Media24Media.com: बिहार के मुंगेर का लगभग 700 वर्ष पुराना बरगद वैज्ञानिक रूप से दिनांकित सबसे प्राचीन बरगद घोषित

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बिहार के मुंगेर का लगभग 700 वर्ष पुराना बरगद वैज्ञानिक रूप से दिनांकित सबसे प्राचीन बरगद घोषित

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बिहार के मुंगेर स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने बरगद (Ficus benghalensis) को रेडियोकार्बन डेटिंग के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से दिनांकित दुनिया का सबसे प्राचीन बरगद (Oldest Accurately Dated Banyan Tree) माना गया है। यह पहली बार है जब किसी बरगद के वृक्ष की आयु का निर्धारण लोककथाओं या ऐतिहासिक अभिलेखों के बजाय पूर्णतः वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर किया गया है।

बरगद के वृक्ष अपनी विशाल जड़ों और शाखाओं के जटिल तंत्र के कारण पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष महत्व रहा है। अब तक ऐसे प्राचीन वृक्षों की आयु का अनुमान लोककथाओं, स्थानीय मान्यताओं या ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर लगाया जाता था, जो अक्सर सटीक नहीं होता था। उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले अधिकांश वृक्षों में स्पष्ट वार्षिक वृक्ष-वृत्त (Growth Rings) नहीं होने के कारण पारंपरिक डेंड्रोक्रोनोलॉजी (वृक्ष-वर्ष निर्धारण) तकनीकें प्रभावी नहीं थीं। इसलिए उच्च सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग जैसी वैकल्पिक वैज्ञानिक पद्धति की आवश्यकता महसूस की गई।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences), लखनऊ की वैज्ञानिक डॉ. त्रिणा बोस को बिहार वन विभाग ने मुंगेर के इस ऐतिहासिक बरगद की आयु निर्धारित करने का दायित्व सौंपा। उन्होंने उष्णकटिबंधीय वृक्षों के लिए पारंपरिक विधियों की सीमाओं को देखते हुए एक नई वैज्ञानिक पद्धति विकसित करने की पहल की।

डॉ. त्रिणा बोस के नेतृत्व में डॉ. मयंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव की शोध टीम ने वृक्ष के द्वितीयक तने तथा प्राचीन प्राथमिक शाखा के केंद्र (Pith) के निकट से लकड़ी के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों से पौधों की कोशिका भित्ति के सबसे स्थिर घटक अल्फा-सेलुलोज़ (Alpha-Cellulose) को अलग किया गया।

इसके बाद इन नमूनों की एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (Accelerator Mass Spectrometry–AMS) आधारित उच्च-सटीकता वाली रेडियोकार्बन डेटिंग की गई। प्राप्त परिणामों का नवीनतम IntCal20 कैलिब्रेशन कर्व तथा OxCal सॉफ्टवेयर की सहायता से विश्लेषण कर वृक्ष की आयु लगभग 700 वर्ष निर्धारित की गई।

यह निष्कर्ष उस पूर्व धारणा को भी गलत सिद्ध करता है कि इस बरगद का रोपण ऐतिहासिक 'बड़ा बंगला (Burra Bunglow)' के निर्माण के समय किया गया था। वास्तुशिल्प के आधार पर यह भवन लगभग 300–350 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे शासकों एवं आम जनता के संवाद, ग्राम सभाओं तथा सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग किया जाता था।

नए वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि यह लगभग 700 वर्ष पुराना बरगद उस प्राकृतिक वन का अवशेष है, जो कभी इस क्षेत्र में विद्यमान था। अर्थात यह वृक्ष 'बड़ा बंगला' के निर्माण से भी पहले अस्तित्व में था और उसने उसके निर्माण का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया। इस प्रकार यह अध्ययन क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाक्रम की समयरेखा को नए सिरे से परिभाषित करता है।

यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Quaternary Research में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में विकसित वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से अब विरासत वृक्षों (Heritage Trees) की आयु का सटीक निर्धारण किया जा सकेगा। इससे सरकारों, वन विभागों और संरक्षण एजेंसियों को सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों की पहचान और संरक्षण में सहायता मिलेगी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के प्राचीन वृक्षों पर भी लागू की जा सकती है। इससे जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा अतीत की जलवायु एवं ऐतिहासिक परिदृश्यों के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी।

यह शोध उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के प्राचीन एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्षों के वैज्ञानिक आयु निर्धारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो दक्षिण एशिया सहित विश्वभर में प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को सशक्त आधार प्रदान करेगी।


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