Media24Media.com: “बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले रक्षक नहीं, भक्षक हैं” — गेंदलाल कोकडिया

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“बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले रक्षक नहीं, भक्षक हैं” — गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के सरकारी स्कूल में शिक्षकों की हड़ताल और रैली का कोई असर देखने को नहीं मिला। विद्यालय के शिक्षक  गेंदलाल कोकडिया एवं हेमन्त कुमार देवांगन नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहे और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रखी। वहीं संकुल खट्टा सहित आसपास के अनेक विद्यालयों में शिक्षक हड़ताल में शामिल रहे और विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित रहा।

इस अवसर पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि “रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि सुरक्षा, शुभता, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसे बांधने वाला व्यक्ति स्वयं जागरूक, जिम्मेदार और समझदार होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं भ्रमित हो, वह दूसरों को सुरक्षा और सही दिशा कैसे दे सकता है? इसी प्रकार यदि शिक्षक ही हड़ताल के कारण विद्यालय बंद कर दें और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो, तो यह शिक्षक के मूल दायित्व के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का सबसे सम्माननीय और जिम्मेदारी वाला पद है। शिक्षक का प्रथम कर्तव्य बच्चों को शिक्षा देना, उनके भविष्य को संवारना और उनमें आत्मविश्वास तथा संस्कार विकसित करना है। इसलिए शिक्षकों को अपनी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए हड़ताल या रैली में शामिल होने के बजाय अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संवाद करना चाहिए।

कोकडिया ने कहा कि “बच्चों का भविष्य किसी भी आंदोलन या मांग से अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यालय बंद होने से सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों का होता है, जिनकी शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षक के कंधों पर है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति रक्षक नहीं, भक्षक बनने जैसा कार्य करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चा शिक्षक वही है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों के बीच उपस्थित रहकर सुरक्षा, शुभता, संस्कार और आत्मविश्वास का भाव जगाए। शिक्षक केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का निर्माता और समाज का मार्गदर्शक होता है।

गेंदलाल कोकडिया ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा—

“शिक्षक सबसे पहले और सबसे अधिक सम्माननीय व्यक्ति है। इसलिए शिक्षक का पहला धर्म बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य की रक्षा करना होना चाहिए।”

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