Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सख्ती, 40 नगरीय निकायों को नोटिस; तीन दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम

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छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सख्ती, 40 नगरीय निकायों को नोटिस; तीन दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम

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अधूरे कार्यों की जानकारी पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश, लापरवाही मिलने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों की धीमी प्रगति को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर प्रदेश के 40 नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित निकायों को तीन दिन के भीतर अधूरे विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति और प्रगति का पूरा विवरण निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।

तीन दिन में देनी होगी पूरी जानकारी

विभाग ने नोटिस के माध्यम से संबंधित नगरीय निकायों से राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत स्वीकृत और निर्माणाधीन विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी है। निकायों को बताना होगा कि कौन-सा कार्य किस चरण में है, अब तक कितना काम पूरा हुआ है और किन परियोजनाओं का काम अभी लंबित है।

इसके साथ ही अधूरे कार्यों का विवरण भी पोर्टल पर अद्यतन करना होगा। विभाग ने इसके लिए तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। निर्धारित समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने या कार्यों में अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी गई है।

बार-बार निर्देश के बाद भी प्रगति नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, विभाग की ओर से पहले भी नगरीय निकायों को विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कुछ निकायों में कार्यों की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। इसके बाद विभाग ने 40 निकायों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने की कार्रवाई की।

विभाग की चिंता उन परियोजनाओं को लेकर है, जिनके पूरा होने से शहरों और कस्बों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। विकास कार्यों में देरी का असर स्थानीय स्तर पर निर्माण, बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर पड़ सकता है।

करोड़ों की परियोजनाओं की प्रगति पर नजर

प्रदेश के नगरीय निकायों में अलग-अलग योजनाओं के तहत विकास कार्य स्वीकृत किए जाते हैं। इनमें निर्माणाधीन परियोजनाओं की स्थिति की नियमित निगरानी और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

विभाग चाहता है कि स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो और लंबित परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में सभी 40 निकायों के नाम, प्रत्येक परियोजना की लागत और अलग-अलग कार्यों में हुई देरी का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।

पोर्टल पर अपडेट से बढ़ेगी निगरानी

विकास कार्यों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होने से विभाग को परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन कार्यों में तेजी की जरूरत है और कहां प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं आ रही हैं।

तीन दिन की समय-सीमा के तहत निकायों को लंबित कार्यों का विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद विभाग उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकता है।

लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी

विभाग ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी और निर्धारित समय-सीमा में जानकारी अपडेट नहीं करने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इस कार्रवाई का उद्देश्य लंबित परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करना, निगरानी को मजबूत बनाना और विकास कार्यों को गति देना है।

आम नागरिकों के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि लंबित परियोजनाओं की निगरानी प्रभावी होती है और काम समय पर पूरे किए जाते हैं, तो शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को लाभ मिल सकता है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए संबंधित निकायों की प्रगति और विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रखनी होगी।


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