Media24Media.com: महासमुंद में सरकारी योजना में कथित बड़ा फर्जीवाड़ा, दो बच्चों की 14 बार शादी दिखाकर ₹91 लाख निकालने का आरोप; 3 साल से जांच लंबित

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महासमुंद में सरकारी योजना में कथित बड़ा फर्जीवाड़ा, दो बच्चों की 14 बार शादी दिखाकर ₹91 लाख निकालने का आरोप; 3 साल से जांच लंबित

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महासमुंद- जिले में सरकारी योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड में दो बच्चों की अलग-अलग प्रविष्टियों के जरिए कुल 14 बार शादी दर्शाकर करीब ₹91 लाख की सरकारी सहायता राशि निकाले जाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन करीब तीन साल बीतने के बावजूद जांच किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।

सात दिन में मांगी गई थी जांच रिपोर्ट

मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच के निर्देश जारी किए गए थे। प्रारंभिक तौर पर जांच टीम को दस्तावेजों, लाभार्थियों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, तय समयसीमा में जांच पूरी नहीं हो सकी।

इसके बाद मामले की जांच के लिए अलग-अलग स्तर पर समितियां गठित की गईं। रिपोर्टों के अनुसार, करीब तीन साल से जांच प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक मामले में अंतिम रिपोर्ट और जिम्मेदारी तय होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

14 बार शादी की प्रविष्टियों ने उठाए सवाल

मामले में सबसे गंभीर सवाल रिकॉर्ड में दर्ज कथित 14 विवाह प्रविष्टियों को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि दो बच्चों से संबंधित रिकॉर्ड में अलग-अलग प्रविष्टियों का इस्तेमाल कर सरकारी सहायता राशि का भुगतान कराया गया।

करीब ₹91 लाख की राशि से जुड़े इस मामले में अब यह जांच का विषय है कि लाभार्थियों की पहचान, पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि एक जैसी या संदिग्ध प्रविष्टियां बार-बार सामने आने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया में उन्हें चिन्हित क्यों नहीं किया गया।

दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड की जांच अहम

पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए आवेदन पत्र, लाभार्थियों के दस्तावेज, स्वीकृति रिकॉर्ड, भुगतान आदेश और संबंधित बैंक खातों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यदि जांच में गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या नियमों के विपरीत भुगतान की पुष्टि होती है, तो इसमें शामिल लोगों के साथ-साथ सत्यापन और स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, अभी इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

तीन साल बाद भी जांच पूरी होने का इंतजार

करीब तीन साल से लंबित इस प्रकरण ने सरकारी योजनाओं में लाभार्थी सत्यापन, रिकॉर्ड प्रबंधन, भुगतान प्रक्रिया और विभागीय जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

फिलहाल पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि करीब ₹91 लाख के भुगतान में वास्तविक अनियमितता कितनी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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