Media24Media.com: बस्तर की 485 बसाहटों को मिलेगी बारहमासी सड़क की सुविधा, 804 करोड़ के 263 नए सड़क कार्यों के प्रस्ताव

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बस्तर की 485 बसाहटों को मिलेगी बारहमासी सड़क की सुविधा, 804 करोड़ के 263 नए सड़क कार्यों के प्रस्ताव

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रायपुर- दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में बड़ी पहल हुई है। संभाग की 485 बसाहटों में सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

इन प्रस्तावित सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर बताई गई है। इस पहल का उद्देश्य अंदरूनी वनांचल और दुर्गम गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि ग्रामीणों को पूरे साल आवागमन की सुविधा मिल सके।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हो रहा काम

बस्तर में सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी PMGSY-4 के तहत कार्य किए जा रहे हैं। योजना के प्रथम बैच में संभाग की 234 बसाहटों के सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है।

इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा जिले की 16 बसाहटें शामिल हैं।

इन कार्यों के माध्यम से ऐसे गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों के कारण आवागमन लंबे समय से चुनौती बना हुआ है।

280 अन्य बसाहटों के लिए 804 करोड़ के प्रस्ताव

PMGSY-4 के दूसरे बैच में 280 अन्य बसाहटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनकी अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है।

प्रस्तावित सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर है। इन कार्यों के आगे बढ़ने से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में आवागमन के साधन बेहतर हो सकते हैं।

इसके अतिरिक्त लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी DPR तैयार किए जा रहे हैं। इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की संभावनाओं और जरूरतों का आकलन किया जा सकेगा।

373 पुलों के निर्माण पर भी पहल

बस्तर में केवल सड़कों का विस्तार ही नहीं, बल्कि नदी-नालों और बरसाती क्षेत्रों में आवागमन की समस्या दूर करने के लिए पुल निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, PMGSY-4 के प्रथम बैच के तहत 206 पुलों और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत 167 पुलों के प्रस्तावों पर अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में विचार किया गया है।

इस तरह कुल 373 पुलों के प्रस्तावों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं बस्तर संभाग में 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं।

नारायणपुर जिले में PM-JANMAN के तहत 22 लंबे पुलों के प्रस्ताव हैं, जिनकी अनुमानित लागत 87.45 करोड़ रुपये बताई गई है। इन पुलों के निर्माण से बरसात के दौरान नदी-नालों के कारण गांवों का संपर्क टूटने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

नक्सलवाद से मुक्त गांवों के लिए विशेष छूट की मांग

बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। यहां कई छोटी बसाहटें जंगलों और पहाड़ी इलाकों में बसी हैं। आबादी कम होने के कारण कुछ गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मौजूदा जनसंख्या संबंधी मानकों के तहत पात्रता हासिल नहीं कर पाते।

इसी समस्या को देखते हुए छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर विशेष छूट देने का अनुरोध किया था।

प्रस्ताव में 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी-छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क स्वीकृति देने और निर्धारित जनसंख्या संबंधी मानकों में राहत देने की बात रखी गई है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में सकारात्मक रुख जताते हुए आवश्यक प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षण की बात कही है।

शेष बसाहटों की पहचान के लिए चार महीने का सर्वे

बस्तर की शेष पात्र बसाहटों की पहचान और उनकी सड़क संबंधी जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (GSS) ऐप के माध्यम से चार महीने का सर्वेक्षण शुरू किया गया है।

इस सर्वे में गांवों की वास्तविक जरूरत, सड़क संपर्क की स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा। साथ ही प्रस्तावित सड़क मार्गों को प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

सड़क बनने से ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?

बारहमासी सड़क संपर्क से बस्तर के दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाएं: मरीजों को अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और एंबुलेंस तक पहुंचने में आसानी होगी। आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।

शिक्षा: विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए स्कूलों तक पहुंचना आसान होगा। बरसात में रास्ते बंद होने की समस्या कम हो सकती है।

कृषि और व्यापार: किसान अपनी उपज को बाजार और खरीदी केंद्रों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। परिवहन लागत और समय में कमी आने की संभावना है।

महिलाओं और बच्चों को सुविधा: आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी सरकारी सुविधाओं तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

स्थानीय रोजगार: सड़क निर्माण और बेहतर संपर्क से स्थानीय व्यापार, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास कार्यों को गति

बस्तर में सड़क और पुल निर्माण को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय से कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार जताया है।

निष्कर्ष: बस्तर की 485 बसाहटों में सड़क कार्यों की स्वीकृति और 280 अन्य बसाहटों के लिए 804.06 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क सुविधा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, प्रस्तावित सड़कों और पुलों के लिए आगे की स्वीकृति, निर्माण की शुरुआत और काम पूरा होने की समय-सीमा पर नजर रहेगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: 485 बसाहटों के कार्य स्वीकृत हैं; 280 बसाहटों के लिए 263 सड़क कार्य प्रस्तावित हैं; लगभग 474 अन्य बसाहटों के DPR तैयार हो रहे हैं। पुलों के प्रस्तावों पर विचार जारी है—उन्हें अभी पूर्ण स्वीकृति या निर्मित पुल नहीं माना जाना चाहिए।


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