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एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, शूटिंग में फिर चमके भारतीय खिलाड़ी

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नई दिल्ली- जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। सोमवार, 21 सितंबर को भारत ने शूटिंग, टेबल टेनिस, कबड्डी और हॉकी समेत कई खेलों में दमदार प्रदर्शन किया। भारत की नजरें अब पदकों की संख्या बढ़ाने पर हैं।

शूटिंग में भारत का जलवा

शूटिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में हिमांशु ढिल्लों, पार्थ माने और रुद्रांक्ष पाटिल की भारतीय टीम ने रजत पदक अपने नाम किया।

भारत ने इस स्पर्धा में 1890.1 अंक हासिल किए, जबकि चीन ने स्वर्ण और दक्षिण कोरिया ने कांस्य पदक जीता। हिमांशु ढिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल ने व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में भी जगह बनाई।

इससे पहले भारतीय महिला निशानेबाजों ने भी 10 मीटर एयर राइफल में दो रजत पदक जीतकर भारत का पदक खाता खोला था।

मिश्रित मार्शल आर्ट्स में भी पदक पक्का

भारत की सुचिका तारियाल ने महिलाओं की पारंपरिक 60 किलोग्राम मिश्रित मार्शल आर्ट्स स्पर्धा में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया।

सेमीफाइनल में सिंगापुर की हुई हून तेओ के खिलाफ मुकाबले का फैसला वजन के नियम के आधार पर हुआ। सुचिका को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने फैसले पर असहमति जताई। इसके बावजूद भारत के खाते में इस स्पर्धा का कांस्य पदक आया।

टेबल टेनिस में पाकिस्तान पर भारत की जीत

महिला टेबल टेनिस टीम ने पाकिस्तान को 3-0 से हराकर शानदार शुरुआत की।

भारत की सुतीर्था मुखर्जी, सिंड्रेला दास और श्रीजा अकुला ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर भारत को एकतरफा जीत दिलाई। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने अपने ग्रुप में लगातार तीसरी जीत दर्ज की।

महिला हॉकी टीम की बड़ी जीत

महिला हॉकी में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने इंडोनेशिया के खिलाफ 14-1 की बड़ी जीत दर्ज की।

इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने टूर्नामेंट में अपना दबदबा दिखाया और गोल अंतर को भी मजबूत किया।

कबड्डी में भी भारत की मजबूत शुरुआत

भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने भी अभियान की शुरुआत जीत के साथ की। भारतीय टीम ने जापान के खिलाफ मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।

कबड्डी में भारत अपने खिताब की रक्षा करने के इरादे से मैदान में उतरा है।

 तैराकी में श्रीहरि नटराज फाइनल में पहुंचे

तैराकी में भारतीय खिलाड़ी श्रीहरि नटराज ने पुरुषों की 50 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि फाइनल में वह 10वें स्थान पर रहे।

भारत के तैराकी दल के लिए यह दिन मिश्रित परिणामों वाला रहा।

भारत की नजरें अब और पदकों पर

एशियन गेम्स के शुरुआती मुकाबलों में भारत ने शूटिंग में लगातार पदक हासिल किए हैं। इसके अलावा महिला क्रिकेट में भारत ने फाइनल में जगह बनाकर एक और पदक पक्का किया है।

भारत के खिलाड़ी हॉकी, कबड्डी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, मुक्केबाजी, तैराकी, वुशु और अन्य खेलों में भी लगातार मुकाबले खेल रहे हैं।

भारत के लिए बड़ी तस्वीर

शूटिंग में पदकों की बरसात, हॉकी में बड़ी जीत, टेबल टेनिस में पाकिस्तान पर 3-0 की जीत और कबड्डी में मजबूत शुरुआत—एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल लगातार सुर्खियां बटोर रहा है।

अब भारतीय प्रशंसकों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत के खिलाड़ी और पदक जीतने के लिए मैदान में उतरेंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी पहनेंगे ‘मेक इन इंडिया’ जूट परिधान, प्राकृतिक रेशों को मिलेगा वैश्विक मंच

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नई दिल्ली- भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) ने टिकाऊ (सस्टेनेबल) वस्त्रों को बढ़ावा देने और प्राकृतिक रेशों में भारत की नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी और टीम के सदस्य पहली बार जूट-विस्कोस (Jute-Viscose) मिश्रित कपड़े से बने विशेष परिधान पहनेंगे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मेक इन इंडिया" और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने 100 प्रतिशत जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े को एक टिकाऊ और आधुनिक वस्त्र विकल्प के रूप में विकसित किया है।

नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आधिकारिक किट अनावरण एवं विदाई समारोह में केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहला अवसर होगा जब किसी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता में भारतीय दल जूट आधारित परिधान पहनकर दुनिया के सामने उतरेगा। इससे न केवल भारत के जूट उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्माताओं की कारीगरी और जूट किसानों के योगदान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा।

जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े का विकास कोलकाता की ग्लॉस्टर जूट मिल्स के सहयोग से किया गया, जबकि इन परिधानों की डिजाइन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), नई दिल्ली ने तैयार की है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 72 देशों के खिलाड़ी भाग लेंगे। भारत की ओर से 124 सदस्यीय दल, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला खिलाड़ी शामिल हैं, प्रतियोगिता में हिस्सा लेगा।

राष्ट्रीय जूट बोर्ड का मानना है कि यह पहल जूट विविधीकरण कार्यक्रम को नई गति देगी, जूट उत्पादों के लिए देश और विदेश में नए बाजार खोलेगी तथा प्राकृतिक रेशों को वैश्विक स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही यह देश के लाखों जूट किसानों के लिए गर्व और प्रोत्साहन का विषय भी बनेगी।


जनवरी 2026 में रेस-वॉक शुरू करने वाली शिलांग की युवा एथलीट बेथलीन माकरी ने खुद पर यकीन रखते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता कांस्य पदक

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रायपुर- पिछले साल 29 दिसंबर को शिलांग के साई के स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में बेथलीन ग्रेस माकरी के कोच ने अचानक इस युवा एथलीट में एक रेस-वॉक एथलीट बनने की काबिलियत देखी। मजे की बात यह है कि बेथलीन खुद इस इवेंट के बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानती थी और इसकी तकनीकी बारीकियों की तो बात ही छोड़ दें।

पिछले साल तक, मेघालय की यह युवा एथलीट एक मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के तौर पर मुकाबला कर रही थीं। लेकिन 2026 की शुरुआत में, उसे अपना खेल बदलने के लिए कहा गया जिसने उसकी शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की ताकत की परीक्षा ली।

खासी ट्राइब से आने वाली बेथलीन के लिए यह बदलाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उनके लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बहुत कठिन थे, जब वह रेस-वॉक की अनजान तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थीं और शरीर में तेज दर्द से जूझ रही थीं। इसके चलते कई रातें बिना नींद के बीतीं और मन में आत्म-संदेह भी पैदा होने लगा।

हालांकि, उनके कोच और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी और इकलौती बेटी होने के नाते, बेथलीन ने इस चुनौती को स्वीकार किया और खेल की तकनीकी बारीकियों को सीखने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पहले एडिशन में भाग लेने के लिए जगदलपुर का रुख किया।

उन्होंने साई मीडिया से कहा, '' पहले दो हफ्ते वाकई बहुत मुश्किल थे, खासकर मेरे शरीर के लिए। रेस-वॉक की तकनीकी बारीकियां मध्यम या लंबी दूरी की दौड़ से बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए मुझे इसे समझने में समय लगा। इसके बाद कई रातों तक नींद नहीं आई, घबराहट के पल आए और आखिरकार मुझे खुद पर शक होने लगा कि क्या मेरा फैसला सही था।'' 

लेकिन बुधवार को उन संघर्षों का भरपूर फल मिला। बेथलीन ने महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। वह झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं।

पदक जीतने के कुछ ही पलों बाद इस एथलीट ने इसका श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उन्होंने कहा, ''मेरे कोच और मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया, और मुझे इसे जारी रखने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे। मैंने भी इसे आज़माने का सोचा, और आज मैं यहां हूं। मेरे पास अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह ठीक वैसी ही शुरुआत थी जिसकी मुझे ज़रूरत थी।'' 

उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला कांस्य पदक मेरी कड़ी मेहनत, मेरे विश्वास और मेरे कोचों व परिवार के समर्थन का प्रमाण है और यह इस खेल में आगे बढ़ने के लिए मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है।“

शिलांग कॉलेज में बीए की दूसरे वर्ष की छात्रा बेथलीन को इस बात पर बेहद गर्व है कि वह मेघालय की एकमात्र ऐसी 'रेस वॉकर' हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, '' मेघालय से कोई रेस वॉकर नहीं है और मेरा मानना है कि मेरा 'खेलो इंडिया' पदक युवाओं को इस खेल को पेशेवर तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मुझे भी अब यह खेल पसंद आने लगा है।''

चार साल की बेटी को घर पर छोड़, असम की भारोत्तोलक पल्लवी ने जीता खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक

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पल्लवी की बेटी महज छह महीने की थी जब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया

बीएसएफ में कार्यरत पति के सहयोग के बगैर आसान नहीं था यह वापसी का सफर

रायपुर- जब पल्लवी पायेंग की बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब असम की इस वेटलिफ्टर के सामने एक कठिन फैसला था। या तो वह अपने पसंदीदा खेल को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। ऐसे समय में उनके पति सुखावन थौमंग ने उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मां ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। पल्लवी ने इस त्याग को सार्थक करते हुए यहां आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।

असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने उनके खेल जीवन की रफ्तार को रोक दिया। इसी दौरान वह मां बनीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग मंच पर वापसी की इच्छा उनके भीतर हमेशा बनी रही। हालांकि, मां बनने के बाद खेल में लौटने का विचार जितना उत्साहजनक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।

पल्लवी ने साई मीडिया से कहा, “यह आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने मां बनने के बाद शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन एक महिला ही समझ सकती है कि पूरी फिटनेस में लौटने के लिए उसे किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बेटी को तब छोड़ा जब वह सिर्फ छह महीने की थी, ताकि मैं दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर सकूं। यह भावनात्मक फैसला था, लेकिन मुझे लगा कि यही सही समय है।” अब चार साल की उनकी बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार स्थित नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है।



यह फैसला आसान नहीं था।

बेटी से दूर लंबे समय तक रहना और कई बार अपने निर्णय पर सवाल उठाना, पल्लवी के सफर का हिस्सा रहा। लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया है, जबकि मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि जब मैं प्रतियोगिताओं के लिए बाहर जाती हूं, तो मेरी बेटी का पूरा ख्याल रखा जाए।” पल्लवी के पति, जो राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाजी पदक विजेता रह चुके हैं, वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं और जम्मू में तैनात हैं।

इसके बावजूद वापसी का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। मां बनने के बाद 2023 में गोलाघाट में हुए राज्य चैंपियनशिप में पल्लवी छठे स्थान पर रहीं। अगले साल डिब्रूगढ़ में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब प्रतियोगिता देर रात तक चली और वह अपनी लय नहीं बना सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाने लगी। तेजपुर में हुए राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और उसी साल अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस वर्ष भी अस्मिता लीग में एक और स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया।

रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक उनके लिए खास रहा। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक मेरे करियर के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला है कि मैं इस स्तर की खिलाड़ी हूं।”

कर्नाटक के तैराक मणिकांता ने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की, छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने जीता दूसरा पदक

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ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक ने चोट के बावजूद वेटलिफ्टिंग में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर- कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं।

मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।

मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2ः25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2ः34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2ः36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2ः53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2ः59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3ः06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।

पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।

मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।”

मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

डेफ़लिम्पिक्स 2025 में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों को दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज टोक्यो में आयोजित 25वें समर डेफ़लिम्पिक्स 2025 में भारत के डेफ़लिम्पियनों के शानदार प्रदर्शन पर हृदय से बधाई दी।

20 पदकों—जिसमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं—के ऐतिहासिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ, हमारे खिलाड़ियों ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से उत्कृष्ट उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने हर खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ की निरंतर मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके इन अद्भुत प्रदर्शन ने भारत का गौरव वैश्विक मंच पर और ऊँचा किया है, और पूरा राष्ट्र उनके इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करता है।

मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया:

“टोक्यो में आयोजित 25वें समर डेफ़लिम्पिक्स 2025 में हमारे डेफ़लिम्पियनों के असाधारण प्रदर्शन पर हार्दिक बधाई। 20 पदकों, जिनमें 9 स्वर्ण शामिल हैं, के ऐतिहासिक सर्वोत्तम प्रदर्शन ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि दृढ़ संकल्प और समर्पण से अद्भुत परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। हर खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ को ढेरों शुभकामनाएँ। पूरा राष्ट्र आप सभी पर गर्व करता है!”


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई यूथ गेम्स 2025 में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर युवा खिलाड़ियों को दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई यूथ गेम्स 2025 में भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर देश के युवा खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी है। भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 48 पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया है।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा:

“हमारे युवा खिलाड़ियों ने एशियाई यूथ गेम्स 2025 में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने शानदार 48 पदक जीतकर पूरे देश को गर्व महसूस कराया है। दल के सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई। उनके जोश, लगन और मेहनत की झलक उनके हर प्रदर्शन में स्पष्ट दिखाई देती है। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएँ।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशभर के खेल प्रेमियों और युवाओं में उत्साह का संचार किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भारत के युवा खेलों के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छूने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एशियाई यूथ गेम्स 2025 में भारतीय दल ने न केवल पदक तालिका में प्रभावशाली स्थान प्राप्त किया है, बल्कि विभिन्न खेलों में उत्कृष्टता, अनुशासन और टीम भावना का अद्भुत प्रदर्शन किया है। एथलेटिक्स, शूटिंग, तैराकी, कुश्ती, बॉक्सिंग और बैडमिंटन जैसे कई खेलों में युवा खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

सरकार द्वारा हाल के वर्षों में खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और युवा खेल विकास कार्यक्रमों जैसी पहल के माध्यम से खिलाड़ियों को मिल रहे सहयोग और प्रशिक्षण के परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

यह उपलब्धि न केवल भारत के उभरते खेल पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश के युवा खिलाड़ी “नया भारत” की ऊर्जा, आत्मविश्वास और क्षमता के सच्चे प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इन युवा खिलाड़ियों की सफलता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और भारत को खेल महाशक्ति बनाने के संकल्प को और बल प्रदान करेगी।


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