Media24Media.com: BRICS SUMMIT 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

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BRICS SUMMIT 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

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नई दिल्ली- भारत में होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS Summit आयोजित होगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे समय में यह सम्मेलन हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई देशों के नेता और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचेंगे। शी जिनपिंग की भारत यात्रा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा।

सबसे बड़ा मुद्दा होगा पश्चिम एशिया का संकट

इस बार BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव तेल, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

BRICS के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संगठन के सदस्य देशों के बीच ही इस संकट को लेकर अलग-अलग हित हैं। ईरान BRICS का सदस्य है, जबकि UAE और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश भी समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए आसान नहीं होगा।

भारत की कूटनीतिक परीक्षा

भारत की कोशिश होगी कि BRICS को किसी एक पक्ष के समर्थन में खड़ा करने के बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का रास्ता आगे बढ़ाया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। ईरान और रूस के नेताओं के साथ भारत की हालिया बातचीत में भी यही रुख सामने आया है।

शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर भी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है। ऐसे में BRICS Summit दोनों देशों को राजनयिक संबंधों को और बेहतर करने का अवसर दे सकता है।

हालांकि व्यापार और निवेश के मोर्चे पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुतिन के साथ भी अहम बातचीत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी सम्मेलन को खास बनाती है।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच BRICS Summit के दौरान द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है।

भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि रूस के साथ उसके संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं और दोनों देश वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।

तेल और ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए स्थिति और महत्वपूर्ण हो जाती है।

महंगा कच्चा तेल भारत के लिए कई तरह की मुश्किलें पैदा कर सकता है—

महंगा तेल → आयात बिल बढ़ेगा → रुपये पर दबाव → महंगाई बढ़ने का खतरा

इसी वजह से BRICS में ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री व्यापार पर चर्चा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

BRICS के एजेंडे में सिर्फ युद्ध नहीं

BRICS Summit में पश्चिम एशिया संकट के अलावा कई आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:

  • खाद्य सुरक्षा

  •  ऊर्जा सुरक्षा

  •  व्यापार और निवेश

  •  तकनीक और डिजिटल सहयोग

  •  टिकाऊ विकास

  •  स्वास्थ्य सहयोग

  •  सप्लाई चेन की मजबूती

  •  वैश्विक संस्थाओं में सुधार

  •  क्षेत्रीय और वैश्विक शांति

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है। भारत की कोशिश BRICS सहयोग को केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय विकास और व्यावहारिक सहयोग से जोड़ने की है।

दिल्ली घोषणापत्र पर होगी नजर

दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में New Delhi Declaration जारी करने की कोशिश होगी। लेकिन पश्चिम एशिया के मुद्दे पर BRICS देशों के अलग-अलग रुख के कारण संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाना बड़ी चुनौती हो सकती है।

यही वजह है कि इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि BRICS देश क्या घोषणा करते हैं, बल्कि यह भी है कि क्या वे मौजूदा वैश्विक संकटों पर एक साझा आवाज बना पाते हैं?

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दुनिया के कई बड़े नेताओं के दिल्ली पहुंचने के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए अलग-अलग सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

भारत के लिए कितना बड़ा मौका?

BRICS Summit भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक नेतृत्व दिखाने का बड़ा अवसर है।

एक तरफ भारत को रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ संबंधों को संभालना है, दूसरी तरफ ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना है। साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी ध्यान में रखना है।

ऐसे में इस पूरे सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी चुनौती होगी—

“सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखते हुए BRICS को एकजुट रखना।”

अगर भारत इस चुनौती को सफलतापूर्वक संभालता है और सदस्य देशों के बीच किसी साझा रुख पर सहमति बनती है, तो यह सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।


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