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जनसुविधा को प्राथमिकता: एनएच-66 पर अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा तत्काल हटाया गया

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यात्रियों की सुविधा और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने केरल के कासरगोड ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 (NH-66) पर अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। यह अस्थायी टोल प्लाज़ा एनएच-66 के विकास एवं रखरखाव से जुड़ी परिचालन व्यवस्थाओं के तहत स्थापित किया गया था।

इस निर्णय की औपचारिक घोषणा आज नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार देशभर में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए भी जनहित और नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की प्रक्रिया को हमेशा “ईज़ ऑफ़ लिविंग” के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि केरल में भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई की ओर से अरिकाडी स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याओं के संबंध में मंत्रालय को अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में मंत्रालय ने इस विषय पर विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अस्थायी टोल प्लाज़ा के कारण स्थानीय निवासियों को वास्तविक और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मंत्रालय ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया और अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा पर संचालन और शुल्क वसूली को तुरंत बंद करने का फैसला किया गया।

इस निर्णय की घोषणा करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सुशासन की बुनियाद संवेदनशीलता और जवाबदेही पर टिकी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला स्थानीय नागरिकों द्वारा झेली जा रही वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में देश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। सरकार ने संपर्क बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को सशक्त करने के लिए कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं शुरू की हैं।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सरकार एक ऐसे भविष्य-तैयार भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विकास के साथ-साथ करुणा और जनकल्याण भी समान रूप से प्रतिबिंबित हों। अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा को हटाने का निर्णय जन-सुनवाई और जनहित में त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ अंततः आम नागरिकों तक पहुंचे।

1 फरवरी 2026 से कार FASTag के लिए KYV प्रक्रिया समाप्त: NHAI ने उपयोगकर्ताओं के लिए प्रक्रिया सरल बनाई

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सार्वजनिक सुविधा बढ़ाने और राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को FASTag सक्रियण के बाद होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत (NHAI) ने निर्णय लिया है कि 1 फरवरी 2026 से कार/जीप/वैन श्रेणी के सभी नए FASTag जारीकरणों के लिए “Know Your Vehicle (KYV)” प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी।

यह सुधार लाखों आम सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आएगा, जो FASTag सक्रियण के बाद दस्तावेजों के बावजूद KYV आवश्यकताओं के कारण असुविधा और देरी का सामना कर रहे थे।

पहले जारी किए गए FASTag पर बदलाव:

पहले से जारी कार FASTag के लिए अब KYV सामान्य आवश्यकता के रूप में अनिवार्य नहीं होगा। KYV केवल उन मामलों में आवश्यक होगा जहां शिकायतें प्राप्त हों, जैसे:

  • ढीले FASTag

  • गलत जारीकरण

  • दुरुपयोग

यदि कोई शिकायत नहीं है, तो मौजूदा कार FASTag के लिए KYV की आवश्यकता नहीं होगी।

मजबूत पूर्व-सक्रियण सुरक्षा उपाय

उपयोगकर्ताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाते हुए, NHAI ने Issuer Banks के लिए पूर्व-सक्रियण सत्यापन नियम मजबूत किए हैं:

  1. VAHAN-आधारित अनिवार्य सत्यापन: FASTag सक्रियण केवल तब किया जाएगा जब वाहन विवरण VAHAN डेटाबेस से सत्यापित हो।

  2. कोई पोस्ट-सक्रियण सत्यापन नहीं: पहले की व्यवस्था जिसमें सक्रियण के बाद सत्यापन की अनुमति थी, अब समाप्त कर दी गई है।

  3. RC-आधारित सत्यापन केवल असाधारण मामलों में: यदि वाहन विवरण VAHAN में उपलब्ध नहीं है, तो बैंक को Registration Certificate (RC) के आधार पर सत्यापन करना होगा और पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।

  4. ऑनलाइन FASTag पर भी लागू: ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से बेचे गए FASTag भी केवल पूर्ण सत्यापन के बाद सक्रिय होंगे।

इन उपायों से यह सुनिश्चित होता है कि सभी वाहन सत्यापन पहले ही पूरा हो जाए, और सक्रियण के बाद ग्राहकों से बार-बार फॉलो-अप करने की आवश्यकता समाप्त हो जाए।

ये सुधार NHAI की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि FASTag इकोसिस्टम सार्वजनिक उपयोगकर्ता के अनुकूल, पारदर्शी और तकनीक-संचालित हो, साथ ही अनुपालन मजबूत और शिकायतें कम हों। सक्रियण से पहले सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी बैंक को सौंपकर, NHAI का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी मुक्त अनुभव प्रदान करना है।

EPFO अधिकारियों के लिए नैतिक नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: PDUNASS और ICCfG के बीच रणनीतिक साझेदारी

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भारत में सार्वजनिक सेवा वितरण को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की शीर्ष प्रशिक्षण संस्था पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ने आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस (ICCfG) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस संबंध में नई दिल्ली में आज एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह MoU EPFO अधिकारियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व और नैतिक मूल्यों को संस्थागत रूप से प्रशिक्षण प्रणाली में शामिल करने का एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है।

समझौता ज्ञापन पर PDUNASS की ओर से क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I राम आनंद तथा ICCfG की ओर से महासचिव शांति नारायण ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित सहित ICCfG के कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब EPFO “ईज़ ऑफ लिविंग” सुधारों और डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में संगठन को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बल्कि नैतिक रूप से सुदृढ़ अधिकारियों की आवश्यकता है।

‘मिशन कर्मयोगी’ की दिशा में कदम

इस सहयोग का उद्देश्य “मिशन कर्मयोगी” की परिकल्पना को साकार करना है, जिसमें नियम-आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित नैतिक दक्षता पर जोर दिया गया है। यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता को प्रशासन का अभिन्न हिस्सा बनाने में सहायक होगी।

PDUNASS के निदेशक कुमार रोहित ने कहा कि EPFO की बढ़ती जिम्मेदारियों के मद्देनज़र अधिकारियों को केवल प्रक्रियात्मक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक विवेक की भी आवश्यकता है। यह साझेदारी कौशल प्रशिक्षण से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण पर केंद्रित है।

संरचित प्रशिक्षण व्यवस्था

MoU के तहत चरणबद्ध वार्षिक प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया गया है। इसमें

  • ग्रुप ‘A’ अधिकारियों के लिए ICCfG केंद्रों पर आवासीय नेतृत्व और नीति-आधारित प्रशिक्षण

  • ग्रुप ‘B’ अधिकारियों के लिए PDUNASS परिसर में पेशेवर आचरण और नागरिक-केंद्रित सेवा पर आधारित प्रशिक्षण शामिल है।

इससे सभी स्तरों पर अधिकारियों को भरोसेमंद और उत्तरदायी सार्वजनिक सेवा देने के लिए तैयार किया जाएगा।

सुधारों के संदर्भ में पहल

यह पहल 2025 में EPFO द्वारा लागू किए गए हालिया सुधारों—जैसे सरल निकासी प्रणाली और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान व्यवस्था—को नैतिक आधार प्रदान करती है। डिजिटल स्वचालन के साथ-साथ मानवीय विवेक और नैतिक निर्णय-क्षमता को मजबूत करना इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य है।

यह समझौता भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रशासन प्रणाली को भविष्य के लिए तैयार, मूल्य-आधारित और जनविश्वास से परिपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पेंशन अदालत में लंबित मामलों का त्वरित समाधान, पेंशनभोगियों को मिली बड़ी राहत

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नई दिल्ली- पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 24 दिसंबर 2025 को आयोजित पेंशन अदालत में कुल 30 मंत्रालयों/विभागों से जुड़े 1087 दीर्घकालिक पेंशन संबंधी मामलों पर सुनवाई की गई। इनमें से 815 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जिससे इस व्यवस्था की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।

इस पेंशन अदालत में रक्षा, गृह, वित्त, डाक, आवासन एवं शहरी कार्य, नागरिक उड्डयन सहित विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मामलों को शामिल किया गया। कई मामलों में वर्षों से लंबित पेंशन और बकाया राशि का निपटारा हुआ, जिससे पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली।

कुछ प्रेरक और भावनात्मक समाधान उदाहरण

सत्यम मिश्रा (प्रयागराज)

114 दिनों से लंबित असाधारण पेंशन (Extra Ordinary Pension) का मामला जुलाई 2024 से अटका हुआ था। पेंशन अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी बात रखने के बाद बीएसएफ अधिकारियों ने जानकारी दी कि ₹5,73,728 की बकाया राशि (एक्स-ग्रेशिया सहित) का भुगतान कर दिया गया है और 1 दिसंबर 2025 से पेंशन प्रारंभ कर दी जाएगी।

दलजीत सिंह (रेवाड़ी, हरियाणा)

150 दिनों से अधिक समय से कम्यूटेशन राशि के भुगतान का मामला लंबित था। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत PCDA(P), प्रयागराज ने बताया कि ₹12,02,656 की कम्यूटेशन राशि 10 नवंबर 2025 को उनके खाते में जमा कर दी गई है।

नसीम अख्तर (श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर)

अगस्त 2020 से पारिवारिक पेंशन का मामला लंबित था। पेंशन अदालत में जानकारी दी गई कि 24 दिसंबर 2025 को प्राधिकरण जारी कर दिया गया है और समस्त बकाया राशि शीघ्र भुगतान की जाएगी।

 कंचन बाला (ऊना, हिमाचल प्रदेश)

जनवरी 2021 से अविवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन न मिलने का मामला। बीएसएफ अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि 10 दिनों के भीतर मामला निपटाया जाएगा।

मुक्ता चक्रवर्ती (गुवाहाटी, असम)

अक्टूबर 2020 से लंबित पारिवारिक पेंशन मामले में PAO-CBDT और CPAO को 10 दिनों के भीतर समीक्षा कर शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए।

मानिका दास (दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल)

229 दिनों से लंबित पारिवारिक पेंशन बकाया का मामला। अधिकारियों ने बताया कि ₹18 लाख की बकाया राशि शीघ्र जमा की जाएगी और 31 दिसंबर 2025 से नियमित पेंशन प्रारंभ होगी।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

पेंशन अदालत ने यह सिद्ध कर दिया कि संवाद, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के माध्यम से वर्षों से अटके मामलों का समाधान संभव है। यह पहल न केवल पेंशनभोगियों के लिए राहत का माध्यम बनी, बल्कि सरकार की ‘Ease of Living’ की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

पेंशनभोगियों की ‘Ease of Living’ को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम: पुणे में 58वीं प्री-रिटायरमेंट काउंसलिंग वर्कशॉप का आयोजन

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माननीय प्रधानमंत्री के ‘Ease of Living’ के विज़न के अनुरूप पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए भारत सरकार का पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) निरंतर प्रगतिशील कदम उठा रहा है। इसी क्रम में पेंशन नीति में सुधार और पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के तहत 58वीं प्री-रिटायरमेंट काउंसलिंग (PRC) वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह 29 दिसंबर 2025 को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित इस वर्कशॉप का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यशाला केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों के लिए आयोजित की जा रही है, जो अगले 12 महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

इस वर्कशॉप के दौरान सेवानिवृत्ति के बाद जीवन को सहज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें सेवानिवृत्ति लाभ, सीजीएचएस, निवेश के विकल्प, भाविष्य पोर्टल, इंटीग्रेटेड पेंशनर्स पोर्टल, पारिवारिक पेंशन, सीपीईएनजीआरएएमएस, अनुभव (ANUBHAV), डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र सहित कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

अनुमान है कि महाराष्ट्र राज्य में कार्यरत लगभग 350 अधिकारी, जो आगामी एक वर्ष में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इस प्री-रिटायरमेंट काउंसलिंग वर्कशॉप से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशनर्स अवेयरनेस प्रोग्राम तथा पेंशन वितरण बैंकों के लिए 11वां बैंकर्स अवेयरनेस प्रोग्राम भी आयोजित किया जाएगा।

कार्यशाला के दौरान पेंशन वितरण बैंकों की एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें कई बैंक सक्रिय रूप से भाग लेंगे। यहां पेंशन से जुड़ी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और बैंक प्रतिनिधि पेंशन खाता खोलने तथा पेंशन राशि के उपयुक्त निवेश विकल्पों पर मार्गदर्शन देंगे।

इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य पेंशनभोगियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशन वितरण बैंकों को नियमों, प्रक्रियाओं और डिजिटल सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन अधिक सुरक्षित, सरल और सम्मानजनक बनाया जा सके।

दिल्ली मेट्रो Phase-V(A) परियोजना के तहत तीन नई कॉरिडोर मंजूर: केंद्रीय राजधानी में बेहतर कनेक्टिविटी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो के Phase-V(A) परियोजना के तहत तीन नई कॉरिडोर को मंजूरी दी है। ये कॉरिडोर निम्नलिखित हैं:

  1. आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी)

  2. एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट टर्मिनल-1 (2.263 किमी)

  3. तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज (3.9 किमी)

इस परियोजना की कुल लंबाई 16.076 किमी होगी और इसका कुल अनुमानित लागत ₹12,014.91 करोड़ है, जो भारत सरकार, दिल्ली सरकार और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएं और लाभ:

  • सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर से सभी कर्तव्य भवनों से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे लगभग 60,000 ऑफिस जाने वाले और 2 लाख दैनिक आगंतुकों को लाभ मिलेगा।

  • ये कॉरिडोर प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने में मदद करेंगे, जिससे नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।

कॉरिडोर विवरण:

  • आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ: यह बोटैनिकल गार्डन–आर.के. आश्रम मार्ग कॉरिडोर का विस्तार होगा और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

  • एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट टर्मिनल-1 और तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज: ये एरोसिटी–तुगलकाबाद कॉरिडोर के विस्तार हैं और एयरपोर्ट को दक्षिणी दिल्ली के क्षेत्रों जैसे तुगलकाबाद, साकेत, कालिंदी कुंज आदि से जोड़ेंगे।

  • इन तीन कॉरिडोर में कुल 13 स्टेशन होंगे, जिनमें से 10 भूमिगत और 3 उन्नत (elevated) स्टेशन होंगे।

स्टेशन विवरण:

  • आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर: आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल–हाई कोर्ट, बरौदा हाउस, भारत मंडपम, इंद्रप्रस्थ।

  • तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज कॉरिडोर: सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर, कालिंदी कुंज।

  • एरोसिटी – IGD एयरपोर्ट T-1: एरोसिटी स्टेशन IGD T-1 स्टेशन से जुड़ा होगा।

अन्य जानकारियाँ:

  • Phase-IV परियोजना की 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशनों का निर्माण जारी है, और लगभग 80.43% सिविल निर्माण पूरा हो चुका है।

  • Phase-IV के प्राथमिक तीन कॉरिडोर दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे होने की संभावना है।

  • दिल्ली मेट्रो वर्तमान में 65 लाख यात्रियों प्रति दिन परिवहन कर रही है, जबकि अब तक का अधिकतम रिकॉर्ड 81.87 लाख यात्रियों का है।

  • DMRC वर्तमान में 12 मेट्रो लाइनों, लगभग 395 किमी लंबाई और 289 स्टेशनों के साथ दिल्ली और एनसीआर में संचालन कर रही है। दिल्ली मेट्रो भारत की सबसे बड़ी मेट्रो नेटवर्क और विश्व की बड़ी मेट्रो प्रणालियों में से एक बन चुकी है।

इन नई मेट्रो एक्सटेंशन से सेंट्रल दिल्ली और घरेलू एयरपोर्ट के क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, सड़क पर ट्रैफिक कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां और विकास पहल

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रायपुर- प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।

मंत्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रूपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। 

नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।

मंत्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।

नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।

120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटलबॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कालोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफार्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये है। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुँच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतुरियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है। कॉमन हज़ार्डस, अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा विकसित की गई है, यह औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान है। नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। इससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगेतथा उद्योगों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा। कॉमन हजारडस वेस्ट अप्रैल 2025 से पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगी। इसकी लैंडफिल क्षमता 60,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। जिससे दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए सुधार वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं। ऋण मुक्त संस्थान इसकी स्पष्ट मिसाल हैं। विकास को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हुआ है। नागरिक केंद्रित सुधारों को सभी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल सेवाओं से सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। सेवा वितरण में समय और लागत दोनों की बचत हुई है। नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। नवा रायपुर विकास का केंद्र बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न अंग बनाया गया है। तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। प्राकृ तिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। नवा रायपुर अटल नगर इन सभी प्रयासों का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। ऋण मुक्त, निवेश अनुकूल और भविष्य तैयार शहर के रूप में इसकी पहचान बनी है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियाँ छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गंगा पर बन रहा नया पुल: साहिबगंज से कटिहार तक उम्मीदों को जोड़ता विकास का सेतु

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दशकों से साहिबगंज (झारखंड) और आस-पास के जिलों के लोग दो वास्तविकताओं के बीच जीवन जीते आए हैं—एक गंगा के इस पार और दूसरी ठीक सामने दूसरी ओर। दूरी भले ही कुछ किलोमीटर की हो, लेकिन संघर्ष लंबा रहा है: महंगे नाव किराए, छूटे हुए अपॉइंटमेंट, समय पर अस्पताल न पहुँच पाने वाली परिवारों की परेशानियाँ, और व्यापारियों का अतिरिक्त खर्च क्योंकि सामान देर से पहुँचता था। अब, जैसे ही झारखंड में NH-133B को बिहार में NH-131A से जोड़ने वाला नया पुल गंगा के ऊपर आकार ले रहा है, उम्मीद लोहे और कंक्रीट के रूप में साकार होती दिख रही है।

“हमारे लिए ₹100 नाव का किराया भी बहुत होता है,” महादेवगंज के रामकेश बताते हैं। वे लंबे इंतज़ार, अनिश्चित स्टीमर सेवा और मनिहारी या कटिहार तक जाने की अतिरिक्त परेशानी का ज़िक्र करते हैं। “हम अपनी सुविधा के समय यात्रा नहीं कर सकते थे। यह पुल बन जाने से हमारी नदी वाली समस्या खत्म हो जाएगी और कटिहार आसानी से पहुँचने से कई ज़रूरी चीज़ें भी सस्ती हो जाएँगी।”

त्वरित जानकारी:

  • परियोजना की लंबाई: 8 किलोमीटर

  • कुल परियोजना लागत: ₹1,977.66 करोड़

  • समाप्ति की अपेक्षित तिथि: वित्त वर्ष 2026–2027

ऑल-वेदर, सीधी कनेक्टिविटी मिलने से यह पुल झारखंड और बिहार के बीच माल ढुलाई को तेज़ करेगा, खासकर झारखंड के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों से होने वाली फ्रेट मूवमेंट को। इससे परिवहन तेज़ और अधिक कुशल होगा। यात्रा समय घटने से ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और स्थानीय व्यापारी प्रतिस्पर्धा में मजबूत होंगे।

“कई बार शादी-ब्याह तक समय पर नहीं पहुँच पाते थे,” सुशील याद करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे स्टीमर उपलब्ध न होने पर लोगों को लंबे और उलझाऊ रास्तों से जाना पड़ता था। उनके लिए यह पुल सम्मान और भरोसे का प्रतीक है। “हम समय और पैसे दोनों बचाएँगे। ज़िंदगी थोड़ी आसान हो जाएगी।”

आपात स्थितियों में जीवनरक्षक पहुँच

“आपातकाल में रात हमारी सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती थी,” अब्दुल, एक दुकानदार बताते हैं। एंबुलेंसों को घाट पर स्टीमर का इंतज़ार करना पड़ता था और मरीजों को भारी देरी झेलनी पड़ती थी। अब स्थायी सड़क बनने से मेडिकल सहायता कहीं तेज़ी से लोगों तक पहुँच सकेगी। साथ ही, बाढ़ के समय जब जलमार्ग उफान पर होते हैं, पुल एक भरोसेमंद मार्ग बनकर स्थानीय सुरक्षा और लचीलापन बढ़ाएगा।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव

यह पुल संथाल परगना (झारखंड) को बिहार, पश्चिम बंगाल, और पूर्वोत्तर राज्यों से मजबूत रूप से जोड़ेगा। इसके अलावा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक जाने वाले व्यापारिक कॉरिडोर भी बेहतर होंगे। जिन समुदायों ने वर्षों तक मौसमी अलगाव झेला है, उनके लिए यह नए बाज़ार, सुचारू क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और अधिक निवेश की संभावनाएँ लेकर आएगा।

“स्टोन, बालू और अन्य सामान ले जाने वाले ट्रक डीज़ल और समय दोनों बचाएँगे,” अब्दुल आगे कहते हैं। “इससे यहाँ के दाम भी कम होंगे। लोग दूसरे जिलों में काम कर उसी दिन वापस आ सकेंगे।”

आज जब लोग नदी किनारे खड़े होकर क्रेनों को गर्डर उठाते देखते हैं, तो पुल उनके सपनों का भार अपने साथ लिए हुए दिखाई देता है।

जो धारा कभी दूरी बनाती थी, वही आज अवसरों का मार्ग बन रही है।

रामकेश, सुशील, अब्दुल और साहिबगंज के हजारों लोगों के लिए—यह पुल केवल एक संरचना नहीं; बल्कि पूरा हुआ वादा, रोज़ का बोझ कम होने की राहत, और एक ऐसा भविष्य है जो अब पहले से कहीं अधिक पास महसूस होता है।


IITF 2025 में EPFO का भव्य पदार्पण: डिजिटल सोशल सिक्योरिटी का नया युग शुरू

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पहली बार भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2025 में अपने अत्याधुनिक पैवेलियन का आयोजन किया, जिसका स्थान भारत मंडपम, नई दिल्ली रहा। इस पैवेलियन का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने किया। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री रमेश कृष्णमूर्ति तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, EPFO तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डॉ. मंडाविया ने EPFO पैवेलियन के उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि IITF सदैव भारत की विकास यात्रा को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा है। इस वर्ष EPFO पहली बार IITF में अपने नए, आधुनिक और सशक्त स्वरूप के साथ उपस्थित हुआ है, जो पारदर्शिता, दक्षता और व्यापक सेवा प्रदायन का प्रतीक है। उन्होंने EPFO की भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में निरंतर प्रगति की सराहना की और इसे देश के कार्यबल की वित्तीय गरिमा सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संस्था बताया।

उन्होंने बताया कि EPFO वर्षों से देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार स्तंभ रहा है। संगठन ने मैनुअल प्रक्रियाओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक एक लंबी यात्रा तय की है, जिसके परिणामस्वरूप संगठित, असंगठित, शहरी और ग्रामीण – हर श्रमिक तक भविष्य निधि सेवाएँ सम्मानपूर्वक और तेजी से पहुँच रही हैं।

पिछले वर्ष में EPFO ने अपने डिजिटल इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं—उन्नत यूनिफाइड पोर्टल, पुनर्निर्मित वेबसाइट, सरलित दावा प्रक्रियाएँ, रियल-टाइम शिकायत निवारण, पेपरलेस ऑनबोर्डिंग और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के माध्यम से पेंशनर्स को दरवाज़े पर सहायता उपलब्ध कराना—इन सभी ने नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाया है।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि यह पैवेलियन केवल सेवाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि EPFO के “भविष्य-उन्मुख, सदस्य-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित” संगठन बनने के संकल्प को दर्शाता है। यह दिखाता है कि किस प्रकार डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ नागरिकों को सशक्त करती हैं, उद्यमों को सहयोग देती हैं और संस्थाओं व नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करती हैं।

उन्होंने आगंतुकों, नियोक्ताओं और युवाओं को पैवेलियन का अवलोकन करने, इसकी सेवाओं को समझने और सामाजिक सुरक्षा के महत्व को जानने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, EPFO टीम को एक सूचनाप्रद, इंटरैक्टिव और भविष्य-दृष्टि वाले पैवेलियन के निर्माण के लिए बधाई दी, जो सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की राष्ट्रीय दृष्टि से मेल खाता है।

शोभा करंदलाजे ने भी EPFO को अपनी शुभकामनाएँ दीं और आग्रह किया कि संगठन आगंतुकों को ऑन-द-स्पॉट सेवाएँ उपलब्ध कराते हुए अधिकतम जागरूकता फैलाने का कार्य करे।

EPFO पैवेलियन, भारत सरकार की ‘जीवन की सुगमता’ और ‘सभी के लिए डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ’ की दृष्टि के अनुरूप एक भविष्य-तैयार, नागरिक-केंद्रीय डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। आगंतुक यहाँ पेंशन सुविधा ज़ोन, नियोक्ता सहायता केंद्र, ई-सेवा डेमो तथा EPF, EPS, EDLI, PM-VBRY और नवनिर्घारित Employees Enrolment Scheme 2025 जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन कर सकते हैं।

हर डेस्क पर EPFO के विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो लाइव सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। आगंतुक पैवेलियन में अपना दावा दाखिल कर सकते हैं, संयुक्त घोषणा कर सकते हैं, UAN जनरेट कर सकते हैं और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।

पैवेलियन में इंटरैक्टिव टचस्क्रीन किओस्क भी लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से उपयोगकर्ता प्रक्रिया-शिक्षण वीडियो देख सकते हैं, प्रकाशन पढ़ सकते हैं और क्विज़ के माध्यम से सेवाओं को बेहतर समझ सकते हैं। बड़े डिस्प्ले स्क्रीन निरंतर शिक्षाप्रद सामग्री प्रदर्शित कर जागरूकता बढ़ाते हैं।

सभी आयु वर्गों के लिए अनुभव को मनोरंजक बनाने हेतु पैवेलियन में किड्स प्ले ज़ोन, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और सेल्फी बूथ की व्यवस्था की गई है। आगंतुक सोशल मीडिया सेल्फी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और बच्चे पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। इन सभी गतिविधियों में भाग लेने वालों के लिए विशेष उपहार भी रखे गए हैं, जिससे पैवेलियन शिक्षा और मनोरंजन दोनों का संगम बन जाता है।

e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म से बदला उपभोक्ता न्याय का स्वरूप, 2 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े

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उपभोक्ता अधिकारों को बड़ा बढ़ावा देते हुए उपभोक्ता मामलों के विभाग के e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म ने एक अत्याधुनिक डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली के रूप में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। 1 जनवरी 2025 को लॉन्च होने के बाद से इस प्लेटफ़ॉर्म पर दो लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म कागज़ी कार्यवाही कम करके, यात्राओं को समाप्त कर, और भौतिक दस्तावेज़ों की आवश्यकता घटाकर प्रक्रियाओं को सरल बनाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। यह NRI उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ी राहत है, क्योंकि वे भौगोलिक दूरी की बाधाओं से मुक्त होकर विदेश से ही अपने उपभोक्ता अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं।

13 नवंबर 2025 तक, इस एकीकृत पोर्टल के माध्यम से 1,30,550 केस दाखिल हुए और 1,27,058 मामलों का निस्तारण किया गया—जो उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली की मजबूती और कुशलता को दर्शाता है।

सरल OTP आधारित पंजीकरण के साथ e-Jagriti NRIs को शिकायत दर्ज करने, डिजिटल/ऑफ़लाइन शुल्क भुगतान करने, वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने, ऑनलाइन दस्तावेज़ आदान-प्रदान करने और मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा देता है—वह भी बिना भारत आए।

2.75 लाख से अधिक उपयोगकर्ता, जिनमें 1388 NRI—वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता न्याय तक आसान पहुँच

प्लेटफ़ॉर्म की AI-सक्षम, बहुभाषी और सुलभ इंटरफ़ेस में Voice-to-Text, चैटबॉट और इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड शामिल हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए उपयोग को आसान बनाते हैं।

इस वर्ष 466 NRI शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें प्रमुख देश शामिल हैं:

  • अमेरिका – 146

  • ब्रिटेन – 52

  • यूएई – 47

  • कनाडा – 39

  • ऑस्ट्रेलिया – 26

  • जर्मनी – 18

भारत में एकीकृत प्रणाली: पारदर्शिता और तेजी में बड़ा सुधार

e-Jagriti ने OCMS, e-Daakhil, NCDRC CMS और CONFONET जैसी पुरानी प्रणालियों को एक प्लेटफ़ॉर्म में जोड़ दिया है।
13 नवंबर 2025 तक भारत में 1,30,550 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। शीर्ष राज्य:

  • गुजरात – 14,758

  • उत्तर प्रदेश – 14,050

  • महाराष्ट्र – 12,484

प्लेटफ़ॉर्म पर भूमिका-आधारित डैशबोर्ड के माध्यम से

  • वकील दस्तावेज़ अपलोड और केस ट्रैक कर सकते हैं,

  • जज डिजिटल फाइलें, एनालिटिक्स और वर्चुअल कोर्टरूम का उपयोग कर कुशल सुनवाई कर सकते हैं।

मुख्य लाभ

1. वैश्विक पहुंच: दुनिया में कहीं से भी केस दाखिल और प्रबंधन।
2. तेज़ निस्तारण: एसएमएस/ईमेल रियल-टाइम अलर्ट, वर्चुअल सुनवाई। 10 राज्यों और NCDRC में 100% से अधिक निस्तारण दर।
3. समावेशिता: बहुभाषी इंटरफ़ेस, दिव्यांग-सुलभ फीचर।
4. सुरक्षित भुगतान: Bharat Kosh और PayGov से जुड़ा डिजिटल भुगतान।

2 लाख SMS और 12 लाख ईमेल अलर्ट—समय पर अपडेट की गारंटी

पंजीकरण OTP, केस फाइलिंग, निस्तारण, नोटिस जारी होने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अलर्ट तुरंत भेजे जाते हैं। इससे NRI उपयोगकर्ता भी समय-सीमा नहीं मिस करते।

2025 में केस निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार

  • जुलाई–अगस्त: 27,545 निस्तारित, 27,080 दाखिल

  • सितंबर–अक्टूबर: 24,504 निस्तारित, 21,592 दाखिल

ये आँकड़े 2024 से बेहतर प्रदर्शन दर्शाते हैं।

सफलता की कहानियाँ

1. ऑनलाइन कोर्स ठगी—25 दिन में ₹3.05 लाख का निर्णय (असम)

  • केस: DC/296/CC/3/2025

  • शिकायत: घटिया ऑनलाइन क्लास रोकने पर ₹54,987 की अनधिकृत कटौती

  • निर्णय: पूर्ण रिफंड + ₹2.5 लाख क्षतिपूर्ति

  • प्रभाव: नॉर्थ-ईस्ट में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के खिलाफ मिसाल।

2. 8 साल पुराना खराब LG फ्रिज—त्रिपुरा में ₹1.67 लाख+ मुआवजा

  • केस: DC/272/CC/33/2025

  • समस्या: 2017 से लगातार खराब फ्रिज, बार-बार मरम्मत

  • निर्णय: ₹85,000 रिफंड + ब्याज, ₹12,000 रिपेयर, ₹50,000 मानसिक पीड़ा, ₹20,000 वाद-व्यय

  • प्रभाव: e-Jagriti से पुरानी खरीद पर भी न्याय सुनिश्चित।

निष्कर्ष

उपभोक्ता मामलों का विभाग सभी नागरिकों और NRIs से e-Jagriti का उपयोग कर सशक्त उपभोक्ता बनने का आग्रह करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म डिजिटल इंडिया की दिशा में मजबूत कदम है, जो तेज़, पारदर्शी और सुलभ उपभोक्ता न्याय सुनिश्चित करता है।


सचिव वी. श्रीनिवास ने पंजाब नेशनल बैंक के मेगा कैंप का उद्घाटन किया, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के माध्यम से पेंशनभोगियों को सुविधा

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वी. श्रीनिवास, सचिव (P&PW), ने 7 नवंबर, 2025 को दिल्ली के संसद मार्ग शाखा में पंजाब नेशनल बैंक द्वारा आयोजित मेगा कैंप का उद्घाटन किया। यह कैंप नैशनलवाइड DLC कैंपेन 4.0 के तहत आयोजित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने पेंशनभोगियों को संबोधित करते हुए सरकार द्वारा पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों को उजागर किया। डिजिटल माध्यम से लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) प्रस्तुत करने की सुविधा ने पेंशनभोगियों की जीवन की सुविधा (Ease of Living) को काफी बढ़ाया है और यह विशेष रूप से वृद्ध और बीमार पेंशनभोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

पंजाब नेशनल बैंक इस कैंप को देशभर में 39 शहरों के 185 स्थानों पर आयोजित कर रहा है।

नैशनलवाइड DLC कैंपेन 4.0 को पेंशन और पेंशनभोगियों के कल्याण विभाग (DoPPW) द्वारा विभिन्न हितधारकों के सहयोग से 1 से 30 नवंबर, 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें पेंशन वितरण बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, पेंशनभोगी कल्याण संघ, CGDA, EPFO, DoT, रेलवे, UIDAI और MeitY शामिल हैं। इस अभियान का उद्देश्य देश के सबसे दूर-दराज़ इलाकों तक सभी पेंशनभोगियों तक पहुँचना है।

इस वर्ष अब तक कुल 67.94 लाख DLCs तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 40.42 लाख Face Authentication के माध्यम से हैं। केवल 1 से 5 नवंबर के बीच 25.60 लाख DLCs तैयार किए गए, जिनमें से 15.62 लाख (61%) Face Authentication के माध्यम से हैं। 90 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों के लिए 37,000 से अधिक DLCs और 100 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों के लिए 985 DLCs तैयार किए गए हैं।

मेगा कैंप में पेंशनभोगियों के लिए Digital Life Certificate के लिए Face Authentication का उपयोग किया गया। डिजिटल माध्यम से लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा, विशेषकर फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक, ने इसे कहीं भी और कभी भी (Anytime Anywhere) प्रस्तुत करने योग्य बनाया।

मेगा कैंप के दौरान, वी. श्रीनिवास ने पेंशनभोगियों के साथ संवाद किया। पेंशनभोगियों ने डिजिटल माध्यम से लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा पर अपनी अत्यधिक संतुष्टि और खुशी व्यक्त की। विशेष रूप से Face Authentication तकनीक की सुविधा, जो स्मार्टफोन के माध्यम से आसानी से की जा सकती है, वृद्ध और बीमार पेंशनभोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है क्योंकि अब उन्हें किसी बैंक या पेंशन वितरण प्राधिकरण के पास जाने की आवश्यकता नहीं है।


डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 का शुभारंभ किया — पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाणन प्रक्रिया में डिजिटल क्रांति की नई पहल

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज राष्ट्रीय डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 का औपचारिक शुभारंभ किया, जिससे पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में सरकार के सतत प्रयासों को एक नई गति मिली है।

डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान 4.0, जो 1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है, ने अपने पहले चार दिनों में ही 55 लाख से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जारी कर लिए हैं, जबकि पूरे महीने का लक्ष्य दो करोड़ प्रमाण पत्रों का है।

पिछले वर्ष के DLC अभियान 3.0 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उस दौरान 52.73 लाख DLC चेहरे की पहचान तकनीक (Face Authentication) के माध्यम से प्रस्तुत किए गए थे, जबकि 72.64 लाख EPFO पेंशनभोगियों द्वारा जमा किए गए थे।

उन्होंने बताया कि अभियान 3.0 को नवंबर 2024 में 1,984 स्थानों पर 845 जिलों और शहरों में आयोजित किया गया था, जिसमें 1.62 करोड़ DLCs जारी किए गए थे, जिनमें से 49.78 लाख केंद्रीय सरकारी पेंशनभोगियों के थे। इनमें से 85,200 पेंशनभोगी 90 वर्ष से अधिक आयु के थे, जबकि 2,200 से अधिक पेंशनभोगी 100 वर्ष से अधिक आयु के थे।

DLC अभियान 4.0 की प्रमुख विशेषताएँ :

वर्तमान अभियान 4.0 देशभर के लगभग 2,000 जिलों, शहरों और कस्बों में 2,500 शिविरों के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है, जिसका समन्वय 1,250 नोडल अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।
यह अभियान मुख्य बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) और पेंशनभोगी कल्याण संघों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस बार “सैचुरेशन एप्रोच” अपनाई गई है ताकि हर पेंशनभोगी, चाहे वह कहीं भी रहता हो या गतिशीलता में अक्षम हो, बिना किसी बाधा के अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सके।

यह अभियान 19 पेंशन वितरित करने वाले बैंकों, UIDAI, MeitY, EPFO, रेलवे, CGDA और दूरसंचार विभाग सहित कई संस्थानों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) अकेले 1,600 से अधिक जिलों और उप-खंडों में 1.8 लाख डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के नेटवर्क के माध्यम से घर-घर जाकर पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र सेवा प्रदान कर रहा है।

विभाग द्वारा एक समर्पित DLC पोर्टल भी विकसित किया गया है, जो 1,850 शहरों और कस्बों में 2,500 से अधिक शिविर स्थलों और 1,200 नोडल अधिकारियों से जुड़ा है।
इसके अतिरिक्त, पूरे महीने के अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशिक्षण सत्र चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जा रहे हैं।

पेंशनभोगियों की सुविधा हेतु तकनीकी नवाचार :

इस वर्ष अभियान का विशेष ध्यान फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर है, जिसे MeitY और UIDAI के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया और भी सरल, तेज़ और सुविधाजनक हो गई है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से PIB, दूरदर्शन, आकाशवाणी, सोशल मीडिया और SMS अभियानों के माध्यम से अभियान का व्यापक प्रचार किया जा रहा है।
#DLCCampaign4 हैशटैग के तहत यह भारत में पेंशनभोगियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल सशक्तिकरण अभियान बन गया है।

मानवीय संवेदना से प्रेरित तकनीकी परिवर्तन :

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की परिकल्पना वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सहानुभूति से प्रेरित थी।
उन्होंने कहा, “वरिष्ठ नागरिकों से यह साबित करने को कहना कि वे जीवित हैं, अमानवीय प्रतीत होता था। इस चुनौती को सरकार ने एक अवसर के रूप में लिया और बायोमेट्रिक तथा फेस ऑथेंटिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग एक मानवीय उद्देश्य के लिए किया।”

उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पेंशनभोगियों के जीवन में सुविधा लाती है, बल्कि समाज को तकनीकी रूप से सशक्त और संवेदनशील बनाती है।

वैश्विक प्रशंसा और प्रधानमंत्री के विज़न की झलक :

डॉ. सिंह ने बताया कि यह अभियान अब एक वैश्विक सफलता की कहानी बन चुका है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और प्रतिनिधिमंडल भारत से सीखने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिक-केंद्रित सुशासन के दृष्टिकोण का परिणाम है, जिसने पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) को सरकार के सबसे प्रभावी और नागरिक-उन्मुख विभागों में बदल दिया है।

सम्मान और निष्कर्ष :

इस अवसर पर वी. श्रीनिवास, सचिव (पेंशन),वंदना गुप्ता, कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्स (CGCA), विश्वजीत सहाय, कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (CGDA), भूवनेश कुमार, CEO UIDAI और ध्रुबज्योति सेनगुप्ता, संयुक्त सचिव (DoPPW) उपस्थित थे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वी. श्रीनिवास और उनकी टीम के उत्कृष्ट कार्य की सराहना की, जिन्होंने इस अभियान को एक पारदर्शी, सुलभ और मानव-केंद्रित पेंशन वितरण प्रणाली में बदल दिया है।

अंत में, उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट पहल प्रधानमंत्री के Ease of Living और Citizen-Centric Governance के विज़न का साकार उदाहरण है —

यह पहल न केवल निरंतर पेंशन वितरण सुनिश्चित करती है, बल्कि भारत को एक पारदर्शी, कुशल और डिजिटल रूप से सशक्त प्रशासनिक ढाँचे की ओर अग्रसर करती है।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा 1 से 30 नवम्बर, 2025 तक देशव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 का आयोजन

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कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) द्वारा 1 से 30 नवम्बर, 2025 तक देशव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान, डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ लिविंग मिशन के अनुरूप, पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए सरकार की एक प्रमुख पहल है।

देशव्यापी DLC अभियान 4.0 के दौरान, दूरसंचार विभाग द्वारा अहमदाबाद के पालडी स्थित टैगोर हॉल में 4 नवम्बर, 2025 को एक मेगा कैंप आयोजित किया जा रहा है। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारी इस कैंप का दौरा करेंगे। इस मेगा कैंप का उद्देश्य पेंशनभोगियों को विभिन्न डिजिटल माध्यमों से अपना जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में सहायता करना है। UIDAI द्वारा आवश्यकता पड़ने पर आधार रिकॉर्ड अद्यतन और तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाएगी।

DLC अभियान 4.0 का लक्ष्य 2 करोड़ पेंशनभोगियों तक पहुंचना है, जो देशभर के 2000 से अधिक शहरों और कस्बों को कवर करेगा। इस अभियान में आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया है, जिससे पेंशनभोगी बिना बायोमेट्रिक उपकरणों के आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। विशेष ध्यान अति वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग पेंशनभोगियों पर दिया जा रहा है, जिन्हें इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा डोरस्टेप DLC सेवा प्रदान की जा रही है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात (24 नवम्बर, 2024) और संविधान दिवस संबोधन (26 नवम्बर, 2024) में इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे डिजिटल इंडिया जैसी पहलें, जैसे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, देशभर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन प्रक्रिया को सरल बना रही हैं।

यह अभियान बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, दूरसंचार विभाग, यूआईडीएआई, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), एनआईसी, तथा गुजरात की पेंशनभोगी कल्याण संघों — जैसे केंद्रीय निवृत्त कर्मचारी मंडल, बड़ोदा सेंट्रल पेंशनर्स एसोसिएशन, और डाक व तार एवं अन्य केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स एसोसिएशन — को एक साथ लाकर पेंशनभोगियों के डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देता है। DLC पोर्टल विभिन्न एजेंसियों द्वारा जीवन प्रमाण पत्र के वास्तविक समय मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है।

मेगा कैंप के दौरान सचिव (P&PW) और कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशंस अकाउंट्स की पेंशनभोगियों के साथ इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 2000 पेंशनभोगी विभिन्न विभागों और संगठनों से इस कैंप में शामिल होंगे।

देशव्यापी DLC अभियान 4.0 के हिस्से के रूप में, गुजरात में 82 शहरों और 107 स्थानों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे, जो विभिन्न जिलों और उपविभागों को कवर करेंगे। इन सभी शिविरों के सुचारू संचालन हेतु कुल 107 नोडल अधिकारी भाग लेंगे।

विभाग पेंशनभोगियों के जीवन को सरल बनाने और उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए ऐसे प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों और पहलों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक और EPFO में समझौता — पेंशनधारकों को घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र सेवा का लाभ

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भारत सरकार के संचार मंत्रालय के तहत डाक विभाग की 100% स्वामित्व वाली संस्था इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 (EPS’95) के तहत पेंशनधारकों को घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (DLC) सेवा उपलब्ध कराना है।

यह समझौता EPFO के 73वें स्थापना दिवस के अवसर पर IPPB के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ आर. विश्वेस्वरन और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (CPFC)रमेश कृष्णमूर्ति के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही वंदना गुर्नानी, सचिव (श्रम एवं रोजगार), केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) के सदस्य, EPFO, IPPB और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस सहयोग के तहत, IPPB अपने देशभर में फैले 1.65 लाख से अधिक डाकघरों और 3 लाख से अधिक डाक सेवकों (डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक) के नेटवर्क का उपयोग करेगा, जो डिजिटल फेस ऑथेंटिकेशन और फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक तकनीक से सुसज्जित हैं। इससे पेंशनधारक अपने घर से ही डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकेंगे — उन्हें अब बैंक शाखा या EPFO कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सेवा EPFO द्वारा पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

IPPB के एमडी एवं सीईओ आर. विश्वेस्वरन ने कहा:

“EPFO के साथ यह साझेदारी IPPB के मिशन को और सशक्त बनाती है, जो हर भारतीय के दरवाजे तक आवश्यक वित्तीय और नागरिक सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के पेंशनधारकों के लिए सुविधाजनक और गरिमापूर्ण जीवन प्रमाणपत्र प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी। यह पहल भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘Ease of Living’ के विज़न को साकार करती है।”

पेंशनधारकों को बस इतना करना होगा कि वे अपने डाकिया या ग्रामीण डाक सेवक से संपर्क करें या अपने निकटतम डाकघर जाएं, अपना आधार नंबर और पेंशन विवरण दें और आधार-आधारित फेस या फिंगरप्रिंट प्रमाणीकरण के माध्यम से सत्यापन कराएं। प्रमाणपत्र बनने के बाद पेंशनधारक को SMS के माध्यम से सूचना प्राप्त होगी, और अगले दिन वह https://jeevanpramaan.gov.in/v1.0/ पर जाकर प्रमाणपत्र देख सकेंगे।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के बारे में

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की स्थापना 1 सितंबर 2018 को भारत सरकार के स्वामित्व में की गई थी। बैंक का उद्देश्य देश के आम नागरिकों को सुलभ, सस्ती और विश्वसनीय बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है। इसका मुख्य लक्ष्य अविकसित और अर्द्ध-बैंकित आबादी तक वित्तीय समावेशन को पहुंचाना है, जिसके लिए यह ~1.65 लाख डाकघरों और ~3 लाख डाककर्मियों के नेटवर्क का उपयोग करता है।

IPPB का संचालन India Stack पर आधारित है — जो पेपरलेस, कैशलैस और प्रेज़ेंस-लेस बैंकिंग को सरल, सुरक्षित और ग्राहक के द्वार तक उपलब्ध कराता है। यह बैंक वर्तमान में 13 भाषाओं में सेवाएं प्रदान कर रहा है, और 5.57 लाख गांवों और कस्बों में 11 करोड़ से अधिक ग्राहकों तक पहुंच बना चुका है।

IPPB कम नकद अर्थव्यवस्था (Less Cash Economy) को प्रोत्साहित करने और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैंक का आदर्श वाक्य है —

“हर ग्राहक महत्वपूर्ण है, हर लेनदेन मूल्यवान है, और हर जमा अमूल्य है।”



उपभोक्ता मामले विभाग ने अधिसूचित किए लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) संशोधन नियम, 2025: चिकित्सा उपकरणों की लेबलिंग में आएगा एकरूपता और पारदर्शिता

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उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) संशोधन नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं। यह संशोधन चिकित्सा उपकरणों वाले पैकेजों के लिए विशेष प्रावधान लाता है, जिससे लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 को मेडिकल डिवाइसेस नियम, 2017 के अनुरूप बनाया गया है। इस कदम का उद्देश्य नियामकीय सामंजस्य स्थापित करना, अनुपालन में अस्पष्टता को कम करना और स्वास्थ्य क्षेत्र में उपभोक्ता संरक्षण को सुदृढ़ करना है।

संशोधन के अनुसार, चिकित्सा उपकरणों वाले पैकेजों के लिए अंक और अक्षरों की ऊँचाई व चौड़ाई से संबंधित प्रावधानों में मेडिकल डिवाइसेस नियम, 2017 को प्राथमिकता दी जाएगी। अर्थात्, अनिवार्य घोषणाएं तो करनी होंगी, परंतु उनके फ़ॉन्ट साइज़ और आकार संबंधी मानक मेडिकल डिवाइसेस नियमों के अनुसार होंगे, न कि लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के अनुसार।

इसके अतिरिक्त, लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के नियम 33 के तहत दी गई छूटें उन मामलों में लागू नहीं होंगी जहां मेडिकल डिवाइसेस नियम, 2017 लागू हैं। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि लीगल मेट्रोलॉजी के तहत दी गई कोई भी छूट केवल उन्हीं घोषणाओं पर लागू होगी जो इन नियमों के अंतर्गत आती हैं, न कि चिकित्सा उपकरणों के लिए निर्धारित नियमों पर।

संशोधन यह भी स्पष्ट करता है कि मेडिकल डिवाइसेस पर मुख्य प्रदर्शन पैनल (Principal Display Panel) पर घोषणा करना लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के अनुसार अनिवार्य नहीं है; ऐसी घोषणाएं मेडिकल डिवाइसेस नियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार की जा सकती हैं।

यह संशोधन उपभोक्ताओं को एकल, स्पष्ट और सुसंगत लेबलिंग मानक प्रदान करेगा, जिससे विभिन्न नियमों के बीच उत्पन्न भ्रम समाप्त होगा। इससे उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य उत्पादों के लिए सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय जानकारी मिलेगी, जो उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करेगी।

उद्योग के लिए भी यह संशोधन लाभकारी है क्योंकि यह दो नियामकीय ढाँचों के बीच अस्पष्टता को समाप्त करता है, अनुपालन को सरल बनाता है और Ease of Doing Business को बढ़ावा देता है। अब उद्योग को केवल एक मानक के तहत लेबलिंग करनी होगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

लीगल मेट्रोलॉजी प्रवर्तन अधिकारी अब स्पष्ट रूप से परिभाषित क्षेत्राधिकार और अनुप्रयोग के साथ सरल और प्रभावी प्रवर्तन कर सकेंगे। इससे राज्यों और एजेंसियों के बीच एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

यह संशोधन सरकार की व्यवसाय-अनुकूल और उपभोक्ता-संवेदनशील नीति के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लीगल मेट्रोलॉजी नियमों को मेडिकल डिवाइसेस नियमों के अनुरूप बनाकर, सरकार ने Ease of Living और Ease of Doing Business की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है — जो उद्योग के लिए स्पष्टता और उपभोक्ताओं के लिए विश्वास सुनिश्चित करता है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र अब पूरी तरह ऑनलाइन,अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के आधार कार्ड हेतु ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र की कोई बाध्यता नहीं

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रायपुर- भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में संशोधित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का ऑनलाइन बनाया जाना अनिवार्य किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों की जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध आधार होगा। अर्थात, इस तिथि के पूर्व जन्मे बच्चों के मामलों में अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे। परंतु अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही तिथि प्रमाण का एकमात्र स्रोत होगा। राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से जन्मे प्रत्येक बच्चे के लिए ऑनलाइन जारी जन्म प्रमाण पत्र को ही मान्य किया गया है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के जन्म तिथि प्रमाणन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। उनके लिए अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं। लेकिन अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही जन्म प्रमाण का एकमात्र आधार होगा।

पूर्व में जिन बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मैन्युअल पद्धति से जारी किया गया था, उनके लिए भी अब पोर्टल में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनाने का प्रावधान उपलब्ध है। इससे पुराने प्रमाण पत्र भी डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा सकेंगे।

यह संज्ञान में आया है कि कुछ जिलों में केवल उन्हीं जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं जिनमें क्यूआर कोड (QR Code) है। यह विषय संज्ञान में आने पर इस विषय में राज्य सरकार द्वारा सहायक प्रबंधक, UIDAI हैदराबाद से अनुरोध किया गया है कि वे राज्य के सभी आधार केंद्रों को उचित दिशा-निर्देश जारी करें। 

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में संशोधित पोर्टल के लॉन्च के बाद प्रारंभिक चरण में कुछ तकनीकी कठिनाइयाँ आई थीं, जिन्हें भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा समाधान कर दिया गया। साथ ही राज्य के सभी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को नए पोर्टल के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से सभी जन्म प्रमाण पत्र केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बनाए जा रहे हैं, और वर्तमान में पोर्टल पूरी तरह से तकनीकी रूप से सुचारू रूप से संचालित है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ITEC प्रतिभागियों के साथ भारत के शासन नवाचार और तकनीकी प्रगति पर साझा किए अनुभव

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान भारत की प्रशासनिक नवाचारों और प्रौद्योगिकी आधारित जनसेवा वितरण में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 19 देशों से आए प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की कई श्रेष्ठ प्रशासनिक पहलें — जैसे आधार-सक्षम डिजिटल पहचान प्रणाली और प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान — ने पारदर्शिता, गति और तकनीक के माध्यम से सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव किया है। उन्होंने ITEC प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने देशों के सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी नवाचार साझा करें ताकि भारत और उसके साझेदार देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें।

उन्होंने कहा, “आज भारत का शासन मॉडल नवाचार पर आधारित है — चाहे वह तकनीक के स्तर पर हो या सृजनात्मक समस्या-समाधान के रूप में। भारत सरकार के लगभग 90 प्रतिशत कार्य अब ऑनलाइन हैं, जिससे महामारी के समय भी कामकाज सुचारु रूप से चलता रहा। तकनीक पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बन गई है।”

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन प्रणाली दक्षता और नवाचार की दिशा में तेज़ी से अग्रसर हुई है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने शासन में नवाचार को जीवन का हिस्सा बनाने की पुरजोर वकालत की है — चाहे वह अवसंरचना योजना हो या डिजिटल सेवाओं का वितरण।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह सत्र "दो-तरफा सीखने" का अवसर है। ITEC कार्यक्रम ने अब तक 2,500 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, जिसमें वर्तमान बैच में 19 देशों के 34 प्रतिभागी शामिल हैं। यह कार्यक्रम प्रशासनिक अनुभवों और विचारों के आपसी आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

प्रतिभागियों द्वारा शहरी यातायात जैसी चुनौतियों पर चर्चा के जवाब में, डॉ. सिंह ने भारत में स्मार्ट निगरानी प्रणालियों और ऑनलाइन प्रवर्तन तंत्र के उपयोग का उदाहरण दिया, जो रोजमर्रा के शासन को अधिक कुशल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक भागीदारी के साथ ऐसी नवाचार-आधारित प्रणालियां प्रशासन में विश्वास और जवाबदेही को मजबूत कर रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे अपने देशों लौटने के बाद भी IIPA और विदेश मंत्रालय से ऑनलाइन संपर्क बनाए रखें, ताकि विचारों और समाधान के आदान-प्रदान का सिलसिला जारी रहे। उन्होंने कहा, “आज की तकनीक ने भौगोलिक सीमाओं को अप्रासंगिक बना दिया है — हम नियमित रूप से ऑनलाइन संवाद कर सकते हैं और सामूहिक रूप से समाधान खोज सकते हैं।”

इस अवसर पर डॉ. सिंह ने ITEC प्रतिनिधियों के साथ स्वच्छता ही सेवा अभियान और एक पेड़ मां के नाम पहल के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया, जिससे सरकार की सतत विकास और जनभागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई।

अपने संबोधन के समापन पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ITEC जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भारत का वैश्विक साझेदारी मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "साझा विकास और सामूहिक नवाचार" के दृष्टिकोण का सच्चा प्रतिबिंब है।

विधायी विभाग द्वारा विशेष अभियान 5.0 : लंबित मामलों के निस्तारण, ई-वेस्ट प्रबंधन एवं रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान

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विधि और न्याय मंत्रालय, लंबित मामलों के निस्तारण हेतु विशेष अभियान (SCDPM) मना रहा है। विशेष अभियान 5.0 दिनांक 2 अक्टूबर, 2025 से 31 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

इस वर्ष अभियान का मुख्य फोकस निम्नलिखित पर होगा:

  • ई-वेस्ट निस्तारण : अनुपयोगी या परित्यक्त कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, LED, ई-डिस्प्ले बोर्ड आदि का निपटान।

  • लंबित मामलों का निस्तारण : सांसद संदर्भ, राज्य सरकारों से प्राप्त संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ, संसदीय आश्वासन, पीएमओ संदर्भ, लोक शिकायतें एवं अपीलें इत्यादि।

  • रिकॉर्ड प्रबंधन : भौतिक अभिलेखों की समीक्षा और छंटाई (weeding out), कार्यालयों में स्वच्छता सुनिश्चित करना, अभिलेखों/फाइलों का डिजिटलीकरण।

  • स्थान प्रबंधन एवं कार्यस्थल सुधार : कार्यालयों में स्थान का कुशल उपयोग और कार्यस्थल अनुभव को बेहतर बनाना।

विशेष अभियान 5.0 के तहत विधायी विभाग ने यह संकल्प लिया है कि वह लंबित मामलों को कम करने, अनुपयोगी सामग्री का निपटान करने और रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में सुधार लाने हेतु लक्षित गतिविधियों को अपनाएगा, ताकि अभियान के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।

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