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हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल समापन, IIT दिल्ली में नवाचारों को मिला मंच

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नई दिल्ली- वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से आयोजित हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 – "वीविंग इनोवेशंस" का सफल समापन फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT), IIT दिल्ली में हुआ। हैकाथॉन में देशभर से 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से शीर्ष 100 चयनित टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए 280 प्रतिभागियों ने भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए तकनीक आधारित समाधान प्रस्तुत किए।

इस हैकाथॉन ने नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और हथकरघा विशेषज्ञों को करघों के आधुनिकीकरण, डिजाइन नवाचार, सतत विकास, बाजार तक पहुंच और बुनकरों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। प्रतिभागियों ने उत्पादकता बढ़ाने, पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करने और हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने वाले कई नवाचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मंत्रालय डॉ. एम. बीना (IAS), IIT दिल्ली के वस्त्र एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता, IIT दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव पंकज कपाड़िया तथा थिंकस्टार्टअप के सह-संस्थापक संजीवा शिवेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग की मजबूत मिसाल पेश की।

इस अवसर पर डॉ. एम. बीना ने कहा कि "हैंडलूम हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि तकनीक भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैंडलूम हैकाथॉन के माध्यम से हम इन दोनों को जोड़कर बुनकर समुदाय को सशक्त बना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र स्वाभाविक रूप से सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। उन्होंने करघा प्रक्रियाओं, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए इंडियन हैंडमेड पोर्टल का उल्लेख किया, जो बुनकरों को बिना किसी तीसरे पक्ष के अपने उत्पाद सीधे वैश्विक बाजार में बेचने का अवसर प्रदान करता है।

डॉ. बीना ने IIT और NIFT जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जो बुनाई की पारंपरिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक सटीकता लाए, श्रम को कम करे और बुनकरों की आय बढ़ाने में सहायक बने।

IIT दिल्ली की डॉ. दीप्ति गुप्ता ने बताया कि संस्थान में स्थापित होने जा रहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी तकनीक और हथकरघा के बेहतर समन्वय को बढ़ावा देगा। इससे उत्पादकता और मानकीकरण में सुधार होगा, जबकि हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता भी बनी रहेगी। यह केंद्र अगले सप्ताह वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया जाएगा।

पंकज कपाड़िया ने कहा कि तकनीक हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जबकि संजीवा शिवेश ने फाइनलिस्ट टीमों को बधाई देते हुए उन्हें भविष्य में भी सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने वाले नवाचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

हैकाथॉन के विजेताओं को चार प्रमुख श्रेणियों—बुनकर आजीविका एवं वित्तीय समावेशन, मार्केट एक्सेस एवं डिजिटल इंटीग्रेशन, सतत विकास एवं पर्यावरणीय प्रभाव, तथा डिजाइन एवं संचालन में नवाचार—में सम्मानित किया गया। विजेता समाधानों में एआई आधारित बुनकर सहायता प्लेटफॉर्म, डिजिटल मार्केटिंग टूल, पर्यावरण अनुकूल रंगाई एवं निगरानी प्रणाली तथा करघा आधुनिकीकरण से जुड़े तकनीकी नवाचार शामिल रहे।

विजेता टीमों में केसीजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, IIHT सलेम, IIT मद्रास, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, श्री ईश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, KLB IIHT हैदराबाद और स्टार्टअप साविन्या स्टूडियो के प्रतिभागी शामिल रहे।

हैंडलूम हैकाथॉन 2.0 का सफल आयोजन वस्त्र मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत नवाचार, शिक्षा-उद्योग सहयोग और तकनीक आधारित समाधानों के माध्यम से भारत के हथकरघा क्षेत्र को अधिक सक्षम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है, ताकि देश के बुनकरों की आजीविका और समृद्धि को नई गति मिल सके।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी पहनेंगे ‘मेक इन इंडिया’ जूट परिधान, प्राकृतिक रेशों को मिलेगा वैश्विक मंच

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नई दिल्ली- भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) ने टिकाऊ (सस्टेनेबल) वस्त्रों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक रेशों में भारत की नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी और टीम के सदस्य पहली बार जूट-विस्कोस (Jute-Viscose) मिश्रित कपड़े से बने विशेष परिधान पहनेंगे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मेक इन इंडिया" और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने 100 प्रतिशत जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े को एक टिकाऊ और आधुनिक वस्त्र विकल्प के रूप में विकसित किया है।

नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आधिकारिक किट अनावरण एवं विदाई समारोह में केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहला अवसर होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता में भारतीय दल जूट आधारित परिधान पहनकर दुनिया के सामने उतरेगा। इससे न केवल भारत के जूट उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्माताओं की कारीगरी और जूट किसानों के योगदान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा।

जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े का विकास कोलकाता की ग्लॉस्टर जूट मिल्स के सहयोग से किया गया, जबकि इन परिधानों की डिजाइन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने तैयार की है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 72 देशों के खिलाड़ी भाग लेंगे। भारत की ओर से 124 सदस्यीय दल, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला खिलाड़ी शामिल हैं, प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड का मानना है कि यह पहल जूट विविधीकरण कार्यक्रम को नई गति देगी, जूट उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार खोलेगी तथा प्राकृतिक रेशों को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह देश के लाखों जूट किसानों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का विषय भी बनेगी।


केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी का उद्घाटन, भारतीय शिल्प परंपराओं को मिली वैश्विक पहचान

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केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में “क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर (Crafted for the Future)” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत हस्तशिल्प आयुक्त (DC Handicrafts) के कार्यालय की इस पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं को उजागर करना और सतत एवं समकालीन जीवन में उनकी प्रासंगिकता को प्रदर्शित करना है।

उद्घाटन समारोह में वस्त्र मंत्रालय की हस्तशिल्प आयुक्त अमृत राज, संयुक्त राष्ट्र आवासीय समन्वयक कार्यालय (भारत) की चीफ ऑफ स्टाफ राधिका कौल बत्रा, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापक सुश्री पद्मावती द्विवेदी तथा ‘गिव मी ट्रीज़ ट्रस्ट’ के संस्थापक स्वामी प्रेम परिवर्तन (पीपल बाबा) सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर गिरिराज सिंह ने कहा कि आज का युवा पारंपरिक शिल्प को समझ रहा है और उसे वैश्विक दर्शकों के अनुरूप समकालीन उत्पादों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने और भारत के विविध शिल्पों को विश्व पटल तक पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

“क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर” दस दिवसीय प्रदर्शनी राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह का हिस्सा है और यह 21 दिसंबर 2025 तक आम जनता के लिए निःशुल्क प्रवेश के साथ खुली रहेगी। ‘वीव द फ्यूचर’ श्रृंखला के तीसरे संस्करण के रूप में यह प्रदर्शनी दैनिक जीवन की भौतिक संस्कृति पर विशेष जोर देती है—जहां समुदायों, उनके पर्यावरण और रोज़मर्रा के जीवन को आकार देने वाली सामग्रियों के बीच गहरे संबंध को दर्शाया गया है। देशभर के कारीगरों और सामग्री नवोन्मेषकों को सामने लाकर यह पहल पारिस्थितिक संतुलन, क्षेत्रीय पहचान और गहन सामग्री ज्ञान पर आधारित प्रथाओं को प्रदर्शित करती है।

कार्यक्रम में बोलते हुए अमृत राज ने कहा कि भारत की शिल्प परंपराओं को जीवित रखना केवल स्मृतियों को संजोना नहीं है, बल्कि शिल्प को एक जीवंत शक्ति के रूप में पहचानना है, जो हमारे भविष्य को आकार दे रही है।

‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी में आगंतुकों के लिए कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनके माध्यम से वे भारत की भौतिक संस्कृति की उत्पत्ति, प्रक्रियाओं और समकालीन संभावनाओं को करीब से अनुभव कर सकते हैं। प्रदर्शनी में शामिल हैं—

  • रोज़मर्रा की सामग्रियों की यात्रा को दर्शाने वाले इमर्सिव इंस्टॉलेशंस

  • स्थानीय और पुनर्योजी सामग्रियों पर काम करने वाले कारीगरों और समूहों का क्यूरेटेड शिल्प बाज़ार

  • सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प प्रक्रियाओं पर दैनिक फिल्म स्क्रीनिंग, प्रदर्शन और संवाद

  • सिरेमिक, कढ़ाई, ऊन, बांस, प्राकृतिक रंग, खाद्य परंपराओं आदि पर कारीगरों, डिज़ाइनरों और विशेषज्ञों द्वारा संचालित हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं (कार्यशालाओं के लिए पंजीकरण आवश्यक)

यह आयोजन सामग्री की उत्पत्ति और शिल्प-आधारित पारिस्थितिक ज्ञान प्रणालियों के प्रति जन सहभागिता को प्रोत्साहित करता है तथा यह समझ विकसित करता है कि कैसे सामग्रियों और उनके निर्माताओं के साथ जागरूक संबंधों के माध्यम से एक सतत भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

IFFI 2025 में पहली बार रेड कार्पेट पर ‘Handloom Sarees in Motion: 70MM on Runway’ फैशन शो आयोजित

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (IFFI) 2025 के रेड कार्पेट पर इस वर्ष एक अनोखा और पहली बार होने वाला अनुभव देखने को मिला, जहाँ वस्त्र मंत्रालय के हैंडलूम विभाग (DC Handlooms) ने सिनेमा, संस्कृति और कुट्योर (Couture) को एक साथ मंच पर उतारा।

यह फैशन शो “Handloom Sarees in Motion: 70MM on Runway” भारतीय हैंडलूम को समर्पित एक सामाजिक पहल थी।

दो बार प्रस्तुत किए गए इस 15 मिनट के भव्य फैशन शो ने दर्शकों को भारतीय सिनेमा की यात्रा पर ले जाते हुए, हर युग को एक सााड़ी के माध्यम से जीवंत किया। हर सेगमेंट में उस दौर की फिल्मों के संगीत का उपयोग किया गया, जिससे पूरा रेड कार्पेट नॉस्टेल्जिया, कला और साड़ी की कालातीत गरिमा से भर उठा।

1940 के शास्त्रीय अंदाज़ से लेकर 2020 के आधुनिक और एक्सपेरिमेंटल स्टाइल तक—भारतीय सिनेमा की सभी प्रसिद्ध झलकियाँ साड़ियों के माध्यम से प्रदर्शित की गईं। शो ने पुराने दौर की कोमल हीरोइनों, 70 के दशक की बेबाक शैली, 90 के रोमांटिक दौर और आज के ग्लैमरस युग की यादों को फिर से जीवंत किया।

40 से अधिक हैंडलूम साड़ियों का भव्य प्रदर्शन

शो में देशभर से आई 40 से अधिक साड़ियों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें शामिल थीं:

  • तसर रेशम – छत्तीसगढ़

  • इकत पश्मीना – जम्मू-कश्मीर

  • बनारसी बुटीदार एवं मुबारकपुर लच्छा बुता – उत्तर प्रदेश

  • चंदेरी – मध्य प्रदेश

  • घीचा सिल्क – छत्तीसगढ़

  • वेंकटागिरी – आंध्र प्रदेश

  • कुथमपुल्ली – केरल

इसके अलावा कई साड़ियों पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों द्वारा हाथ से पेंट की गई कलाओं को भी प्रदर्शित किया गया, जिनमें शामिल थीं:

  • पिचवाई (राजस्थान)

  • पत्ताचित्र (ओडिशा)

  • वारली (महाराष्ट्र)

  • पेन-कलमकारी (आंध्र प्रदेश)

  • मधुबनी (बिहार)

  • गोंड एवं भील कला (झारखंड/मध्य प्रदेश)

सम्मानित अतिथियों के वक्तव्य

एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने कहा:

“IFFI रचनात्मकता का उत्सव है। इस वर्ष मुख्य रेड कार्पेट पर हैंडलूम आधारित फैशन शो ने भारत की सांस्कृतिक गहराई और सिनेमा व शिल्प कौशल के अद्भुत संगम को दर्शाया।”

हैंडलूम विकास आयुक्त डॉ. एम बीना ने कहा:

“साड़ी केवल परिधान नहीं बल्कि दर्शन है—कला का, ग्रामीण जीवन का, परंपरा का। IFFI के माध्यम से हमने वैश्विक दर्शकों के सामने भारत के बुनकरों और कलाओं की विरासत को प्रस्तुत किया है।”


वस्त्र मंत्रालय के अधीन संगठनों ने "स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025" के अंतर्गत व्यापक गतिविधियों का आयोजन

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नई दिल्ली-वस्त्र मंत्रालय एवं इसके अधीन विभिन्न संगठनों ने “स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025” के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी स्तर पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वच्छता, जनजागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना रहा।

जेसीआई क्षेत्रीय कार्यालय ने निगम के सफाई मित्रों एवं आमजन के लिए “सफाई मित्र सुरक्षा शिविर” आयोजित किए। इन शिविरों से 200 से अधिक लोगों को लाभ मिला, जिनमें नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, औषधि वितरण एवं अन्य सेवाएँ सम्मिलित रहीं।

टेक्सटाइल्स कमेटी, मुंबई ने अधिक भीड़-भाड़ वाले स्थलों पर स्वच्छ भारत सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किए, जिनमें स्थानीय एवं क्षेत्रीय कला, संगीत और नृत्य शैलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश प्रसारित किया गया।

राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम लिमिटेड (एनएचडीसी) ने अपने मुख्यालय परिसर में 22 सितंबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। इसके अतिरिक्त, निगम के क्षेत्रीय कार्यालयों में भी निरंतर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) ने “जन-आधारित विशाल स्वच्छता अभियान” का आयोजन कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में किया। इस अवसर पर सचिव सहित अन्य अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

हथकरघा विकास आयुक्त का कार्यालय द्वारा नई दिल्ली स्थित उद्योग भवन परिसर के विभिन्न अनुभागों में कीट नियंत्रण एवं गहन सफाई गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:

“स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि यह जनआंदोलन है। वस्त्र मंत्रालय तथा इसके अधीन सभी संगठन प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत के संकल्प को साकार करने हेतु प्रतिबद्ध हैं।”

वस्त्र मंत्रालय ने शुरू किया स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान

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वस्त्र मंत्रालय गर्व के साथ घोषणा करता है कि स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान का शुभारंभ हो चुका है। यह एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य दैनिक जीवन में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। यह अभियान मंत्रालय के सभी संगठनों में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा।

इस वर्ष का थीम है ‘स्वच्छोत्सव’, जो स्वच्छता को सामूहिक प्रयास और सामुदायिक भागीदारी का त्योहार मानकर इसे मनाने पर जोर देता है। इस थीम के तहत, मंत्रालय और उसके संबद्ध संगठन स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जागरूकता पर आधारित कई गतिविधियां आयोजित करेंगे।

  • कार्यालय परिसर, शैक्षणिक संस्थानों के परिसर और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे।

  • इन कार्यक्रमों में कर्मचारी, छात्र, नागरिक समाज समूह, स्थानीय समुदाय और आम जनता को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान के तहत की गई प्रमुख गतिविधियां:

  1. स्वच्छता प्रतिज्ञा:

    • AS&FA (वस्त्र) ने अधिकारियों को स्वच्छता प्रतिज्ञा दिलाई ताकि वे इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा मानें।

    • मंत्रालय के सभी संगठनों में भी स्वच्छता प्रतिज्ञा कराई गई।

  2. स्टैंडिस और बैनर:

    • मंत्रालय और अन्य संगठनों के प्रमुख स्थानों पर स्टैंडिस लगाए गए।

    • स्वच्छता ही सेवा अभियान का बैनर मंत्रालय और उसके सभी संगठनों की वेबसाइट के डैशबोर्ड पर अपलोड किया गया।

  3. सेल्फी प्वाइंट:

    • मंत्रालय और अन्य कार्यालयों में प्रमुख स्थानों पर सेल्फी प्वाइंट स्थापित किया गया ताकि लोग स्वच्छता संदेश के साथ फोटो ले सकें।

  4. सोशल मीडिया अभियान:

    • अभियान की गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जा रहा है, ताकि स्वच्छता का संदेश अधिकतम लोगों तक पहुंचे।



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