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BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता में पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में चार ज्ञान संकलनों का विमोचन

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भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत आयोजित 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ BRICS पर्यावरण कार्य समूह द्वारा तैयार चार ज्ञान-संकलनों (Knowledge Compendiums) का विमोचन किया। ये दस्तावेज BRICS सदस्य देशों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, ज्ञान प्रणालियों और नवाचारों को दर्शाते हैं।

ये चारों संकलन BRICS पर्यावरण कार्य समूह में हुई रचनात्मक एवं सार्थक चर्चाओं का परिणाम हैं। इनमें BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय अनुभवों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, नवीन समाधानों और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों को साझा किया गया है।

1. सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुभवों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों और सफलता की कहानियों पर संकलन

भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा तैयार यह संकलन BRICS सदस्य देशों—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और UAE—के उत्कृष्ट उदाहरणों का साझा ज्ञान भंडार है।

इसमें बताया गया है कि BRICS देश नीतिगत नवाचार, व्यवहार परिवर्तन, पर्यावरण शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी, सतत उपभोग एवं उत्पादन, सर्कुलर इकोनॉमी, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और हरित विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सतत जीवनशैली को व्यवहार में कैसे ला रहे हैं।

भारत के योगदान में मिशन LiFE, पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम और SAMBHAV अभियान शामिल हैं, जो नागरिकों के नेतृत्व वाली सतत जीवनशैली के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह संकलन नागरिक भागीदारी, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान और डिजिटल एकीकरण पर जोर देते हुए पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और आपसी सीख का एक व्यावहारिक खाका प्रस्तुत करता है।

2. एकीकृत अग्नि प्रबंधन के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवोन्मेषी दृष्टिकोणों पर संकलन

दुनिया भर में बदलती जलवायु परिस्थितियां, लंबे समय तक सूखा और बढ़ता तापमान जंगलों में आग लगने की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा रहे हैं। इससे पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, आजीविका और समुदायों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

इस साझा चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी BRICS 2026 अध्यक्षता के दौरान एकीकृत वनाग्नि प्रबंधन (Integrated Wildfire Management) को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया।

इस पहल के तहत देशों ने सामुदायिक नेतृत्व वाली रोकथाम, स्वदेशी ज्ञान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, प्रौद्योगिकी, तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया सहित विभिन्न अनुभवों और अभिनव समाधानों को साझा किया।

यह संकलन केवल विभिन्न देशों के अनुभवों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है—रोकथाम से तैयारी तक, प्रारंभिक चेतावनी से प्रारंभिक कार्रवाई तक और प्रतिक्रिया से पुनर्बहाली तक आग का सामूहिक रूप से प्रबंधन करना आवश्यक है।

ज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्थानों और समुदायों को जोड़कर BRICS देश सामूहिक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं, जंगलों और जैव विविधता की रक्षा कर सकते हैं, आजीविका को सुरक्षित रख सकते हैं और आग के प्रति अधिक सक्षम भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

3. एकीकृत लैंडस्केप-आधारित हरितीकरण दृष्टिकोण पर संकलन

यह संकलन BRICS सदस्य देशों के अनुभवों, अच्छी कार्यप्रणालियों और नीतिगत दृष्टिकोणों को एक साथ प्रस्तुत करता है, जो भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता हानि और जलवायु परिवर्तन जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित हैं।

इसमें सदस्य देशों के सामूहिक योगदान को दर्शाते हुए ऐसे लैंडस्केप-आधारित उपायों को प्रमुखता दी गई है, जो पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को जैव विविधता संरक्षण के साथ एकीकृत करते हैं।

संकलन में BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, क्षमता निर्माण एवं तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान तथा निगरानी और आकलन के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है।

यह पहल पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने, आजीविका में सुधार और वैश्विक पुनर्स्थापना एवं सतत विकास के लक्ष्यों में योगदान देने के लिए सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

4. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे और अग्रणी सर्कुलर इकोनॉमी कार्यप्रणालियों पर संकलन

यह संकलन BRICS सदस्य देशों के अनुभवों, नीतिगत दृष्टिकोणों, नियामक उपायों और संस्थागत मॉडलों को प्रस्तुत करता है, जिनका उद्देश्य सर्कुलर और संसाधन-कुशल अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को बढ़ावा देना है।

इसमें सामुदायिक नेतृत्व वाले अपशिष्ट प्रबंधन, डिजिटल वेस्ट-एक्सचेंज प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय सर्कुलर इकोनॉमी रोडमैप, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सिस्टम, रीसाइक्लिंग प्रमाणन और अपशिष्ट क्षेत्र में व्यापक सुधार जैसी प्रमुख पहलों को शामिल किया गया है।

संकलन में भारत के बाजार-आधारित विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे की प्रगति को भी रेखांकित किया गया है, जिसे केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का समर्थन प्राप्त है और जिसका विस्तार विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों तक किया गया है।

साथ ही, BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी समाधान, तकनीकी क्षमता निर्माण और सर्कुलर बिजनेस मॉडल विकसित करने जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य संसाधन-कुशल, लचीली और सतत अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है।

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