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सफलता की कहानी -अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिली नई उड़ान

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बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास

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वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

​बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम

यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित  "AUAP - WURI  इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने  प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल ​शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड ​​स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।

​इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।

​समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम

बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।

इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन

AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।

WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

शाला प्रवेश उत्सव में गूंजा शिक्षा का उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

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हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, शिक्षा ही समृद्ध भविष्य की सबसे मजबूत नींव है — राजेश अग्रवाल

रायपुर- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय 'शाला प्रवेश उत्सव' में सहभागिता कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नवीन शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत कराई तथा अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अपने सपनों को साकार कर सके।"

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, नियमित विद्यालय आने तथा जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन शैक्षणिक सत्र के अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

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समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राज्य एवं जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, उज्ज्वल भविष्य के लिए दी शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहब, सांसद कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

स्कूलों में बच्चों का हुआ अभिनंदन,प्राचार्य पुष्पा ने की संकुल के स्कूलों का निरीक्षण

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आरंग- मंगलवार को स्कूल खुलने से स्कूलों में रौनकता आई। प्रथम दिवस स्कूलों में साफ सफाई, मध्यान्ह भोजन और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता का विशेष रूप से ध्यान रखा गया। नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा,आरती और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा आरती कर और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। साथ ही मिठाई और चाकलेट वितरण कर बच्चों का उत्साह वर्धन किया। बच्चों में भी स्कूल खुलने से काफी उत्साह दिखा। वहीं भिलाई हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ नई प्राचार्य पुष्पा निषाद, समन्वयक जीतेंद्र शुक्ला, व्याख्याता सीएल साहू ने संकुल के  स्कूलों पहुंचकर स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसमें बच्चों व शिक्षको की उपस्थिति,साफ सफाई ,मध्यान्ह भोजन व अन्य भौतिक संसाधनों का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दी।इस अवसर पर संस्था प्रमुख सहित सभी शिक्षकों व बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति रही।



टॉप क्लास एजुकेशन योजना से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिल रही नई उड़ान, शिक्षा से सशक्त हो रहा भारत

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नई दिल्ली- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराकर समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहा है। मंत्रालय की टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम फॉर एससी स्टूडेंट्स के माध्यम से देशभर के हजारों छात्र-छात्राएं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इस योजना का उद्देश्य ऐसे मेधावी एससी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है, जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है। योजना के तहत छात्रों को ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, पुस्तकों, कंप्यूटर तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

वर्ष 2007-08 में शुरू हुई इस योजना का दायरा लगातार बढ़ा है। योजना के तहत लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या 2007-08 में 195 से बढ़कर 2025-26 में 4,742 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में योजना पर वार्षिक व्यय 2.17 करोड़ रुपये से बढ़कर 117.19 करोड़ रुपये हो गया है।

आज इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थी देश के प्रमुख संस्थानों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

तकनीकी क्षेत्र में सफलता की मिसाल

योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अमूल शतूरिया, जिन्होंने IIIT इलाहाबाद से सूचना प्रौद्योगिकी में बी.टेक की पढ़ाई की, योजना की सहायता से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर एक अग्रणी तकनीकी कंपनी में 56 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नियुक्त हुए। एक स्कूल बस चालक के पुत्र होने के बावजूद उनकी सफलता इस योजना की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाती है।

इसी प्रकार सुश्मिता पोथुराजू ने IIIT इलाहाबाद में अध्ययन के दौरान कोडिंग, इंटर्नशिप और नेतृत्व गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की और बाद में अमेज़न में 45 लाख रुपये वार्षिक पैकेज के साथ नियुक्ति प्राप्त की।

राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान

आईआईटी पालक्काड की सिविल इंजीनियरिंग छात्रा थम्बल्ला सिंधु ने योजना के सहयोग से पेशेवर शिक्षा प्राप्त की और बाद में देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी के रूप में चयनित हुईं।

वहीं, आईआईटी पालक्काड के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्नातक नलन एस ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में नियुक्ति प्राप्त की। वे अपने समुदाय के प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं और उनकी सफलता इस योजना की व्यापक सामाजिक प्रभावशीलता को दर्शाती है।

कानून, प्रबंधन और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी सफलता

बोग्गिति शाइनी जैस्पर ने भारतीय प्लांटेशन प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु से पीजीडीएम की पढ़ाई पूरी कर कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफल करियर बनाया। वहीं, ऋषभ भास्कर लाडे ने महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, मुंबई से बी.ए. एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी कर आईडीबीआई बैंक में सहायक विधि प्रबंधक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की।

रचनात्मकता, उद्यमिता और अनुसंधान को बढ़ावा

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद की छात्रा वार्तिका सोनकर ने योजना के सहयोग से डिजाइन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को निखारा और आज एक सफल ज्वेलरी डिजाइनर के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

वहीं, चिंतला संजय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग आधारित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं को आगे बढ़ाया है।

आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को मिल रही नई दिशा

यह योजना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और बेहतर भविष्य के प्रति आकांक्षा का भी निर्माण कर रही है। योजना के लाभार्थी विद्यार्थी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और पेशेवर विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच ही समावेशी और विकसित भारत की आधारशिला है। टॉप क्लास एजुकेशन योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो प्रतिभा, अवसर और दृढ़ संकल्प को जोड़कर देश के लिए नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रबंधकों, विधि विशेषज्ञों, उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को तैयार कर रही है।

योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रत्येक सफलता यह साबित करती है कि उचित अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह पहल विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित

विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान

रायपुर- श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें।

इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रमिक तथा उनके परिवारजन उपस्थित थे।

नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार

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रायपुर-प्राथमिक शाला नानदमाली में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के तहत अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह बदल गया है। शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसकी अभिभावकों ने सराहना की है।

विद्यालय की वर्तमान स्थिति:

सरगुजा जिले के नानदमाली प्राथमिक शाला में वर्तमान में 123 विद्यार्थी दर्ज हैं। पहले शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन नवीन पदस्थापना के बाद अब विद्यालय में कुल 5 शिक्षक उपलब्ध हैं:

  • प्रधान पाठक: पुष्पा बड़ा

  • सहायक शिक्षक: दीनानाथ कैवर्त

  • सहायक शिक्षक: पुष्पा पंडो

  • सहायक शिक्षक: हरी चंद पटेल

  • सहायक शिक्षक (युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया): नीलिमा सिंह

इन शिक्षकों के चलते प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों को पर्याप्त समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम:

पांचों शिक्षक अब बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने में सक्रिय हैं। कक्षाओं में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित होने से पढ़ाई अधिक व्यवस्थित और सरल ढंग से संचालित हो रही है। बच्चों को अब व्यक्तिगत मार्गदर्शन और पर्याप्त समय मिल रहा है।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया:

अभिभावकों ने शिक्षक पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की सराहना की है। उनका कहना है कि पहले कक्षाओं में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई अधूरी रह जाती थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से न केवल विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर सुधर रहा है, बल्कि पूरे गांव का शैक्षिक वातावरण सकारात्मक बन रहा है।

सरकारी पहल:

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों के अनुरूप हर विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निष्कर्ष:

युक्तियुक्तकरण के तहत शिक्षक पदस्थापना से नानदमाली शाला में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आया है और यह ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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