Media24Media.com: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी पहनेंगे ‘मेक इन इंडिया’ जूट परिधान, प्राकृतिक रेशों को मिलेगा वैश्विक मंच

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी पहनेंगे ‘मेक इन इंडिया’ जूट परिधान, प्राकृतिक रेशों को मिलेगा वैश्विक मंच

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नई दिल्ली- भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) ने टिकाऊ (सस्टेनेबल) वस्त्रों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक रेशों में भारत की नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी और टीम के सदस्य पहली बार जूट-विस्कोस (Jute-Viscose) मिश्रित कपड़े से बने विशेष परिधान पहनेंगे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मेक इन इंडिया" और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने 100 प्रतिशत जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े को एक टिकाऊ और आधुनिक वस्त्र विकल्प के रूप में विकसित किया है।

नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आधिकारिक किट अनावरण एवं विदाई समारोह में केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहला अवसर होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता में भारतीय दल जूट आधारित परिधान पहनकर दुनिया के सामने उतरेगा। इससे न केवल भारत के जूट उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्माताओं की कारीगरी और जूट किसानों के योगदान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा।

जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े का विकास कोलकाता की ग्लॉस्टर जूट मिल्स के सहयोग से किया गया, जबकि इन परिधानों की डिजाइन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने तैयार की है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 72 देशों के खिलाड़ी भाग लेंगे। भारत की ओर से 124 सदस्यीय दल, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला खिलाड़ी शामिल हैं, प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड का मानना है कि यह पहल जूट विविधीकरण कार्यक्रम को नई गति देगी, जूट उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार खोलेगी तथा प्राकृतिक रेशों को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह देश के लाखों जूट किसानों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का विषय भी बनेगी।


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