Media24Media.com: भारत अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो जैव प्रौद्योगिकी और AI से संचालित होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो जैव प्रौद्योगिकी और AI से संचालित होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अगली औद्योगिक क्रांति जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित होगी, जबकि पिछली औद्योगिक क्रांति IT आधारित थी और भारत उसमें देर से शामिल हुआ था।

एक मीडिया कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल है, जिनके पास समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति ‘BioE3’ है। इसके अलावा भारत के पास राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और इंडिया AI मिशन भी हैं तथा अंतरिक्ष और अन्य उभरते क्षेत्रों में देश ने तेजी से प्रगति की है।

उन्होंने बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो पहले लगभग नगण्य थी, अब करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर की हो गई है और अगले 8 से 9 वर्षों में 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

मीडिया कॉन्क्लेव में प्रौद्योगिकी डेवलपर्स, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ संवाद करते हुए मंत्री ने भारत के वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरने, तकनीकी बदलाव की तेज गति, नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने डिजिटल अप्लायंस अवॉर्ड्स के विजेताओं को भी बधाई दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तकनीकी यात्रा में बड़ा बदलाव आया है और आज देश कई क्षेत्रों में वैश्विक मानकों के अनुरूप काम कर रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चंद्रयान मिशन द्वारा चंद्रमा पर जल अणुओं के प्रमाण का पता लगाने को वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान में भारत के योगदान का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भारत में कभी प्रतिभा या वैज्ञानिक क्षमता की कमी नहीं रही, बल्कि आवश्यकता ऐसे सक्षम नीतिगत वातावरण की थी, जो इन क्षमताओं को वास्तविक उपलब्धियों में बदल सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पारंपरिक विनिर्माण के साथ-साथ जैव प्रौद्योगिकी, सर्कुलर इकोनॉमी, रीसाइक्लिंग और अन्य तकनीक-आधारित क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार औद्योगिक परिवर्तन का अगला चरण मुख्य रूप से AI और जैव प्रौद्योगिकी से संचालित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव का पहले से ही हिस्सा है और उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति है। सरकार की BioE3 पहल—Biotechnology for Economy, Employment and Environment का उद्देश्य देश में जैव प्रौद्योगिकी के मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण करना है। जैव प्रौद्योगिकी का प्रभाव चिकित्सा विज्ञान, कृषि और खाद्य उत्पादन पर बढ़ेगा तथा इससे आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इस निर्णय ने यह साबित किया है कि सक्षम नीतिगत ढांचा देश की क्षमताओं को किस तरह सामने ला सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अब करीब 9 अरब डॉलर की है और तेजी से विस्तार कर रही है।

उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के उभरने को इस बदलाव का उदाहरण बताया। कई भारतीय कंपनियों ने अपने रॉकेट विकसित किए हैं और कुछ ने कुछ ही वर्षों में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा और क्षमता पहले से मौजूद थी, अब उस क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उन क्षेत्रों में भी निजी क्षेत्र को तेजी से शामिल कर रही है, जो पहले मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र तक सीमित थे। परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन उद्योग जगत को भी उभरते क्षेत्रों के लिए आवश्यक क्षमताएं विकसित करने के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि 2047 के भारत के विजन से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश के पास सीमित समय है। वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र को विकसित होना होगा और निजी क्षेत्र को नए क्षेत्रों में भागीदारी के लिए तैयार रहना होगा। सरकार इस बदलाव के लिए आवश्यक अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।

मंत्री ने कहा कि तकनीक शिक्षा और अवसरों तक पहुंच को भी बदल रही है, खासकर महानगरों से बाहर रहने वाले युवाओं के लिए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के एक छात्र के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख किया, जिसने डिजिटल लर्निंग संसाधनों की मदद से IIT-JEE परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने कहा कि तकनीक ने शिक्षा के ऐसे अवसरों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है, जो पहले कई लोगों के लिए कठिन थे।

उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी यह दर्शाता है कि नवाचार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में युवा उद्यमी सामने आ रहे हैं। तकनीक तक पहुंच और उसका प्रभावी उपयोग युवा भारतीयों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुराने कानूनों और प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 2,000 अप्रचलित कानूनों को हटाया गया है, जिनमें ऐसे प्रावधान भी शामिल थे जो सामाजिक और प्रशासनिक बदलावों के बावजूद पुराने दौर से चले आ रहे थे।

उन्होंने अविवाहित बेटियों के लिए पारिवारिक पेंशन अधिकार, महिला सरकारी कर्मचारियों के नामांकन अधिकार और 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले मृत्यु होने वाले कर्मचारियों के परिवारों से जुड़े पेंशन प्रावधानों में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बड़ी संख्या में दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने के फैसले को भी याद किया और कहा कि यह नागरिकों तथा युवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 के भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को केवल अनुकरण करने वाले राष्ट्र की भूमिका से आगे बढ़ना होगा और ऐसी क्षमताओं एवं नवाचारों को विकसित करना होगा, जिन्हें दूसरे देश भी अपनाना चाहें। इसके लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच व्यापक साझेदारी का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले मौजूद संदेह को आपसी सीख और सहयोग से बदलना होगा। सरकार और उद्योग को एक-दूसरे से सीखते हुए प्रभावी कार्यप्रणालियों को अपनाना और बेहतर तालमेल के साथ काम करना होगा।

मंत्री ने कहा कि भारत के बड़े विकासात्मक, तकनीकी और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए “पूरी सरकार के साथ पूरा राष्ट्र” (Whole of Government + Whole of Nation) का दृष्टिकोण आवश्यक होगा।

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