकरण, मशीनरी, चमड़ा, ऑटोमोबाइल और रसायन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में समयबद्ध मार्गदर्शिका पर विचार किया।

  • प्रमाणन आवश्यकताओं, कृषि और मछली व्यवसायों की सूची, प्रतियोगिता विरोधी प्रथाओं की रोकथाम और अन्य गैर-शुल्क मुद्दों को हल करने के लिए त्रैमासिक नियामक-से-नियामक बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी।

  • लॉजिस्टिक्स, भुगतान और मानकों से संबंधित व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के फर्मों के लिए व्यवसाय करना आसान और पूर्वानुमान योग्य हो।

उद्योग प्लेनरी

भारतीय और रूसी वरिष्ठ उद्योग नेताओं की उपस्थिति में वाणिज्य सचिव ने कंपनियों से 2030 द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट्स को संरेखित करने का आग्रह किया। उन्होंने भारत में लॉजिस्टिक्स सुधार, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और वस्तुओं और सेवाओं में सह-निवेश और सह-उत्पादन के अवसरों पर जोर दिया।

चर्चाओं में निर्यात बैलेंस बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिम को कम करने और योजनाबद्ध प्रोजेक्ट्स को क्रियाशील अनुबंधों में बदलने पर बल दिया गया, जिससे दोनों देशों के लोगों के लिए रोजगार और दीर्घकालिक समृद्धि पैदा हो।

भारत, एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में, रूस के साथ अपने व्यापार और आर्थिक सहयोग को गहरा करने का लक्ष्य रखता है और 2047 तक विकसित राष्ट्र, ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में काम कर रहा है।

भारत-नेपाल द्विपक्षीय बैठक: ट्रांजिट संधि में संशोधन से रेल आधारित व्यापारिक संपर्क को मिलेगा बढ़ावा

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भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और नेपाल सरकार के उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री अनिल कुमार सिन्हा के बीच आज नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच ट्रांजिट संधि (Treaty of Transit) के प्रोटोकॉल में संशोधन से संबंधित लेटर ऑफ एक्सचेंज (LoE) का आदान-प्रदान किया गया। इस हस्ताक्षर से जोगबनी (भारत) और बिराटनगर (नेपाल) के बीच रेल आधारित माल परिवहन को सुगम बनाया जाएगा, जिसमें अब बल्क कार्गो (bulk cargo) भी शामिल होगा। यह उदारीकरण प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर — कोलकाता–जोगबनी, कोलकाता–नौतनवा (सुनौली) और विशाखापत्तनम–नौतनवा (सुनौली) — तक विस्तारित किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच बहु-मोडल व्यापारिक संपर्क और नेपाल के तीसरे देशों के साथ व्यापार को और सशक्त बनाया जाएगा।

यह लेटर ऑफ एक्सचेंज (LoE) जोगबनी–बिराटनगर रेल लिंक के माध्यम से कंटेनरयुक्त और बल्क कार्गो दोनों के लिए प्रत्यक्ष रेल संपर्क को सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से कोलकाता और विशाखापत्तनम बंदरगाहों से माल की ढुलाई नेपाल के मोरंग जिले में स्थित नेपाल कस्टम यार्ड कार्गो स्टेशन तक की जा सकेगी। यह रेल लिंक भारत सरकार की अनुदान सहायता (grant assistance) से निर्मित किया गया था और इसे भारत एवं नेपाल के प्रधानमंत्रियों द्वारा 1 जून 2023 को संयुक्त रूप से उद्घाटित किया गया था।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा-पार कनेक्टिविटी और व्यापार सुगमता को बढ़ाने के लिए चल रही द्विपक्षीय पहलों का स्वागत किया, जिसमें इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICPs) और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं का विकास शामिल है।

भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक और निवेश भागीदार है, जो नेपाल के बाहरी व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये नई पहलें दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेंगी और क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देंगी।

भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चौथा दौर की वार्ता संपन्न, दोनों देशों ने किया समयबद्ध और संतुलित समझौते के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त

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ऑकलैंड और रोटोरुआ-भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) पर चौथे दौर की वार्ताएँ आज ऑकलैंड और रोटोरुआ में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। यह दौर पाँच दिनों तक चला, जिसमें दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाएँ हुईं।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री टॉड मैकक्ले ने इस दौर के दौरान हुई निरंतर प्रगति की सराहना की और एक आधुनिक, व्यापक एवं भविष्य-उन्मुख मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा

वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने कई प्रमुख विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं —

  • वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग (Economic and Trade Cooperation)

  • उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin)

इन चर्चाओं में दोनों देशों की यह साझा भावना परिलक्षित हुई कि भारत–न्यूजीलैंड साझेदारी को और सशक्त बनाते हुए एक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक समृद्धि और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को सुनिश्चित करने के लिए गहरे आर्थिक साझेदारी संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार प्रवाह में वृद्धि, निवेश संबंधों को गहराई, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, और व्यवसायों के लिए अधिक स्थिरता और बाजार पहुँच सुनिश्चित होगी।

व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार (Bilateral Merchandise Trade) लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

प्रस्तावित FTA से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, दवा निर्माण, शिक्षा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है, जिससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।

समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर

दोनों देशों ने यह सहमति जताई कि अंतर-सत्रीय कार्य (Inter-sessional Work) के माध्यम से बातचीत की गति को बनाए रखा जाएगा। सभी अध्यायों पर विस्तृत चर्चा जारी रहेगी ताकि भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी रूप में अंतिम रूप दिया जा सके।


न्यूजीलैंड में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत–न्यूजीलैंड व्यापार मंच ने द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को दी नई गति

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक यात्रा के अवसर पर, जहाँ वे अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुँचे, भारत–न्यूजीलैंड व्यापार मंच (India–New Zealand Business Forum) का आयोजन ऑकलैंड चैंबर ऑफ कॉमर्स और भारतीय उच्चायोग, वेलिंगटन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

इस मंच में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, प्रमुख उद्योगपति, और व्यापारिक जगत के प्रतिनिधि एक साथ आए। इसका उद्देश्य भारत–न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों की गहराई को प्रदर्शित करना और साझेदारी एवं सहयोग के नए अवसरों की खोज करना था।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण था एक “फायरसाइड चैट” — जिसमें पीयूष गोयल और टॉड मॅक्ले, न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री, के बीच विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद ने दोनों देशों की सरकारों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की चल रही वार्ताओं के महत्व को रेखांकित किया। यह चर्चा मार्च 2025 में भारत में हुए उस उच्चस्तरीय बैठक की भावना को आगे बढ़ाती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक समग्र और प्रगतिशील व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

ऑकलैंड और रोटोरुआ प्रवास के दौरान, गोयल ने न्यूजीलैंड के कई प्रमुख उद्योग नेताओं से मुलाकात की, जिनमें कारमेन विसेलिच (सीईओ, Valocity),]रंजय सिक्का (सीईओ, Slumberzone), नाथन गाय (अध्यक्ष, Meat Industry Association), और टोनी क्लिफर्ड (प्रबंध निदेशक, Pan Pac) शामिल थे। इन बैठकों में कृषि, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, खेल, गेमिंग, और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति—विशेषकर हालिया चंद्र अभियानों—के चलते स्पेस सहयोग को भी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदारी क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया।

रोटोरुआ में गोयल ने एक सीईओ राउंडटेबल को संबोधित किया, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल और न्यूजीलैंड के अग्रणी उद्योगों के सीईओ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के बीच मित्रता, विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने भारत को एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए नवाचार और मूल्यवर्धन के व्यापक अवसरों पर प्रकाश डाला।

गोयल और टॉड मॅक्ले ने ऑकलैंड और रोटोरुआ दोनों स्थानों पर भारतीय प्रवासी समुदाय से भी संवाद किया। ऑकलैंड में इस अवसर पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भारत और न्यूजीलैंड के बीच “जीवंत सेतु (Living Bridge)” बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावना को प्रतिध्वनित करता है।

गोयल ने प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे न्यूजीलैंड — अपनी “कर्मभूमि” — के विकास में योगदान देते हुए भारत से अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को बनाए रखें और दोनों देशों के समुदायों को सशक्त बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएँ।

भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी न्यूजीलैंड की कई प्रमुख कंपनियों के साथ व्यापारिक और निवेश संभावनाओं पर चर्चा की।  उन्होंने रेड स्टैग (न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी सॉमिल), फॉनटेरा कोऑपरेटिव ग्रुप के डेयरी और फूड इनोवेशन मुख्यालय, और ऑकलैंड यूनिवर्सिटी इनोवेशन हब का दौरा किया, जहाँ द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसरों पर सार्थक बातचीत हुई।

इस यात्रा ने भारत–न्यूजीलैंड संबंधों में नए युग की शुरुआत को चिह्नित किया और इस बात को पुनः स्थापित किया कि भारत, न्यूजीलैंड को अपनी विकास यात्रा में एक रणनीतिक भागीदार के रूप में देखता है। दोनों देशों ने लंबी अवधि के आर्थिक सहयोग और आपसी समृद्धि को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत किया।


उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से इस्राइल के आर्थिक प्रतिनिधि यैर ओशेरॉफ की सौजन्य भेंट

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 रायपुर-उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा में अपने रायपुर स्थित निवास कार्यालय में इस्राइल के अर्थ मंत्रालय के दक्षिण भारत हेतु आर्थिक एवं व्यापारिक प्रतिनिधि यैर ओशेरॉफ ने सौजन्य मुलाकात की।

बैठक के दौरान भारत और इस्राइल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार प्रगाढ़ हो रहे मित्रतापूर्ण संबंधों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि नवाचार, सिंचाई तकनीक और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में इस्राइल के अनुभव एवं विशेषज्ञता से राज्य को लाभ मिल सकता है।

इस अवसर पर ओशेरॉफ ने छत्तीसगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद को समाप्त करने हेतु किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित हो रही स्थायी शांति का वातावरण राज्य के विकास को गति देगा।

बैठक में उन्नत तकनीक के आदान-प्रदान, औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा नई तकनीक के माध्यम से रोजगार एवं विकास के अवसर सृजित करने पर भी चर्चा की गई। इस मुलाकात से छत्तीसगढ़ के इस्राइल के साथ आर्थिक, वैज्ञानिक और औद्योगिक सहयोग की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

भारत–न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा: रोटोरुआ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उच्च-स्तरीय वार्ताएं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड की अपनी आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन व्यापार, निवेश, संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च-स्तरीय बैठकों में भाग लिया।

दिन की शुरुआत में, रोटोरुआ जाते समय मंत्री ने एयर न्यूजीलैंड के सीईओ निखिल रविशंकर से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक संपर्क को बढ़ाने में एयर न्यूजीलैंड की भूमिका पर चर्चा हुई। पीयूष गोयल ने भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र पर प्रकाश डाला और एयर सेवाओं तथा पर्यटन को मजबूत करने के लिए सहयोग के बड़े अवसरों का उल्लेख किया।

रोटोरुआ पहुंचने पर, रोटोरुआ की मेयर तानिया टैप्सेल ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीयूष गोयल ने शहर की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ते द्विपक्षीय संबंध व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आएंगे।

इसके बाद, न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में, पीयूष गोयल का ते पुइया — माओरी संस्कृति और कला के राष्ट्रीय केंद्र — में पारंपरिक माओरी स्वागत समारोह (पोह्विरी) के साथ स्वागत किया गया। समारोह में पारंपरिक गीतों और "होंगी" अभिवादन ने दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और गर्मजोशी को दर्शाया। मंत्री ने माओरी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की प्रशंसा की और कहा कि माओरी मूल्यों और भारतीय सभ्यता के सिद्धांतों में गहरा साम्य है — विशेष रूप से प्रकृति और समुदाय के प्रति आदर में।

इसके बाद, पीयूष गोयल और मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत–न्यूजीलैंड सीईओ राउंडटेबल की संयुक्त अध्यक्षता की, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पीयूष गोयल ने भारत की तेजी से बदलती आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला और तकनीक, कृषि, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यटन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने न्यूजीलैंड के उद्योग जगत को भारत के साथ और गहरी साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पीयूष गोयल ने मंत्री टॉड मैक्ले को उनके गृह नगर रोटोरुआ में मिले स्नेहपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि भारत और न्यूजीलैंड आपसी मित्रता, समृद्धि और साझा प्रगति के मार्ग पर अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


भारत ने पेरू और चिली के साथ व्यापार वार्ता के दो महत्वपूर्ण राउंड सफलतापूर्वक संपन्न किए

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भारत ने लैटिन अमेरिका के देशों के साथ दो महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता राउंड सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं, जो क्षेत्र के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और व्यापारिक संबंधों को गहरा करने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।

9वां राउंड – भारत–पेरू व्यापार समझौता वार्ता:

9वां राउंड भारत–पेरू व्यापार समझौता वार्ता 3 से 5 नवंबर 2025 तक लीमा, पेरू में आयोजित किया गया। इस वार्ता में प्रस्तावित समझौते के मुख्य अध्यायों में उल्लेखनीय प्रगति हुई, जिनमें सामान और सेवाओं का व्यापार, मूल नियम (Rules of Origin), तकनीकी बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, विवाद समाधान और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

समापन समारोह में पेरू की विदेश व्यापार एवं पर्यटन मंत्री ह.ए. सुश्री टेरेसा स्टेला मेरा गोमेज़ और विदेश व्यापार के उप मंत्री ह.ए. सेसर अगस्तो ल्लोना सिल्वा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भारत की ओर से ह.ए. विश्वास विदु सापकाल, भारत के पेरू राजदूत और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख विमल आनंद, संयुक्त सचिव और मुख्य वार्ता प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री गोमेज़ ने पेरू की ओर से वार्ता को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समझौता व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ावा देगा। राजदूत सापकाल ने भारत की सतत वृद्धि गति को रेखांकित किया और कहा कि यह समझौता महत्वपूर्ण खनिज, दवा, ऑटोमोबाइल, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर उत्पन्न करेगा।

दोनों पक्षों ने अगली वार्ता राउंड से पहले लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए अंतर-सत्रीय बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। अगली वार्ता राउंड जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित है।

तीसरा राउंड – भारत–चिली व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) वार्ता:

पहले, 27 से 30 अक्टूबर 2025 तक सैंटियागो, चिली में भारत–चिली CEPA वार्ता का तीसरा राउंड संपन्न हुआ। इस वार्ता में सामान और सेवाओं का व्यापार, निवेश संवर्धन, मूल नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार, TBT/SPS उपाय, आर्थिक सहयोग और महत्वपूर्ण खनिज जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने CEPA वार्ता को जल्द और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के अपने साझा संकल्प को दोहराया। इस समझौते का उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और आर्थिक एकीकरण को गहरा करना है।

निष्कर्ष:

पेरू और चिली के साथ भारत की बढ़ती व्यापारिक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के साथ मजबूत साझेदारी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यापक आर्थिक सहयोग के ढांचे के माध्यम से आगे बढ़ रही है।


भारत–रोमानिया व्यापार मंच में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

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राज्य वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री जितिन प्रसाद ने आज ब्रासोव वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (CCIBv) द्वारा भारत के बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास और भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के सहयोग से आयोजित भारत–रोमानिया व्यापार मंच में भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश और औद्योगिक सहयोग का विस्तार करना था। इसमें ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग सेवाओं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया।

अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और उन्होंने रोमानियाई उद्यमों को ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत भारत के गतिशील विनिर्माण और नवाचार तंत्र में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

“भारत में व्यापार के अवसर” पर दिए गए एक प्रस्तुतीकरण में हाल के नीति सुधारों, व्यवसाय करने में सुगमता से जुड़ी पहलों और प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोरों में राज्य-स्तरीय प्रोत्साहनों का विवरण प्रस्तुत किया गया। सत्र के दौरान भारतीय और रोमानियाई कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों और प्रौद्योगिकी साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और व्यवसायिक मिलान सत्रों का भी आयोजन किया गया।

ब्रासोव मंच भारत और मध्य एवं पूर्वी यूरोप के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने दोनों देशों की सतत् विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की।

ब्रासोव आधुनिक रोमानिया का प्रतीक है — जहाँ परंपरागत उद्योग नई तकनीकों से मिलते हैं, जहाँ लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को प्रोत्साहन मिलता है, और जहाँ नवाचार फलता-फूलता है। यह भावना भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहलों की दृष्टि से मेल खाती है, जहाँ MSME और स्टार्ट-अप्स समावेशी विकास के इंजन के रूप में कार्य करते हैं। ब्रासोव की औद्योगिक क्षमता और भारत की विनिर्माण, डिज़ाइन और इंजीनियरिंग क्षमताओं के बीच सहयोग की असीम संभावनाएँ मौजूद हैं।

भारत और रोमानिया के बीच व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को सुदृढ़ करने पर द्विपक्षीय बैठक

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वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज रोमानिया की विदेश मंत्री महामहिम ओआना-सिल्विया त्सोइउ के साथ बुखारेस्ट में द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में व्यापार विस्तार, निवेश आकर्षण और भारत–यूरोपीय संघ (EU) के व्यापक आर्थिक ढांचे के अंतर्गत मजबूत एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने इस वर्ष के भीतर एक न्यायसंगत, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभदायक भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की, जो चल रही वार्ताओं के लिए निर्धारित राजनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप है।

बैठक के दौरान मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की। भारत का रोमानिया को निर्यात वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार FY 2023–24 में लगभग 2.98 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, दवाइयाँ और सिरेमिक जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को और गहरा करने तथा मानकों, परीक्षण और निवेश साझेदारियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बाजारों तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने उत्पादन के विविधीकरण और विश्वसनीय साझेदारों के रूप में मजबूत, अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का भी निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों में स्थिरता और विश्वास सुनिश्चित हो सके।

भारत और रोमानिया के नेतृत्व के बीच हालिया उच्च-स्तरीय संवादों पर आधारित होकर, दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने और नियमित द्विपक्षीय संपर्क कार्यक्रम जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने, मोबिलिटी टूलकिट विकसित करने और निवेशकों तक पहुंच को मजबूत करने के लिए फॉलो-अप कार्रवाइयों का समन्वय करने का निर्णय लिया ताकि संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदला जा सके।

यह यात्रा दोनों देशों की भारत–रोमानिया आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जो व्यापार का विस्तार करती है, निवेश प्रवाह को बढ़ाती है, और कौशल-आधारित गतिशीलता के नए मार्ग खोलती है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को पारस्परिक लाभ प्राप्त होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भूटान की आधिकारिक यात्रा पर, भारत–भूटान आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित

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 केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 तक भूटान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा में वे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं।

सीतारमण अपनी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत ऐतिहासिक संगचेन चोेखोर मठ से करेंगी, जिसकी स्थापना वर्ष 1765 में हुई थी। यह मठ 100 से अधिक भिक्षुओं का अध्ययन केंद्र है, जहाँ उन्नत बौद्ध दर्शन का अध्ययन कराया जाता है।

यात्रा के दौरान, वे भारत सरकार के सहयोग से संचालित कई प्रमुख परियोजनाओं का दौरा करेंगी, जिनमें कुरिचू हाइड्रोपावर प्लांट डैम और पावरहाउस, ग्यालसंग अकादमी, संगचेन चोेखोर मठ और पुनाखा जोंग शामिल हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री भूटान के राजा महामहिम जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक और भूटान के प्रधानमंत्री महामहिम दशो त्शेरिंग टोबग से शिष्टाचार भेंट करेंगी। इसके अलावा, वे भूटान के वित्त मंत्री श्री लेकी दोरजी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगी, जिसमें भारत–भूटान के आर्थिक और वित्तीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

आधिकारिक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, श्रीमती सीतारमण निम्नलिखित विषयों पर प्रस्तुतियों में भाग लेंगी —

  • भूटान की ऊर्जा क्षेत्र पर ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DGPC) की प्रस्तुति,

  • भूटान की 21वीं सदी की आर्थिक रोडमैप,

  • ड्रुक पीएनबी और बैंक ऑफ भूटान द्वारा बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर प्रस्तुति,

  • और गेलफू माइंडफुलनेस सिटी प्रोजेक्ट पर प्रस्तुति।

वित्त मंत्री कॉटेज एंड स्मॉल इंडस्ट्री (CSI) मार्केट का भी दौरा करेंगी, जहाँ वे भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से एक लेनदेन का अवलोकन करेंगी। यह दोनों देशों के बीच डिजिटल और वित्तीय जुड़ाव को और सशक्त बनाने का प्रतीक है।

यात्रा के अंतिम चरण में, सीतारमण भूटान के पुनाखा जोंग — देश का दूसरा सबसे पुराना और दूसरा सबसे बड़ा जोंग — का दौरा करेंगी। वहाँ जाते समय वे भूटानी किसानों से भी संवाद करेंगी, ताकि उनके कृषि अभ्यासों, चुनौतियों और अवसरों को समझा जा सके।

यह यात्रा भारत और भूटान के बीच गहरे और भरोसेमंद साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो परस्पर सम्मान, विश्वास और क्षेत्रीय प्रगति एवं समृद्धि की साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का जर्मनी दौरा: भारत–जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्षों का जश्न और आर्थिक सहयोग को नई दिशा

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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 23 अक्टूबर 2025 से बर्लिन (जर्मनी) के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और जर्मनी के बीच साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी। वर्ष 2025 भारत–जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ भी है, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक, मजबूत और लचीले संबंधों का प्रतीक है।

इस यात्रा के दौरान, मंत्री गोयल जर्मनी और भारत दोनों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों और व्यापार संघों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों और संवादों में भाग लेंगे।

मंत्री गोयल की मुलाकात जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइखे तथा संघीय चांसलरी में आर्थिक और वित्तीय नीति सलाहकार एवं जर्मनी के G7 और G20 शेर्पा डॉ. लेविन हॉल से होगी। इन बैठकों में भारत-जर्मनी आर्थिक साझेदारी को और गतिशील बनाने तथा व्यापार और निवेश सहयोग के नए अवसरों की खोज पर चर्चा होगी।

इसके अलावा, मंत्री गोयल लक्ज़मबर्ग के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश और व्यापार मंत्री ज़ेवियर बेटेल से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करने, लक्ज़मबर्ग की आगामी भारत यात्रा, क्षेत्रीय विकास और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

बर्लिन में अपने प्रवास के दौरान,मंत्री गोयल “तीसरे बर्लिन ग्लोबल डायलॉग (BGD)” सम्मेलन में वक्ता के रूप में भाग लेंगे। यह वार्षिक वैश्विक सम्मेलन है जिसमें दुनिया भर के व्यापार, शासन और शिक्षा जगत के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले मुद्दों पर चर्चा करते हैं। मंत्री “लीडर्स डायलॉग: ग्रोइंग टुगेदर – ट्रेड एंड एलायंसेस इन ए चेंजिंग वर्ल्ड” सत्र में पैनलिस्ट के रूप में भाग लेंगे। यह सत्र बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में राष्ट्रों और व्यवसायों के सहयोग और नए व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर केंद्रित होगा।

यात्रा के दौरान मंत्री गोयल की मुलाकात जर्मनी की प्रमुख कंपनियों जैसे — Schaeffler Group, Renk Vehicle Mobility Solutions, Herrenknecht AG, Infineon Technologies AG, Enertrag SE और Mercedes-Benz Group AG के CEOs से होगी। इसके अलावा वे जर्मन मिटलस्टैंड कंपनियों के प्रमुखों के साथ गोलमेज बैठक की अध्यक्षता करेंगे तथा Federation of German Industries (BDI) और Asia-Pacific Association of German Business (APA) के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे।

इन बैठकों का उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच निवेश, नवाचार, सतत विकास और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।

यह यात्रा भारत और यूरोपीय साझेदारों के बीच रणनीतिक प्राथमिकताओं के बढ़ते सामंजस्य को दर्शाती है, जो नवाचार, लचीलापन और साझा समृद्धि पर आधारित दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

भारत और सऊदी अरब के बीच रासायनिक एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में द्विपक्षीय बैठक

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नई दिल्ली- रसायन और उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग और सऊदी अरब के उद्योग और खनिज मंत्रालय के बीच द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व निवेदिता शुक्ला वर्मा, सचिव, रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग ने किया, जबकि सऊदी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व H.E इंजीनियर खलील बिन इब्राहीम बिन सालमाह, उप-मंत्री, उद्योग और खनिज ने किया।

सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024–25 में USD 41.88 बिलियन तक पहुंचा, जिसमें रसायन और पेट्रोकेमिकल का योगदान लगभग 10% (लगभग USD 4.5 बिलियन) रहा।

बैठक में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में नए सहयोग के क्षेत्रों का अन्वेषण करने पर चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में अपने आपसी सामंजस्य को मान्यता दी, जिसमें सऊदी अरब की ताकत पेट्रोकेमिकल्स और भारत की ताकत स्पेशलिटी केमिकल्स में निहित है। यह सहमति बनी कि दोनों पक्ष अपनी ताकत का उपयोग कर सहयोग को और बढ़ाएंगे।

बैठक में रसायन और पेट्रोकेमिकल्स के मूल्य श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने, भारत के Petroleum, Chemical and Petrochemical Investment Regions (PCPIRs) में निवेश और दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों के बीच संभावित साझेदारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

साथ ही, इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग करने पर भी सहमति बनी।

दोनों पक्षों ने रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में सतत और परस्पर लाभकारी साझेदारी बनाने और भारत-सऊदी अरब के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।



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