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अवतार ने लॉन्च किया ‘वार्या’ – भारत का किफायती और स्वदेशी AI वीडियो मॉडल

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AI-नेटिव ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी Avataar ने आज ‘वार्या’ (Varya) नामक एक उन्नत AI वीडियो मॉडल लॉन्च किया। यह मॉडल भारत के अगले दौर के उपयोगकर्ताओं के लिए सस्ता, सुलभ और भारतीय संदर्भों के अनुरूप वीडियो AI उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इस मॉडल का अनावरण किया गया, जिसमें भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन और अवतार की नेतृत्व टीम उपस्थित रही।

भारत की विविधता को समझने वाला AI

वार्या को किसी सामान्य भारतीय अवधारणा के लिए नहीं, बल्कि भारत की विविध वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मॉडल भारत के विभिन्न क्षेत्रों, त्योहारों, समुदायों, भोजन, परिधान, सार्वजनिक स्थानों और दैनिक जीवन से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों को समझने और उनके अनुरूप वीडियो तैयार करने में सक्षम है।

इसके माध्यम से:

  • गांव का शिक्षक दृश्यात्मक पाठ तैयार कर सकता है।

  • MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) अपने उत्पादों के विज्ञापन बना सकते हैं।

  • आम नागरिक वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इंडियाAI मिशन का सहयोग

अवतार उन कंपनियों में शामिल है जिन्हें IndiaAI Mission के तहत स्वदेशी फाउंडेशन AI क्षमताओं के विकास के लिए चुना गया था।

राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग अवसंरचना तक सब्सिडी वाली पहुंच ने वार्या के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक AI अवसंरचना किस प्रकार घरेलू नवाचार को गति दे सकती है।

सिर्फ 4 चरणों में वीडियो निर्माण

वार्या की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिस्टिलेशन तकनीक है।

जहां सामान्य वीडियो AI मॉडल वीडियो तैयार करने के लिए लगभग 50 चरणों से गुजरते हैं, वहीं वार्या केवल 4 चरणों में समान गुणवत्ता वाला वीडियो तैयार कर सकता है।

कंपनी के अनुसार:

  • वीडियो निर्माण लागत लगभग ₹0.48 प्रति सेकंड है।

  • यह कई प्रमुख वैश्विक वीडियो मॉडलों की तुलना में 10 गुना तक अधिक किफायती है।

“Idea → Video → Story”

वार्या का उपयोग बेहद सरल बनाया गया है।

उपयोगकर्ता:

  1. कोई विचार टाइप कर सकता है,

  2. कोई तस्वीर अपलोड कर सकता है,

  3. वीडियो तैयार कर सकता है,

  4. और आगे नए क्लिप जोड़कर कहानी को जारी रख सकता है।

एक साधारण प्रॉम्प्ट से पाठ, विज्ञापन, मार्गदर्शिका, फिल्म या व्यक्तिगत स्मृति का निर्माण किया जा सकता है।

भारत की AI महत्वाकांक्षा का प्रतीक

लॉन्च के दौरान सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वार्या भारत की AI यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण की दिशा में देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फाउंडेशन मॉडल भारत में अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देंगे तथा विश्वस्तरीय और जन-सुलभ AI समाधान विकसित करने में मदद करेंगे।

“किफायती AI ही समावेशी AI है”

अवतार के सह-संस्थापक एवं CEO Sravanth Aluru ने कहा कि भारत का AI भविष्य केवल सबसे बड़े मॉडलों से नहीं, बल्कि सबसे अधिक दक्ष मॉडलों से तय होगा।

उनके अनुसार:

"1.4 अरब लोगों के देश में किफायत कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है।"

उन्होंने कहा कि AI की अगली पीढ़ी की कहानियां, शिक्षा, विज्ञापन और सेवाएं तभी सफल होंगी जब वे सभी के लिए उपलब्ध हों।

डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन क्या है?

डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन मशीन लर्निंग की एक मॉडल-कम्प्रेशन तकनीक है, जिसमें एक छोटा और तेज़ "स्टूडेंट मॉडल" बड़े और जटिल "टीचर मॉडल" की क्षमताओं को सीखता है।

इस प्रक्रिया से:

  • अनावश्यक गणनाएं कम हो जाती हैं,

  • वीडियो तेजी से तैयार होता है,

  • लागत घटती है,

  • और गुणवत्ता लगभग समान बनी रहती है।

वार्या भारत का पहला ऐसा वीडियो मॉडल माना जा रहा है जिसने इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाकर तेज, किफायती और जन-सुलभ वीडियो AI उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।


भारत में एआई शिक्षा सुधार की बड़ी पहल: उद्योग के साथ मिलकर पाठ्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी

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भारत सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पाठ्यक्रम में व्यापक सुधार की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि छात्रों को उभरती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर रूप से तैयार किया जा सके। इस संबंध में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एआई पाठ्यक्रम टास्कफोर्स के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

मौजूदा पाठ्यक्रम का अध्ययन

टास्कफोर्स ने देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चल रहे बी.टेक (कंप्यूटर साइंस एवं संबंधित शाखाओं) के पाठ्यक्रम का आधारभूत अध्ययन किया। यह अध्ययन उद्योग विशेषज्ञों और नैसकॉम के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि भारत में एआई से जुड़े विषयों का विस्तार हुआ है, लेकिन अभी भी शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचे और व्यावहारिक प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण अंतर मौजूद हैं। विशेष रूप से जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (MLOps) और फाउंडेशन मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता बताई गई।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

टास्कफोर्स ने पाठ्यक्रम सुधार के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  • व्यावहारिक आधारित शिक्षण: पहले सेमेस्टर से ही वास्तविक उद्योग उपयोग मामलों पर आधारित शिक्षा

  • क्रेडिट-आधारित एकीकरण: एआई पाठ्यक्रम को औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट प्रणाली में शामिल करना

  • व्यावहारिक प्रशिक्षण में वृद्धि: 25–30% से बढ़ाकर 40–75% तक व्यावहारिक अनुभव

  • उद्योग-एकीकृत शिक्षण: कैपस्टोन प्रोजेक्ट और एआई समाधान विकास पर जोर

  • जिम्मेदार एआई: सभी सेमेस्टर में एआई गवर्नेंस और नैतिकता का समावेश

  • मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम: प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और उन्नत डिप्लोमा की सुविधा

शिक्षक विकास पर जोर

बैठक में यह भी माना गया कि पाठ्यक्रम सुधार के साथ-साथ शिक्षकों का प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसके लिए निम्न सुझाव दिए गए:

  • ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम

  • मानकीकृत मूल्यांकन ढांचा

  • आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना

  • उद्योग विशेषज्ञों को सहायक शिक्षक के रूप में शामिल करना

साझा एआई अवसंरचना

एक राष्ट्रीय स्तर के साझा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जिसमें सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को GPU कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक तकनीकों तक समान पहुंच मिल सकेगी।

भविष्य की कार्ययोजना

बैठक में निम्नलिखित अगले कदमों पर सहमति बनी:

  • राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों और आवश्यकताओं का आकलन

  • एआईसीटीई के साथ समन्वय कर नए पाठ्यक्रम को लागू करना

  • उद्योग-आधारित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • गैर-तकनीकी विषयों में एआई जागरूकता के लिए अलग कार्ययोजना

यह पहल भारत में एआई शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती सार्वजनिक नीति संस्थान के सहयोग से 23 मई 2026 को आईएसबी मोहाली परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” का आयोजन किया।

शिखर सम्मेलन के चौथे संस्करण की शुरुआत उद्घाटन मुख्य भाषण से हुई, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने संबोधित किया। उन्होंने ऐसे एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतिम छोर पर मौजूद प्रत्येक नागरिक की सेवा कर सके।

उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए उत्पादकता बढ़ाने, शासन व्यवस्था में सुधार करने तथा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई के कारण बौद्धिक कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का उपयोग करने की विशिष्ट स्थिति में है।

पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता, तथा रोजगार सृजन और डिजिटल उद्यमिता जैसे विषय शामिल थे। इसके साथ ही एक समानांतर गोलमेज चर्चा में राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में भारती सार्वजनिक नीति संस्थान, आईएसबी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी प्रशासनिक ढांचे में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एआई को एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।”

उन्होंने असमानता, तकनीकी छलांग लगाने के अवसर और भविष्य के रोजगार को उभरते एआई परिदृश्य के प्रमुख आयाम बताया। प्रोफेसर छत्रे ने यह भी कहा कि एआई से जुड़े अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त सुरक्षा उपाय, सामाजिक सुरक्षा तंत्र और सकारात्मक नीतिगत कदम आवश्यक हैं।

इस शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस तथा कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों की भागीदारी रही।

इंडियाAI मिशन और NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया

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इंडियाAI मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई 2026 को IISc बेंगलुरु में AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया। यह आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शोकेस का समापन था, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

यह हैकाथॉन NHA और IISc बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दावों (क्लेम्स) के निपटान की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाना तथा धोखाधड़ी (फ्रॉड) की पहचान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बर्नवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह, NHA की संयुक्त सचिव ज्योति यादव तथा MeitY की संयुक्त निदेशक शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया, जिनके समाधान AI आधारित क्लेम प्रोसेसिंग को बदलने की क्षमता रखते हैं।

यह हैकाथॉन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1900+ उपचार पैकेजों के लिए बड़ी संख्या में क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं।

हैकाथॉन विजेता

समस्या विवरण 1: क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन एवं STG अनुपालन

अलग-अलग गुणवत्ता वाले मेडिकल दस्तावेजों को पढ़कर महत्वपूर्ण डेटा निकालना, आवश्यक विज़ुअल तत्वों की पहचान करना और NHA द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) के अनुपालन की जांच करना।

  • विजेता: विनय बाबू उल्ली

  • रनर-अप:  खुशी सिंह

  • द्वितीय रनर-अप: विजय बालाजी

समस्या विवरण 2: रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित रोग पहचान एवं रिपोर्ट मिलान

एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का विश्लेषण कर उन्हें रिपोर्ट से मिलाकर सही तरीके से क्लेम का सत्यापन करना।

  • विजेता: हरीश कुमार

  • रनर-अप:  भरत वर्मा संगाराजू

  • द्वितीय रनर-अप: अर्नोल्ड सचित

समस्या विवरण 3: डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा एवं डीपफेक पहचान

फर्जी या AI-जनरेटेड दस्तावेजों, जैसे कि नकली डिस्चार्ज समरी, बिल में छेड़छाड़ और फर्जी पहचान की पहचान करना।

  • विजेता: प्रवीण श्रीधर

  • रनर-अप: निकिलेश्वर राव सुलाके

  • द्वितीय रनर-अप: सुमंत नायडू माथिरेड्डी

विजेता टीमों को क्रमशः ₹5 लाख, ₹3 लाख और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधान भविष्य में AB PM-JAY प्रणाली में लागू किए जा सकते हैं।

भारत में AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन 2026 का सफल समापन

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने इंडिया एआई मिशन और भारतीय विज्ञान संस्थान के सहयोग से AB PM-JAY ऑटो-अडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 का सफलतापूर्वक समापन किया।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत स्वास्थ्य बीमा दावों की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

3,500 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी

इस हैकाथॉन में देशभर से स्टार्टअप, छात्र, शोधकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। 3,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और उनके समाधानों का मूल्यांकन विशेषज्ञ जूरी द्वारा किया गया।

प्रमुख श्रेणियों में विजेता

तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों में विजेताओं का चयन किया गया—

1. क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और STG अनुपालन

  • विजेता: टीम निर्णय (विनय बाबू उल्ली)

  • रनर-अप: आईआईआईटी ग्वालियर की टीम

  • द्वितीय रनर-अप: विदाल हेल्थ टीम

2. रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित डिटेक्शन

  • विजेता: टीम बिल्टआईक्यू एआई (हरिश कुमार)

  • रनर-अप:टीम कण्टक शोधना

  • द्वितीय रनर-अप: टीम अर्नोल्ड सचिथ एवं डॉ. स्मिता राव

3. डॉक्यूमेंट फ्रॉड / डीपफेक डिटेक्शन

  • विजेता: टीम सोपा क्लेम्स (प्रवीण श्रीधर, स्नेहल जोशी)

  • रनर-अप: आरजीयूकेटी-नुज़विद की टीम फॉरेंसिक

  • द्वितीय रनर-अप: टीम सुश्रुत हेल्थ एआई

पुरस्कार राशि

  • विजेता: ₹5 लाख

  • रनर-अप: ₹3 लाख

  • द्वितीय रनर-अप: ₹2 लाख

AI और डिजिटल स्वास्थ्य पर चर्चा

कार्यक्रम में “दावों के निपटान (क्लेम्स एडजुडिकेशन) का भविष्य” और “एआई के युग में धोखाधड़ी, अपव्यय और दुरुपयोग” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य बीमा में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पर फोकस

एक विशेष राउंडटेबल में बड़े अस्पतालों के साथ  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) को लागू करने पर चर्चा हुई, जिसमें डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ABHA और इंटरऑपरेबल सिस्टम जैसे विषय शामिल रहे।

निष्कर्ष

NHA ने कहा कि यह पहल भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ाकर दावों की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘एआई और जेंडर सशक्तिकरण’ केसबुक का शुभारंभ

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एआई और जेंडर सशक्तिकरण पर केसबुक का आधिकारिक शुभारंभ India AI Impact Summit 2026 में किया गया। यह भारत की समावेशी और नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रति प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह केसबुक Government of India द्वारा IndiaAI Mission के तहत Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के नेतृत्व में विकसित की गई है। इसे UN Women के सहयोग से तथा Ministry of Women and Child Development (MoWCD) के समर्थन से तैयार किया गया है।

इस प्रकाशन में ग्लोबल साउथ के विभिन्न देशों से चुने गए 23 वास्तविक एआई समाधानों को शामिल किया गया है, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर मापनीय प्रभाव दर्शाते हैं।

आधिकारिक लॉन्च

केसबुक का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया गया:

  • S. Krishnan, सचिव, MeitY

  • Anil Malik, सचिव, MoWCD

  • Christine Arab, क्षेत्रीय निदेशक, यूएन वीमेन एशिया एवं प्रशांत

वैश्विक स्तर पर मिली पहचान

समिट के दौरान António Guterres, महासचिव, United Nations ने 20 फरवरी 2026 को जनएआई एक्सपो में यूएन वीमेन के स्टॉल का दौरा किया।

उन्होंने ग्रामीण समुदायों की उन युवा महिलाओं से बातचीत की, जो WeSTEM परियोजना के अंतर्गत STEM क्षेत्रों में करियर बना रही हैं। यह परियोजना यूएन वीमेन द्वारा मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों के सहयोग से तथा European Union, Micron Technology, Nokia और Head Held High Foundation के समर्थन से लागू की जा रही है।

इन युवा महिलाओं ने साझा किया कि वे एआई का उपयोग नए कौशल विकसित करने, शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और उभरते रोजगार अवसरों की खोज के लिए कर रही हैं। इस अवसर पर Kanta Singh, कंट्री रिप्रेजेंटेटिव (ए.आई.), यूएन वीमेन ने महासचिव को केसबुक की प्रति भेंट की। इस दौरान Amandeep Singh Gill भी उपस्थित थे।

जेंडर-रेस्पॉन्सिव एआई नवाचार का प्रदर्शन

इस केसबुक में 50 से अधिक देशों से प्राप्त 233 प्रविष्टियों में से चयनित 23 एआई समाधानों को शामिल किया गया है। इनका मूल्यांकन MeitY, MoWCD और यूएन वीमेन के वरिष्ठ अधिकारियों की स्वतंत्र समिति द्वारा बहु-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से किया गया।

चयनित समाधान निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित हैं:

  • स्वास्थ्य सेवाएँ (मासिक धर्म स्वास्थ्य सहित)

  • आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन

  • डिजिटल सुरक्षा एवं तकनीक-सक्षम लैंगिक हिंसा की रोकथाम

  • जलवायु अनुकूलन और सतत कृषि

  • न्याय एवं कानूनी सेवाओं तक पहुँच

  • शिक्षा और कौशल विकास

नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के लिए ज्ञान संसाधन

यह केसबुक नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विकास क्षेत्र के पेशेवरों के लिए एक व्यापक ज्ञान-संसाधन है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई प्रणालियाँ नैतिक, समावेशी और महिलाओं एवं बालिकाओं की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप हों।

यह प्रकाशन भारत के “डेमोक्रेटिक एआई डिफ्यूजन” के विज़न के अनुरूप है और इंडिया एआई मिशन के सात चक्रों (कार्य समूहों) में जेंडर-रेस्पॉन्सिव सिद्धांतों को शामिल करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

पृष्ठभूमि

16–20 फरवरी 2026 के दौरान आयोजित India AI Impact Summit 2026 में वैश्विक नेताओं, नीति-निर्माताओं, नवप्रवर्तकों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने भाग लिया। यह समिट भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व को आगे बढ़ाते हुए वैश्विक एआई गवर्नेंस ढांचे में सह-निर्माता की भूमिका को मजबूत करता है।

भारत के पहले क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना हेतु NIELIT और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच MoU

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने 20 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर स्थापित किया जाएगा।

यह सहयोग भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश क्वांटम मिशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्वांटम नवाचार केंद्र विकसित करने के राज्य के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
अमरावती, राज्य की महत्वाकांक्षी क्वांटम वैली पहल का केंद्र बनने के लिए तैयार है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

MoU पर हस्ताक्षर निम्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किए गए:

  • एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

  • एस. कृष्णन, सचिव, MeitY

  • डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

  • सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM, अमरावती क्वांटम वैली

प्रमुख वक्तव्य

🔹 डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की डीप-टेक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
अमरावती में NIELIT का क्वांटम और AI परिसर क्वांटम तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनेगा।

🔹 सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM

उन्होंने कहा कि NIELIT क्वांटम-AI विश्वविद्यालय, क्वांटम विज्ञान, AI और उद्योग-आधारित कौशल विकास को एकीकृत करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा।

प्रस्तावित विश्वविद्यालय परिसर की प्रमुख विशेषताएं

प्रमुख अध्ययन एवं अनुसंधान क्षेत्र

  • क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम एल्गोरिदम

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

  • क्वांटम संचार और साइबर सुरक्षा

  • क्वांटम हार्डवेयर और सिस्टम इंजीनियरिंग

  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग

  • AI–क्वांटम समन्वय अनुसंधान

शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचा

परिसर में निम्न सुविधाएं होंगी:

  • स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रम

  • उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएं

  • उद्योग से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र (CoEs)

  • डीप-टेक इनक्यूबेशन और उद्यमिता समर्थन

  • वैश्विक शैक्षणिक और R&D सहयोग

पहल का महत्व

यह पहल भारत की क्वांटम तकनीक और AI क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगी और देश को अगली पीढ़ी के नवाचार और डीप-टेक शिक्षा में वैश्विक अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

NIELIT के बारे में

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), MeitY के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, जो शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

NIELIT के पास देशभर में 56 केंद्र, 750+ मान्यता प्राप्त संस्थान और 9000+ प्रशिक्षण केंद्र हैं और इसने लाखों छात्रों को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया है।

NIELIT को शिक्षा मंत्रालय द्वारा डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है, जिसका मुख्य परिसर रोपड़ (पंजाब) में और अन्य परिसर आइजोल, अगरतला, औरंगाबाद, कालीकट, गोरखपुर, इम्फाल, ईटानगर, अजमेर, कोहिमा, पटना और श्रीनगर में स्थित हैं।


वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट का लॉन्च – डिजिटल समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

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भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल समावेशन की आधारशिला बनती जा रही हैं, जो लाखों लोगों को सार्वजनिक सेवाओं, जानकारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच प्रदान कर रही हैं। इसी संदर्भ में 20 फरवरी 2026 को इंडिया AI समिट एक्सपो 2026 में वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च किया गया

यह पहल खुले, समावेशी और जिम्मेदार वॉयस तकनीकों के लिए नीति और व्यवहारिक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

रिपोर्ट और टूलकिट के विकास में सहयोग

यह नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट निम्न संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किए गए:

  • ARTPARK @ IISc

  • Digital Futures Lab

  • Trilegal

इस कार्य को डिजिटल इंडिया भाषिणी (BHASHINI) डिवीजन और FAIR Forward – AI for All पहल (GIZ और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित) का समर्थन प्राप्त हुआ।

भारत में वॉयस तकनीकों का महत्व

भाषाई विविधता वाले देश भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो भाषण आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं।

हालांकि, वॉयस तकनीकों के विकास और उपयोग से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं, जैसे:

  • डेटा शासन

  • समावेशन

  • गुणवत्ता

  • खुलापन

  • जिम्मेदार उपयोग

इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति, तकनीकी अभ्यास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच समन्वय आवश्यक है।

नीति रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

नीति रिपोर्ट भारत में जिम्मेदार और खुले स्पीच सिस्टम के विकास में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करती है और निम्न सुझाव देती है:

  • मूलभूत भाषण डेटा सेट को डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति (Digital Public Goods) के रूप में मान्यता देना

  • मॉडल की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार

  • टिकाऊ सार्वजनिक अवसंरचना में निवेश

  • दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का समावेश

  • नवाचार को सक्षम बनाना

डेवलपर्स टूलकिट की विशेषताएं

डेवलपर्स टूलकिट भारतीय भाषाओं के वॉयस डेटा और अनुप्रयोगों पर काम करने वाले डेवलपर्स की चुनौतियों को उजागर करता है, जैसे:

  • डेटा प्रतिनिधित्व में असमानता

  • गुणवत्ता आश्वासन की कमजोर प्रणालियां

  • सीमित मूल्यांकन अभ्यास

  • खंडित शासन ढांचे

यह टूलकिट AI विकास जीवनचक्र आधारित समावेशी और मजबूत स्पीच AI सिस्टम बनाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

प्रमुख वक्तव्य

अमिताभ नाग, CEO, डिजिटल इंडिया भाषिणी

उन्होंने कहा कि भारत के वॉयस-फर्स्ट डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में बढ़ते कदमों के साथ मजबूत नीति और कार्यान्वयन ढांचे की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वॉयस तकनीकें भारत में भाषा, साक्षरता और डिजिटल विभाजन को पाटने का माध्यम हैं और इसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का आधार बनाना चाहिए।

डॉ. एरियाने हिल्डेब्रांट, जर्मन BMZ

उन्होंने कहा कि वॉयस AI स्थानीय भाषाओं और बोलियों में काम करने पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक भागीदारी के लिए द्वार खोल सकती है।

साझेदार संस्थाओं के बारे में

  • डिजिटल इंडिया भाषिणी: AI आधारित बहुभाषी भाषा अनुवाद और वॉयस समाधान मंच

  • GIZ और FAIR Forward: वैश्विक स्तर पर समावेशी AI को बढ़ावा देने की पहल

  • ARTPARK @ IISc: AI और रोबोटिक्स स्टार्टअप इनक्यूबेशन कार्यक्रम

  • Digital Futures Lab: तकनीक और समाज के अध्ययन पर अनुसंधान संस्था

  • Trilegal: प्रमुख भारतीय लॉ फर्म

  • Nasscom AI: भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने वाली प्रमुख संस्था


भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 में “भविष्य के महासागरों के लिए AI” पर उच्चस्तरीय चर्चा

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), भारत सरकार ने 16–20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के तहत “AI for Our Oceans of Tomorrow: Data, Models and Governance” विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में महासागर शासन, आपदा प्रबंधन, समुद्री आजीविका और ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy) के विकास में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। इस सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के नेता, स्टार्टअप और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

महासागरों की भूमिका और AI का महत्व

मुख्य भाषण देते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम. मोहापात्रा ने बताया कि महासागर जलवायु नियंत्रण, आपदा जोखिम कम करने, खाद्य सुरक्षा और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के पास महासागर अवलोकन, चक्रवात पूर्वानुमान, समुद्री डेटा सिस्टम और शुरुआती चेतावनी सेवाओं में मजबूत राष्ट्रीय क्षमताएं हैं, जिससे चरम मौसम घटनाओं में जान-माल के नुकसान में काफी कमी आई है।

उन्होंने यह भी बताया कि डेटा-आधारित और AI-सक्षम मॉडल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे महासागर तापमान वृद्धि, अम्लीकरण और समुद्र स्तर वृद्धि) को समझने में पारंपरिक भौतिक मॉडलों के पूरक हो सकते हैं।
उन्होंने डीप ओशन मिशन को एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल बताया, जो गहरे समुद्र की खोज, अपतटीय ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित है।

भारत-नॉर्वे सहयोग और डिजिटल महासागर ढांचा

भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने महासागरों और ब्लू इकॉनमी में भारत-नॉर्वे सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI मछली पालन, शिपिंग, बंदरगाह संचालन और तटीय लचीलापन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व भारत को खुले डेटा, साझा मानकों और जिम्मेदार डिजिटल शासन पर आधारित एक वैश्विक डिजिटल महासागर ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाता है, जिससे पूरी दुनिया को लाभ होगा।

डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लू इकॉनॉमी

पैनल चर्चा में सरकारी, अकादमिक, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करते हुए एक डिजिटल ओशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर सकता है, जो खुले डेटा, AI आधारित इंटेलिजेंस और मजबूत शासन ढांचे को एकीकृत करेगा।

AI समुद्री आजीविका बढ़ाने, लागत घटाने और ब्लू इकॉनॉमी क्षेत्रों में डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए आवश्यक होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महासागर अभी भी डेटा की कमी वाला और जटिल क्षेत्र हैं, इसलिए भौतिक विज्ञान आधारित AI (Physics-informed AI) और फिजिकल इंटेलिजेंस की जरूरत है।

नीतिगत समर्थन, डेटा उपलब्धता, वित्तीय सहयोग और जोखिम साझा करने के साथ ब्लू इकॉनॉमी भारत और ग्लोबल साउथ के लिए दीर्घकालिक विकास का बड़ा इंजन बन सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे।

समापन टिप्पणी

सत्र का समापन डॉ. (कमांडर) पी. के. श्रीवास्तव, वैज्ञानिक G और सलाहकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने किया। उन्होंने महासागर कार्यक्रमों में AI के एकीकरण के लिए संरचित रोडमैप बनाने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।


India AI Impact Startups 2026: भारत में सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए AI स्टार्टअप्स की नई तस्वीर

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India AI Impact Summit 2026 में जारी यह रिपोर्ट 110 स्टार्टअप्स और गैर-लाभकारी संगठनों का प्रोफाइल प्रस्तुत करती है, जो बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहे हैं। यह रिपोर्ट IndiaAI और Kalpa Impact द्वारा प्रकाशित की गई है और इसमें स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, जलवायु, वित्तीय समावेशन, शहरी परिवहन और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

यह रिपॉजिटरी भारत के AI-for-impact इकोसिस्टम का पहला संरचित मैपिंग है, जो दिखाती है कि भारतीय संस्थापक स्थानीय समस्याओं के लिए वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वॉयस AI और स्थानीय भाषाओं में इंटरफेस वंचित समुदायों तक पहुंचने का प्रमुख माध्यम बन रहे हैं, और “मेड-इन-इंडिया” फाउंडेशन मॉडल्स पर काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या भी बढ़ रही है।

यह रिपोर्ट:

  • नीति निर्माताओं को AI समाधानों के एकीकरण में मदद करेगी

  • निवेशकों को तकनीकी रूप से परिपक्व और स्केलेबल स्टार्टअप्स पहचानने में सहायता देगी

  • वैश्विक विकास समुदाय को ग्लोबल साउथ के लिए दोहराने योग्य मॉडल प्रदान करेगी

Abhishek Singh (MeitY और IndiaAI Mission) ने कहा कि यह रिपॉजिटरी नीति निर्माताओं, उद्योग और निवेशकों के लिए एक व्यावहारिक संसाधन है और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में AI क्षमताओं के एकीकरण को आसान बनाएगी।

Mohammed Y. Safirulla (IndiaAI Mission) ने कहा कि भारत का AI इकोसिस्टम तेजी से परिपक्व हो रहा है और यह रिपोर्ट दिखाती है कि स्टार्टअप्स अब पायलट प्रोजेक्ट्स से बड़े पैमाने पर लागू समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं।

Anshul Singhal (MeitY) ने कहा कि भारतीय AI स्टार्टअप्स सिर्फ एप्लिकेशन नहीं, बल्कि समावेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं—जैसे कोर्ट ट्रांसक्रिप्शन, ग्रामीण स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और किसान सलाह प्रणाली।

Sushant Kumar (Kalpa Impact) ने कहा कि भारतीय AI स्टार्टअप्स “सुपर-यूटिलिटी” समाधान बना रहे हैं, जैसे बिना इंटरनेट काम करने वाला Edge AI और स्थानीय भाषाओं में बोलने वाले वॉयस बॉट्स। कई स्टार्टअप्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर चुके हैं, जिससे भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए AI एक्सपोर्ट हब बन रहा है।


इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: नई दिल्ली में 16–20 फरवरी को होगा वैश्विक आयोजन

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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा। यह अब तक आयोजित चार वैश्विक एआई सम्मेलनों में सबसे बड़ा होने की संभावना है, जो जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-उन्मुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गति को दर्शाता है।

इस समिट को वैश्विक समुदाय से अभूतपूर्व रुचि प्राप्त हुई है। आयोजन से पूर्व ही 35,000 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हो चुके हैं। समिट का प्रमुख उद्देश्य दृष्टि को व्यवहारिक क्रियान्वयन में बदलना है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर प्रभावी और सार्थक परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समिट में सरकारों, उद्योग जगत के नेताओं, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी अपेक्षित है, जो कार्यक्रम के एजेंडे को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता होने की संभावना है, जिनमें 15–20 राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री तथा वैश्विक और भारतीय कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े लगभग 500 प्रमुख व्यक्ति—जिनमें नवोन्मेषक, शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTOs) शामिल हैं—भी इसमें भाग लेंगे।

भागीदारी की व्यापकता को दर्शाते हुए, समिट में 500 से अधिक एआई स्टार्टअप्स की स्टार्टअप प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी तथा मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ लगभग 500 सत्रों का आयोजन होगा, जिससे यह एआई पर केंद्रित सबसे व्यापक वैश्विक आयोजनों में से एक बन जाएगा।

समिट से पहले की गतिविधियों में भी व्यापक भागीदारी देखने को मिली है। प्री-समिट आयोजनों के लिए 1,300 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अब तक भारत और वैश्विक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों एवं क्षेत्रों में 500 से अधिक प्री-समिट कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। समिट ढांचे के अंतर्गत सात प्रमुख (फ्लैगशिप) कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिनमें कुल मिलाकर 3,00,000 से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता रही है। यह एआई इम्पैक्ट समिट प्रक्रिया में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रुचि को दर्शाता है।

वैश्विक एआई समिट प्रक्रिया समय के साथ विकसित हुई है—जिसकी शुरुआत ब्लेचली पार्क में एआई जोखिमों पर चर्चा से हुई, इसके बाद सियोल में नैतिकता और समावेशन पर विमर्श हुआ, और फिर पेरिस में साझा सिद्धांतों के क्रियान्वयन की दिशा में प्रगति हुई। यह समिट वैश्विक एआई विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से संबंधित विस्तृत जानकारी—जिसमें कार्यक्रम, विषयगत फोकस क्षेत्र और भागीदारी की प्रक्रियाएं शामिल हैं—समिट की आधिकारिक वेबसाइट https://impact.indiaai.gov.in/ पर उपलब्ध है। इच्छुक हितधारकों से अनुरोध है कि वे वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार एवं प्रभावी उपयोग को आगे बढ़ाने के इस वैश्विक संवाद का हिस्सा बनें।

समिट के लिए मीडिया मान्यता (Media Accreditation) प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। केवल मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों को ही समिट की कार्यवाही को कवर करने की अनुमति दी जाएगी। आवेदन आधिकारिक पोर्टल https://impact.indiaai.gov.in/media-accreditation के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाने आवश्यक हैं। मीडिया मान्यता हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 8 फरवरी 2026 है।


India–AI Impact Summit 2026: विश्व में पहला ‘Global South’ में आयोजित होने वाला AI समिट

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways):

  • India–AI Impact Summit 2026 पहली बार Global South में आयोजित होने वाला विश्व स्तर का AI समिट होगा।

  • यह समिट 16 से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

  • समिट की थीम “People, Planet और Progress” (तीन सूत्र/सुतर) पर आधारित है।

  • India AI Impact Expo में 400+ प्रदर्शक और 1.5 लाख से अधिक आगंतुक शामिल होंगे।

AI: भारत की विकास यात्रा का अहम स्तंभ

AI भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह शासन (Governance), डिजिटल सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और वित्त जैसे क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। भारत की बहुभाषी और विविध संस्कृति AI के लिए एक मजबूत आधार बनाती है, जिससे multi-lingual और multi-modal AI विकसित हो सके।

समिट का उद्देश्य और महत्व

India–AI Impact Summit 2026 का उद्देश्य AI के वैश्विक मंच पर चर्चा को विकास और वास्तविक परिणामों से जोड़ना है। यह समिट AI के ज़रिये:

  • वैश्विक सहयोग को मजबूत करेगा

  • उत्तरदायी और सुरक्षित AI के मानकों को बढ़ावा देगा

  • आर्थिक और सामाजिक विकास को तेज करेगा

  • भारत को AI नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगा

तीन ‘सुतर’ और सात ‘चक्र’ (Sutras & Chakras)

तीन मूल स्तंभ (Sutras):

  1. People (लोग)

  2. Planet (पर्यावरण)

  3. Progress (प्रगति)

सात चक्र (Chakras):

  1. Human Capital – AI कौशल विकास

  2. Inclusion for Social Empowerment – सामाजिक समावेशन

  3. Safe and Trusted AI – सुरक्षित एवं भरोसेमंद AI

  4. Resilience, Innovation and Efficiency – टिकाऊ और प्रभावी AI

  5. Science – AI आधारित अनुसंधान

  6. Democratizing AI Resources – AI संसाधनों की समान उपलब्धता

  7. AI for Economic Growth & Social Good – आर्थिक विकास और सामाजिक लाभ

समिट में AI के प्रमुख उपयोग (Sectors)

1. स्वास्थ्य (Healthcare):

  • दूरस्थ निदान, AI आधारित टेस्टिंग

  • टेलीमेडिसिन और रोग पूर्वानुमान

  • AI से TB, कैंसर जैसी बीमारियों का तेज़ निदान

2. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था:

  • मौसम और कीट अनुमान

  • ड्रोन और सैटेलाइट आधारित फसल निगरानी

  • किसान ई-मेरीटा जैसे प्लेटफॉर्म

3. शिक्षा:

  • व्यक्तिगत शिक्षा (Adaptive Learning)

  • भाषा अनुवाद और ट्यूटरिंग

  • DIKSHA जैसे प्लेटफॉर्म

4. वित्त और वाणिज्य:

  • फर्जीवाड़ा रोकथाम (Fraud Detection)

  • क्रेडिट स्कोरिंग

  • चैटबॉट आधारित बैंकिंग

5. शासन और सार्वजनिक सेवाएं:

  • न्यायिक अनुवाद, सेवा वितरण में तेज़ी

  • स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक प्रबंधन

  • सरकारी प्रक्रियाओं में AI का उपयोग

मुख्य कार्यक्रम और गतिविधियाँ (AI Impact Events)

Pre-Summit Events

  • विभिन्न देशों और राज्यों में AI विषयक पूर्व-चर्चाएँ

  • 8 राज्य स्तरीय AI सम्मेलन (Meghalaya, Gujarat, Odisha, etc.)

Main Summit

  • सात चक्रों पर आधारित सत्र

  • 700+ प्रस्ताव प्राप्त हुए

Flagship Events

  • AI for ALL: वैश्विक AI चुनौतियाँ

  • AI by HER: महिला-प्रेरित AI नवाचार

  • YUVAi: युवा AI चुनौतियाँ

  • Research Symposium

  • India AI Impact Expo (70,000 sq.m. क्षेत्र)

समिट का एजेंडा (16–20 Feb 2026)

  • दिन
  • कार्यक्रम
  • 16 Feb
  • Keynotes, Panel Discussion, AI Expo
  • 17 Feb
  • Knowledge Compendium Release, AI by HER
  • 18 Feb
  • Research Symposium, Summit Dinner
  • 19 Feb
  • Opening Ceremony, Leaders’ Plenary
  • 20 Feb
  • GPAI Council Meeting

समर्थनकर्ता संस्थाएँ (Institutional Frameworks)

  • MeitY (मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी)

  • IndiaAI Mission

  • STPI (Software Technology Parks of India)

  • Digital India Initiative

उम्मीदित परिणाम (Expected Outcomes)

  • AI आधारित सार्वजनिक सेवाओं और उद्योगों में तेजी

  • नीति और नियमन में स्पष्टता

  • AI स्किलिंग और रोजगार में वृद्धि

  • वैश्विक सहयोग और नवाचार में वृद्धि

  • भारत को AI के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना

समापन (Conclusion)

India–AI Impact Summit 2026, AI को भारत के विकास के लिए एक रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। यह समिट AI के उपयोग को वास्तविक दुनिया में लागू करने, सामाजिक लाभ और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा।


राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 आयोजित, शासन और नवाचार में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन

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राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन मंगलवार, 06 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्व, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों ने भाग लिया। सम्मेलन में शासन, अवसंरचना, नवाचार और कार्यबल विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। यह सम्मेलन 15 से 20 फरवरी 2026 के बीच आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की पूर्वपीठिका के रूप में आयोजित किया गया।

सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (वर्चुअल माध्यम से), केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, तथा राजस्थान सरकार के आईटी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ सहित MeitY और राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता ने राजस्थान को भारत की एआई-आधारित विकास यात्रा में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने हेतु केंद्र–राज्य सहयोग की मजबूती को रेखांकित किया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,

“जिस स्तर का परिवर्तन औद्योगिक क्रांति, बिजली, कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, इंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकी से आया था, वही परिवर्तन अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री का स्पष्ट लक्ष्य प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करना है, ताकि एआई-संचालित बुद्धिमत्ता कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि हर व्यक्ति, हर परिवार और हर उद्यम तक पहुँचे। इसी दिशा में आज एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसके तहत 10 लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि भारत का युवा वर्ग इस नए तकनीकी युग के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।”

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृढ़ विश्वास है कि प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण होना चाहिए। इसी दृष्टि से सरकार ने इंडिया एआई मिशन के तहत ₹10,000 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता की है, ताकि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग किया जा सके। इसका उद्देश्य नागरिकों की आय बढ़ाना, जीवन सुगमता में सुधार करना और जिम्मेदार व समावेशी एआई के माध्यम से देश की समग्र उत्पादकता को बढ़ावा देना है।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा,

“आज राजस्थान ई-गवर्नेंस और समावेशन से आगे बढ़ते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग में अग्रणी बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। एआई हमारे देश की यात्रा का अगला बड़ा चरण है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए हमने एआई और एमएल नीति लागू की है। यह नीति एआई प्रणालियों को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाएगी। एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से सार्वजनिक सेवा वितरण को तेज़, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।”

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय और राज्य स्तर की कई एआई पहलों की घोषणा और शुभारंभ रहा, जिसने एआई-आधारित नवाचार और शासन के केंद्र के रूप में राजस्थान की भूमिका को और सुदृढ़ किया। इनमें प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:

  • YUVA AI for All – राष्ट्रीय एआई साक्षरता कार्यक्रम, भारत सरकार की प्रमुख पहल, जिसे MeitY के अंतर्गत IndiaAI Mission द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों और युवाओं में एआई की आधारभूत समझ विकसित करना है। राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के अवसर पर यह अभियान लाखों शिक्षार्थियों को AI 101 पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा, जो विकसित भारत और समावेशी एआई अपनाने के दृष्टिकोण से जुड़ा है।

  • राजस्थान एआई/एमएल नीति 2026 का शुभारंभ, जिसका उद्देश्य शासन को मजबूत करना, आर्थिक विकास को गति देना, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना तथा उच्च-मूल्य रोजगार सृजित करना है। इसके साथ ही राजस्थान एआई पोर्टल भी लॉन्च किया गया।

  • iStart लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) का शुभारंभ, जो राज्य में कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार को समर्थन देगा।

  • राजस्थान AVGC-XR पोर्टल, जो एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगा। इस अवसर पर भारत और राजस्थान की एआई दृष्टि को प्रदर्शित करने वाला एक एआई-थीम आधारित वीडियो भी जारी किया गया।

  • संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए गूगल, आईआईटी दिल्ली, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर और स्किल डेवलपमेंट नेटवर्क (वाधवानी फाउंडेशन) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे एआई अनुसंधान, कौशल विकास, नैतिक ढांचे और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।

एक उच्चस्तरीय रणनीतिक सत्र में MeitY के अतिरिक्त सचिव, IndiaAI Mission के सीईओ एवं एनआईसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनवीडिया के दक्षिण एशिया प्रबंध निदेशक विशाल धूपर के बीच संवाद हुआ, जिसका संचालन प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक समीर जैन ने किया। इस चर्चा में एआई अवसंरचना के लोकतंत्रीकरण, सार्वजनिक–निजी सहयोग, बड़े पैमाने पर नवाचार और वैश्विक एआई सेफ्टी कॉमन्स के निर्माण पर भारत की रणनीति पर विचार किया गया।

MeitY की वैज्ञानिक ‘जी’ एवं IndiaAI Mission की सीओओ कविता भाटिया ने IndiaAI Mission का अवलोकन प्रस्तुत किया और India AI Impact Summit 2026 की प्राथमिकताओं एवं दृष्टि को साझा किया।

सम्मेलन में “वैश्विक एआई, राष्ट्रीय एआई और क्षेत्रीय एआई पर परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसे आईआईटी जोधपुर के प्रोफेसर अविनाश शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान किस प्रकार वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और संदर्भ-संवेदनशील एआई समाधानों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इसके साथ ही समानांतर विषयगत सत्रों में शासन, अवसंरचना, नवाचार, नैतिकता और रोजगार जैसे क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई।

राजस्थान क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय पड़ाव के रूप में कार्य किया और सार्वजनिक हित, समावेशी विकास तथा सतत प्रगति के लिए एआई के उपयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

India–AI Impact Summit 2026 की तैयारी: गांधीनगर में क्षेत्रीय सम्मेलन

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भारत में जिम्मेदार, समावेशी और नवाचार-आधारित AI इकोसिस्टम को राज्यों में विस्तार देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के अंतर्गत IndiaAI Mission, गुजरात सरकार और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गांधीनगर के सहयोग से 11 दिसंबर 2025 को महात्मा मंदिर, गांधीनगर में एक रीजनल प्री-समिट कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

यह क्षेत्रीय सम्मेलन 15–20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में निर्धारित India–AI Impact Summit 2026 के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

क्षेत्रीय सम्मेलन में वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, प्रौद्योगिकी नेताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया जाएगा, जहाँ वे AI-आधारित आर्थिक, डिजिटल और सामाजिक परिवर्तन पर विचार-विमर्श करेंगे।

सम्मेलन की शुरुआत औपचारिक उद्घाटन सत्र से होगी जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई राजनिकांत पटेल, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष रमेशभाई सांघवी, गुजरात सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई देवाभाई मोधवाडिया, गुजरात सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास, MeitY के अतिरिक्त सचिव और NIC के महानिदेशक अभिषेक सिंह, तथा गुजरात विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पोनुगुमतला भारती जैसी विशिष्ट हस्तियाँ शामिल होंगी।

AI for Good Governance: Empowering India’s Digital Future विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में MeitY, Bhashini, Google Cloud, Microsoft, IBM Research, NVIDIA, Oracle और AWS के राष्ट्रीय व वैश्विक विशेषज्ञ उच्चस्तरीय कीनोट सत्रों का नेतृत्व करेंगे। इन सत्रों में निम्न विषय शामिल होंगे:

  • शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में AI

  • शहरी और ग्रामीण विकास में AI-संचालित परिवर्तन

  • स्मार्ट कृषि और ग्रामीण समृद्धि के लिए AI

  • जेनरेटिव AI और भविष्य की नवाचार शक्तियाँ

  • स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक कल्याण में AI

  • फिनटेक और डिजिटल समावेशन हेतु AI

  • बहुभाषी AI और भाषाई पहुंच में BHASHINI की भूमिका

सत्रों के अतिरिक्त, प्रतिभागी नेटवर्किंग सत्रों में शामिल होंगे और IndiaAI एवं DST Gujarat द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए एक्सपीरियंस ज़ोन का अवलोकन करेंगे, जिसमें शासन, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग क्षेत्रों में AI समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा।

सरकारी नेताओं, उद्योग नवप्रवर्तकों और शैक्षणिक विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाकर, गांधीनगर रीजनल प्री-समिट का उद्देश्य भारत के AI इकोसिस्टम को ऐसे ढाँचों के साथ सुदृढ़ करना है जो स्केलेबल, विश्वसनीय, इंटरऑपरेबल और जनहित आधारित हों। इस सम्मेलन से प्राप्त अंतर्दृष्टियाँ सीधे तौर पर India–AI Impact Summit 2026 के एजेंडा और परिणामों को आकार देंगी, जिससे एक सुरक्षित, विश्वसनीय और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक AI भविष्य के निर्माण में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और मजबूत होगी।


“India–AI Impact Summit 2026 से पहले IIT मद्रास में जिम्मेदार AI पर प्री-सम्मिट कार्यक्रम आयोजित”

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भारत की सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी AI के लिए दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के प्रयास में, IIT मद्रास में Centre for Responsible AI (CeRAI) ने इंडियाAI मिशन, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के सहयोग से 11 दिसंबर, 2025 को चेन्नई में प्रेसम्मिट कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम India–AI Impact Summit 2026 से पहले आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन 10 दिसंबर की शाम को होगा, इसके बाद 11 दिसंबर को पूर्ण दिवस का प्रेसम्मिट इवेंट और हाइब्रिड, बंद दरवाजे की वर्किंग ग्रुप बैठक आयोजित की जाएगी।

India–AI Impact Summit 2026, जिसे पहली बार ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है, 15–20 फरवरी, 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

प्रेसम्मिट कार्यक्रम में विशिष्ट नेताओं की उपस्थिति रहेगी, जिनमें शामिल हैं:

  • डॉ. टी.आर.बी. राजा, उद्योग, निवेश संवर्धन और वाणिज्य मंत्री, तमिलनाडु सरकार

  • प्रो. कमकोटी वी., निदेशक, IIT मद्रास

  • सृराम नटराजन, प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, डलास

  • प्रो. बालारमन रविंद्रन, प्रोफेसर एवं प्रमुख, WSAI, IIT मद्रास और Safe & Trusted AI Working Group के अध्यक्ष

साथ ही, MeitY, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, और उद्योग, अकादमिक, सिविल सोसाइटी और सरकारी क्षेत्रों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे।

भारत की नैतिक, सुरक्षित और समावेशी AI के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप, यह सम्मेलन (Conclave) AI सुरक्षा और शासन के सिद्धांतों को व्यवहार में लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। जैसे-जैसे AI प्रणाली सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में आवश्यक बनती जा रही हैं, न्यायसंगतता, जवाबदेही और दुरुपयोग से संबंधित चिंताएँ बढ़ रही हैं। इस परिप्रेक्ष्य में ऐसे ढांचे की आवश्यकता है जो स्केलेबल, प्रवर्तनीय और विविध वैश्विक संदर्भों के लिए उपयुक्त हों।

Safe & Trusted AI Working Group, जिनके अध्यक्ष प्रो. बालारमन रविंद्रन हैं, इस अंतर को पाटने का लक्ष्य रखते हैं। यह समूह पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास पर आधारित ऐसा AI पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का प्रयास कर रहा है, जहाँ नवाचार जिम्मेदारीपूर्वक आगे बढ़े और AI के लाभ समान रूप से साझा किए जाएँ।

मुख्य भाषण, विशेषज्ञ पैनल और कार्य सत्रों के माध्यम से, सम्मेलन Global South के लिए AI Safety Commons स्थापित करने के मार्गों का अध्ययन करेगा। इसमें साझा डेटा सेट, बेंचमार्क और शासन संसाधन शामिल होंगे, जो सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय AI विकास को सक्षम बनाएँगे। चर्चाएँ जिम्मेदार AI सिद्धांतों को व्यवहारिक शासन और नियामक मॉडलों में बदलने पर भी केंद्रित होंगी, जिन्हें विविध सांस्कृतिक, कानूनी और तकनीकी संदर्भों में लागू किया जा सके।

सरकारी, उद्योग, अकादमिक और सिविल सोसाइटी के हितधारकों को एक साथ लाकर सीमा-पार सहयोग को बढ़ावा देना इस सम्मेलन का उद्देश्य है। इससे वैश्विक स्तर पर इंटरऑपरेबल, लेकिन स्थानीय संदर्भ में आधारित और स्केलेबल AI ढांचे तैयार किए जा सकेंगे। इन विचार-विमर्शों और सहमति से प्राप्त अंतर्दृष्टियाँ India–AI Impact Summit 2026 के दृष्टिकोण, रोडमैप और परिणामों को सीधे प्रभावित करेंगी, और विश्वसनीयता, सुरक्षा और समावेशन पर आधारित वैश्विक AI पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करेंगी।


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