Media24Media.com: हरतालिका तीज पर क्या करें और क्या न करें? जानें व्रत के जरूरी नियम

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हरतालिका तीज पर क्या करें और क्या न करें? जानें व्रत के जरूरी नियम

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14 सितंबर को मनाई जाएगी हरतालिका तीज, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि की कामना से सुहागिन महिलाएं रखेंगी व्रत


हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन माना जाता है। इस दौरान व्रती महिलाओं को कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। पंडित राकेश झा के अनुसार, व्रत के दौरान खान-पान, पूजा और आचरण से जुड़े कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

हरतालिका तीज व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

काले, नीले और सफेद वस्त्र पहनने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन काले, नीले और सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। शुभ अवसर पर लाल, पीले या हरे जैसे रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

नमक और मीठे का सेवन न करें

मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज के निर्जला व्रत में नमक और मीठे व्यंजनों का सेवन नहीं किया जाता। कुछ धार्मिक मान्यताओं में मीठा खाने को अगले जन्म से जुड़ी मान्यताओं के साथ जोड़ा गया है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।

पति और परिवार से विवाद न करें

व्रत के दिन मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसलिए पति या परिवार के किसी सदस्य से वाद-विवाद करने, अपशब्द बोलने और नकारात्मक विचार रखने से बचना चाहिए।

अनाज और फल का सेवन न करने की मान्यता

हरतालिका तीज का व्रत पारंपरिक रूप से निर्जला रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में अनाज और फल का सेवन भी नहीं किया जाता। फल खाने को लेकर भी कुछ लोक मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनमें अगले जन्म से जुड़ी बातें कही जाती हैं।

निर्जला व्रत में पानी पीने से बचें

हरतालिका तीज को निर्जला व्रत के रूप में रखने की परंपरा है। यानी व्रत के दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर जबरन निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

दिन में सोने से बचें

मान्यता है कि हरतालिका तीज के व्रत में दिन में शयन नहीं करना चाहिए। इसके बजाय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करने की परंपरा है। रात में जागरण करने की भी धार्मिक मान्यता है।

पारण के बाद तामसिक भोजन न करें

व्रत के अगले दिन पारण करते समय भी सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। पारण के तुरंत बाद तामसिक या अत्यधिक भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

हरतालिका तीज पर क्या करना चाहिए?

सूर्योदय से पहले स्नान करें

व्रती महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद पूजा की तैयारी करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद लाल, पीले या अन्य शुभ रंग के वस्त्र धारण किए जा सकते हैं।

सात्विक आचरण रखें

व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करने और मन, वचन व कर्म से सात्विक रहने की परंपरा है। घर में भी सात्विक भोजन बनाने और सकारात्मक माहौल बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

सोलह श्रृंगार करें और मेहंदी लगाएं

हरतालिका तीज पर सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन मेहंदी लगाती हैं और सुहाग से जुड़ी वस्तुओं का श्रृंगार करती हैं। पूजा के दौरान सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करने की भी परंपरा है।

भगवान शिव-पार्वती की पूजा और मंत्र जाप करें

व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना चाहिए। मंत्र जाप, भजन-कीर्तन और हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अगले दिन विधि से करें व्रत का पारण

हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन पूजा के बाद पारण करके पूरा किया जाता है। पारण के समय पहले जल ग्रहण करने और इसके बाद हल्का व सात्विक भोजन करने की परंपरा है।

ध्यान दें: हरतालिका तीज के व्रत से जुड़े नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में कुछ अलग हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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