Media24Media.com: रायपुर की टार फैक्ट्री में दूसरी बार भीषण आग, औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल

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रायपुर की टार फैक्ट्री में दूसरी बार भीषण आग, औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल

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उरला औद्योगिक क्षेत्र में पोरवाल टार प्रोडक्ट्स लिमिटेड में लगी आग; दमकल और पुलिस ने संभाला मोर्चा, पिछली घटना की भी होगी जांच

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पोरवाल टार प्रोडक्ट्स लिमिटेड की फैक्ट्री में सोमवार, 19 अक्टूबर को भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग से उठता धुएं का घना गुबार दूर तक दिखाई दिया। घटना के समय फैक्ट्री परिसर में मजदूर काम कर रहे थे। आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, फैक्ट्री में पिछले कुछ महीनों के भीतर दूसरी बार आग लगने की घटना सामने आई है। बार-बार आग लगने से औद्योगिक इकाई में अग्निशमन व्यवस्था, मशीनों के रखरखाव और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी सुरक्षा चूक या लापरवाही को घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा।

दोपहर में लगी आग, आसमान में छाया धुएं का गुबार

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे फैक्ट्री में आग लगी। आग तेजी से फैलने के बाद परिसर से धुएं का बड़ा गुबार उठने लगा। घटना के समय कर्मचारी और मजदूर फैक्ट्री में मौजूद थे, जिससे वहां कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

सूचना मिलने पर पुलिस और दमकल की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। आग को दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए राहत एवं अग्निशमन कार्य किया गया। अधिकारियों के अनुसार, आग पर काबू पा लिया गया और इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। फैक्ट्री को हुए आर्थिक नुकसान का आकलन तत्काल उपलब्ध नहीं था।

टार के रिसाव से आग लगने की आशंका

प्रारंभिक जानकारी में टार की प्रोसेसिंग के दौरान रिसाव को आग लगने की संभावित वजह बताया गया है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है। वास्तविक कारण का पता तकनीकी जांच और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर ही चल सकेगा।

जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं किसी पाइपलाइन, टैंक, मशीन या प्रोसेसिंग उपकरण में खराबी तो नहीं थी। इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि आग लगने के शुरुआती क्षणों में अग्निशमन उपकरणों का इस्तेमाल किया गया या नहीं और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।

चार महीने पहले भी हुई थी आग की घटना

इस मामले को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि इसी फैक्ट्री में लगभग चार महीने पहले भी आग लगी थी। उस घटना में दो मजदूरों के बुरी तरह झुलसने की जानकारी सामने आई थी।

पहली घटना के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा हुई थी या नहीं, किन कमियों की पहचान की गई थी और उन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे—ये महत्वपूर्ण सवाल हैं।

यदि पिछली घटना के बाद सुरक्षा संबंधी सुधार सुझाए गए थे, तो उनकी अनुपालना की जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दूसरी घटना किन परिस्थितियों में हुई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह पुष्टि नहीं होती कि पिछली घटना के बाद किसी विशेष सुरक्षा निर्देश का उल्लंघन किया गया था।

मजदूरों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

टार और अन्य गर्म या ज्वलनशील औद्योगिक पदार्थों की प्रोसेसिंग करने वाली इकाइयों में छोटी तकनीकी खराबी भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है। ऐसे प्रतिष्ठानों में उपकरणों का नियमित निरीक्षण, तापमान और दबाव पर नियंत्रण, रिसाव का समय रहते पता लगाने की व्यवस्था, उपयुक्त अग्निशमन उपकरण तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

इसके अलावा, कर्मचारियों को आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकालने की योजना, स्पष्ट निकासी मार्ग और नियमित मॉक ड्रिल भी जरूरी हैं। घटना के बाद यह जांचना आवश्यक होगा कि फैक्ट्री में लागू सुरक्षा मानकों और संबंधित अनुमतियों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

पुलिस जांच से तय होगी जिम्मेदारी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रायपुर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आदित्य पांडे ने बताया कि आग पर नियंत्रण पा लिया गया है और घटना में किसी की जान जाने की सूचना नहीं है। उन्होंने मामले में प्रकरण दर्ज करने और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही।

जांच में आग लगने के वास्तविक कारण, संभावित तकनीकी खराबी, सुरक्षा इंतजामों और पिछली घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में किसी नियम के उल्लंघन या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है।

औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी

उरला औद्योगिक क्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा इंतजामों की नियमित समीक्षा की जरूरत को सामने रखा है। संबंधित विभागों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच करें और आवश्यक होने पर इकाई की अग्निशमन व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव तथा कर्मचारियों की सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का निरीक्षण करें।

सबसे अहम सवाल यही है कि फैक्ट्री में बार-बार आग लगने की वजह क्या है और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाएंगे। इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।


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