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नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की, मानसून तैयारियों पर दिया विशेष जोर

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नई दिल्ली- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति की समीक्षा की। नई दिल्ली में आयोजित अलग-अलग समीक्षा बैठकों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री  हर्ष मल्होत्रा भी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान तेलंगाना में 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर में 2,035 किलोमीटर और लद्दाख में 804 किलोमीटर लंबाई की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया गया। यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया से प्राप्त फीडबैक तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई।

बैठक में नितिन गडकरी ने चल रही परियोजनाओं की प्रगति, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के साथ-साथ गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी तंत्र मजबूत करने, कार्यों को समय पर पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क अवसंरचना से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों की सुविधा में सुधार होगा।

मानसून को देखते हुए गडकरी ने सभी परियोजना क्षेत्रों में व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावी जल निकासी व्यवस्था, ढलानों की सुरक्षा एवं स्थिरीकरण, तथा मौसम संबंधी बाधाओं से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये कदम सड़क सुरक्षा, निर्बाध यातायात और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

नितिन गडकरी ने दोहराया कि केंद्र सरकार समयबद्ध क्रियान्वयन, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों के माध्यम से देशभर में विश्वस्तरीय राजमार्ग अवसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु ₹18,907 करोड़ आवंटित, 26,474 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य

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भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) तथा अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के अंतर्गत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दी गई, जिसमें पीएमजीएसवाई और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के तहत राज्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने की।

समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों तथा राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों (SRRDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity) पर विशेष जोर

सचिव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए शेष वंचित क्षेत्रों तक ग्रामीण सड़क संपर्क सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे पीएमजीएसवाई-I तथा पीएम-जनमन (PM-JANMAN) के अंतर्गत शेष सभी असंबद्ध बस्तियों को शीघ्र जोड़ने की दिशा में कार्य करें। विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की बस्तियों को प्राथमिकता देने को कहा गया। उन्होंने सभी पात्र ग्रामीण क्षेत्रों तक हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने, क्रियान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सड़क अवसंरचना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए सचिव ने संबंधित राज्यों को कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

भाग लेने वाले राज्यों ने अपनी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं और मंत्रालय को आश्वस्त किया कि सभी लंबित कार्य और वार्षिक लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

गुणवत्ता और डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने पर बल

समीक्षा का एक प्रमुख विषय ग्रामीण सड़क परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता रहा। सचिव ने कहा कि टिकाऊ और विश्वसनीय ग्रामीण संपर्क सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और प्रभावी रखरखाव व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

राज्यों से फील्ड स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और परियोजना क्रियान्वयन के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

बैठक में ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म के सार्वभौमिक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान की रीयल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। इसके व्यापक उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आगे की रणनीति

बैठक के समापन पर सचिव ने राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने, परियोजना माइलस्टोन का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकारों, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

राज्यों ने भी क्रियान्वयन में तेजी लाने, अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करने तथा देश की प्रत्येक पात्र बस्ती तक हर मौसम में सड़क संपर्क का लाभ पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव में तकनीक का बड़ा कदम, एनएचएआई ने शुरू की स्वचालित गड्ढा मरम्मत और यांत्रिक सफाई व्यवस्था

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नई दिल्ली- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के रखरखाव को अधिक प्रभावी, तेज और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई तकनीक-आधारित पहल शुरू की हैं। इसके तहत शहरी और विकसित क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम की यांत्रिक सफाई तथा स्वचालित गड्ढा भराई, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों और यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के उपयोग संबंधी व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, निवारक रखरखाव उपायों और अनुबंधीय दायित्वों के सख्त पालन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार करना है। इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी, टिकाऊपन बढ़ेगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा।

मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई पर विशेष जोर

आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के शहरी क्षेत्रों में लाइनिंग युक्त नालियों की यांत्रिक सफाई अनिवार्य कर दी है। इसके लिए हाई-फ्लो सुपर सक्शन एवं जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डी-वाटरिंग पंप सेट जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

इन मशीनों की सहायता से जल निकासी, जमी हुई गाद को ढीला करना, कीचड़ का सक्शन तथा भारी मलबे को हटाने जैसे कार्य तेजी और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। भविष्य के रखरखाव अनुबंधों में इस व्यवस्था को अनिवार्य प्रावधान के रूप में शामिल किया जाएगा।

स्वचालित गड्ढा मरम्मत मशीनों से होगा त्वरित सुधार

एनएचएआई ने प्रदर्शन-आधारित रखरखाव अनुबंधों (PBMC) के तहत ऑटोमैटिक पॉटहोल फिलिंग, कॉम्पैक्टिंग एवं पैचिंग मशीनों तथा मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इन मशीनों के उपयोग से सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत तेज गति से होगी, रखरखाव प्रतिक्रिया समय कम होगा और यात्रियों को होने वाली असुविधा में कमी आएगी। समय पर मरम्मत से सड़कों की संरचनात्मक मजबूती भी बनी रहेगी।

सड़कों की सफाई होगी अधिक प्रभावी

यांत्रिक सड़क सफाई मशीनों के माध्यम से धूल, गाद और अन्य कणों को व्यवस्थित रूप से हटाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग अधिक स्वच्छ रहेंगे, दृश्यता बेहतर होगी, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और धूल प्रदूषण में कमी आएगी।

इन मशीनों को वाराणसी-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग, हंडिया-राजातालाब राष्ट्रीय राजमार्ग तथा हरियाणा, पंजाब और गुजरात की विभिन्न परियोजनाओं में पहले ही तैनात किया जा चुका है।

एनएचएआई के अनुसार यांत्रिक ड्रेनेज सफाई, स्वचालित गड्ढा मरम्मत और आधुनिक सड़क सफाई तकनीकों को अपनाने से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, निवारक रखरखाव को मजबूती मिलेगी और देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।

जनसुविधा को प्राथमिकता: एनएच-66 पर अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा तत्काल हटाया गया

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यात्रियों की सुविधा और जनकल्याण को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने केरल के कासरगोड ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 (NH-66) पर अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। यह अस्थायी टोल प्लाज़ा एनएच-66 के विकास एवं रखरखाव से जुड़ी परिचालन व्यवस्थाओं के तहत स्थापित किया गया था।

इस निर्णय की औपचारिक घोषणा आज नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार देशभर में तेज़ी से बुनियादी ढांचे का विकास करते हुए भी जनहित और नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की प्रक्रिया को हमेशा “ईज़ ऑफ़ लिविंग” के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि केरल में भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई की ओर से अरिकाडी स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा को लेकर स्थानीय लोगों की समस्याओं के संबंध में मंत्रालय को अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में मंत्रालय ने इस विषय पर विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अस्थायी टोल प्लाज़ा के कारण स्थानीय निवासियों को वास्तविक और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मंत्रालय ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया और अरिकाडी के पास स्थित अस्थायी टोल प्लाज़ा पर संचालन और शुल्क वसूली को तुरंत बंद करने का फैसला किया गया।

इस निर्णय की घोषणा करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सुशासन की बुनियाद संवेदनशीलता और जवाबदेही पर टिकी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला स्थानीय नागरिकों द्वारा झेली जा रही वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में देश ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। सरकार ने संपर्क बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को सशक्त करने के लिए कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं शुरू की हैं।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सरकार एक ऐसे भविष्य-तैयार भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विकास के साथ-साथ करुणा और जनकल्याण भी समान रूप से प्रतिबिंबित हों। अरिकाडी के पास अस्थायी टोल प्लाज़ा को हटाने का निर्णय जन-सुनवाई और जनहित में त्वरित कार्रवाई का एक और उदाहरण है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ अंततः आम नागरिकों तक पहुंचे।

सड़क निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त और समय-सीमा में करें पूरा- मुख्यमंत्री साय

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नारायणपुर-कोंडागांव निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का मुख्यमंत्री साय ने किया निरीक्षण

एनएच-130डी कोंडागांव से नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा तक जोड़ेगा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुर कोंडागांव के मध्य निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति

डबल इंजन की सरकार के तहत विकास कार्यों को गति देते हुए बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। एनएच-130डी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है, एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में 122 किमी लंबा हिस्सा

नेशनल हाईवे 130-डी का कोंडागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है, जबकि कुतुल से महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक 21.5 किलोमीटर की दूरी है। इस प्रकार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी में से लगभग 122 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा, सुरक्षित और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री के सहयोग से मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेज गति से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगा, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र में विश्वास, निवेश तथा आवागमन को नई दिशा देगी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

दिल्ली में सड़क अवसंरचना और डी-कंजेशन योजनाओं की समीक्षा, ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य पर जोर

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली में प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति, यातायात भीड़ कम करने की रणनीतियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सेहरावत, दिल्ली के मुख्य सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली परिवहन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


चर्चा की शुरुआत करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण–अनुकूल गतिशीलता प्रणालियों के माध्यम से “विकसित भारत” की भावना को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण दिल्ली को एक आदर्श शहर के रूप में विकसित करना है—जो भीड़–मुक्त, बेहतर रूप से जुड़ा हुआ और भविष्य के लिए तैयार हो, साथ ही नागरिकों और यात्रियों के जीवन स्तर में सुधार लाए।

मल्होत्रा ने कहा कि “विकसित दिल्ली”—जो भीड़–मुक्त, जुड़ी हुई और नागरिक–केंद्रित हो—चार स्तंभों पर आधारित है:

  1. भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगाने वाली अवसंरचना, न कि केवल वर्तमान यातायात पर प्रतिक्रिया करने वाली।

  2. एकीकृत योजना—राजमार्गों को शहरी सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से जोड़ना।

  3. सतत गतिशीलता—उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन।

  4. लोगों को प्राथमिकता देने वाला डिजाइन—सुरक्षा, पहुंच और सुविधा पर विशेष जोर।

मंत्री ने UER-II के साथ बनने वाली द्वितीयक सर्विस सड़कों की समीक्षा की, जो आस-पास के गांवों और बस्तियों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना वर्तमान में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) चरण में है। स्थानीय नागरिकों की पहुंच, सुरक्षा और सर्विस सड़कों को कॉलोनियों, वाणिज्यिक क्षेत्रों और संस्थागत परिसरों से जोड़ने से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने DDA को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि NHAI, कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, अपने दायित्व समयबद्ध रूप से पूरे करेगी। साथ ही, NHAI और DDA को आपसी समन्वय के साथ आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ाने के निर्देश दिए।

मंत्री हर्ष मल्होत्रा और सांसद कमलजीत सेहरावत ने UER-II के खुलने के बाद द्वारका उप-नगर में बढ़ी यातायात भीड़ पर भी ध्यान दिया। यद्यपि UER-II का निर्माण DDA मास्टर प्लान के अनुरूप किया गया है, लेकिन आंतरिक कॉलोनियों और सेक्टरों में यातायात के उचित वितरण के लिए त्वरित योजना और क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई।

मंत्री ने DDA, नगर निगम दिल्ली (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य हितधारकों को निर्देश दिए कि वे द्वारका उप-नगर में भीड़ कम करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार करें—जैसे आंतरिक सड़कों से होकर गुजरने वाले यातायात का विचलन, हवाई अड्डे और गुरुग्राम कॉरिडोर से बेहतर संपर्क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के साथ बेहतर एकीकरण तथा बुद्धिमान यातायात प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना।

मंत्री ने दिल्ली के उन तीन प्रमुख सड़क कॉरिडोरों की भी समीक्षा की, जिन्हें रखरखाव, मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए PWD से NHAI को सौंपा गया है। ये तीन मार्ग—मथुरा रोड (आश्रम से बदरपुर बॉर्डर), ओल्ड दिल्ली–रोहतक रोड (पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर) और महरौली–गुरुग्राम रोड (महरौली से गुरुग्राम शहर)—कुल 33 किमी लंबे हैं और दिल्ली को पड़ोसी क्षेत्रों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग हैं। मंत्री ने परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने दिल्ली डी-कंजेशन प्लान की भी समीक्षा की और कार्यों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डी-कंजेशन केवल यातायात कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वाहन उत्सर्जन में कमी, यात्रा समय और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि होती है।

दिल्ली डी-कंजेशन प्लान के प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

  • दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे (NE-5) का KMPE से UER-II (NH-344M) तक विस्तार, जिससे UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और कटरा के बीच सीधा संपर्क मिलेगा।

  • UER-II (NH-344M) का अलीपुर के पास से दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) तक विस्तार, जो NH-44/दिल्ली आउटर–इनर रिंग रोड के लिए बाईपास का कार्य करेगा।

  • द्वारका एक्सप्रेसवे (शिव मूर्ति, महिपालपुर के पास) से नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज तक सड़क सुरंग का निर्माण, जिससे यातायात का सुगम प्रवाह सुनिश्चित होगा।

मंत्री ने केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) और सेतु बंधन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति, धन आवंटन और कार्यान्वयन की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाएं पूर्णता के निकट हैं। मंत्री ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में DDA, NHAI, PWD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली परिवहन विभाग, IGL के बीच लंबित अन्य मुद्दों—जैसे भूमि हस्तांतरण और राइट-ऑफ-वे स्वीकृतियां—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों के शीघ्र समाधान को परियोजनाओं की समय-सीमा बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया गया।

मंत्री ने सभी एजेंसियों को स्वीकृतियों के लिए समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। सभी एजेंसियों ने निरंतर समन्वय बनाए रखने और लंबित मामलों को शीघ्र निर्णय के लिए उच्च स्तर पर उठाने पर सहमति जताई।

दिल्ली के मुख्य सचिव ने कहा कि समन्वित और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही नागरिकों को वास्तविक लाभ मिलेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

समापन टिप्पणी में हर्ष मल्होत्रा ने “विकसित दिल्ली — डी-कंजेस्ट दिल्ली” के लक्ष्य को साकार करने के लिए साझेदारी में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया और सभी विभागों की रचनात्मक भागीदारी की सराहना करते हुए दिल्ली के अवसंरचना परिवर्तन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के लिए DPR तैयार करने हेतु मार्गदर्शिका का विमोचन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु मार्गदर्शिका’ का विमोचन किया

23 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा तैयार की गई ‘सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु मार्गदर्शिका’ का विमोचन किया।

BRO देश के सबसे दूरदराज और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में राजमार्गों और रणनीतिक सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। यह मार्गदर्शिका इंजीनियरिंग डिज़ाइन, निर्माण पद्धति, निष्पादन रणनीति, गुणवत्ता नियंत्रण और लागत विश्लेषण सहित DPR का समग्र दस्तावेज प्रदान करती है।

मार्गदर्शिका का उद्देश्य DPR तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले विनिर्देश, मानक, दिशानिर्देश और प्रक्रियाओं का संक्षिप्त, समग्र और एकरूप संदर्भ प्रदान करना है। यह इंजीनियरों को नए निर्माण या मौजूदा सड़क अवसंरचना के उन्नयन के हर चरण में सहायता प्रदान करेगी।

मार्गदर्शिका का लक्ष्य उन समय और लागत में बढ़ोतरी से जुड़े मुद्दों को दूर करना है जो अपर्याप्त रूप से तैयार DPR के कारण उत्पन्न होते हैं। यह परियोजनाओं की समय पर निष्पादन, रणनीतिक कनेक्टिविटी में सुधार और सीमा क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान को सुनिश्चित करेगी।

इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, DG सीमा सड़क संगठन लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन सहित अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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