Media24Media.com: #NEET

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #NEET. Show all posts
Showing posts with label #NEET. Show all posts

परीक्षा में गड़बड़ी रोकने की कवायद: NTA में 600 एक्सपर्ट की छुट्टी, अब 4 स्तर पर जांचे जाएंगे क्वेश्चन पेपर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- देश की सबसे बड़ी प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़ा बदलाव किया गया है। परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए NTA की परीक्षा टीम में व्यापक फेरबदल किया गया है। इसके तहत करीब 600 विशेषज्ञों को परीक्षा टीम से हटाया गया है और नए विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। साथ ही, अब प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चार स्तरों पर जांच की व्यवस्था लागू की जाएगी।

शिक्षा मंत्रालय की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, इन सुधारों का उद्देश्य प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा के सुरक्षित संचालन तक पूरी प्रक्रिया में खामियों और संभावित गड़बड़ियों को कम करना है।

600 विशेषज्ञों को हटाया गया, नई टीम तैयार

NTA की परीक्षा प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव विशेषज्ञों की टीम को लेकर किया गया है। एजेंसी ने करीब 600 विशेषज्ञों को परीक्षा टीम से हटा दिया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की है।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब NTA से जुड़ी कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता, पेपर लीक और परीक्षा संचालन को लेकर सवाल उठे हैं। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल विशेषज्ञों और टीम का नए सिरे से गठन करके जवाबदेही तथा गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत किया जा सकता है।

अब चार स्तर पर होगी क्वेश्चन पेपर की जांच

NTA की नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव चार-स्तरीय प्रश्नपत्र जांच प्रणाली है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा में इस्तेमाल होने से पहले प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषाई, अनुवाद संबंधी या अन्य किसी तरह की गंभीर गलती न रह जाए।

नई व्यवस्था में प्रश्नपत्र को एक ही स्तर पर जांचने के बजाय कई स्तरों पर उसकी समीक्षा की जाएगी। इससे किसी एक स्तर पर हुई चूक के बावजूद अगले स्तर पर उसे पकड़ने की संभावना बढ़ेगी। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था प्रश्नपत्रों की scrutiny को मजबूत करने और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लाई जा रही है।

20-25 नए अधिकारी भी होंगे शामिल

विशेषज्ञों में बदलाव के साथ NTA में प्रशासनिक स्तर पर भी नई नियुक्तियां की जा रही हैं। मंत्रालय के मुताबिक, अगले दो से तीन सप्ताह में करीब 20 से 25 अधिकारियों को NTA में शामिल किया जाना है।

इसके अलावा एजेंसी में आगे और कर्मचारियों को शामिल करने की योजना की भी समीक्षा की गई है। इसका उद्देश्य NTA की प्रशासनिक और परीक्षा संचालन क्षमता को मजबूत करना है।

NTA के दफ्तर भी होंगे शिफ्ट

सिर्फ परीक्षा टीम में बदलाव ही नहीं, बल्कि NTA के कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने की तैयारी है। मंत्रालय के मुताबिक, NTA के कार्यालयों को नए परिसरों में जल्द से जल्द स्थानांतरित किया जाएगा।

नए परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के जरिए मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी, प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय प्रक्रियाओं की सुरक्षा बढ़ाना है।

आखिर क्यों पड़ी NTA में इतने बड़े बदलाव की जरूरत?

पिछले कुछ समय से NTA की कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठते रहे हैं। खास तौर पर NEET-UG और UGC-NET जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर डाला।

UGC-NET के जून 2026 सत्र में English, Commerce और Sociology के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, भाषा और अनुवाद संबंधी कई खामियां सामने आने के बाद इन विषयों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया गया है। इन तीन विषयों की पुनर्परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि बाकी 84 विषयों की परीक्षा प्रभावित नहीं हुई है।

प्रश्नपत्रों की गलतियों ने बढ़ाई चिंता

UGC-NET विवाद ने यह सवाल खड़ा किया कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार और जांचने की प्रक्रिया कितनी मजबूत है। विशेषज्ञ समिति की जांच में संबंधित प्रश्नपत्रों में कई प्रकार की गलतियां सामने आने की बात कही गई।

इसी पृष्ठभूमि में अब NTA प्रश्नपत्रों की जांच को कई स्तरों पर करने जा रहा है। चार-स्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले संभावित गलतियों और कमजोरियों की पहचान की जा सके।

छात्रों का भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती

NTA के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा वापस हासिल करना भी है। NEET-UG, UGC-NET और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की एक छोटी सी गलती भी लाखों उम्मीदवारों के परिणाम और भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

चार स्तर की जांच, विशेषज्ञों की नई टीम, अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति और CISF सुरक्षा जैसे कदम इसी दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

आगे क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद NTA की परीक्षा प्रणाली में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

  • प्रश्नपत्र तैयार करने वाली विशेषज्ञ टीम में बदलाव होगा।

  • करीब 600 पुराने विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञ शामिल किए जा रहे हैं।

  • प्रश्नपत्रों की चार स्तरों पर जांच होगी।

  • 20-25 नए अधिकारियों को जल्द शामिल किया जाएगा।

  • NTA के कार्यालयों को नए परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा।

  • नए कार्यालयों में CISF की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी।

  • परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील प्रक्रियाओं की निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।

क्या इससे पेपर लीक और गलतियां पूरी तरह रुक जाएंगी?

सरकार के इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, लेकिन केवल प्रशासनिक बदलावों से यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में हर तरह की गड़बड़ी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

असल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चार-स्तरीय जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है, विशेषज्ञों की नई टीम कितनी सक्षम होती है और प्रश्नपत्र की गोपनीयता से लेकर परीक्षा केंद्र तक पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का कितना सख्ती से पालन किया जाता है।

निष्कर्ष

NTA में 600 विशेषज्ञों को हटाने और चार-स्तरीय प्रश्नपत्र जांच व्यवस्था लागू करने का फैसला परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

अब सरकार और NTA की जिम्मेदारी है कि इन सुधारों को सिर्फ घोषणा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि भविष्य में प्रश्नपत्र सही, सुरक्षित और समय पर उपलब्ध हों तथा परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न्यूनतम हो।

'छात्रों का भविष्य सर्वोपरि'... धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, अगले साल से 'नीट' में बड़ा बदलाव

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों का एक भावुक पत्र साझा कर अपने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि वे नहीं चाहते कि राजनीतिक गतिरोध के कारण देश के छात्रों का भविष्य खराब हो।

इस्तीफे की 3 सबसे बड़ी वजहें

* छात्रों को कानूनी पेचीदगियों से बचाना: प्रधान ने लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश का कोई भी विद्यार्थी कानूनी विवादों और अदालती चक्करों में उलझे। उनका मकसद है कि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें।

* देश विरोधी ताकतों को रोकने का संकल्प: पत्र के अनुसार, जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो हालात बने हैं, उसका देश विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना सही समझा।

* आहत महसूस करना: उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।


धर्मेंद्र प्रधान के पत्र की मुख्य बातें

* 4 दशकों का नाता: उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से छात्र राजनीति, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं।

* CBI जांच और बड़ा फैसला: उन्होंने माना कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं हुई थीं, जिसकी जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही ऐलान किया कि अगले साल से नीट परीक्षा पूरी तरह CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में होगी।

* परीक्षा माफिया पर वार: प्रधान ने कहा कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कुछ लोगों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

* पीएम का आभार: उन्होंने मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मोदी और कैबिनेट के सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वे आने वाले समय में प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित रखेंगे।

https://www.facebook.com/share/r/19NFQKEoiJ/

रायपुर के पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में 20 एमबीबीएस सीटें बढ़ीं, कुल संख्या हुई 250

No comments Document Thumbnail

रायपुर- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह कॉलेज पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध है।

MARB की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी अनुमति पत्र (Letter of Permission) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की एमबीबीएस सीटों की संख्या 230 से बढ़ाकर 250कर दी गई है, यानी कुल 20 नई सीटों की बढ़ोतरी हुई है।

स्थापना से अब तक सीटों में वृद्धि का इतिहास

वर्ष 1963 में 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने समय-समय पर अपनी प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रारंभिक 60 सीटों से बढ़कर यह संख्या 100, वर्ष 2009 में 150, वर्ष 2019 में 180, वर्ष 2023 में 230 तथा अब एनएमसी की नवीनतम स्वीकृति के पश्चात 250 सीटों तक पहुँच गई है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने ही राज्य में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

No comments Document Thumbnail

कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

गोली मारकर हत्या, आरी से किए टुकड़े, बेटे की हैवानियत से दहला लखनऊ, पढ़े पूरी खबर

No comments Document Thumbnail

 लखनऊ में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिया। आरोपी की योजना शव को गोमती नदी में फेंकने की थी।


पुलिस के अनुसार, आशियाना थाना क्षेत्र में रहने वाले अक्षत पर उसके पिता द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी का दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी दो बार परीक्षा दे चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था। बताया जा रहा है कि इसी तनाव और विवाद के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

लाइसेंसी राइफल से मारी गोली

20 फरवरी की सुबह पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई। गुस्से में अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल उठाई और उनके सिर में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

शव के टुकड़े कर ड्रम में भरा

हत्या के बाद आरोपी ने शव को घसीटकर नीचे लाया। पहले नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने के कारण उसने आरी खरीदकर शव के टुकड़े कर दिए। हाथ-पैर अलग-अलग जगह फेंके गए, जबकि धड़ को नीले ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट भर दिया गया ताकि बदबू न फैले और किसी को शक न हो।

सबूत मिटाने की कोशिश

खून से सने बिस्तर, चादर और तकिए को आरोपी ने अमौसी इलाके में ले जाकर जला दिया। घटना के समय उसकी छोटी बहन (11वीं की छात्रा) घर में ही थी। गोली की आवाज सुनकर बाहर आने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चार दिन तक कमरे में बंद रखा।

पड़ोसियों के शक से खुला राज

चार दिन बाद पड़ोसियों को घर से आ रही दुर्गंध पर शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब घर पहुंची तो खून के निशान और संदिग्ध नीला ड्रम मिला। ड्रम खोलते ही अंदर से धड़ बरामद हुआ, जिसे देखकर पुलिस भी सन्न रह गई।

पूछताछ में आरोपी टूट गया और पूरे अपराध का खुलासा कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बहन सदमे में है और उसकी काउंसलिंग कराई जा रही है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.