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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

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 रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी से देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने मंदिर में माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया।


इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की अटूट श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहाँ की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति जी के प्रवास से बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। माँ दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था है और उनकी उपासना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। माँ दंतेश्वरी से जुड़ी आस्था बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में गहराई से रची-बसी है।

बस्तर दशहरा में बड़ा हादसा: विजय रथ के पहिए के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौत, एक घायल

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जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। जगदलपुर में भीतर रैनी की रस्म के दौरान आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। घटना के बाद उत्सव स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे ने इतने बड़े पारंपरिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 

रथ खींचने के दौरान हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना उस समय हुई जब जगदलपुर में बस्तर दशहरा की पारंपरिक रथ यात्रा निकाली जा रही थी। बड़ी संख्या में लोग विजय रथ को खींचने में शामिल थे। इसी दौरान रथ खींच रहे एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ गया और वह रथ के पहिए की चपेट में आ गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना में एक अन्य व्यक्ति के पैर में चोट आई। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घायल व्यक्ति की हालत खतरे से बाहर बताई गई। 

मृतक की पहचान को लेकर शुरुआती रिपोर्ट में जानकारी नहीं

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में मृतक की पहचान की पुष्टि नहीं की गई थी। हादसे के कारणों और उससे जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने घटना की जानकारी देते हुए रथ यात्रा में शामिल लोगों से सावधानी बरतने और रथ से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की।

क्या है भीतर रैनी की परंपरा?

बस्तर दशहरा देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से अलग है। यहां पर्व का मुख्य केंद्र मां दंतेश्वरी और बस्तर की विशिष्ट आदिवासी धार्मिक परंपराएं हैं। इस उत्सव में रावण दहन नहीं होता, बल्कि देवी-देवताओं, स्थानीय रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया जाता है।

भीतर रैनी बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्मों में से एक है। इस अवसर पर आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ को बड़ी संख्या में ग्रामीण और पारंपरिक रथ खींचने वाले लोग मिलकर आगे बढ़ाते हैं। धार्मिक परंपरा के तहत देवी दंतेश्वरी के छत्र से जुड़ी रस्में निभाई जाती हैं और रथ की परिक्रमा कराई जाती है। 

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

बस्तर दशहरा में हर साल बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, ग्रामीण, श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। विशाल रथ को खींचने के दौरान लोगों की भीड़ और रथ के पहियों की निकटता के कारण विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

इस घटना के बाद आयोजन के दौरान सुरक्षा घेरा मजबूत करने, रथ के आसपास पर्याप्त दूरी बनाए रखने, भीड़ को व्यवस्थित करने और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को सक्रिय रखने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों में पुलिस और स्वयंसेवकों की पर्याप्त तैनाती, स्पष्ट दिशा-निर्देश, सुरक्षित रास्ते और भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

प्रशासन और श्रद्धालुओं के लिए अहम संदेश

बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस तरह के आयोजनों में परंपराओं के निर्वहन के साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

श्रद्धालुओं से अपील है कि वे रथ के पहियों और खींचने वाली रस्सियों से उचित दूरी बनाए रखें, भीड़ में धक्का-मुक्की न करें और पुलिस तथा आयोजन समिति के निर्देशों का पालन करें।

फिलहाल इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत और एक व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई है। मृतक की पहचान तथा घटना से संबंधित अन्य विवरणों की पुष्टि के लिए प्रशासन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जाना चाहिए।


बस्तर दशहरा में रचेगा नया इतिहास: सिरहासार के मुरिया दरबार में पहली बार शामिल होंगी राष्ट्रपति मुर्मू

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 जगदलपुर : विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के इतिहास में शुक्रवार को एक स्वर्णिम और अभूतपूर्व अध्याय जुड़ने जा रहा है, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सिरहासार में आयोजित होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। बस्तर की सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के इस ऐतिहासिक मंच पर पहुँचने वाली वे देश की पहली राष्ट्रपति होंगी।


इस गौरवशाली अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति बस्तर अंचल के पारंपरिक सामाजिक संरक्षकों और जनप्रतिनिधियों, मांझी-चालकी, नाइक-पाइक और मेंबर-मेंबरिन से रूबरू होकर उनसे आत्मीय संवाद करेंगी। अंचल के इन जमीनी प्रतिनिधियों के साथ होने वाली यह सीधी चर्चा बस्तर की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर और जनजातीय पहचान के सम्मान का एक सशक्त प्रतीक बनेगी।

इस ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण को भव्य बनाने के लिए बस्तर दशहरा समिति और स्थानीय प्रशासन ने स्वागत की विशेष पारंपरिक तैयारियां की हैं। सिरहासार पहुँचने पर राष्ट्रपति का अभिनंदन बस्तर की लोक-संस्कृति के अनूठे प्रतीकों के साथ किया जाएगा, जिसके तहत उन्हें स्थानीय परंपरा के अनुरूप स्वागत किया जाएगा। बस्तर की इस गौरवमयी परंपरा में राष्ट्रपति की सहभागिता को लेकर पूरे अंचल में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

बीजापुर में CRPF के सब-इंस्पेक्टर की मौत, 131वीं बटालियन में थे तैनात; जांच में जुटी पुलिस

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मेटागुड़ा कैंप में हुई घटना, गोली चलने की आवाज सुनकर साथी जवान पहुंचे; सुकमा के एल्मागुंडा कैंप में इलाज के दौरान तोड़ा दम

बीजापुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक दुखद खबर सामने आई है। बीजापुर जिले के जंगल क्षेत्र में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के मेटागुड़ा कैंप में तैनात सब-इंस्पेक्टर देवानंद यादव की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात हुई थी। देवानंद यादव CRPF की 131वीं बटालियन में पदस्थ थे।

गोली चलने की आवाज सुनकर पहुंचे साथी जवान

अधिकारियों के अनुसार, कैंप में गोली चलने की आवाज सुनकर वहां मौजूद अन्य जवान और अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल सब-इंस्पेक्टर को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें फील्ड एंबुलेंस से सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एल्मागुंडा कैंप ले जाया गया।

वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद कैंप और सुरक्षा बल के अधिकारियों के बीच शोक का माहौल रहा।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी थे देवानंद यादव

प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, देवानंद यादव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के करजहा गांव के निवासी थे। घटना की सूचना उनके परिजनों को दिए जाने और शव को पैतृक गांव भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

आत्महत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस ने मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें घटना का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।

सुरक्षा बलों के जवानों का मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण

बस्तर क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के जवान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, कठिन कार्य परिस्थितियां और व्यक्तिगत समस्याएं किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, इस मामले में इन कारकों की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसी घटनाएं सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, समय पर परामर्श और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद उपलब्ध कराने के महत्व की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। घटना के कारणों और अन्य परिस्थितियों के संबंध में पुलिस या CRPF की ओर से कोई अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।


बस्तर को रेल कनेक्टिविटी की बड़ी सौगात! रायपुर–रावघाट मेमू ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, उद्घाटन टला

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी खबर सामने आई है। रायपुर से रावघाट तक मेमू ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। रेलवे बोर्ड ने इस सेवा की समय-सारिणी जारी कर दी है, लेकिन 12 अक्टूबर को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम फिलहाल टल गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रेल मंत्री का प्रस्तावित दौरा रद्द होने के कारण उद्घाटन नहीं हो सका। अब यात्रियों को ट्रेन सेवा शुरू होने की नई तारीख की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। 

ताड़ोकी से 17 किलोमीटर आगे पहुंचेगी रेल सेवा

अब तक कांकेर जिले के ताड़ोकी तक यात्री रेल सेवा उपलब्ध थी। ताड़ोकी से लगभग 17 किलोमीटर आगे रावघाट तक रेल लाइन का काम पूरा होने के बाद इस खंड पर यात्री ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है।

रेल मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को जानकारी दी थी कि दल्लीराजहरा–रावघाट नई रेल लाइन के अंतिम ताड़ोकी–रावघाट खंड का काम पूरा हो गया है और इस पर रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) का निरीक्षण तथा गति परीक्षण किया गया है। यह यात्री सेवा शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रायपुर–रावघाट मेमू ट्रेन की समय-सारिणी को लेकर क्या जानकारी है?

मीडिया में प्रकाशित रेलवे बोर्ड के पत्र से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, दोनों दिशाओं में मेमू ट्रेन चलाने की योजना है।

  • रावघाट से प्रस्थान: सुबह 6:30 बजे

  • ताड़ोकी आगमन: सुबह 7:00 बजे

  • दल्ली राजहरा आगमन: सुबह 8:25 बजे

  • दुर्ग आगमन: सुबह 11:30 बजे

  • रायपुर आगमन: दोपहर 1:05 बजे

ये समय ट्रेन संख्या 68769 रावघाट–रायपुर मेमू के लिए रिपोर्ट किए गए प्रस्तावित समय हैं। वापसी ट्रेन के प्रकाशित समय में विसंगति बताई गई है, इसलिए इसे अंतिम और सत्यापित समय-सारिणी नहीं माना जाना चाहिए। यात्रा से पहले रेलवे की आधिकारिक सूचना जरूर जांचें।

बस्तर के लोगों को क्या होगा फायदा?

1. राजधानी तक पहुंच आसान होने की उम्मीद

रायपुर में इलाज, पढ़ाई, नौकरी, सरकारी कामकाज और व्यापार के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को रेल परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।

2. किसानों और वनोपज कारोबारियों को लाभ

क्षेत्र में कृषि उत्पादों और वनोपज के परिवहन के विकल्प बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

3. औद्योगिक परिवहन को मजबूती

दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क पहुंचाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे औद्योगिक परिवहन व्यवस्था को लाभ मिल सकता है।

4. दूरस्थ क्षेत्रों के विकास को गति

बेहतर रेल संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और बाजारों तक पहुंच में सुधार की संभावना है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित स्टेशनों और आगे की परिवहन सुविधा पर भी निर्भर करेगा।

रावघाट से जगदलपुर तक रेल विस्तार की तैयारी

रावघाट तक रेल सेवा का विस्तार परियोजना का महत्वपूर्ण चरण है। इसके आगे रावघाट से जगदलपुर के बीच लगभग 140 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित विस्तार का हिस्सा है। इस मार्ग के पूरा होने से बस्तर क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। 

यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 12 अक्टूबर को प्रस्तावित उद्घाटन टलने की खबर है, लेकिन नई उद्घाटन तिथि और नियमित परिचालन शुरू होने की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यात्रियों को ट्रेन नंबर, स्टॉपेज, किराया और अंतिम समय-सारिणी की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक सूचना से करने के बाद ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए यह रेल परियोजना परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजरें ट्रेन सेवा शुरू होने की नई तारीख पर टिकी हैं।


मां दंतेश्वरी मंदिर में मोबाइल ले जाने पर रोक, श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए विशेष काउंटर

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दंतेवाड़ा- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रसिद्ध मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब  श्रद्धालुओं को मंदिर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है। दर्शन करने से पहले भक्तों को अपना मोबाइल फोन मंदिर के बाहर बनाए गए विशेष काउंटर पर जमा करना होगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

नवरात्रि के दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति ने यह कदम उठाया है।

मोबाइल से फोटो खींचने, सेल्फी लेने और वीडियो बनाने में लगने वाले समय के कारण दर्शन की कतार धीमी हो सकती है। ऐसे में मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य कतार को तेजी से आगे बढ़ाना और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन का अवसर देना है।

कहां जमा करना होगा मोबाइल?

श्रद्धालुओं के मोबाइल जमा कराने के लिए दंतेवाड़ा में जय स्तंभ चौक के पास, पुलिस सहायता केंद्र के बगल में विशेष काउंटर बनाया गया है।

यहां मोबाइल जमा करने के लिए श्रद्धालुओं को अपना नाम, मोबाइल नंबर और फोन का विवरण दर्ज कराना होता है। इसके बाद उन्हें एक टोकन दिया जाता है। दर्शन के बाद टोकन लौटाकर अपना मोबाइल वापस लिया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, व्यवस्था शुरू होने के शुरुआती घंटों में ही 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल जमा कराए। काउंटर पर एक समय में लगभग 1,000 से 2,000 मोबाइल सुरक्षित रखने की क्षमता बताई गई है। जरूरत पड़ने पर इसकी क्षमता बढ़ाने की भी तैयारी की गई थी।

सुरक्षा और प्रशासन की विशेष व्यवस्था

मोबाइल जमा कराने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। तहसीलदार, नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

मंदिर के अंदर सुरक्षा नियमों के तहत फोटो और वीडियो बनाने पर भी प्रतिबंध है। मीडिया कर्मियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके अनुसार उन्हें गरुड़ स्तंभ तक ही मोबाइल ले जाने और कवरेज करने की अनुमति दी गई है। गर्भगृह तथा अन्य प्रतिबंधित हिस्सों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं है।

श्रद्धालुओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • मंदिर पहुंचने से पहले मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था के लिए समय रखें।

  • मोबाइल जमा करते समय टोकन सुरक्षित रखें।

  • दर्शन के बाद टोकन दिखाकर अपना मोबाइल वापस लें।

  • मंदिर परिसर में फोटो, वीडियो और रील बनाने से बचें।

  • भीड़ के दौरान प्रशासन और मंदिर समिति के निर्देशों का पालन करें।

श्रद्धा और सुगम दर्शन पर जोर

मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक वातावरण बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और श्रद्धालुओं को कम परेशानी में दर्शन उपलब्ध कराना है।

श्रद्धालुओं के लिए संदेश: मंदिर जाने से पहले मोबाइल प्रतिबंध और जमा काउंटर की व्यवस्था की जानकारी लेकर निकलें, ताकि दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।


बस्तर दशहरा 2026: पर्यटकों की बढ़ी आवाजाही, सुरक्षा के लिए 400 जवान तैनात

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उत्सव के दौरान लगभग 400 जवानों की तैनाती और 15 से अधिक स्थानों पर पुलिस निगरानी की व्यवस्था की जानकारी सामने आई है।

बस्तर दशहरा अपनी अनूठी आदिवासी परंपराओं, मां दंतेश्वरी की आराधना और पारंपरिक रस्मों के लिए जाना जाता है। यह सामान्य दशहरा उत्सव से अलग है और इसकी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं लंबे समय तक चलती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था में क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं?

Bastar Dussehra 2021, Chhattisgarh Update; Devotees With Goddess Maa Danteshwari Doli | बस्तर दशहरा के लिए रवाना हुई मां दंतेश्वरी की डोली: जवानों ने हर्ष फायर कर दी सलामी; पूर्व मंत्री, MLA और कलेक्टर ने की पूजा अर्चना - Jagdalpur News | Dainik Bhaskar
 रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी दी। प्रमुख इंतजाम इस प्रकार हैं:
  • करीब 400 पुलिस जवान: भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए।

  • 15 से अधिक फिक्स्ड पुलिस पॉइंट: शहर के प्रमुख स्थानों और महत्वपूर्ण मार्गों पर निगरानी के लिए।

  • CCTV निगरानी: भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

  • प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा: ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और रायपुर की ओर जाने वाले रास्तों पर भी पुलिस की तैनाती की जानकारी दी गई है।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बस्तर दशहरा की सुरक्षा में 24 घंटे पुलिस की निगरानी

पुलिस के मुताबिक, दशहरा उत्सव की प्रमुख रस्मों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जवान तैनात रहेंगे। लगभग 400 जवानों की ड्यूटी की व्यवस्था की गई है, जबकि 15 से अधिक फिक्स्ड पॉइंट पर 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की जानकारी दी गई है।

सुरक्षा व्यवस्था में शामिल प्रमुख उपाय:

  • 24 घंटे ड्यूटी: भीड़ और कानून-व्यवस्था की निगरानी।

  • CCTV और कंट्रोल रूम: प्रमुख आयोजन स्थलों की गतिविधियों पर नजर।

  • पुलिस सहायता केंद्र: स्थानीय लोगों और पर्यटकों को जरूरत पड़ने पर सहायता।

  • अतिरिक्त बल: भीड़ बढ़ने या किसी आपात स्थिति में जरूरत के अनुसार और जवान तैनात करने की योजना।

पुलिस का उद्देश्य उत्सव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

जगदलपुर में ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी

Chhattisgarh: Home Minister Amit Shah to attend Bastar Dussehra
10 अक्टूबर को जगदलपुर पुलिस प्रशासन ने बस्तर दशहरा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात संबंधी एडवाइजरी जारी की। इसका उद्देश्य मां दंतेश्वरी मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन सुचारु रखना है।

उत्सव में शामिल होने वाले लोगों के लिए जरूरी बातें:

  1. मंदिर और आयोजन स्थलों के पास पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

  2. जहां यातायात प्रतिबंध या डायवर्जन लागू हो, वहां वैकल्पिक मार्ग अपनाएं।

  3. वाहन निर्धारित पार्किंग स्थानों पर ही खड़े करें।

  4. भीड़ के बीच बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

  5. किसी संदिग्ध वस्तु या आपात स्थिति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

बस्तर दशहरा क्यों है खास?

Bastar Dussehra 2025: The Festival Without a Ravana Dahan | Outlook India
बस्तर दशहरा देश के अनूठे सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल है। इसकी परंपरा लगभग 600 साल पुरानी मानी जाती है और यह करीब 75 दिनों तक चलता है। इसका मुख्य केंद्र जगदलपुर है।

इस उत्सव की कुछ प्रमुख विशेषताएं:

  • मां दंतेश्वरी की आराधना इसका केंद्रीय धार्मिक पक्ष है।

  • आदिवासी समाज की परंपराएं और सामुदायिक भागीदारी इसकी पहचान हैं।

  • पारंपरिक रस्मों, रथ यात्रा और स्थानीय रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है।

  • यह सामान्य दशहरे की तरह रावण दहन पर केंद्रित नहीं है।

भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, 2026 में बस्तर दशहरा की शुरुआत 12 अगस्त को पाट जात्रा से हुई और इसका मुख्य दशहरा चरण 18 से 22 अक्टूबर के बीच निर्धारित है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था से लोगों को आयोजन स्थलों तक पहुंचने, भीड़ के प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता मिलने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अधिक भीड़ के कारण कुछ क्षेत्रों में यात्रा का समय बढ़ सकता है।

दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक अपनी यात्रा की योजना पहले बनाएं, ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और मंदिर या रथ यात्रा के आसपास पुलिस द्वारा निर्धारित मार्गों का पालन करें।


सुकमा में विस्फोटक निष्क्रिय करने के दौरान बड़ा हादसा, CRPF के 4 जवान घायल; 2 गंभीर

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 एलारमडगु कैंप के पास, सुकमा, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुकमा जिले से सुरक्षा बलों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक धमाका हो गया। इस घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, इनमें से दो जवानों को गंभीर चोटें आई हैं।

कहाँ और कैसे हुआ हादसा?

रिपोर्टों के अनुसार, घटना सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र में एलारमडगु (Elarmadgu) CRPF कैंप से लगभग 200 मीटर दूर बोडराजपाड़र नाला के पास हुई। जगदलपुर से आई एम्युनिशन टेक्नीशियन टीम (Ammunition Technician Team—ATT) कैंपों में रखे पुराने, बचे हुए और अनुपयोगी विस्फोटकों की जाँच करने तथा उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए पहुँची थी।

प्रक्रिया के दौरान विस्फोटक का एक टुकड़ा उछलकर पास के क्षेत्र में जा पहुँचा और धमाका हो गया। इससे वहाँ मौजूद चार CRPF कर्मी घायल हो गए। पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोटक नष्ट करने के दौरान हुआ हादसा था, न कि किसी नए नक्सली हमले की पुष्टि।

घायल जवानों के नाम और स्थिति

मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से चारों घायल कर्मियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है।

जवान का नाम                       पद       चोट की स्थिति
एम.के. तिवारी        सहायक उप निरीक्षक (ASI), ATT टीम        गंभीर
अनीश खान        सहायक उप निरीक्षक (ASI), 50वीं बटालियन        गंभीर
अमरनाथ मिश्रा        इंस्पेक्टर, ATT टीम        मामूली
कुलदीप राज        हेड कांस्टेबल, 50वीं बटालियन        मामूली

घायल जवानों को कहाँ भर्ती कराया गया?

घटना के तुरंत बाद चारों जवानों को प्राथमिक उपचार दिया गया और कोंटा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल दोनों जवानों को आवश्यकता पड़ने पर बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में भेजने की तैयारी की जा रही थी। उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में आगे की चिकित्सा स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है।

क्या यह नक्सली हमला था?

उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटनावश हुआ विस्फोट था। शुरुआती खबरों में IED विस्फोट की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया कि धमाका पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। इसे नक्सलियों द्वारा किए गए हमले के रूप में पेश करना उपलब्ध तथ्यों से समर्थित नहीं है।

इस घटना का महत्व

  • पुराने विस्फोटकों को निष्क्रिय करने का काम प्रशिक्षित तकनीकी टीमों द्वारा किया जाता है, फिर भी इसमें जोखिम बना रहता है।

  • घटना ने सुरक्षा शिविरों में रखे पुराने और अनुपयोगी विस्फोटकों के सुरक्षित निपटान के महत्व को सामने रखा है।

  • सुकमा बस्तर संभाग का संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र है, इसलिए ऐसी घटनाओं पर स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहती है।


आज का समाचार बुलेटिन

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नमस्कार! स्वागत है आपका आज के खास न्यूज़ बुलेटिन में।

देश-दुनिया, छत्तीसगढ़, राजनीति, कारोबार, खेल और टेक्नोलॉजी की हर बड़ी खबर पर रहेगी हमारी पैनी नज़र।

तो बिना देर किए, शुरू करते हैं आज की बड़ी खबरें।

देश की बड़ी खबरें

मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर विपक्ष का प्रदर्शन

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने भी विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के तरीके पर आपत्ति जताई है।

छत्तीसगढ़ की बड़ी खबर

छत्तीसगढ़ का मुख्य चुनाव आयुक्त का दौरा स्थगित

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित कर दिया गया है। उनके दौरे में दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर, चित्रकोट जलप्रपात और कवर्धा का भोरमदेव मंदिर शामिल था।

दौरे की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

बस्तर में सुरक्षा कैंप अब बनेगा विद्यार्थियों का हॉस्टल

बस्तर में पहले सुरक्षा कैंप के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे एक भवन को अब आदिवासी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और शैक्षणिक परिसर के रूप में विकसित किया गया है।

अबूझमाड़ क्षेत्र में छात्राओं के लिए भी नया छात्रावास तैयार किया जा रहा है। इसे क्षेत्र में शिक्षा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कोंडागांव

कोंडागांव जिला प्रशासन की ओर से महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित कंप्यूटर स्किल टेस्ट की संशोधित सूचना जारी की गई है।

अर्थव्यवस्था और बैंकिंग

आज RBI करेगा ब्याज दर पर फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति आज रेपो रेट पर फैसला करेगी।

बाजार में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

अगर रेपो रेट बढ़ता है तो इसका असर:

  • होम लोन की ब्याज दर पर पड़ सकता है।

  • नए कर्ज महंगे हो सकते हैं।

  • व्यापारिक ऋण की लागत बढ़ सकती है।

  • बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है।

शेयर बाजार

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली।

सेंसेक्स: 685 अंक बढ़कर 73,067.81 पर बंद हुआ।
निफ्टी: 220 अंक बढ़कर 22,776.10 पर पहुंचा।

हालांकि आज बाजार की दिशा RBI के ब्याज दर संबंधी फैसले और कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित हो सकती है।

रुपया कमजोर

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर लगभग ₹96.42 प्रति डॉलर तक पहुंच गया।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपये पर दबाव डाल रही हैं।

दुनिया की बड़ी खबर

रूस-यूक्रेन युद्ध

रूस ने बुधवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर फिर हवाई हमला किया।

हमले में कई इमारतों और गोदामों को नुकसान पहुंचने की खबर है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने भी रूस की ओर से बड़े हमले की आशंका जताई है।

विज्ञान की बड़ी खबर

🏆 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

फ्रांसिस हाल्ज़ेन को वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है।

उन्हें उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो और ब्रह्मांड में उनकी उत्पत्ति से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है।

टेक्नोलॉजी और AI

Nvidia की वैल्यूएशन में जबरदस्त उछाल

AI के क्षेत्र में बढ़ते निवेश और मांग के कारण Nvidia का बाजार मूल्य लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर के स्तर के करीब पहुंच रहा है।

AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश का उत्साह अमेरिकी शेयर बाजारों को भी मजबूती दे रहा है।

Boston Dynamics में नया CEO

रोबोटिक्स कंपनी Boston Dynamics ने रोहित प्रसाद को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 7 अक्टूबर से प्रभावी हुई है।

क्रिकेट की बड़ी खबर

हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी कप्तानी

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर ने तीनों प्रारूपों की कप्तानी छोड़ दी है।

अब स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का नया ऑल-फॉर्मेट कप्तान बनाया गया है।

हरमनप्रीत खिलाड़ी के रूप में टीम का हिस्सा बनी रहेंगी।

एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में मलेशिया को 5–1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

इस जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए भी स्थान सुनिश्चित कर लिया है।

श्रेयस अय्यर का शानदार शतक

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में श्रेयस अय्यर ने शानदार नाबाद शतक लगाया।

उन्होंने सिर्फ 43 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। भारत ने 172 रन के लक्ष्य को केवल 14.4 ओवर में 8 विकेट से हासिल कर लिया।


छत्तीसगढ़ में NMDC की ₹5,427 करोड़ की बड़ी परियोजना शुरू, बस्तर से नागरनार तक जुड़ेगा पूरा आयरन-ओर नेटवर्क

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बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लिए बड़ी औद्योगिक खबर सामने आई है। सरकारी खनन कंपनी NMDC Ltd. ने ₹5,427 करोड़ की एकीकृत आयरन-ओर प्रोसेसिंग, स्लरी पाइपलाइन और पेलेट निर्माण परियोजना को कमीशन कर दिया है। यह परियोजना NMDC के बचेली स्थित लौह-अयस्क संचालन को नागरनार स्थित स्टील प्लांट से जोड़ती है।

परियोजना में क्या-क्या शामिल है?

इस एकीकृत परियोजना के तहत तीन प्रमुख सुविधाएं विकसित की गई हैं—

बचेली में आयरन-ओर प्रोसेसिंग प्लांट
बैलाडिला की खदानों से निकलने वाले आयरन-ओर फाइन्स और स्लाइम्स को प्रोसेस करके कंसंट्रेट तैयार किया जाएगा।

135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन
बचेली से नागरनार तक करीब 135 किमी लंबी पाइपलाइन के जरिए प्रोसेस्ड आयरन-ओर कंसंट्रेट पहुंचाया जाएगा। इसकी क्षमता 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है।

नागरनार में 2 MTPA पेलेट प्लांट
नागरनार में स्थापित पेलेट प्लांट की क्षमता 2 मिलियन टन प्रति वर्ष है। यहां आयरन-ओर कंसंट्रेट को पेलेट में बदला जाएगा, जिसका इस्तेमाल स्टील उत्पादन में किया जा सकता है।

सड़क और रेल परिवहन पर क्या असर?

पाइपलाइन के जरिए आयरन-ओर कंसंट्रेट की ढुलाई होने से सड़क मार्ग से परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा और रेलवे पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिल सकती है।

यह पाइपलाइन बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 61 गांवों से होकर गुजरती है।

बस्तर के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

इस परियोजना के साथ NMDC की गतिविधियां सिर्फ खनन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि माइनिंग → बेनिफिशिएशन/प्रोसेसिंग → स्लरी ट्रांसपोर्ट → पेलेट उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन में जुड़ेंगी।

परियोजना से बैलाडिला खदानों से निकलने वाले फाइन्स और स्लाइम्स के बेहतर उपयोग का भी रास्ता बनेगा और पेलेट के रूप में एक वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार होगा।

NMDC का बड़ा लक्ष्य

NMDC ने बताया है कि यह परियोजना कंपनी की व्यापक विस्तार और विविधीकरण रणनीति का हिस्सा है। कंपनी दीर्घकाल में अपनी आयरन-ओर उत्पादन क्षमता को 100 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।


आस्था, परंपरा और भव्यता के रंग में सजेगा ऐतिहासिक बस्तर दशहरा

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75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष

रायपुर- ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की।

बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष

बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।

नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए।

केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत

बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही।

उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प

बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया।

उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया।

भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा।

1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित

बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी।

बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार

कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया।

बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

झीरम घाटी हमला: 13 साल बाद 10 आरोपी दोषी, NIA की विशेष अदालत का बड़ा फैसला; 16 सितंबर को सजा पर फैसला

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जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब दोषियों को दी जाने वाली सजा के बिंदु पर 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाएगी।

25 मई 2013 को बस्तर के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में शामिल है।

क्या हुआ था झीरम घाटी में?

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बस्तर क्षेत्र से गुजर रही थी। यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला झीरम घाटी के पास पहुंचा, जहां पहले से घात लगाए माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया।

जांच के अनुसार, हमले में बड़ी संख्या में माओवादी शामिल थे। पहले विस्फोट और उसके बाद लगातार गोलीबारी से काफिले में अफरा-तफरी मच गई। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख लोगों की मौत हुई।

महेंद्र कर्मा को माओवादियों का प्रमुख निशाना माना गया था। वह नक्सल विरोधी अभियान और सलवा जुडूम से जुड़े रहे थे। यही वजह थी कि झीरम घाटी हमले को केवल एक सामान्य माओवादी हमला नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने वाली बड़ी घटना के रूप में भी देखा गया।

13 साल चली कानूनी प्रक्रिया

हमले के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई। NIA ने सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद सितंबर 2015 में पूरक चार्जशीट भी दाखिल की गई। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

रिपोर्टों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। इसके बाद अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहा। इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया एक दशक से अधिक समय तक चली और सैकड़ों सुनवाई हुईं।

कौन-कौन दोषी करार दिए गए?

NIA की विशेष अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है, उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मरकाम, मड़कम देवा, जोगा मड़कम, बंजामी सन्ना उर्फ चमरा और महादेव नाग के नाम शामिल हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों में महिलाएं भी शामिल हैं।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपियों को दोषी माना।

16 सितंबर को तय होगी सजा

अदालत ने फिलहाल दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है, लेकिन सजा की अवधि अभी तय नहीं हुई है। विशेष अदालत ने सजा के बिंदु पर फैसला सुनाने के लिए 16 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।

इसका मतलब है कि 5 सितंबर को अदालत ने आरोपियों को दोषी माना है, जबकि उन्हें कितनी सजा दी जाएगी, इसका फैसला 16 सितंबर को होगा।

बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की बात कही

दोषसिद्धि के बाद बचाव पक्ष ने फैसले पर असहमति जताई है। बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी के अनुसार, अदालत के आदेश की पूरी प्रति मिलने और उसका अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

झीरम घाटी हमला क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

झीरम घाटी हमला केवल एक नक्सली हिंसा की घटना नहीं थी, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। एक ही हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की मौत ने प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व में बड़ा खालीपन पैदा कर दिया था।

हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था, राजनीतिक साजिश और घटना की व्यापक जांच को लेकर भी लंबे समय तक सवाल उठते रहे। कांग्रेस की ओर से समय-समय पर घटना के पीछे कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा चूक की जांच की मांग की जाती रही है। दूसरी ओर, NIA की जांच और अदालत में चले मुकदमे का केंद्र आरोपियों की कथित आपराधिक भूमिका और हमले में उनकी भागीदारी रहा।

13 साल बाद आया फैसला, अब सजा का इंतजार

झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया जाना इस मामले की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की नजर अब 16 सितंबर 2026 पर है, जब अदालत दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।

इस फैसले के साथ झीरम घाटी हत्याकांड का एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय आगे बढ़ा है, लेकिन घटना से जुड़े कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी सवाल अब भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।

झीरम घाटी कांड: एक नजर में

  • घटना: झीरम घाटी नक्सली हमला

  • तारीख: 25 मई 2013

  • स्थान: दरभा क्षेत्र, बस्तर, छत्तीसगढ़

  • निशाना: कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला

  • मृतक: 29 लोग

  • प्रमुख मृतकों में: महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल, दिनेश पटेल, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार

  • जांच एजेंसी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)

  • दोषी करार: 10 आरोपी

  • फैसला: 5 सितंबर 2026

  • सजा पर फैसला: 16 सितंबर 2026

हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि  नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की,  उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं । 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बस्तर तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा होंगे शामिल

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नक्सल प्रभाव से बाहर आए गांवों तक पहुंचेगी बाइक रैली

महिला बाइकर्स भी होंगी सहभागी, शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि के साथ स्मृति के लिए मिट्टी का होगा संग्रहण

रायपुर- स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी शामिल होंगे। मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित होने वाली यह यात्रा बस्तर के उन क्षेत्रों और ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा एवं विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं गौरव की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।

बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है

यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने रखना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना तथा नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब अमन, विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा माध्यम से अब तिरंगा बस्तर के कोने कोने तक फहराया जायेगा और भारत का संविधान भी राज्य के कोने कोने में लागू होने का संदेश सभी को दिया जाएगा।

शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि, शहीद परिवारों का सम्मान

तिरंगा यात्रा के दौरान उन स्थानों पर विशेष रूप से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़े नक्सली हमले हुए अथवा व्यापक जनहानि हुई थी। प्रत्येक शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। 

आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें

इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शहीदों की शहादत वाले स्थानों की मिट्टी को श्रद्धापूर्वक संग्रहित एवं संरक्षित किया जाएगा। इस पवित्र मिट्टी को भविष्य में शहीदों के लिए निर्मित किए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। यह पहल शहीदों की स्मृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का भावनात्मक और ऐतिहासिक माध्यम बनेगी।

महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी

बस्तर तिरंगा यात्रा में वुमन बाइकर्स रैली  की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे और महिला बाइकर्स भी तिरंगा हाथ में लेकर इस यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। 

तीन दिनों में बस्तर के दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी तिरंगा यात्रा

बस्तर तिरंगा यात्रा 12 अगस्त को यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। 13 अगस्त को यात्रा दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम होगा। 14 अगस्त को यात्रा बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले कुर्रेगुट्टालु की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया जाएगा।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ से होंगे पौधरोपण

इस यात्रा के प्रत्येक घटना स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत स्थल पर जितने लोग शहीद हुए हैं उतने ही पौधों का पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। 

बस्तर की संस्कृति और विकास की झलक भी दिखेगी

तिरंगा यात्रा के दौरान सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पुनर्वासित युवाओं की सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। 

बस्तर की वादियों में होगी शांति की दौड़

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य बस्तर शांति दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा। विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान, शहीद सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। 

तिरंगा यात्रा बनेगी नए बस्तर की पहचान

 ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को प्रेरित करने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की नई पहचान को देश के सामने रखने का अभियान है। तिरंगे के साथ बस्तर के गांवों और उन स्थानों तक पहुंचने वाली यह यात्रा उन इलाकों में विश्वास का संदेश लेकर जाएगी, जहां कभी हिंसा और भय का साया था।

बस्तर के 92 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा, स्वतंत्रता दिवस पर दिखेगा नया बदलाव

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बस्तर- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लिए इस बार का स्वतंत्रता दिवस बेहद खास होने जा रहा है। पहली बार नक्सल प्रभावित रहे 92 गांवों में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया जाएगा।

इन गांवों में लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव रहा है। अब सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ यहां के ग्रामीण 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे।

प्रशासन के अनुसार, इन गांवों में तिरंगा फहराया जाना केवल स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर और शांति एवं विकास की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक माना जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर भी इस आयोजन को लेकर उत्साह है। वर्षों तक उग्रवाद से प्रभावित रहे इन इलाकों में तिरंगे का फहराया जाना सुरक्षा, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत होती पहुंच का महत्वपूर्ण संदेश देगा।

सुकमा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी: जंगल से नक्सलियों के हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद

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 सुकमा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। भेज्जी थाना क्षेत्र के बोधराजपाड़र के जंगलों में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा जमीन में छिपाकर रखा गया हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद किया है। मौके से एक रायफल और दर्जनों जिंदा कारतूस जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


मुख्य बिंदु 

  • बरामदगी: एक .315 बोर बोल्ट एक्शन रायफल, 7.62×39 मिमी के 47 जिंदा कारतूस, 7.62×51 मिमी के 2 जिंदा कारतूस और एक एल्यूमिनियम कंटेनर।

  • संयुक्त टीम: भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की 50वीं बटालियन की कार्रवाई।

  • नेतृत्व: एसपी मयंक गुर्जर के निर्देशन और एएसपी (ऑप्स) रोहित शाह के मार्गदर्शन में चला अभियान।

खुफिया इनपुट पर हुई कार्रवाई

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों ने बोधराजपाड़र के जंगलों में हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए 3 अगस्त को भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ 50वीं बटालियन की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। सघन तलाशी के दौरान जवानों ने जमीन में दबाकर रखा गया डंप ढूंढ निकाला।

अभियान रहेगा जारी

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा बल नक्सलियों के ठिकानों, डंप और गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और आगे भी इस तरह के सर्च ऑपरेशन चलाए जाते रहेंगे।

प्रमुख बदलाव जो किए गए हैं:

  • हेडलाइन एवं सब-हेडलाइन: खबर को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए स्पष्ट शीर्षक दिया गया है।
  • स्थान-रेखा (Dateline): समाचार के प्रारंभ में सुकमा (छत्तीसगढ़) जोड़ा गया है, जो अखबारों का मानक प्रारूप है।
  • हाइलाइट्स (Highlights) बॉक्स: पाठकों के लिए एक ही नज़र में मुख्य जानकारी (क्या बरामद हुआ, कौन सी टीम शामिल थी) समझना आसान बना दिया गया है।
  • पैराग्राफ फ्लो: वाक्यों को अखबार की सम्पादकीय शैली (Editorial Style) के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है।

जगदलपुर केंद्रीय जेल में गूंजी शहनाई, दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी-प्रेमिका ने मंडप में लिए सात फेरे

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 जगदलपुर : बस्तर जिले की केंद्रीय जेल परिसर में एक अनोखा विवाह संपन्न हुआ, जो इस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के विशेष निर्देश पर दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद एक युवक ने अपनी प्रेमिका के साथ जेल के भीतर बने मंडप में वैदिक रीतियों के अनुसार सात फेरे लिए।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया और मनमती कश्यप के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। दोनों अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते हैं, जिसके चलते युवती के परिजन इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुरेश के खिलाफ दुष्कर्म (Rape) की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कोर्ट में युवती ने ली प्रेमी की तरफदारी

सुरेश के जेल जाने के बाद मामले में नया मोड़ तब आया, जब युवती ने खुद अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। युवती ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि वह सुरेश से अपनी मर्जी से प्रेम करती है और उसी के साथ अपना जीवन बिताना चाहती है। इसके साथ ही उसने अदालत से विवाह की अनुमति देने का अनुरोध किया।

जेल प्रशासन की निगरानी में हुआ विवाह

युवती के बयान और परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को विवाह कराने के निर्देश जारी किए। आदेश मिलते ही केंद्रीय जेल परिसर में पहली बार विवाह मंडप सजाया गया। कड़े प्रशासनिक पहरे और कानूनी औपचारिकताओं के बीच दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

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