Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन

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छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन

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धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों ने दिए सुझाव 

​रायपुर- समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस द्वय शत्रुघ्न सिंह और एम.के.राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े के समक्ष आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक और सामाजिक संगठनों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों  की बैठक आयोजित कर समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव लिए गए।  संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से गठित यूसीसी समिति के समक्ष धार्मिक और सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न वर्गों सहित आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों की सहभागिता लगातार देखने को मिल रही है।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में एक समान नियम बनाना है। पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार दिया गया है। इसके तहत मौखिक तलाक और कुछ अन्य धार्मिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। इसके लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव  देने के लिए उपस्थित रहे। 

समान नागरिक संहिता के लिए विभिन्न आयोग, निगम, मंडल के पदाधिकारियों, विभिन्न समाज के प्रमुखो, पदाधिकारियों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में  सुझाव देने वालों में उपाध्यक्ष मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के जान राजेश पॉल, अध्यक्ष मुस्लिम समाज सलाम रिजवी, अध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी इंद्रजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण ललित चंद्राकर,  राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा शामिलथे स इसी प्रकार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य  सरला कोसरिया तथा दीपिका सोरी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग विशेषर पटेल, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष लखन लाल धीवर, जैतू साव मठ के महंत राम सुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

एक समान विधिक ढाँचा तैयार करने की दिशा में बढ़ाया कदम 

छत्तीसगढ़ में सभी नागरिकों को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान व न्यायसंगत अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाये जाने का सुझाव दिया। ​प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के मुख्य आयाम में​ सर्व समावेशी समानता को शामिल किया गया है। धर्म या समुदाय से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक ढाँचा तैयार करना के दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसमें उत्तराधिकार और वैवाहिक अधिकारों में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना और असमानता पैदा करने वाले नियमों को समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं और भ्रम को दूर कर एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित संहिता का निर्माण करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा रहा है।

जनजातीय परंपराओं का संरक्षण

राज्य की विशिष्ट जनजातीय और रूढ़िगत परंपराओं पर प्रस्तावित सुधारों के व्यावहारिक प्रभावों का संवेदनशीलता से आकलन किया जाएगा। ​प्रदेशव्यापी जन-संवाद से समावेशी प्रारूप की तैयारी के लिए गठित यह समिति राज्य के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक- धार्मिक संगठनों और कानूनविदों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस विस्तृत परिचर्चा से राज्य में एक पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।

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