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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ED की बड़ी कार्रवाई, 1200 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1200 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है। एजेंसी ने कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़ी चर्चित ‘ढेबर सिटी’ की जमीनों तथा गोवा स्थित लग्जरी ‘वेस्टइन गोवा होटल’ सहित कई संपत्तियों को अपने दायरे में लिया है।


ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 28 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन अलग-अलग अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए। एजेंसी के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों की डीड वैल्यू लगभग 200 करोड़ रुपये है, जबकि इनका बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।

2019 से 2023 के बीच 2883 करोड़ की अवैध कमाई का आरोप

ED का दावा है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी व्यवस्था में कथित हेरफेर कर एक संगठित शराब सिंडिकेट ने करीब 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। जांच एजेंसी के मुताबिक इस सिंडिकेट के संचालन में कारोबारी अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा की प्रमुख भूमिका रही। मामले की जांच EOW और ACB रायपुर में दर्ज FIR के आधार पर आगे बढ़ाई गई है।

गोवा के लग्जरी होटल पर भी कार्रवाई

ED के अनुसार उत्तर गोवा के अंजुना क्षेत्र में स्थित प्रीमियम ‘वेस्टइन गोवा होटल’ को लगभग 110 करोड़ रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी से खरीदा गया था। यह होटल पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। एजेंसी ने दावा किया है कि होटल की खरीद से जुड़े धन के परिवहन में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

रायपुर की जमीनें और बेनामी संपत्तियां भी कुर्क

पहले कुर्की आदेश के तहत विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। ED का आरोप है कि विकास अग्रवाल सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का संचालन करता था तथा डिस्टिलरियों से कथित कमीशन वसूली कर राशि सिंडिकेट तक पहुंचाता था।

कार्रवाई में रायपुर स्थित ‘ढेबर सिटी होम्स’ की जमीनों के अलावा विभिन्न शेल कंपनियों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियां भी शामिल हैं। इन संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 30 करोड़ रुपये बताया गया है।

कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी जब्त

तीसरे कुर्की आदेश के तहत ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड अटैच किए गए हैं।

ED का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा कथित तौर पर सिंडिकेट को देने के लिए बाध्य किया जाता था, जिससे लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।

चार नए आरोपी शामिल, संख्या बढ़कर 85

मामले में ED ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में छठी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल की है। इसमें विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को आरोपी बनाया गया है।

इसके साथ ही शराब घोटाला मामले में जांच के दायरे में आने वाले आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग का खुलासा: ED जांच में 95 करोड़ की संदिग्ध एंट्री, नक्सल इलाकों तक पहुंच

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 रायपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, विदेश से आए करोड़ों रुपये का उपयोग बस्तर और धमतरी क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों के विस्तार में किए जाने के संकेत मिले हैं।


95 करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन

ED के मुताबिक नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 95 करोड़ रुपये विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत लाए गए। इनमें से लगभग 6.5 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ में खर्च किए जाने की बात सामने आई है। यह पूरा मामला The Timothy Initiative (TTI) और उससे जुड़े नेटवर्क से संबंधित बताया जा रहा है।

विदेशी नागरिक हिरासत में

इस मामले में विदेशी नागरिक मिकाह मार्क को बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ब्यूरो ने हिरासत में लिया। उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए, जिनका उपयोग भारत में बार-बार नकदी निकासी के लिए किया जा रहा था।

देशभर में ED की छापेमारी

ED ने 18 और 19 अप्रैल को देशभर में छह स्थानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि Truist Bank से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाकर विभिन्न राज्यों के एटीएम से नकद निकासी की जा रही थी, ताकि वित्तीय निगरानी प्रणाली से बचा जा सके।

FCRA नियमों का उल्लंघन

एजेंसी के अनुसार संबंधित संगठन FCRA के तहत पंजीकृत नहीं है, इसके बावजूद विदेशी फंड का उपयोग किया जा रहा था। लेन-देन के रिकॉर्ड के लिए ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भी सामने आया है, जिसे कथित तौर पर विदेश से संचालित किया जा रहा था।

कैश, कार्ड और दस्तावेज जब्त

छापेमारी के दौरान ED ने 25 विदेशी डेबिट कार्ड, करीब 40 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी को आशंका है कि यह एक संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

जांच जारी

फिलहाल ED इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और फंडिंग के स्रोत, उपयोग तथा संभावित नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

रानू साहू केस: हाईकोर्ट सख्त, संपत्ति अटैचमेंट के खिलाफ सभी याचिकाएं खारिज

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा की पूर्व और निलंबित कलेक्टर आईएएस रानू साहू से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम फैसला सुनाते हुए उनके रिश्तेदारों की संपत्तियों के अटैचमेंट के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।


मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। यह पूरा प्रकरण कथित कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रानू साहू और उनके परिजनों की करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि ED ने ऐसी संपत्तियों को भी अटैच किया है, जो कथित अपराध से पहले खरीदी गई थीं और जिनका FIR में उल्लेख नहीं है। अपीलेट ट्रिब्यूनल से राहत न मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत स्वतः सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” की परिभाषा व्यापक है, जिसमें अपराध से अर्जित संपत्ति के साथ उसकी समतुल्य कीमत भी शामिल होती है।

अदालत ने यह भी माना कि यदि अवैध कमाई की सीधी संपत्ति का पता नहीं चलता, तो उसकी बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियों को भी अटैच किया जा सकता है। मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में वित्तीय लेन-देन जटिल और छिपे हुए होते हैं, जिससे प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाना कठिन होता है।

इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने ED की कार्रवाई को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

इस फैसले से प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को कानूनी मजबूती मिली है, वहीं याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है।

कस्टम मिलिंग स्कैम: ईडी की बड़ी कार्रवाई, नेताओं–अधिकारियों तक पहुँच सकती जांच

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 दुर्ग। ₹140 करोड़ से अधिक के कस्टम मिलिंग घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार सुबह दुर्ग में बड़ी कार्रवाई की। ईडी की छह सदस्यीय टीम दो गाड़ियों में सवार होकर हुडको स्थित सुधाकर रावटे के घर पहुँची और दबिश दी। टीम रावटे से पूछताछ कर रही है तथा घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही है।


10 जिलों में एक साथ रेड

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में प्रदेश के 10 जिलों में एक साथ छापेमारी की जा रही है। इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और ईडी ने मुख्य आरोपी पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और रायपुर के कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया था।

कैसे हुआ घोटाला?

आरोप है कि कस्टम मिलिंग के भुगतान में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। बिल पास कराने के लिए मिलर्स से ₹20 प्रति क्विंटल वसूला जाता था और केवल पैसा देने वालों को ही भुगतान मिलता था।

ईडी की चार्जशीट

इस मामले में ईडी पहले ही 3500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश कर चुकी है, जिसमें 35 पन्नों की समरी भी शामिल है।

चैतन्य बघेल की रिमांड 15 सितंबर तक बढ़ी, शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी

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 रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की रिमांड 15 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। शनिवार को रायपुर की पीएमएलए स्पेशल कोर्ट में उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई।


चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया है। आरोप है कि घोटाले की रकम से उन्हें 16.70 करोड़ रुपए मिले। पिछले दो महीने से वे जेल में बंद हैं।

रियल एस्टेट में इन्वेस्ट हुआ ब्लैक मनी

ED की जांच में सामने आया कि घोटाले की रकम को विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में निवेश किया गया। छापेमारी के दौरान अकाउंटेंट और प्रोजेक्ट से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए।

प्रोजेक्ट कंसल्टेंट राजेंद्र जैन ने बयान दिया कि वास्तविक खर्च 13–15 करोड़ रुपए था, जबकि रिकॉर्ड में सिर्फ 7.14 करोड़ रुपए दिखाया गया। जांच में यह भी पता चला कि बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश पेमेंट किया, जो हिसाब-किताब में दर्ज नहीं था।

सिंडिकेट से 1000 करोड़ की हेराफेरी

ED का दावा है कि इस सिंडिकेट ने करीब 1000 करोड़ रुपए की हेराफेरी की है। ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाए गए और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया।

ईडी की छापेमारी से हड़कंप- रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर में एकसाथ दबिश

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 रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह छत्तीसगढ़ के कई शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। राजधानी रायपुर के साथ दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर में भी ईडी की टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। इस कार्रवाई से राजनीतिक और कारोबारी हल्कों में हड़कंप मच गया है।


रायपुर में कारोबारी के घर रेड

सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीम ने रायपुर के शंकर नगर स्थित कारोबारी विनय गर्ग के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा रायपुर में ही 8 से 10 अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई जारी है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

छापेमारी के दौरान सशस्त्र बलों की तैनाती की गई।
कार्रवाई में ईडी के 8 से 10 अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि रेड मुख्यतः कृषि कारोबार से जुड़े लोगों के ठिकानों पर केंद्रित है।

किस मामले से जुड़ी है कार्रवाई?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि छापेमारी किस घोटाले या आर्थिक अनियमितता से जुड़ी हुई है। ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

मेडिकल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: कारोबारी के घर से दस्तावेज, मोबाइल और रिकॉर्ड जब्त

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में हुए 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को दुर्ग में बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के गंजपारा स्थित निवास और कार्यालय पर की गई, जो सुबह 8 बजे से शुरू होकर रात 8 बजे तक, करीब 12 घंटे तक चली।


ईडी की इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, रिकॉर्ड और संपत्ति से संबंधित कागजात जब्त किए गए हैं।

खरीदी में गड़बड़ी: 5 लाख की मशीन 17 लाख में, ₹8.50 की ट्यूब ₹2,352 में खरीदी
इस छापेमारी की कार्रवाई CGMSC द्वारा की गई रिएजेंट, EDTA ब्लड ट्यूब और CBC मशीन की खरीदी में भारी अनियमितताओं की जांच के तहत की गई थी। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) द्वारा दाखिल 18,000 पन्नों की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

बाजार में 5 लाख रुपये की कीमत वाली CBC मशीन, CGMSC को 17 लाख रुपये में बेची गई थी।

वहीं, ₹8.50 कीमत वाली EDTA ब्लड सैंपल ट्यूब को ₹2,352 प्रति यूनिट की दर से खरीदी दिखाया गया।

20 ईडी अफसरों की टीम, CRPF की महिला टुकड़ी भी रही मौजूद
इस छापेमारी में करीब 20 ईडी अधिकारी 7 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान CRPF की महिला टुकड़ी भी मौके पर तैनात रही। ईडी अधिकारियों ने इस दौरान:

सिद्धार्थ चोपड़ा का मोबाइल फोन
CGMSC से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलें
मोक्षित कॉर्पोरेशन के पिछले 10 वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड
और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए।
साथ ही, कुछ फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

बैंक लॉकरों की भी जांच
ईडी टीम ने शशांक चोपड़ा के भाई सिद्धार्थ चोपड़ा और शरद चोपड़ा के बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। सूत्रों के अनुसार, ईडी को इस जांच में कुछ अहम आर्थिक सुराग हाथ लगे हैं, जिन्हें केस में आगे शामिल किया जाएगा।

फिलहाल, ED द्वारा जब्त दस्तावेजों की जांच जारी है और जल्द ही इस घोटाले में कुछ और अहम गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप केस में गूगल और मेटा को ईडी का नोटिस, 21 जुलाई को पूछताछ के लिए तलब

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 नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स से जुड़े मामलों की जांच के तहत टेक दिग्गज कंपनियों गूगल (Google) और मेटा (Meta) को नोटिस भेजा है। ईडी का आरोप है कि इन दोनों कंपनियों ने अवैध सट्टेबाजी ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों और प्रचार के ज़रिए बढ़ावा दिया। इसी सिलसिले में 21 जुलाई को दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।


विज्ञापनों के जरिए बढ़ावा देने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, गूगल और मेटा पर यह आरोप है कि उन्होंने ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब, गूगल सर्च, इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से प्रमुखता दी। इन पर सट्टेबाजी से संबंधित वेबसाइट्स और प्रचार सामग्रियों को स्पेस देने और लाभ कमाने का आरोप है।

सट्टेबाजी पर बड़ी कार्रवाई

यह पहली बार है जब भारत में काम कर रही किसी बहुराष्ट्रीय टेक कंपनी को ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। ईडी की यह कार्रवाई देशभर में चल रहे ऑनलाइन सट्टेबाजी विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिसमें पहले ही कई फिल्मी सितारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका पर जांच हो चुकी है।

‘स्किल बेस्ड गेम’ की आड़ में सट्टेबाजी

प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि इन ऐप्स में से कई खुद को ‘स्किल बेस्ड गेम’ बताकर असल में अवैध सट्टेबाजी में लिप्त हैं। करोड़ों रुपये की ब्लैक मनी इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कमाई गई और हवाला के जरिए देश-विदेश में भेजी गई। यह पूरा नेटवर्क अब जांच के घेरे में है।

29 लोगों पर केस, कई हस्तियां शामिल

ईडी ने बीते सप्ताह इस मामले में 29 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें कई प्रसिद्ध अभिनेता, टीवी होस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हैं। जिन हस्तियों के नाम ईडी की ECIR (Enforcement Case Information Report) में दर्ज हैं, उनमें प्रकाश राज, राणा दग्गुबाती और विजय देवरकोंडा जैसे नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन हस्तियों ने मोटी रकम लेकर इन ऐप्स का प्रचार किया।

चैतन्य बघेल की बढ़ीं मुश्किलें, ईडी को कोर्ट से मिली 5 दिन की रिमांड

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है। ईडी की टीम ने उन्हें भिलाई स्थित आवास से हिरासत में लेकर रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने पूछताछ के लिए पांच दिन की रिमांड मंजूर की है।


गौरतलब है कि यह कार्रवाई राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। ईडी के इस कदम के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति गरमा गई है।

जानकारी के मुताबिक, विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सुबह-सुबह ईडी की टीम ने भूपेश बघेल के भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान आसपास के इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधानसभा सत्र में शामिल होने रायपुर रवाना हो गए, जबकि ईडी की टीम ने चैतन्य बघेल को हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया।

जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा, सड़क पर ड्रामा करने से सच्चाई नहीं बदलेगी: सांसद बृजमोहन

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मीडिया से चर्चा करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, "जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा।" कांग्रेस ने अपने शासनकाल में छत्तीसगढ़ को लूटने, भ्रष्टाचार फैलाने और जनता के अधिकारों का हनन करने का कार्य किया, जिसकी जांच अब ED कर रही है।


अग्रवाल ने कहा कि, "कांग्रेस शासन में जिस प्रकार से सरकारी योजनाओं में घोटाले हुए, जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग किया गया, उसके प्रमाण अब सामने आ रहे हैं। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही निश्चित रूप से होगी।"

कांग्रेस द्वारा ED कार्रवाई के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "ED एक स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी है, जो कानून के दायरे में रहकर जांच कर रही है। यदि कांग्रेस को लगता है कि जांच में कोई त्रुटि है, तो उनके लिए न्यायालय का दरवाजा हमेशा खुला है। उन्हें कोर्ट जाना चाहिए, सड़क पर ड्रामा करने से सच्चाई नहीं बदलेगी।"

बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा चेहरा क्यों न हो।

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