Media24Media.com: BRICS Summit में भारत का दबदबा, PM मोदी ने वैश्विक चुनौतियों पर रखा भारत का पक्ष

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BRICS Summit में भारत का दबदबा, PM मोदी ने वैश्विक चुनौतियों पर रखा भारत का पक्ष

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नई दिल्ली- राजधानी नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit का आयोजन हो रहा है। दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख नेताओं की इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और Global South की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा केंद्र में है।

भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Summit में भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख रहे हैं।

ऊर्जा सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता

BRICS बैठक में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आई है। मौजूदा वैश्विक तनाव और कई महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते जोखिम के बीच सदस्य देशों ने ऊर्जा की लगातार और सुरक्षित आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया है।

भारत का कहना है कि विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि के लिए सस्ती, भरोसेमंद और uninterrupted energy supply बेहद जरूरी है।

BRICS देशों ने ऊर्जा infrastructure की सुरक्षा, supply chains को मजबूत करने और भविष्य में clean energy की ओर व्यवस्थित transition पर भी जोर दिया है।

Global South की आवाज को मजबूत करने पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को किसी देश या समूह के खिलाफ मंच बनाने के बजाय सहयोग और विकास का मंच बताया है।

भारत का जोर इस बात पर है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली का संदेश साफ है—Global South केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि वैश्विक नियमों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भागीदार होना चाहिए।

UN Security Council Reform का मुद्दा भी प्रमुख

Summit में संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं में सुधार की मांग भी महत्वपूर्ण रही है।

भारत लंबे समय से United Nations Security Council में सुधार और विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।

भारत का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाएं आज की दुनिया की वास्तविक आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करतीं। इसलिए उन्हें ज्यादा representative, inclusive और effective बनाने की जरूरत है।

भारत-चीन संबंधों पर भी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच महत्वपूर्ण बातचीत भी हुई।

दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर और बेहतर बनाने के साथ-साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भारत और चीन के बीच किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दोनों देश BRICS के प्रमुख सदस्य हैं और एशिया की राजनीति एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी बड़ी भूमिका है।

UAE और Iran के साथ भारत की कूटनीति

Summit के दौरान भारत ने UAE और Iran के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीत की।

UAE के साथ defence, AI, space, energy, critical minerals और connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

वहीं Iran के साथ बातचीत में Middle East की स्थिति, maritime security और energy routes जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।

भारत की कोशिश है कि BRICS के मंच का इस्तेमाल केवल आर्थिक सहयोग के लिए ही नहीं, बल्कि संवाद और diplomatic engagement के लिए भी किया जाए।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा

BRICS देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार में alternative payment mechanisms और national currencies के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा जारी है।

इसका उद्देश्य अचानक डॉलर को खत्म करना नहीं है, बल्कि BRICS देशों को international trade और financial system में वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराना है।

अगर सदस्य देशों के बीच local currencies में व्यापार और payment systems बढ़ते हैं, तो इससे cross-border trade को कुछ परिस्थितियों में अधिक flexibility मिल सकती है।

Infrastructure और Supply Chain की सुरक्षा

BRICS Summit में यह भी स्पष्ट हुआ कि आज के दौर में infrastructure का मतलब केवल सड़क, रेलवे, बंदरगाह और बिजली संयंत्र नहीं है।

अब digital networks, energy grids, undersea cables, transportation corridors और critical mineral supply chains भी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं।

ऐसे infrastructure को cyber attacks, physical attacks और geopolitical disruptions से सुरक्षित रखना BRICS देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह Summit?

BRICS Summit भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

एक तरफ भारत Global South की leadership को मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ चीन, रूस, UAE और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर भी BRICS के माध्यम से मिलता है।

भारत का प्रयास है कि वह East और West दोनों के साथ अपने strategic और economic relations को संतुलित रखते हुए वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करे।

Bottom Line

नई दिल्ली में चल रहा BRICS Summit केवल नेताओं की बैठक नहीं है। यह बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था में भारत और अन्य emerging economies की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है।

Energy security से लेकर global trade, infrastructure protection से लेकर UN reforms और Global South की आवाज तक—इन सभी मुद्दों पर भारत अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रख रहा है।

नई दिल्ली से संदेश साफ है—BRICS के जरिए भारत एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की पैरवी कर रहा है जिसमें विकासशील देशों की आवाज ज्यादा मजबूत, प्रतिनिधित्व ज्यादा व्यापक और वैश्विक सहयोग ज्यादा प्रभावी हो।

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