Media24Media.com: धमतरी-कांकेर सीमा क्षेत्र में तेंदुए का हमला: कुछ ही घंटों में 8 ग्रामीण घायल, छह माह की गर्भवती महिला भी चपेट में

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धमतरी-कांकेर सीमा क्षेत्र में तेंदुए का हमला: कुछ ही घंटों में 8 ग्रामीण घायल, छह माह की गर्भवती महिला भी चपेट में

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कारीपानी और बस्तर बुढ़रा गांव में अलग-अलग घटनाओं से दहशत; वन विभाग ने ड्रोन से निगरानी और पिंजरे से पकड़ने की कार्रवाई शुरू की

धमतरी- छत्तीसगढ़ के धमतरी और कोंडागांव जिले की सीमा से लगे वनांचल क्षेत्र में तेंदुए के हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। 14 और 15 अक्टूबर 2026 की रात तथा सुबह के बीच कुछ ही घंटों के अंतराल में दो अलग-अलग गांवों में हुए हमलों में आठ लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। घायलों में छह माह की गर्भवती महिला भी शामिल है। लगातार हुई इन घटनाओं ने जंगल से लगे गांवों में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पहली घटना धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के कारीपानी गांव में बुधवार रात करीब 10 बजे हुई, जबकि दूसरी घटना गुरुवार सुबह लगभग 5 बजे कोंडागांव जिले के बस्तर बुढ़रा गांव में सामने आई। वन विभाग की टीमें तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने और उसे पकड़ने के लिए जुट गईं। शुरुआती आकलन में दोनों घटनाओं में एक ही तेंदुए के शामिल होने की आशंका जताई गई, हालांकि उसकी गतिविधियों की पुष्टि के लिए निगरानी जारी थी।

कारीपानी गांव में बैल पर हमले के बाद ग्रामीणों को बनाया निशाना

जानकारी के मुताबिक, सीतानदी वन क्षेत्र के कारीपानी गांव में रात के समय एक तेंदुआ पहुंचा और उसने एक बैल पर हमला कर दिया। इस दौरान हुई हलचल और शोर सुनकर गांव की 60 वर्षीय उर्मिला बाई मरकाम घर से बाहर निकलीं। तभी तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया।

उर्मिला बाई को बचाने के लिए उनके भाई सुंदर लाल नेताम आगे आए, लेकिन वे भी हमले में घायल हो गए। घटनास्थल पर पहुंची एक पड़ोसी महिला मनाई बाई भी तेंदुए के हमले की चपेट में आ गईं। इस घटना में तीन ग्रामीण घायल हुए।

घायलों को उपचार के लिए नगरी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, उर्मिला बाई और सुंदर लाल नेताम की स्थिति को देखते हुए उन्हें आगे के इलाज के लिए धमतरी जिला अस्पताल रेफर किया गया, जबकि मनाई बाई का उपचार नगरी में जारी रहा।

बस्तर बुढ़रा गांव में सुबह-सुबह हमला, गर्भवती महिला घायल

पहली घटना के कुछ घंटों बाद कोंडागांव जिले के बस्तर बुढ़रा गांव में तेंदुए के हमले की दूसरी घटना सामने आई। बताया गया कि सुबह करीब पांच बजे एक परिवार अपने आंगन में आग के पास बैठकर मक्का निकालने का काम कर रहा था। इसी दौरान तेंदुए ने वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।

इस घटना में पांच लोग घायल हुए। इनमें 34 वर्षीय रामशिला मंडावी भी शामिल हैं, जो छह माह की गर्भवती बताई गई हैं। इसके अलावा देवलाल वट्टी (66), दुआरूराम मंडावी (44) और लता मंडावी (40) के घायल होने की जानकारी सामने आई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए कांकेर रेफर किया गया।

गर्भवती महिला के घायल होने की खबर ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गर्भस्थ शिशु की स्थिति के बारे में विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं थी।

क्या दोनों हमलों में एक ही तेंदुआ शामिल था?

वन विभाग के अधिकारियों के शुरुआती आकलन के अनुसार, दोनों गांवों की भौगोलिक निकटता और तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए आशंका थी कि दोनों घटनाओं में एक ही तेंदुआ शामिल हो सकता है। बताया गया कि हमलों से पहले तेंदुए को बहिगांव-कारीपानी क्षेत्र में देखा गया था। बहिगांव के मक्का खेत में उसकी मौजूदगी और सड़क पार करते हुए दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई।

हालांकि, केवल आसपास के क्षेत्र में दिखाई देने के आधार पर दोनों हमलों में एक ही जानवर की भूमिका को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसके लिए वन विभाग की ट्रैकिंग और अन्य साक्ष्यों का आकलन जरूरी है।

वन विभाग की कार्रवाई: ड्रोन से निगरानी और पिंजरे की व्यवस्था

घटनाओं के बाद वन विभाग की टीमों ने प्रभावित क्षेत्र में तलाश तेज की। रिपोर्टों के मुताबिक, तेंदुए को पकड़ने के लिए चारे वाला पिंजरा लगाया गया और केशकाल वन मंडल तथा उदंती-सीतानदी क्षेत्र की टीमें उसकी गतिविधियों पर नजर रखने में जुटीं। निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।

वनांचल में तेंदुए की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों की सुरक्षा प्राथमिक चिंता बन गई। ऐसी परिस्थितियों में वन विभाग के लिए जरूरी होता है कि वह तेंदुए की गतिविधियों का पता लगाने के साथ-साथ ग्रामीणों को समय पर सावधान करे और जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाके में आवाजाही को नियंत्रित करे।

जंगल से लगे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती

धमतरी और कोंडागांव के वनांचल क्षेत्रों में जंगल और आबादी के बीच निकटता के कारण वन्यजीवों का गांवों के आसपास पहुंचना चिंता का विषय बन सकता है। रात में मवेशियों पर हमला, खेतों के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी और ग्रामीणों का अचानक उनके सामने आ जाना ऐसी परिस्थितियां हैं जिनमें जान-माल का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के सामान्य सुरक्षा सुझावों के अनुसार, ग्रामीणों को तेंदुआ दिखाई देने पर उसके पास जाने, उसे घेरने या भगाने की कोशिश करने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर नहीं भेजना चाहिए तथा रात के समय पर्याप्त रोशनी और सतर्कता रखनी चाहिए। वन्यजीव दिखने या हमले की स्थिति में तुरंत वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।

ग्रामीणों की सुरक्षा और निगरानी पर जोर

लगातार हुई दोनों घटनाओं ने प्रभावित गांवों में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया है। घायलों का उपचार, तेंदुए की गतिविधियों की निगरानी और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के प्रयास इस समय सबसे अहम हैं। साथ ही, ग्रामीणों तक सही और समय पर सूचना पहुंचाना भी जरूरी है, ताकि अफवाहों के बजाय प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर सुरक्षा कदम उठाए जा सकें।

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