Media24Media.com: 'विकसित भारत 2047' के लिए क्षमता निर्माण के साथ संस्थागत समन्वय भी आवश्यक : डॉ. जितेंद्र सिंह

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'विकसित भारत 2047' के लिए क्षमता निर्माण के साथ संस्थागत समन्वय भी आवश्यक : डॉ. जितेंद्र सिंह

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का "समग्र सरकार (Whole of Government)" दृष्टिकोण विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थानों की क्षमताओं के समन्वय पर आधारित है, जहाँ सभी संस्थान और पेशेवर अपनी-अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण (Capacity Building) अब केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि संस्थागत समन्वय (Institutional Synergy) को भी मजबूत करना होगा, ताकि 'विकसित भारत 2047' की आकांक्षाओं के अनुरूप शासन व्यवस्था तैयार की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission - CBC) तथा स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'दक्ष (DAKSH - Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony)' नेतृत्व विकास कार्यक्रम के तीसरे बैच का उद्घाटन कर रहे थे। यह एक वर्ष का नेतृत्व विकास कार्यक्रम है, जिसे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सहयोग से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के वरिष्ठ अधिकारियों को भविष्य में बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में लोक उद्यम विभाग के सचिव के. मोसेस चलाई, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल, स्कोप के अध्यक्ष एवं एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. पी. महादेवस्वामी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन मदन पिल्लुतला, स्कोप के महानिदेशक अतुल सोबती, उपाध्यक्ष एवं गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ब्रजेश कुमार उपाध्याय सहित अनेक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि तथा कार्यक्रम के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी इस कार्यक्रम की विश्वसनीयता और उपयोगिता को दर्शाती है। उन्होंने वर्तमान बैच में महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना करते हुए इसे भारत के बदलते नेतृत्व परिदृश्य का सकारात्मक संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के तहत लागू किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधारों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह एक नया संस्थागत प्रयोग था, लेकिन आज यह पूरे सरकारी तंत्र में क्षमता निर्माण का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।

मंत्री ने कहा कि सरकार की कार्यशैली अब 'Whole of Government' से आगे बढ़कर 'Whole of Government and Whole of Nation' की अवधारणा की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण तभी सार्थक होगा जब विभिन्न संस्थान अलग-अलग कार्य करने के बजाय अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का समन्वित उपयोग करें। इस दिशा में क्षमता निर्माण आयोग विभिन्न श्रेणियों के लोक सेवकों को साझा प्रशिक्षण मंच उपलब्ध कराकर व्यक्तिगत दक्षताओं के साथ-साथ संस्थागत समन्वय को भी सुदृढ़ कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्ष (DAKSH) कार्यक्रम को देश के विकसित होते क्षमता निर्माण तंत्र का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भविष्य के नेतृत्व का निर्माण कर रहा है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि पूर्व बैचों के कई प्रतिभागी अब बोर्ड स्तर के पदों पर पहुँच चुके हैं, जो कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच की पारंपरिक सीमाएँ धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इसलिए वरिष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों को निजी क्षेत्र, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और आधुनिक प्रबंधन मॉडल से भी परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि वे तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

प्रौद्योगिकी में तीव्र बदलाव का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज के दौर में नेतृत्व के लिए निरंतर सीखना (Continuous Learning) अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ज्ञान तेजी से बदल रहा है, इसलिए सफल नेतृत्व के लिए अनुकूलन क्षमता और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को वरिष्ठ अधिकारियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक अनुकूलित (Customized) बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए सुझाव दिया कि दक्ष जैसे कार्यक्रमों में संरचित एवं गोपनीय फीडबैक प्रणाली विकसित की जाए, जिससे कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण को एकतरफा व्याख्यानों के बजाय संवाद-आधारित बनाया जाए, ताकि प्रतिभागी अपने व्यावसायिक अनुभव भी साझा कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों तथा विषय-विशेष उत्कृष्टता केंद्रों के साथ अधिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नेतृत्व विकास कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्ष (DAKSH) जैसे कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भारत के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब क्षमता निर्माण आयोग और स्कोप जैसे संस्थान 'विकसित भारत' की यात्रा में अपने महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व कर सकेंगे।

इस अवसर पर क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि आज नेतृत्व विकास केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनों और संस्थानों को नई प्रौद्योगिकियों तथा बदलते प्रशासनिक मॉडल के अनुरूप सक्षम बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उभरती प्रौद्योगिकियों और संस्थागत अनुकूलन जैसे भविष्य उन्मुख विषयों को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल कर रहा है तथा प्रतिभागियों के फीडबैक के आधार पर कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा रहा है।

क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल ने कहा कि दक्ष (DAKSH) भारत के भावी नेतृत्व में एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश है। उन्होंने बताया कि यह एक वर्षीय कार्यक्रम व्यवहार विज्ञान, नेतृत्व अनुसंधान तथा रणनीतिक सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना तथा उन्हें नैतिक नेतृत्व, नवाचार, लचीलापन और राष्ट्रीय दृष्टि के साथ संस्थानों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाना है।

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