Media24Media.com: सरगुजा के 35 सरकारी स्कूलों में NEET-JEE की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग शुरू

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सरगुजा के 35 सरकारी स्कूलों में NEET-JEE की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग शुरू

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अंबिकापुर- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के 35 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में NEET और JEE की तैयारी के लिए निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग शुरू की गई है। इस पहल का शुभारंभ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया। 

35 स्कूलों के विद्यार्थियों को मिलेगा विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन

इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी उपलब्ध कराना है। अब विद्यार्थियों को महँगी निजी कोचिंग के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम होगी और वे अपने ही स्कूल में विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ सकेंगे।

जिला खनिज न्यास निधि (DMF) और स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से शुरू की गई इस योजना में जिले के प्रत्येक विकासखंड से पाँच शासकीय विद्यालयों का चयन किया गया है। 

दो वर्षों तक मिलेगी कोचिंग की सुविधा

जिला प्रशासन की विस्तृत जानकारी के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 और 2027-28 के दौरान कक्षा 11वीं विज्ञान संकाय के लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक कोचिंग देने की योजना है।

  • NEET की तैयारी: जीव विज्ञान समूह के विद्यार्थी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे।

  • JEE की तैयारी: गणित समूह के विद्यार्थी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।

  • लाइव ऑनलाइन कक्षाएँ: विद्यार्थी विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान कर सकेंगे।

  • पढ़ाई की सामग्री: रिकॉर्डेड लेक्चर, क्लास नोट्स, प्रश्न बैंक, ऑनलाइन मॉक टेस्ट और अध्ययन सामग्री जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना है।

कोचिंग का संचालन Physics Wallah Limited द्वारा किया जाएगा। कक्षाएँ हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रित माध्यम में संचालित होंगी।

स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक तकनीक से होगी पढ़ाई

योजना के तहत चयनित विद्यालयों में आधुनिक डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 75 इंच के 4K इंटरैक्टिव पैनल, कंप्यूटर, HD वेबकैम, माइक्रोफोन और पावर बैकअप जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए AI आधारित लर्निंग एनालिटिक्स, प्रगति ट्रैकिंग और अभिभावकों के लिए रिपोर्टिंग डैशबोर्ड का भी प्रावधान है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने क्या कहा?

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी का भविष्य केवल आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी के कारण नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने स्कूल प्राचार्यों को विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर अजीत वसंत ने भी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की नियमित समीक्षा और प्रत्येक तीन महीने में फीडबैक सत्र आयोजित करने की बात कही। 

इस पहल से विद्यार्थियों को क्या फायदा होगा?

इस योजना से खासतौर पर ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महँगी कोचिंग फीस और दूसरे शहर में रहने के खर्च से राहत मिल सकती है।

यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो इसे छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों में भी अपनाने का रास्ता खुल सकता है।

छत्तीसगढ़ के लिए यह शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है—अब असली सफलता इस बात से तय होगी कि कितने विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी और प्रवेश परीक्षाओं में सफलता मिलती है।


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