Media24Media.com: SCO बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर कड़ा संदेश: बोले—आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे

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SCO बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर कड़ा संदेश: बोले—आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे

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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की सरकार प्रमुखों की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवादियों को वित्तीय सहायता देने, समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाह उपलब्ध कराने वालों के लिए भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।


आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की अपील

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान नहीं लेता, बल्कि निवेश, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, आतंकवादी गतिविधियां समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देती हैं और युवाओं को शिक्षा, रोजगार तथा बेहतर भविष्य के अवसरों से वंचित करती हैं।

राजनाथ सिंह ने SCO के सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से लड़ने में किसी देश के साथ अलग और किसी अन्य देश के साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। आतंकवाद के वित्तपोषण, समर्थन और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री की मौजूदगी में दिया संदेश

इस बैठक की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि राजनाथ सिंह का संबोधन उस समय हुआ, जब बैठक में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार भी मौजूद थे। इस दौरान सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली सहायता का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। इस पृष्ठभूमि में राजनाथ सिंह का बयान क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। हालांकि, उनके संबोधन में व्यक्त विचारों को किसी विशिष्ट घटना से जोड़ने के लिए अलग से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।

SCO की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

शंघाई सहयोग संगठन एक क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठन है, जिसके सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, संपर्क व्यवस्था और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर चर्चा होती है।

भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आतंकवाद तथा अस्थिरता के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं, निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और आम नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर घट सकते हैं।

राजनाथ सिंह ने इस संदर्भ में SCO के सदस्य देशों से सुरक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक सहयोग में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका संदेश था कि संगठन की सफलता केवल बैठकों और संस्थाओं की संख्या से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले वास्तविक बदलावों से मापी जानी चाहिए।

व्यापार और संपर्क व्यवस्था पर भी भारत का जोर

बैठक में रक्षा मंत्री ने आर्थिक सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच व्यापार और संपर्क परियोजनाएं ऐसी होनी चाहिए, जिनसे सभी देशों को लाभ मिले।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संपर्क परियोजनाओं में संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत के अनुसार, किसी भी कनेक्टिविटी परियोजना को परामर्श, पारस्परिक सम्मान और सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग के लिए 2026–2030 की कार्ययोजना का समर्थन भी किया। इसका व्यापक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और विकास के अवसरों को मजबूत करना है।

भारत का स्पष्ट संदेश: आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई जरूरी

राजनाथ सिंह के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल निंदा पर्याप्त नहीं है। इसके वित्तीय स्रोतों, समर्थन नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।

भारत ने SCO के मंच से यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्रीय शांति, आर्थिक प्रगति और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का मिलकर सामना करना होगा।

निष्कर्ष: दुशांबे में राजनाथ सिंह का संबोधन आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर केंद्रित रहा। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि SCO के सदस्य देश आतंकवाद के वित्तपोषण, समर्थन और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ अपने साझा संकल्प को किस तरह ठोस कदमों में बदलते हैं।


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