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निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

प्रिंसिपल ऑफ द ईयर समीर प्रधान का सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षा के मानवीयकरण में योगदान को सराहा

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा द्वारा 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर' से सम्मानित एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पटेवा के प्राचार्य समीर चंद्र प्रधान के सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों ने उनके 37 वर्षों के शैक्षणिक योगदान, मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका की सराहना की।

संकुल केंद्र खट्टा के प्रतिनिधि शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि समीर प्रधान का संपूर्ण शिक्षकीय जीवन शिक्षा के मानवीयकरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान ने विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, समय प्रबंधन, अनुशासन, चित्रकला, कविता, स्काउट-गाइड तथा जीवन विद्या अध्ययन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया। वे छुट्टी के दिनों में भी विद्यालय में गतिविधियां संचालित करते थे और कई बार स्वयं घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय लाने का कार्य भी करते थे।

उन्होंने बताया कि समीर प्रधान ने महासमुंद डीएमएस, स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा तथा मध्यप्रदेश के सागर सहित विभिन्न संस्थानों में लगभग 37 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्हें 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर', 'द बेस्ट प्रिंसिपल' तथा 'द मास्टर' सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्यों का उल्लेख अमेरिका की प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है।

गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण के दौरान दिल्ली में आयोजित नीति निर्माण समिति की बैठक में समीर प्रधान ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), रायपुर की ओर से लगभग 30 मिनट का प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसका भारत सरकार द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवाचार, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और समग्र शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करती है।

सम्मान समारोह में समीर प्रधान ने संकुल केंद्र खट्टा के प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, समन्वयक सुरेश कुमार साहू, वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया तथा सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने का प्रभावी माध्यम है तथा इसे विद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा ने समीर प्रधान को सिद्धांतनिष्ठ एवं आदर्श नीति निर्धारक बताया। वहीं प्राचार्य लिकेश कुमार साहू ने उन्हें शिक्षा के मानवीयकरण के लिए समर्पित प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया। समन्वयक सुरेश कुमार साहू ने उनके प्रशासनिक कौशल एवं व्यवहारिक नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम में दुलारी चंद्राकर, लखन साहू, चंद्रभान ध्रुव, तुलसी देवांगन सहित संकुल केंद्र खट्टा के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सितोष जुल्फे ने किया। समारोह के दौरान शिक्षकों ने समीर प्रधान के साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए उनके उज्ज्वल एवं प्रेरणादायी शिक्षकीय जीवन की सराहना की।

टूटा पुल बना स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बाधा, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाए उपेक्षा के आरोप

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महासमुंद- जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खट्टा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क पर बना जर्जर पुल और क्षतिग्रस्त सड़क बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी बहने लगता है, जिससे आसपास के छह गांवों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों को स्कूल नहीं पहुंच पाना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल खट्टा, कोकड़ी, रखमखेड़ा सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते से स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा, खट्टा हाई स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा कोकड़ी शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं।

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि बरसात के दौरान पुल के ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे छात्र-छात्राओं का स्कूल जाना जोखिम भरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बालिकाएं तेज बहाव के बीच पुल पार करने से डरती हैं, जिसके कारण कई बार वे स्कूल नहीं जा पातीं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यही मार्ग गर्भवती महिलाओं, बीमार मरीजों और अन्य ग्रामीणों के लिए अस्पताल एवं आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। पुल पर पानी आने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के सरपंच डॉ. राजकमल पटेल तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा रामस्वरूप दीवान का निवास भी इसी गांव में है और उन्हें भी इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि लंबे समय से पुल और सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक, सांसद और संबंधित विभाग से मांग की है कि बरसात समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना पुल की तत्काल मरम्मत अथवा वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई तो इसका सबसे अधिक असर स्कूली शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा पर पड़ेगा। उनका मानना है कि सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज आधिकारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला। उन्होंने कर्तव्य भवन में पदभार ग्रहण किया। जोशी के पास शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी प्रभार है।

कार्यभार संभालने के बाद जोशी ने मंत्रालय की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा मंत्रालय की अन्य प्रमुख पहलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी. के. अनिल कुमार, तथा शिक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।



निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

हड़ताल का मुख्य कारण मानवीय मूल्यों की समझ का अभाव, बच्चों की पढ़ाई बाधित होना चिंता का विषय: गेंदलाल कोकड़िया

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रायपुर- प्रदेश में शिक्षकों की हड़ताल को लेकर सामाजिक चिंतन सामने आया है। समाजसेवी गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व बच्चों के भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकीय पेशा केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। एक शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की समझ और जीवन दृष्टि की कमी के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षकों को 'जीवन विद्या' जैसे मानवीय मूल्यों पर आधारित अध्ययन और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो उनकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का बंद होना बच्चों के साथ अन्याय है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षाओं की तैयारी बाधित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है। सरकार और शिक्षक संगठनों को आपसी संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान निकालना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है और समाधान के सभी प्रयासों के बाद भी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान को दी जानी चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया ने अंत में कहा कि "एक शिक्षक उपकार का कार्य करता है। उसका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

स्वेच्छानुदान मद से सुदूर वनांचल स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल, मांझीगुडा को 10 कंप्यूटर प्रदत्त

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने स्वेच्छानुदान मद से बस्तर जिले के विकासखंड दरभा के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा चिंगपाल को 10 कंप्यूटर प्रदान किए। इसके लिए राज्यपाल द्वारा पूर्व में स्वीकृति प्रदान की गई थी।

लोक भवन  में आज राज्यपाल ने विद्यालय के लिए कंप्यूटरों का औपचारिक रूप से हस्तांतरण किया। इन कंप्यूटरों के माध्यम से सुदूर वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके ज्ञान और कौशल का विकास होगा। 

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा (जिला बस्तर) के प्राचार्य उपस्थित थे।


सफलता की कहानी- पीडिया में 21 साल बाद गूंजी स्कूल की घंटी, 539 बच्चों के जीवन में लौटी शिक्षा की नई उम्मीद

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कभी बंद पड़े स्कूलों में फिर लौटी रौनक, बदलते बस्तर की नई तस्वीर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।

प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत

पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।

बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई

माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।

इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य

कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

बदलते बस्तर की नई पहचान

पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बस्तर में खाली हुए सुरक्षा कैंप अब बनेंगे स्कूल, वर्षों बाद फिर गूंजेगी बच्चों की पढ़ाई

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और हालात सामान्य होने के बाद एक बड़ी पहल शुरू की गई है। जिन सुरक्षा कैंपों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा, ताकि वर्षों से शिक्षा से वंचित बच्चों को फिर से पढ़ाई का अवसर मिल सके।

लंबे समय तक नक्सली हिंसा के कारण कई सरकारी स्कूल बंद हो गए थे या सुरक्षा बलों के अस्थायी कैंप के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। इससे हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और कई गांवों में शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप हो गई थी।

अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद प्रशासन इन भवनों को दोबारा शिक्षा के लिए तैयार कर रहा है। आवश्यक मरम्मत, फर्नीचर, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद इन भवनों में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों को फिर से खोलना ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि शिक्षा के विस्तार से क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे।

स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे बस्तर में शांति, विकास और शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ

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अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

फरसाबहार में मिली सफलता के बाद जिले के सभी विकासखंडों में होगा विस्तार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो?

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ।

ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है।

बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।

डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।

बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही।

डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला।

260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षतापायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

“साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

स्कूलों में बच्चों का हुआ अभिनंदन,प्राचार्य पुष्पा ने की संकुल के स्कूलों का निरीक्षण

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आरंग- मंगलवार को स्कूल खुलने से स्कूलों में रौनकता आई। प्रथम दिवस स्कूलों में साफ सफाई, मध्यान्ह भोजन और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता का विशेष रूप से ध्यान रखा गया। नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा,आरती और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा आरती कर और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। साथ ही मिठाई और चाकलेट वितरण कर बच्चों का उत्साह वर्धन किया। बच्चों में भी स्कूल खुलने से काफी उत्साह दिखा। वहीं भिलाई हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ नई प्राचार्य पुष्पा निषाद, समन्वयक जीतेंद्र शुक्ला, व्याख्याता सीएल साहू ने संकुल के  स्कूलों पहुंचकर स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसमें बच्चों व शिक्षको की उपस्थिति,साफ सफाई ,मध्यान्ह भोजन व अन्य भौतिक संसाधनों का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दी।इस अवसर पर संस्था प्रमुख सहित सभी शिक्षकों व बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति रही।



शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,28 अधिकारियों के तबादले, कई जिलों में नए डीईओ पदस्थ

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रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।

अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार  महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।

जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।

स्कूल शिक्षा  मंत्री गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।

बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘समग्र शिक्षा 3.0’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘रीइमैजिनिंग समग्र शिक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शात्मक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।


बैठक में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अगले चरण में शासन, अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र हितलाभों को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक प्राथमिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); संजय कुमार, सचिव (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता); डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा); मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा सचिव एवं समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक; विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो। उन्होंने सीखने की खाइयों को पाटने, ड्रॉपआउट दर कम करने, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार, शिक्षक क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण कौशलों के विकास तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और सुझाव स्कूली शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने तथा समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक प्रतिस्पर्धी, भारतीय मूल्यों से जुड़ा और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और ज्ञान तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों को पुनः समाज के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष बाद देश शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार कर इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे विद्यालयों और राज्यों की जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण से तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना का व्यावहारिक रूप है, जहां विद्यालय परिवर्तन के केंद्र बनते हैं और बहुविषयक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के अपर सचिव धीरज साहू ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें समग्र शिक्षा और एनईपी 2020 के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी वर्षों के लिए रूपरेखा और प्रमुख उपलब्धि लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

समग्र शिक्षा एक एकीकृत, केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक संपूर्ण स्कूली शिक्षा को समग्र दृष्टिकोण से कवर करती है।


राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) की समीक्षा और रणनीति कार्यशाला आयोजित

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शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने 06 दिसंबर 2025 को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा और रणनीतियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्रालय ने NMMSS की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह योजना केंद्रीय क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जो हर साल एक लाख नई छात्रवृत्तियाँ प्रदान करती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करना और कक्षा VIII के बाद ड्रॉपआउट दर को कम करना है ताकि छात्र कक्षा XII तक अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

कार्यशाला में केंद्र सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच घनिष्ठ सहयोग पर जोर दिया गया। इसमें सुझाव दिए गए कि योजना के प्रचार-प्रसार को बढ़ाया जाए, वितरण प्रणाली को सुधारें और यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रवृत्ति योग्य लाभार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।

कार्यक्रम में NMMSS पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें 2021–22 से 2024–25 तक की योजना की प्रगति, कोटा उपयोग, NMMSS परीक्षा संचालन और छात्रवृत्ति नवीनीकरण में चुनौतियों पर चर्चा की गई। इसके बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के नोडल अधिकारियों के साथ हितधारक परामर्श हाइब्रिड मोड में आयोजित किए गए।

राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) की मुख्य बातें

  • यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों का समर्थन करती है।

  • प्रत्येक वर्ष कक्षा IX के छात्रों को एक लाख छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं।

  • छात्रवृत्ति कक्षा X से XII तक नवीनीकरण योग्य है।

  • योजना के लिए पात्र छात्र सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकायों के स्कूलों में अध्ययनरत होना चाहिए।

  • छात्रवृत्ति की राशि ₹7,12,000 प्रति वर्ष है।

  • छात्र के माता-पिता की वार्षिक आय ₹3,50,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  • चयन परीक्षा के लिए छात्र ने कक्षा VII में कम से कम 55% अंक प्राप्त किए होने चाहिए, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है।


भारतीय भाषा उत्सव 2025 का समापन: बहुभाषावाद और सांस्कृतिक एकता का संदेश

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शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने भारतीय भाषा उत्सव (BBU) 2025 के समापन समारोह का आयोजन 11 दिसंबर 2025 को नेशनल बाल भवन, नई दिल्ली में किया। इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार ने।

सचिव संजय कुमार का संबोधन

अपने उद्बोधन में संजय कुमार ने भारतीय भाषा उत्सव के तीन वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार एवं बहुभाषावाद में उनके योगदान को स्मरण किया।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच— मातृभाषा में सीखने— पर बल देते हुए छात्रों और शिक्षकों को अनेक भाषाएँ सीखने, शब्दावली को समृद्ध करने और स्पष्ट एवं प्रभावी संप्रेषण के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति सभी भाषाओं और समुदायों का सम्मान करने से आती है।

प्रो. एम. जगदीश कुमार का संवाद

छात्रों से संवाद करते हुए प्रो. कुमार ने बहुभाषा सीखने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बहुभाषावाद आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, नवाचार और संज्ञानात्मक लचीलापन को मजबूत करता है, जो युवाओं को विकसित भारत 2047 के निर्माण में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम में भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) और राष्ट्रीय बाल भवन (NBB) के छात्रों ने:

  • गीत

  • शास्त्रीय व लोक नृत्य

  • बहुभाषीय देशभक्ति प्रस्तुतियाँ

  • नुक्कड़ नाटक

  • कविता वाचन

प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक सद्भाव का वातावरण बनाया और विद्यार्थियों की रचनात्मकता को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।

प्रदर्शनियाँ और गतिविधियाँ

विभिन्न भाषाओं में विकसित शिक्षण-सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई।
साथ ही भाषाई खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस वर्ष की थीम

“भाषाएँ अनेक, भाव एक / Many Languages, One Emotion”
इस थीम के अंतर्गत 4 से 11 दिसंबर तक देशभर के विद्यालयों में गतिविधियाँ आयोजित की गईं। यह आयोजन सुविख्यात कवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती (11 दिसंबर) पर आधारित था।

NEP 2020 के प्रति प्रतिबद्धता का पुनर्पुष्टि

भारतीय भाषा उत्सव 2025 ने भारत की भाषाई विरासत के संरक्षण और बहुभाषावाद के प्रोत्साहन के प्रति DoSEL की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। इसने सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया और छात्रों को भारत की भाषाई समृद्धि अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उपस्थित गण

कार्यक्रम में DoSEL के वरिष्ठ अधिकारियों, भारतीय भाषा समिति के प्रतिनिधियों, स्वायत्त संस्थाओं के प्रमुखों, शिक्षाविदों, शिक्षकों और देशभर के स्कूली छात्रों ने सहभागिता की।



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