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एक घंटे के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों का जान जोखिम में क्यों डाला गया?

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महासमुंद- साइबर सुरक्षा आज के समय में अत्यंत आवश्यक विषय है, लेकिन इसके नाम पर आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अवधि और व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। केवल एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए जिले के शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाना, वह भी तेज बारिश के मौसम में, क्या वास्तव में उचित है? क्या महज प्रमाण-पत्र देने से शिक्षक साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित हो जाएंगे?

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण की उपयोगिता पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक घंटे के प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दूर-दराज से जिला मुख्यालय बुलाने से शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बरसात के मौसम में लंबी दूरी तय करने के दौरान शिक्षकों की जान-माल की सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है। हाल के दिनों में बारिश के कारण कई स्थानों पर दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आई हैं, ऐसे में गैर-जरूरी आवागमन को कम करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कोकडिया का कहना है कि प्रशिक्षण में दी गई साइबर सुरक्षा से संबंधित अधिकांश सामान्य जानकारियां आज शिक्षकों तक टीवी, मोबाइल, समाचार माध्यमों और विभिन्न जागरूकता अभियानों के जरिए पहले से पहुंच रही हैं। यदि वास्तव में शिक्षकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए प्रशिक्षित करना है तो प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न होकर व्यावहारिक, संवादात्मक और विस्तृत होना चाहिए।

उनके अनुसार, इस प्रशिक्षण को जिला मुख्यालय पर केवल एक घंटे में आयोजित करने के बजाय संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों के माध्यम से भी कराया जा सकता है। पहले संकुल समन्वयकों को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाए और उसके बाद वे अपने-अपने संकुल के शिक्षकों को प्रशिक्षण दें। इससे शिक्षकों का यात्रा समय बचेगा, विद्यार्थियों की पढ़ाई कम प्रभावित होगी और प्रशासन का खर्च भी घटेगा।

एक घंटे का प्रशिक्षण कितना प्रभावी?

साइबर अपराध लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल भाषण सुनाकर या जानकारी देकर साइबर सुरक्षा की समझ विकसित नहीं की जा सकती। प्रशिक्षण में वास्तविक उदाहरण, साइबर ठगी के तरीके, फर्जी कॉल और लिंक की पहचान, बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाव, सोशल मीडिया सुरक्षा, पासवर्ड सुरक्षा, डेटा सुरक्षा तथा साइबर अपराध होने अथवा प्रयास किए जाने पर तत्काल क्या कदम उठाए जाएं—इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।

वन-वे प्रशिक्षण प्रभावी नहीं होते। प्रशिक्षण में शिक्षकों को सवाल पूछने, अपने अनुभव साझा करने, उदाहरणों पर चर्चा करने और समस्याओं का समाधान समझने का अवसर मिलना चाहिए। आपसी संवाद और प्रश्नोत्तर ही किसी प्रशिक्षण को प्रभावी बनाते हैं।

साइबर अपराध रोकने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी

कोकडिया ने कहा कि केवल जनता को जागरूक करने से साइबर अपराध पूरी तरह नहीं रुकेंगे। साइबर कानूनों को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है।

यदि किसी व्यक्ति को ठगने का प्रयास किया जा रहा है, फर्जी कॉल या संदेश के माध्यम से धोखाधड़ी का प्रयास किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केवल पैसा खाते से निकल जाने के बाद ही कार्रवाई करने की बजाय धोखाधड़ी के प्रयास की सूचना पर भी तत्काल कार्रवाई और मार्गदर्शन की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस एवं संबंधित अधिकारियों को साइबर अपराध के नए तरीकों के बारे में लगातार प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को समय पर सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल सके।

टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाना होगा

आज साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों से साइबर अपराधों का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा। हमें आधुनिक तकनीक को समझना और उसका प्रभावी उपयोग करना होगा।

ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे संदिग्ध नंबर, फर्जी कॉल और साइबर ठगी के प्रयासों की पहचान जल्द से जल्द हो सके तथा संबंधित एजेंसियों तक सूचना पहुंच सके। साइबर सुरक्षा केवल प्रशिक्षण का विषय नहीं, बल्कि तकनीक, कानून, पुलिस व्यवस्था और जन-जागरूकता—इन सभी के समन्वय का विषय है।

प्रमाण-पत्र नहीं, वास्तविक प्रशिक्षण चाहिए

एक घंटे के प्रशिक्षण के बाद यदि हजारों शिक्षकों के प्रमाण-पत्र तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो यह भी विचारणीय है कि उस खर्च से वास्तविक रूप से कितना साइबर सुरक्षा कौशल विकसित हुआ।

यदि शिक्षक पहले से सामान्य साइबर सुरक्षा जानकारी रखते हैं और प्रशिक्षण केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित रह जाता है, तो यह शिक्षकों के साथ भी अन्याय है और सरकारी संसाधनों का भी उचित उपयोग नहीं है।

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि सरकारी प्रशिक्षण केवल औपचारिकता के लिए एक घंटे का नहीं होना चाहिए। यदि प्रशिक्षण आवश्यक है तो उसे पर्याप्त समय देकर प्रभावी तरीके से कराया जाए।

पूरे दिन का प्रशिक्षण हो

साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कम से कम एक पूरे दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए। इसमें विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, वास्तविक साइबर ठगी के उदाहरण, प्रश्नोत्तर, साइबर अपराध की शिकायत की प्रक्रिया, डिजिटल सुरक्षा के उपाय और व्यवहारिक अभ्यास शामिल किए जाने चाहिए।

इसके साथ ही शिक्षकों को जिला मुख्यालय बुलाने के बजाय पहले संकुल समन्वयकों को प्रशिक्षित कर संकुल स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इससे समय, धन और यात्रा का खर्च बचेगा तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई भी कम प्रभावित होगी।

गेंदलाल कोकडिया का कहना है कि साइबर सुरक्षा निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन प्रशिक्षण भी उतना ही गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। महज एक घंटे का प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र बांटना समाधान नहीं है। यदि उद्देश्य वास्तव में शिक्षकों को साइबर सुरक्षा के प्रति सक्षम बनाना है, तो प्रशिक्षण पूरे दिन का, संवादात्मक, व्यावहारिक और स्थानीय स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए।

सवाल यह नहीं है कि साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण जरूरी है या नहीं—सवाल यह है कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिससे वास्तव में शिक्षक और समाज साइबर अपराध से सुरक्षित हो सकें।

सफलता की कहानी -अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिली नई उड़ान

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बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राज्यपाल डेका से निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने की भेंट

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति गजराज पगारिया, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।

निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

हड़ताल का मुख्य कारण मानवीय मूल्यों की समझ का अभाव, बच्चों की पढ़ाई बाधित होना चिंता का विषय: गेंदलाल कोकड़िया

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रायपुर- प्रदेश में शिक्षकों की हड़ताल को लेकर सामाजिक चिंतन सामने आया है। समाजसेवी गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व बच्चों के भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकीय पेशा केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। एक शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की समझ और जीवन दृष्टि की कमी के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षकों को 'जीवन विद्या' जैसे मानवीय मूल्यों पर आधारित अध्ययन और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो उनकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का बंद होना बच्चों के साथ अन्याय है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षाओं की तैयारी बाधित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है। सरकार और शिक्षक संगठनों को आपसी संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान निकालना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है और समाधान के सभी प्रयासों के बाद भी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान को दी जानी चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया ने अंत में कहा कि "एक शिक्षक उपकार का कार्य करता है। उसका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

शाला प्रवेश उत्सव में गूंजा शिक्षा का उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

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हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, शिक्षा ही समृद्ध भविष्य की सबसे मजबूत नींव है — राजेश अग्रवाल

रायपुर- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय 'शाला प्रवेश उत्सव' में सहभागिता कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नवीन शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत कराई तथा अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अपने सपनों को साकार कर सके।"

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, नियमित विद्यालय आने तथा जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन शैक्षणिक सत्र के अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

राजधानी के बड़े निजी स्कूलों को टक्कर दिया, प्रदेश का प्रयास विद्यालय

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प्रयास विद्यालयों के विद्यार्थियों का सीजी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन

10वीं एवं 12वीं में शत-प्रतिशत सफलता, मेरिट सूची में उल्लेखनीय स्थान

10वीं की छात्रा कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया

प्रयास विद्यालयों के 13 विद्यार्थियों ने टॉप-10 में बनाई जगह

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री रामविचार नेताम ने दी बधाई और शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़ के ‘प्रयास’ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों में रचा उत्कृष्टता का इतिहास: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

रायपुर- छत्तीसगढ़ के आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग  एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम की है। विभाग के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन में सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परिणाम देते हुए बड़े निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दी है। प्रयास विद्यालयों के 13 बच्चों ने सीजी बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 में जगह बनाने में सफलता हासिल की है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल 17 प्रयास विद्यालय संचालित है। जिसमें नक्सल प्रभावित बच्चों से लेकर सभी वर्गों के बच्चें अध्ययनरत है। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से बच्चों को एक नई हौसला मिला है, जो उनके सपनों को साकार करने में सार्थक हो रही है। बतादें कि प्रयास विद्यालय के माध्यम से बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा दी जाति है। साथ ही उच्चस्तर के कोचिंग संस्थाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं एनआईटी, आईआईटी, नीट, जेईई एवं अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।

प्रयास विद्यालय के इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रयास आवासीय विद्यालयों की अवधारणा की सार्थकता को प्रमाणित करती है। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु किए गए सतत प्रयास की सराहना की हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि राज्य के लिए गौरव का विषय है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रयास विद्यालय के बच्चों ने सीजी बोर्ड की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विभाग हमेशा बच्चों के शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्य के लिए यह उपलब्धि न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही दिशा, समर्पण और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।

प्रमुख सचिव बोरा ने जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बताया कि प्रदेश के 50 मेरिट छात्रों में से 13 विद्यार्थी प्रयास विद्यालय के है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बात के लिए प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और बेहतर कार्य करने को कहा।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि हायर सेकेंडरी परीक्षा (कक्षा 12वीं) में प्रयास आवासीय विद्यालय के कुल 128 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय, गुडियारी की 19 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। कोरबा जिले की छात्रा कु. रागिनी कंवर ने 95 प्रतिशत अंक अर्जित कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जीव विज्ञान विषय में दो छात्राओं द्वारा 100 में 100 अंक अर्जित किया जाना विशेष उपलब्धि है।हाईस्कूल परीक्षा (कक्षा 10वीं) में भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। कुल 119 छात्राओं में से 48 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। गणित विषय में 6 विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत अंक अर्जित किए। कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी टॉप 10 मेरिट सूची में 97.5 प्रतिशत अंकों के साथ स्थान अर्जित किया।

उल्लेखनीय है कि हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य सूची में कुल 42 विद्यार्थियों में से 21 विद्यार्थी आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालयों के हैं। इनमें प्रयास आवासीय विद्यालय के 11 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया है, जो विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।

बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘समग्र शिक्षा 3.0’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘रीइमैजिनिंग समग्र शिक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शात्मक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।


बैठक में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अगले चरण में शासन, अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र हितलाभों को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक प्राथमिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); संजय कुमार, सचिव (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता); डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा); मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा सचिव एवं समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक; विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो। उन्होंने सीखने की खाइयों को पाटने, ड्रॉपआउट दर कम करने, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार, शिक्षक क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण कौशलों के विकास तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और सुझाव स्कूली शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने तथा समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक प्रतिस्पर्धी, भारतीय मूल्यों से जुड़ा और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और ज्ञान तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों को पुनः समाज के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष बाद देश शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार कर इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे विद्यालयों और राज्यों की जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण से तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना का व्यावहारिक रूप है, जहां विद्यालय परिवर्तन के केंद्र बनते हैं और बहुविषयक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के अपर सचिव धीरज साहू ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें समग्र शिक्षा और एनईपी 2020 के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी वर्षों के लिए रूपरेखा और प्रमुख उपलब्धि लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

समग्र शिक्षा एक एकीकृत, केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक संपूर्ण स्कूली शिक्षा को समग्र दृष्टिकोण से कवर करती है।


जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने नई पहल

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मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिला प्रशासन, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के बीच हुआ एमओयू

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आज बगिया में जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन जशपुर, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर रोहित व्यास, एसईसीएल की ओर से जनरल मैनेजर सी. एम. वर्मा तथा ईडीसीआईएल की ओर से प्रोजेक्ट डायरेक्टर विकास सहरावत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सके। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। 

एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। साथ ही एमओयू में इंटरएक्टिव पैनल की स्थापना के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण, संचालन एवं नियमित मेंटेनेंस के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि उपकरणों का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। 

इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त होगी। कलेक्टर रोहित व्यास ने एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस परियोजना से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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  • छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग की रणनीति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
  • अंजोर विजन के लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर व्यापक एवं गहन विमर्श
  • मुख्यमंत्री ने कहा — लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए कार्ययोजना ठोस हो और क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव  विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

फरसाबहार में बन रहा है सर्वसुविधायुक्त एकलव्य विद्यालय

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 रायपुर- जशपुर जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु फरसाबहार में 37.80 करोड़ रुपये की लागत से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के नवीन भवन का निर्माण तीव्र गति से किया जा रहा है।

नवीन भवन आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त होगा, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस विद्यालय में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। वर्तमान में फरसाबहार स्थित विद्यालय में कक्षा 8वीं तक शिक्षा दी जा रही है, जिसे अब 12वीं तक विस्तारित करने की योजना है।

आधुनिक भवन में निःशुल्क शिक्षा, गणवेश, पुस्तकें, भोजन, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान तथा विकलांग विद्यार्थियों के लिए सुलभ अवसंरचना जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही ई-लर्निंग, जीवन कौशल विकास और कैरियर मार्गदर्शन जैसी सेवाओं से भी विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। यह विद्यालय विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल से जशपुर जिले के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक नया अवसर प्राप्त हो रहा है।


मुख्यमंत्री की पहल पर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े शाला त्यागी बच्चे

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पहाड़ी कोरवा बाहुल्य क्षेत्र के पांच बच्चों को आश्रम एवं स्कूल में कराया गया एडमिशन

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम  चलाई जा रही है। इसके तहत मैनपाट विकासखण्ड के कोरता ग्राम पंचायत के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समाज के 5 बच्चों का विद्यालय एवं आश्रम में प्रवेश कराया गया।

इस अभियान अंतर्गत बच्चों को पुस्तकें, स्कूल ड्रेस और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई। पहाड़ी कोरवा बसाहट क्षेत्र में भ्रमण के दौरान यह देखा गया कि पहाड़ी कोरवा बच्चे अधिकारियों को देख दूर भागते थे। उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने  प्रशासन निरंतर टीम बनाकर सर्वे कर रही है। बच्चों के अभिभावकों को भी समझाइश दी जा रही है । अभिभावक अधिकारियों के समझाइश को मानकर बच्चों को स्कूल भेजने तैयार हो रहे हैं।अध्ययन सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे पर उत्साह और मुस्कान छा गई। बच्चों ने कहा कि अब वे स्कूल छोड़कर कभी नहीं जाएंगे और नियमित रूप से पढ़ाई करेंगे।

मुहिम अंतर्गत कुमारी राखि को कक्षा चौथी, कु. कुमारी को कक्षा चौथी, कुमारी सुमारी को कक्षा चौथी, कुमारी रवीना को कक्षा चौथी, कुमारी सुमंती को कक्षा चौथी शाला प्रवेश कराया गया।बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा की महत्ता बताते हुए उन्हें प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने भविष्य को संवारने की सलाह दी गई।

शाला त्यागी बच्चों का पुनः नामांकन जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के समन्वित प्रयास का हिस्सा है। इसके लिए विकासखण्ड स्तर पर समितियों का गठन कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में ठोस कदम है, बल्कि विशेषकर पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की राह भी प्रशस्त करेगी।


नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार

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रायपुर-प्राथमिक शाला नानदमाली में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के तहत अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह बदल गया है। शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसकी अभिभावकों ने सराहना की है।

विद्यालय की वर्तमान स्थिति:

सरगुजा जिले के नानदमाली प्राथमिक शाला में वर्तमान में 123 विद्यार्थी दर्ज हैं। पहले शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन नवीन पदस्थापना के बाद अब विद्यालय में कुल 5 शिक्षक उपलब्ध हैं:

  • प्रधान पाठक: पुष्पा बड़ा

  • सहायक शिक्षक: दीनानाथ कैवर्त

  • सहायक शिक्षक: पुष्पा पंडो

  • सहायक शिक्षक: हरी चंद पटेल

  • सहायक शिक्षक (युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया): नीलिमा सिंह

इन शिक्षकों के चलते प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों को पर्याप्त समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम:

पांचों शिक्षक अब बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने में सक्रिय हैं। कक्षाओं में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित होने से पढ़ाई अधिक व्यवस्थित और सरल ढंग से संचालित हो रही है। बच्चों को अब व्यक्तिगत मार्गदर्शन और पर्याप्त समय मिल रहा है।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया:

अभिभावकों ने शिक्षक पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की सराहना की है। उनका कहना है कि पहले कक्षाओं में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई अधूरी रह जाती थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से न केवल विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर सुधर रहा है, बल्कि पूरे गांव का शैक्षिक वातावरण सकारात्मक बन रहा है।

सरकारी पहल:

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों के अनुरूप हर विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निष्कर्ष:

युक्तियुक्तकरण के तहत शिक्षक पदस्थापना से नानदमाली शाला में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आया है और यह ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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