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सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और उपस्थिति की गुणवत्ता बढ़ी, निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग

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महासमुंद- पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में समय से पहले छुट्टी दिए जाने का मामला सामने आने के बाद सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय संचालन की व्यवस्था को बेहतर बताते हुए चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

कोकडिया का कहना है कि पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के अनेक निजी स्कूलों में निर्धारित समय से पहले छुट्टी कर दी गई, जबकि सरकारी स्कूल पूरे निर्धारित समय तक संचालित होते रहे। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरणों से सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में अंतर स्पष्ट होता है।

‘ऑनलाइन उपस्थिति से सरकारी स्कूलों में बढ़ी जवाबदेही’

गेंदलाल कोकडिया के मुताबिक सरकारी स्कूलों में वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन में जवाबदेही बढ़ी है। उनका दावा है कि ऑनलाइन उपस्थिति के कारण शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचने और पूरे समय उपस्थित रहने के प्रति अधिक गंभीर हुए हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इसी तरह की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था निजी स्कूलों में भी अनिवार्य की जाए, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय के संचालन की नियमित निगरानी हो सके।

‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था लागू हो’

कोकडिया ने ‘एक देश, एक शिक्षा’ की तर्ज पर देशभर में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, शिक्षण सामग्री, निशुल्क गणवेश, मध्याह्न भोजन सहित विद्यार्थियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर बताते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और अभिभावकों को कई सुविधाएं बिना शुल्क उपलब्ध होती हैं।

निजी स्कूलों में सुरक्षा मानकों पर भी उठाए सवाल

गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाते। उनके अनुसार, कई बार स्कूली बच्चों को वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने की स्थिति देखने को मिलती है।

उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना है कि एक ही दोपहिया वाहन पर चार-पांच बच्चों को बैठाकर स्कूल लाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

फीस और परिवहन खर्च को लेकर भी उठाया मुद्दा

कोकडिया ने निजी स्कूलों में पढ़ाई और परिवहन पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, निजी स्कूलों में पढ़ाई की फीस करीब 6 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक और वाहन शुल्क करीब 8 हजार से 50 हजार रुपये तक हो सकता है। इसके विपरीत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कई मूलभूत सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति, विद्यालय समय के पालन और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

हालांकि, निजी स्कूलों से जुड़े इन आरोपों और दावों पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

जयपुर में CJP टीम पर हमले का मामला: आशुतोष रांका पर मारपीट का आरोप, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

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जयपुर- राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को सरकारी स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में हुई इस घटना में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत पार्टी के कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों की ओर से घटना को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची थी CJP टीम

जानकारी के मुताबिक, CJP की टीम अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत जयपुर के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने पहुंची थी। रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल का निरीक्षण भी इसी अभियान का हिस्सा था।

CJP की ओर से स्कूल की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों की कक्षाएं वैकल्पिक स्थान पर संचालित होने की बात भी सामने आई है।

लेकिन टीम के गांव पहुंचते ही स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला कहासुनी से बढ़कर धक्का-मुक्की और कथित मारपीट तक पहुंच गया।

CJP का आरोप- बीजेपी समर्थकों ने बनाया निशाना

घटना के बाद CJP ने आरोप लगाया कि उनकी टीम पर पहले से योजनाबद्ध तरीके से हमला किया गया। पार्टी नेताओं का दावा है कि हमला करने वाले सामान्य ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी समर्थक लोग थे।

CJP नेताओं के मुताबिक, कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, उन्हें गांव से बाहर खदेड़ा गया और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं।

CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर पाई।

ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए पूरी घटना की अलग तस्वीर पेश की है। ग्रामीणों का कहना है कि CJP की टीम जिस तरह गांव में पहुंची और गतिविधियां कर रही थी, उससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हुई।

ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया कि CJP कार्यकर्ताओं के पास हथियार मौजूद थे और गांव में उन्होंने कथित तौर पर ‘देश विरोधी’ नारे लगाए। हालांकि, ये ग्रामीणों के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

गाड़ियों के शीशे खुद तोड़ने का भी दावा

इस विवाद में ग्रामीणों ने CJP पर ही एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि टीम के सदस्यों ने कथित तौर पर अपनी ही गाड़ियों के शीशे खुद तोड़े, ताकि घटना को हमले के रूप में पेश किया जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके ऊपर हमला करने या वाहनों में तोड़फोड़ करने के आरोप सही नहीं हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और घटना से जुड़े वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

CJP ने बताई स्कूल की बदहाल स्थिति

विवाद के बीच CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल से टकराव करना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की स्थिति को सामने लाना है।

पार्टी की टीम जिस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी, उसकी हालत को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे। रिपोर्टों में स्कूल भवन के असुरक्षित होने और वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई कराए जाने की बात सामने आई है। CJP का दावा है कि वह इसी तरह के स्कूलों की स्थिति को जनता और सरकार के सामने लाने के लिए अभियान चला रही है।

आशुतोष रांका ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

घटना के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान सरकार और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी निशाना साधा। CJP की ओर से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रांका ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कथित हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है। CJP ने मांग पूरी नहीं होने पर राजस्थान में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

घटना के बाद मामला सिर्फ स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा। CJP नेताओं ने बीजेपी पर सीधे आरोप लगाए, जबकि ग्रामीणों की ओर से CJP की गतिविधियों और उनके दावों पर सवाल उठाए गए।

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी घटना को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और CJP कार्यकर्ताओं पर कथित हमले की आलोचना की।

इस तरह सरकारी स्कूल के निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानून-व्यवस्था के मुद्दे में बदलता दिखाई दे रहा है।

आखिर विवाद की असली वजह क्या है?

पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

CJP का पक्ष:

  • टीम स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी।

  • ग्रामीणों ने उन्हें रोककर कथित तौर पर मारपीट की।

  • वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव किया गया।

  • हमले के पीछे बीजेपी समर्थकों के होने का आरोप है।

  • पुलिस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

ग्रामीणों का पक्ष:

  • CJP की टीम के आने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया।

  • ग्रामीणों ने CJP के कार्यकर्ताओं पर हथियार रखने और कथित ‘देश विरोधी’ नारे लगाने का आरोप लगाया।

  • ग्रामीणों ने CJP के वाहनों के शीशे खुद तोड़े जाने का दावा किया।

  • बीजेपी से जुड़े होने के आरोपों को ग्रामीणों ने खारिज किया है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच और उपलब्ध वीडियो/अन्य साक्ष्यों से ही स्पष्ट होंगी।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

जयपुर की इस घटना ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, राजनीतिक संगठनों के स्कूल निरीक्षण और ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक टकराव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP टीम पर वास्तव में किसने हमला किया, वाहनों में तोड़फोड़ किसने की और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हथियार व कथित नारेबाजी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच निष्पक्ष जांच से ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

https://youtube.com/shorts/i5VV-v__PeQ?feature=share

निष्कर्ष

जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में CJP टीम के स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आशुतोष रांका और CJP ने बीजेपी समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए CJP कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एक तरफ CJP ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बता रहे हैं। ऐसे में अब पुलिस और प्रशासन की जांच अहम होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शुक्रवार को गांव में वास्तव में क्या हुआ था।

शिक्षकों की कमी से छात्राओं का फूटा आक्रोश, स्कूल में जड़ा ताला

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पांच प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित, छात्राओं के साथ अभिभावक भी उतरे विरोध में

धमतरी- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बारना स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। लंबे समय से पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया।

पांच विषयों की पढ़ाई पर संकट

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, रसायन, भूगोल और सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं और उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।

विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा और भविष्य की तैयारी के लिए विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षकों के अभाव में उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने और कठिन विषयों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश में भी प्रदर्शन पर डटे रहे विद्यार्थी और ग्रामीण

शिक्षकों की मांग को लेकर विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण स्कूल परिसर पहुंचे। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

कई बार दे चुके हैं आवेदन

ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पहले भी संबंधित अधिकारियों को आवेदन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो विद्यार्थियों और अभिभावकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की है।

पढ़ाई के साथ भविष्य की चिंता

विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक नहीं होने का असर केवल वर्तमान पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर भी पड़ रहा है। खासकर उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी गंभीर समस्या बन गई है।

अभिभावकों ने भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में यदि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो बच्चों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होना स्वाभाविक है।

प्रशासन से तत्काल नियुक्ति की मांग

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल में खाली पदों पर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पढ़ाई सुचारु करने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक समस्या को लेकर उनका विरोध जारी रह सकता है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के कई हिस्सों में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों और ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं।

निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

राजधानी के बड़े निजी स्कूलों को टक्कर दिया, प्रदेश का प्रयास विद्यालय

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प्रयास विद्यालयों के विद्यार्थियों का सीजी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन

10वीं एवं 12वीं में शत-प्रतिशत सफलता, मेरिट सूची में उल्लेखनीय स्थान

10वीं की छात्रा कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया

प्रयास विद्यालयों के 13 विद्यार्थियों ने टॉप-10 में बनाई जगह

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री रामविचार नेताम ने दी बधाई और शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़ के ‘प्रयास’ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों में रचा उत्कृष्टता का इतिहास: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

रायपुर- छत्तीसगढ़ के आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग  एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा संचालित ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों ने इस वर्ष छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम की है। विभाग के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन में सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परिणाम देते हुए बड़े निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दी है। प्रयास विद्यालयों के 13 बच्चों ने सीजी बोर्ड परीक्षा के टॉप-10 में जगह बनाने में सफलता हासिल की है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल 17 प्रयास विद्यालय संचालित है। जिसमें नक्सल प्रभावित बच्चों से लेकर सभी वर्गों के बच्चें अध्ययनरत है। प्रयास आवासीय विद्यालय के माध्यम से बच्चों को एक नई हौसला मिला है, जो उनके सपनों को साकार करने में सार्थक हो रही है। बतादें कि प्रयास विद्यालय के माध्यम से बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा दी जाति है। साथ ही उच्चस्तर के कोचिंग संस्थाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं एनआईटी, आईआईटी, नीट, जेईई एवं अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।

प्रयास विद्यालय के इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रयास आवासीय विद्यालयों की अवधारणा की सार्थकता को प्रमाणित करती है। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु किए गए सतत प्रयास की सराहना की हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि राज्य के लिए गौरव का विषय है तथा यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रयास विद्यालय के बच्चों ने सीजी बोर्ड की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विभाग हमेशा बच्चों के शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्य के लिए यह उपलब्धि न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही दिशा, समर्पण और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसकी सराहना पूरे देश में हो रही है।

प्रमुख सचिव बोरा ने जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बताया कि प्रदेश के 50 मेरिट छात्रों में से 13 विद्यार्थी प्रयास विद्यालय के है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बात के लिए प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और बेहतर कार्य करने को कहा।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि हायर सेकेंडरी परीक्षा (कक्षा 12वीं) में प्रयास आवासीय विद्यालय के कुल 128 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय, गुडियारी की 19 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। कोरबा जिले की छात्रा कु. रागिनी कंवर ने 95 प्रतिशत अंक अर्जित कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जीव विज्ञान विषय में दो छात्राओं द्वारा 100 में 100 अंक अर्जित किया जाना विशेष उपलब्धि है।हाईस्कूल परीक्षा (कक्षा 10वीं) में भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। कुल 119 छात्राओं में से 48 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। गणित विषय में 6 विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत अंक अर्जित किए। कु. दीपांशी ने 98.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रयास आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी टॉप 10 मेरिट सूची में 97.5 प्रतिशत अंकों के साथ स्थान अर्जित किया।

उल्लेखनीय है कि हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य सूची में कुल 42 विद्यार्थियों में से 21 विद्यार्थी आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित एकलव्य एवं प्रयास आवासीय विद्यालयों के हैं। इनमें प्रयास आवासीय विद्यालय के 11 विद्यार्थियों ने स्थान प्राप्त किया है, जो विभागीय प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

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