Media24Media.com: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटने पर कार्रवाई, प्राचार्य महेश प्रजापति हटाए गए

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटने पर कार्रवाई, प्राचार्य महेश प्रजापति हटाए गए

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बलरामपुर- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं बांटे जाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों की शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को उनके पद से हटा दिया है। मामले की विभागीय जांच अभी जारी है।

यह पूरा मामला रघुनाथपुर गांव स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का है। बताया गया है कि 26 अक्टूबर 2026 को स्कूल में मध्य विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच कुछ पुस्तिकाएं बांटी गई थीं। इन पुस्तिकाओं में आसाराम से जुड़ी सामग्री होने की बात सामने आने के बाद अभिभावकों ने आपत्ति जताई।

बच्चों के घर पुस्तिकाएं पहुंचने के बाद खुला मामला

जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों को ‘संस्कार सरिता’, ‘व्रत नियम’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ नाम की पुस्तिकाएं दी गई थीं। अभिभावकों को इस बारे में तब पता चला, जब बच्चे पुस्तिकाएं लेकर घर पहुंचे।

इसके बाद कुछ अभिभावकों ने सवाल उठाया कि सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को ऐसी सामग्री किसकी अनुमति से बांटी गई। उनका आरोप था कि पुस्तिकाएं आसाराम से जुड़े लोगों के स्कूल पहुंचने के बाद प्राचार्य की मौजूदगी में वितरित की गईं।

कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों से पुस्तिकाओं की सामग्री पढ़ने और उसके आधार पर परीक्षा या टेस्ट की तैयारी करने को कहा गया था। हालांकि, इस संबंध में अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अभिभावकों ने शिक्षा विभाग में की शिकायत

मामला सामने आने के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की और स्कूल में बाहरी लोगों द्वारा सामग्री बांटे जाने पर सवाल उठाए।

अभिभावकों का कहना था कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकों और अन्य सामग्री की पहले जांच होनी चाहिए। किसी भी बाहरी संगठन या व्यक्ति को बिना उचित अनुमति के बच्चों के बीच सामग्री वितरित करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

DEO ने दिए जांच के निर्देश, प्राचार्य पर हुई कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने वाड्रफनगर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

जांच अधिकारी ने स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राचार्य महेश प्रजापति को स्कूल से हटा दिया गया और उन्हें कलेक्टर कार्यालय से संबद्ध किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।

प्राचार्य ने अपने बचाव में क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्राचार्य महेश प्रजापति ने अपने बचाव में कहा कि उन्हें पुस्तिकाओं की वास्तविक सामग्री की जानकारी नहीं थी। उनका कहना था कि स्कूल आए लोगों ने केवल किताबें बांटने की बात कही थी और उन्होंने इसी आधार पर अनुमति दी थी।

इसलिए जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में पुस्तिकाएं किस संगठन या व्यक्तियों द्वारा लाई गई थीं, उन्हें बांटने की अनुमति किसने दी और क्या विद्यार्थियों को वास्तव में इनके आधार पर टेस्ट देने के लिए कहा गया था।

जांच में किन बिंदुओं पर होगी पड़ताल?

शिक्षा विभाग की जांच में मुख्य रूप से इन सवालों पर तथ्य जुटाए जाने हैं:

  1. स्कूल में पुस्तिकाएं बांटने वाले लोग कौन थे और वे किस संगठन से जुड़े थे?

  2. पुस्तिकाएं स्कूल परिसर में किसकी अनुमति से वितरित की गईं?

  3. क्या प्राचार्य को पुस्तिकाओं की सामग्री की जानकारी थी?

  4. क्या विद्यार्थियों को इन पुस्तिकाओं को पढ़कर टेस्ट देने के निर्देश दिए गए थे?

  5. क्या स्कूल में बाहरी सामग्री बांटने से संबंधित विभागीय नियमों का पालन किया गया?

सरकारी स्कूलों में बाहरी सामग्री के वितरण पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों और संगठनों की गतिविधियों तथा विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकों की जांच की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री निर्धारित शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों के अनुरूप हो। किसी भी बाहरी सामग्री के वितरण से पहले उसकी विषयवस्तु और अनुमति की जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल प्राचार्य को प्रारंभिक जांच के आधार पर पद से हटाया गया है, लेकिन पूरे मामले की अंतिम जिम्मेदारी और पुस्तिकाओं के वितरण से जुड़े तथ्यों का निर्धारण विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा।


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