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'छात्रों का भविष्य सर्वोपरि'... धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, अगले साल से 'नीट' में बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली- नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों का एक भावुक पत्र साझा कर अपने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि वे नहीं चाहते कि राजनीतिक गतिरोध के कारण देश के छात्रों का भविष्य खराब हो।

इस्तीफे की 3 सबसे बड़ी वजहें

* छात्रों को कानूनी पेचीदगियों से बचाना: प्रधान ने लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश का कोई भी विद्यार्थी कानूनी विवादों और अदालती चक्करों में उलझे। उनका मकसद है कि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें।

* देश विरोधी ताकतों को रोकने का संकल्प: पत्र के अनुसार, जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो हालात बने हैं, उसका देश विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना सही समझा।

* आहत महसूस करना: उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।


धर्मेंद्र प्रधान के पत्र की मुख्य बातें

* 4 दशकों का नाता: उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से छात्र राजनीति, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं।

* CBI जांच और बड़ा फैसला: उन्होंने माना कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं हुई थीं, जिसकी जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही ऐलान किया कि अगले साल से नीट परीक्षा पूरी तरह CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में होगी।

* परीक्षा माफिया पर वार: प्रधान ने कहा कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कुछ लोगों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

* पीएम का आभार: उन्होंने मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मोदी और कैबिनेट के सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वे आने वाले समय में प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित रखेंगे।

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रायपुर के पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में 20 एमबीबीएस सीटें बढ़ीं, कुल संख्या हुई 250

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रायपुर- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह कॉलेज पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध है।

MARB की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी अनुमति पत्र (Letter of Permission) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की एमबीबीएस सीटों की संख्या 230 से बढ़ाकर 250कर दी गई है, यानी कुल 20 नई सीटों की बढ़ोतरी हुई है।

स्थापना से अब तक सीटों में वृद्धि का इतिहास

वर्ष 1963 में 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने समय-समय पर अपनी प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रारंभिक 60 सीटों से बढ़कर यह संख्या 100, वर्ष 2009 में 150, वर्ष 2019 में 180, वर्ष 2023 में 230 तथा अब एनएमसी की नवीनतम स्वीकृति के पश्चात 250 सीटों तक पहुँच गई है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने ही राज्य में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

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कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

गोली मारकर हत्या, आरी से किए टुकड़े, बेटे की हैवानियत से दहला लखनऊ, पढ़े पूरी खबर

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 लखनऊ में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटे ने अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिया। आरोपी की योजना शव को गोमती नदी में फेंकने की थी।


पुलिस के अनुसार, आशियाना थाना क्षेत्र में रहने वाले अक्षत पर उसके पिता द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी का दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी दो बार परीक्षा दे चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था। बताया जा रहा है कि इसी तनाव और विवाद के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

लाइसेंसी राइफल से मारी गोली

20 फरवरी की सुबह पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई। गुस्से में अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल उठाई और उनके सिर में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

शव के टुकड़े कर ड्रम में भरा

हत्या के बाद आरोपी ने शव को घसीटकर नीचे लाया। पहले नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने के कारण उसने आरी खरीदकर शव के टुकड़े कर दिए। हाथ-पैर अलग-अलग जगह फेंके गए, जबकि धड़ को नीले ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट भर दिया गया ताकि बदबू न फैले और किसी को शक न हो।

सबूत मिटाने की कोशिश

खून से सने बिस्तर, चादर और तकिए को आरोपी ने अमौसी इलाके में ले जाकर जला दिया। घटना के समय उसकी छोटी बहन (11वीं की छात्रा) घर में ही थी। गोली की आवाज सुनकर बाहर आने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चार दिन तक कमरे में बंद रखा।

पड़ोसियों के शक से खुला राज

चार दिन बाद पड़ोसियों को घर से आ रही दुर्गंध पर शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब घर पहुंची तो खून के निशान और संदिग्ध नीला ड्रम मिला। ड्रम खोलते ही अंदर से धड़ बरामद हुआ, जिसे देखकर पुलिस भी सन्न रह गई।

पूछताछ में आरोपी टूट गया और पूरे अपराध का खुलासा कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बहन सदमे में है और उसकी काउंसलिंग कराई जा रही है।

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