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सड़क सुरक्षा पर जोर: हर्ष मल्होत्रा ने कहा—यह सिर्फ अभियान नहीं, राष्ट्रीय आंदोलन

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नई दिल्ली- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभर में जिम्मेदार सड़क उपयोग की संस्कृति विकसित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा हैं।

उन्होंने यह बात PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित ‘उत्तराखंड एडवेंचर राइड’ के तीसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाते हुए कही। इस दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्री मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत ने सड़क अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने PHDCCI की सराहना करते हुए कहा कि ‘उत्तराखंड एडवेंचर राइड’ जैसे कार्यक्रम रोमांचक पर्यटन और जन-जागरूकता का प्रभावी संयोजन हैं, जो समाज के विभिन्न वर्गों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाते हैं।

मंत्री ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिनमें करीब 45% मामले दोपहिया वाहनों से जुड़े होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा के दूत बनें और जिम्मेदार व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करें।

सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने ‘4E’ मॉडल—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन (Enforcement), शिक्षा और आपातकालीन देखभाल—को सड़क सुरक्षा का आधार बताया। उन्होंने दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) में सुधार, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत सख्त नियमों और बेहतर आपातकालीन सेवाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने ‘पीएम राहत योजना’ और ‘राह-वीर योजना’ जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जो दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता प्रदान करने को प्रोत्साहित करती हैं।

मंत्री मल्होत्रा ने युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों और संवाद के माध्यम से उनमें जिम्मेदार ड्राइविंग की आदत विकसित की जा रही है।

उन्होंने लोगों से हेलमेट न पहनना, तेज गति से वाहन चलाना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का उपयोग करना और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसी खतरनाक आदतों से बचने की अपील की।

सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:
“हेलमेट विकल्प नहीं, सुरक्षा है।”
“गति शक्ति नहीं, जोखिम है।”
“जीवन अनमोल है—सुरक्षा से बढ़कर कोई कॉल नहीं।”

उन्होंने बताया कि AI आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) और FASTag जैसी तकनीकों से सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा रहा है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदार मानव व्यवहार भी उतना ही जरूरी है।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट और मोटरसाइकिल समुदाय के 40 राइडर्स ने भाग लिया। मंत्री ने इसे सामूहिक प्रयास का प्रतीक बताते हुए सराहा।

अंत में, मंत्री मल्होत्रा ने सभी नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, जिम्मेदार ड्राइविंग अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसे सरकार, संस्थाओं और नागरिकों को मिलकर निभाना होगा।

सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रम

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रायपुर- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुक्रम में मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ शासन के मार्गदर्शन में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा द्वारा पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत प्रतिदिन जन-जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप की ओर से लीड एजेंसी द्वारा जन जागरूकता संबंधी तैयार पोस्टर एवं फ्लैक्स जारी किया गया। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रदेश के समस्त सरपंचों एवं पंचगणों को पंचायत अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु आवश्यक पहल करने के लिए एक अपील जारी किया गया। सड़क सुरक्षा माह के प्रथम दिवस 01 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी की अध्यक्षता में बेमेतरा में हेलमेट रैली को हरी झण्डी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। इसी कड़ी में 03 जनवरी को दुर्ग में संभाग स्तरीय अधिकारियों, संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, सात जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, शिक्षा, आबकारी, स्वास्थ्य निर्माण एजेंसियों की बैठक तथा 05 जनवरी को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की उपस्थिति में संबंधित विभागीय सचिवों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं को रोकने कार्ययोजना के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देने के साथ ही विशेष रूप से सर्वाधिक दुर्घटनाओं वाले जिले रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग के लिए समन्वित प्रयास से कार्ययोजना बनाया जाकर वर्ष 2026 के दौरान दुर्घटनाओं में कमी लाने के निर्देश दिये गये।

प्रदेश में वर्ष 2025 में गत वर्ष की तुलना में मृत्यु दर में यद्यपि कमी आई है। गत वर्ष की तुलना में यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही में लगभग 45 प्रतिशत अधिक (लगभग 9 लाख प्रकरणों) की जाकर लगभग 39 करोड़ रूपये परिशमन शुल्क संकलित किये गये। साथ ही जन जागरुकता के कार्यों के फलस्वरूप अर्थात् लगभग 3 प्रतिशत मृत्यु दर में कमी परिलक्षित हुई है। प्रदेश के 20 जिलों में मृत्युदर में कमी हुई है। रायपुर सहित अन्य 13 जिलों में मृत्यु दर को कम करने कार्य किए जा रहे हैं। इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी सहित दुर्घटना जन्य सड़क खण्डों में यथाशीघ्र सुधारात्मक उपायों एवं आकस्मिक उपचार हेतु त्वरित प्रतिक्रिया हेतु समुचित उपाय का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह 2026 के दौरान जन-जागरुकता के लिये यातायात पुलिस द्वारा प्रतिदिन पृथक-पृथक गतिविधियों के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। इसी अनुक्रम में वाहन चालकों एवं यात्रीगणों को बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, मोबाइल में बात करते हुए या नशे का सेवन कर तथा तेज गति से वाहन चलाने वालों को समझाईश देकर यातायात के नियमों का पालन करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही यातायात नियमों के पालन करने वालों को सम्मानित करने का कार्य भी किया जा रहा है।

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