Media24Media.com: #LeadershipDevelopment

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #LeadershipDevelopment. Show all posts
Showing posts with label #LeadershipDevelopment. Show all posts

'विकसित भारत 2047' के लिए क्षमता निर्माण के साथ संस्थागत समन्वय भी आवश्यक : डॉ. जितेंद्र सिंह

No comments Document Thumbnail

मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का "समग्र सरकार (Whole of Government)" दृष्टिकोण विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थानों की क्षमताओं के समन्वय पर आधारित है, जहाँ सभी संस्थान और पेशेवर अपनी-अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण (Capacity Building) अब केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि संस्थागत समन्वय (Institutional Synergy) को भी मजबूत करना होगा, ताकि 'विकसित भारत 2047' की आकांक्षाओं के अनुरूप शासन व्यवस्था तैयार की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission - CBC) तथा स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'दक्ष (DAKSH - Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony)' नेतृत्व विकास कार्यक्रम के तीसरे बैच का उद्घाटन कर रहे थे। यह एक वर्ष का नेतृत्व विकास कार्यक्रम है, जिसे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के सहयोग से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के वरिष्ठ अधिकारियों को भविष्य में बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में लोक उद्यम विभाग के सचिव के. मोसेस चलाई, क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल, स्कोप के अध्यक्ष एवं एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. पी. महादेवस्वामी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन मदन पिल्लुतला, स्कोप के महानिदेशक अतुल सोबती, उपाध्यक्ष एवं गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ब्रजेश कुमार उपाध्याय सहित अनेक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि तथा कार्यक्रम के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी इस कार्यक्रम की विश्वसनीयता और उपयोगिता को दर्शाती है। उन्होंने वर्तमान बैच में महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना करते हुए इसे भारत के बदलते नेतृत्व परिदृश्य का सकारात्मक संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के तहत लागू किए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधारों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह एक नया संस्थागत प्रयोग था, लेकिन आज यह पूरे सरकारी तंत्र में क्षमता निर्माण का एक सशक्त स्तंभ बन चुका है।

मंत्री ने कहा कि सरकार की कार्यशैली अब 'Whole of Government' से आगे बढ़कर 'Whole of Government and Whole of Nation' की अवधारणा की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण तभी सार्थक होगा जब विभिन्न संस्थान अलग-अलग कार्य करने के बजाय अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का समन्वित उपयोग करें। इस दिशा में क्षमता निर्माण आयोग विभिन्न श्रेणियों के लोक सेवकों को साझा प्रशिक्षण मंच उपलब्ध कराकर व्यक्तिगत दक्षताओं के साथ-साथ संस्थागत समन्वय को भी सुदृढ़ कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्ष (DAKSH) कार्यक्रम को देश के विकसित होते क्षमता निर्माण तंत्र का स्वाभाविक विस्तार बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए भविष्य के नेतृत्व का निर्माण कर रहा है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि पूर्व बैचों के कई प्रतिभागी अब बोर्ड स्तर के पदों पर पहुँच चुके हैं, जो कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच की पारंपरिक सीमाएँ धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इसलिए वरिष्ठ सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों को निजी क्षेत्र, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और आधुनिक प्रबंधन मॉडल से भी परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि वे तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

प्रौद्योगिकी में तीव्र बदलाव का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज के दौर में नेतृत्व के लिए निरंतर सीखना (Continuous Learning) अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ज्ञान तेजी से बदल रहा है, इसलिए सफल नेतृत्व के लिए अनुकूलन क्षमता और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को वरिष्ठ अधिकारियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक अनुकूलित (Customized) बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए सुझाव दिया कि दक्ष जैसे कार्यक्रमों में संरचित एवं गोपनीय फीडबैक प्रणाली विकसित की जाए, जिससे कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा सके। साथ ही प्रशिक्षण को एकतरफा व्याख्यानों के बजाय संवाद-आधारित बनाया जाए, ताकि प्रतिभागी अपने व्यावसायिक अनुभव भी साझा कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों तथा विषय-विशेष उत्कृष्टता केंद्रों के साथ अधिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नेतृत्व विकास कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दक्ष (DAKSH) जैसे कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भारत के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए सक्षम नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब क्षमता निर्माण आयोग और स्कोप जैसे संस्थान 'विकसित भारत' की यात्रा में अपने महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व कर सकेंगे।

इस अवसर पर क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि आज नेतृत्व विकास केवल व्यक्तिगत दक्षताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनों और संस्थानों को नई प्रौद्योगिकियों तथा बदलते प्रशासनिक मॉडल के अनुरूप सक्षम बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उभरती प्रौद्योगिकियों और संस्थागत अनुकूलन जैसे भविष्य उन्मुख विषयों को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल कर रहा है तथा प्रतिभागियों के फीडबैक के आधार पर कार्यक्रमों में निरंतर सुधार किया जा रहा है।

क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य (प्रशासन) अलका मित्तल ने कहा कि दक्ष (DAKSH) भारत के भावी नेतृत्व में एक रणनीतिक राष्ट्रीय निवेश है। उन्होंने बताया कि यह एक वर्षीय कार्यक्रम व्यवहार विज्ञान, नेतृत्व अनुसंधान तथा रणनीतिक सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों को बोर्ड स्तर की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना तथा उन्हें नैतिक नेतृत्व, नवाचार, लचीलापन और राष्ट्रीय दृष्टि के साथ संस्थानों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाना है।

सीपीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम के दूसरे बैच का नई दिल्ली में शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रमुख नेतृत्व विकास कार्यक्रम DAKSH (Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) के दूसरे बैच के उद्घाटन सत्र का आयोजन आज नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में किया गया। यह कार्यक्रम क्षमता निर्माण आयोग (CBC) और स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (SCOPE) द्वारा संयुक्त रूप से मिशन कर्मयोगी के व्यापक ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह में भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव;  के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग; रचना शाह, सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग;  एस. राधा चौहान, अध्यक्ष, क्षमता निर्माण आयोग; के. पी. महादेवस्वामी, अध्यक्ष, स्कोप;अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप; तथा अलका मित्तल, सदस्य (प्रशासन), क्षमता निर्माण आयोग शामिल थे।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अतुल सोबती, महानिदेशक, स्कोप ने कहा कि DAKSH कार्यक्रम नेताओं को आत्ममंथन, तैयारी और स्वयं के रूपांतरण में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नेतृत्व उभरने, रणनीतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए अलका मित्तल, सदस्य, क्षमता निर्माण आयोग ने DAKSH के डिजाइन और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम 12 माह की एक परिवर्तनकारी नेतृत्व यात्रा के रूप में संरचित है, जिसमें डिजिटल लर्निंग, प्रमुख संस्थानों में कक्षा आधारित प्रशिक्षण, एक्जीक्यूटिव कोचिंग, लाइव एक्शन लर्निंग प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि DAKSH के पहले बैच में 73 वरिष्ठ सीपीएसई अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया था, जबकि दूसरे बैच में ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, खनन एवं खनिज, विनिर्माण और निर्माण जैसे विविध क्षेत्रों से 72 प्रतिभागी शामिल हैं।

उन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को भी रेखांकित किया, जिनमें iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिकारियों का बड़े पैमाने पर ऑनबोर्डिंग, कर्मयोगी सप्ताह जैसे पहलों के माध्यम से आजीवन सीखने की संस्कृति का संस्थानीकरण, कर्मयोगी दक्षता मॉडल का विकास, प्रशिक्षण संस्थानों का प्रत्यायन तथा भारत-केंद्रित केस स्टडीज़ के राष्ट्रीय भंडार अमृत ज्ञान कोष का निर्माण शामिल है। सीपीएसई के लिए नेतृत्व विकास, दक्षता आधारित वृद्धि, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम को प्राथमिक सुधार क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

मुख्य संबोधन देते हुए डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने भारत की विकास यात्रा में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के निर्माण में सीपीएसई ने आधारभूत भूमिका निभाई, जिससे आर्थिक वृद्धि, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की नींव पड़ी। उन्होंने कहा कि कई दशकों तक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम भारत की विकास रणनीति की रीढ़ रहे।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि समय के साथ वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन और आर्थिक सुधारों ने वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के वर्चस्व पर होने वाली बहस अब एक समन्वित दृष्टिकोण में बदल गई है, जहां प्रतिस्पर्धा, दक्षता और नवाचार केंद्र में हैं। इस बदलते परिदृश्य में सीपीएसई से अपेक्षाएँ भी विकसित हुई हैं और उनसे अधिक चुस्ती के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सेवा करने की अपेक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत मुक्त व्यापार समझौतों और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहराई से एकीकृत हो रहा है, सीपीएसई को न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम अनिश्चितता के समय में आर्थिक विकास में रणनीतिक भूमिका निभाते रहते हैं।

डॉ. मिश्रा ने वर्ष 2021 की सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सीपीएसई को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां निजी उद्यमों की भूमिका बढ़ रही है, वहीं ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना और वित्त जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित, स्थिरता और लचीलेपन के लिए आवश्यक बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम उन बाजारों में संतुलनकारी भूमिका निभाते हैं जहां बाजार पूर्ण नहीं होते और जहां सार्वजनिक हित व राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू जुड़े होते हैं।

प्रौद्योगिकी और नवाचार के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि सीपीएसई को प्रौद्योगिकी उन्मुख और नवाचार प्रेरित बने रहना होगा। उन्होंने भारत के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उल्लेख करते हुए यूपीआई, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रौद्योगिकी अपनाने में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नेतृत्व करने की बेहतर स्थिति में हैं, जहां राष्ट्रीय विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।

नेतृत्व और मानव संसाधन पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता अंततः उसके नेतृत्व की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलन क्षमता और रणनीतिक सोच के महत्व पर बल दिया, विशेषकर तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे DAKSH कार्यक्रम का उपयोग संगठनात्मक सीमाओं से परे दृष्टिकोण विकसित करने, निर्णय क्षमता मजबूत करने, सहयोगात्मक ढंग से कार्य करने और साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप टीम निर्माण के लिए करें।

इससे पहले के. मोसेस चालई, सचिव, सार्वजनिक उद्यम विभाग ने सीपीएसई के पैमाने और आर्थिक योगदान पर संक्षेप में प्रकाश डाला। उन्होंने जीडीपी में योगदान और केंद्रीय राजकोष में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक और घरेलू परिवर्तनों के बीच इस योगदान को बनाए रखने के लिए भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व विकसित करना आवश्यक है, और DAKSH इस दिशा में एक समयोचित पहल है।

कार्यक्रम के अंत में जगदीप गुप्ता, सचिव, क्षमता निर्माण आयोग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मिशन कर्मयोगी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

DAKSH नेतृत्व कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार करने तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से परिकल्पित किया गया है।



केंद्रीय क्षेत्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) की क्षमता निर्माण पर भारत परामर्श सम्मेलन का आयोजन

No comments Document Thumbnail

क्षमता निर्माण आयोग (CBC) ने वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम विभाग (DPE) के सहयोग से नई दिल्ली में “भारत CPSEs’ Consultative Conclave” का आयोजन किया। इस सम्मेलन का विषय था: “Shaping India’s Growth Story through DAKSH PSEs @2047”, जिसका उद्देश्य CPSEs के लिए एक साझा और संरचित क्षमता निर्माण रोडमैप तैयार करना था। यह रोडमैप मिशन कर्मयोगी—भारत की राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण योजना के अनुरूप था।

सम्मेलन में CPSEs, केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य प्रमुख संस्थागत भागीदारों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। सम्मेलन के माध्यम से CPSEs की नेतृत्व क्षमता, उत्तराधिकार योजना, मानव संसाधन रणनीतियों में सुधार और अच्छे शासन के सिद्धांतों को समेकित करने पर जोर दिया गया।

मुख्य बिंदु और विवरण:

  • डॉ. अलका मित्तल (सदस्य, प्रशासन, CBC) ने CPSEs की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें केवल आर्थिक वृद्धि के इंजन ही नहीं बल्कि सार्वजनिक मूल्यों और दीर्घकालीन संस्थागत क्षमता के संरक्षक बताया।

  • एस. राधा चौहान (अध्यक्ष, CBC) ने दक्षता, नेतृत्व विकास और प्रदर्शन-आधारित सीखने को CPSEs में शामिल करने का महत्व बताया।

  • उद्घाटन भाषण में के. मोसेस चलाई (सचिव, DPE) ने नेतृत्व की आवश्यकता और अच्छे बदलाव को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के डॉ. सी. जयकुमार ने “HR Strategies for Purpose-Driven Leadership” विषयक मुख्य भाषण दिया।

  • अतुल सोबती (DG, SCOPE) ने DAKSH (Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) के तहत CPSEs में नेतृत्व विकास और HR सुधार का ढांचा प्रस्तुत किया।

  • सम्मेलन में CPSEs के बीच नेतृत्व विकास, प्रशिक्षण, उत्तराधिकार योजना, HR नीतियों और शासन सुधार पर राउंडटेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं।

भविष्य की योजना और थीमैटिक इवेंट्स:

  1. वित्तीय प्रबंधन: दीर्घकालीन पूंजी योजना, जोखिम ढांचे, संचालन उत्कृष्टता।

  2. अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार: तकनीकी अपनाने, नवाचार साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन।

  3. CSR, ESG और स्थिरता नेतृत्व: जिम्मेदार व्यवसाय, ESG मापदंड, जलवायु-संबंधी रणनीतियाँ।

  4. इंजीनियरिंग, परियोजना और संपत्ति प्रबंधन उत्कृष्टता।

  5. प्रशिक्षण और विकास प्रणाली: क्षमता सुदृढ़ीकरण, PSEs में ज्ञान साझा करना, शोध-आधारित प्रशिक्षण मॉडल।

सम्मेलन का समापन CBC सचिव एस. पी. रॉय की अंतिम टिप्पणियों और निदेशक नवनीत कौर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

यह भारत CPSE Consultative Conclave CPSEs की नेतृत्व क्षमता, शासन, और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के अनुरूप है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने IPS और IFoS प्रशिक्षुओं के साथ नेतृत्व, शासन और नैतिक सार्वजनिक सेवा पर की बातचीत

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) के अधिकारी प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की। ये अधिकारी हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA) में स्पेशल फाउंडेशन कोर्स कर रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने “भारत के लौह पुरुष” सरदार वल्लभभाई पटेल का स्मरण करते हुए उनके प्रांतीय राज्यों के एकीकरण और अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना में उनके केंद्रीय योगदान को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जहां ऑटो वॉन बिस्मार्क ने जर्मनी को एकीकृत किया, जहां लोग मुख्यतः एक भाषा साझा करते थे, वहीं सरदार पटेल ने भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं वाले भारत को एकीकृत किया – एक कहीं अधिक जटिल कार्य।

उपराष्ट्रपति ने सक्षम अधिकारियों के चयन में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रशिक्षण संस्थानों जैसे HIPA की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के विकास की दिशा में अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भगवद गीता के सिद्धांतों के अनुरूप करें, अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करें और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलें।

सार्वजनिक सेवा में जिम्मेदार और जवाबदेह कार्रवाई के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने समय पर फाइलों और मामलों का निपटान करने, और सेवा की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करने का सुझाव दिया।

बातचीत के दौरान उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक जीवन में धैर्य के महत्व पर बल दिया। उन्होंने पूर्व सांसदों जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, एन. जी. रंगा और एन. जी. गोरे का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका लंबे समय तक जनता का समर्थन उनके बहसों की गुणवत्ता के कारण था। उन्होंने सोशल मीडिया के युग में जोरदार आवाज़ें अक्सर अस्थायी लोकप्रियता प्राप्त करती हैं, यह भी बताया।

उपराष्ट्रपति ने कुशल और मानवीय शासन के लिए धैर्य और ध्यानपूर्वक सुनने को आवश्यक उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को सुनना अक्सर समस्याओं के बड़े हिस्से का समाधान कर देता है।

प्रशिक्षुओं के सवालों के जवाब में उन्होंने निरंतर सीखने, धर्म का पालन करने और धैर्य बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जानकारी के अधिभार, गलत सूचना और सोशल मीडिया पर नकारात्मक खबरों की चुनौती पर भी प्रकाश डाला। अधिकारियों को सकारात्मक और रचनात्मक कहानियों को बढ़ावा देने की सलाह दी और डिजिटल व्यवहार में सामाजिक जिम्मेदारी का पालन करने तथा जिम्मेदार साझा करने के लिए उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह बातचीत युवा अधिकारियों को नेतृत्व, शासन और नैतिक सार्वजनिक सेवा के मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान करने वाली रही।

मनसेर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर: वित्तीय शासन सुदृढ़ करने पर जोर

No comments Document Thumbnail

वित्त मंत्रालय के खर्च विभाग (DoE), मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय ने 28 से 30 नवंबर 2025 तक मनसेर, हरियाणा में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय के अधिकारी, हरियाणा राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सार्वजनिक वित्तीय तंत्र से मूल्यवान अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए।

शिविर का उद्देश्य और उद्घाटन

शिविर का शुभारंभ पवन कुमार, मुख्य सलाहकार लागत, के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने समकालीन लोक प्रशासन में सतत सीखने और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद डॉ. गौरी रंगड़ा (हार्टफुलनेस फाउंडेशन) द्वारा “हार्टफुलनेस कम्युनिकेशन” पर सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व और प्रभावी हितधारक संलग्नता को बढ़ावा देना था।

पहला दिन: महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श

पहले दिन मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:

  1. अंतरराष्ट्रीय ज्ञान निकाय (International Knowledge Body) का विकास

  2. नगरपालिका सेवाओं के लिए मानकीकृत लागत निर्धारण (Standardised Costing)

इसके बाद वी. वुअलनाम, सचिव, DoE को प्रमुख विचार और सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुख्य सिफारिशों में शामिल थे:

  • DoE के तहत एक नोडल सेल की स्थापना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत लागत ढांचे विकसित करे, जिसमें नगरपालिका निकायों के लिए भी स्थानीय और वैश्विक संस्थाओं के साथ सहयोग शामिल हो।

  • समयबद्ध रणनीतिक कदमों के माध्यम से मौजूदा चुनौतियों का समाधान और वित्तीय शासन को सुदृढ़ बनाना।

  • भविष्य के चिंतन शिविरों में युवाओं को केंद्रीय भूमिका देने का प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण दोहराया गया।

दूसरा दिन: योग और ज्ञान सत्र

दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद विशेषज्ञों और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से विभिन्न ज्ञान सत्र आयोजित किए गए:

  • राजीव शोरे, IIIT सूरत: AI/ML जैसे उभरते तकनीकी उपकरणों का प्रशासनिक दक्षता, विश्लेषणात्मक क्षमता और पारदर्शिता बढ़ाने में उपयोग।

  • प्रो. नवीन सिरोही, IICA: कॉर्पोरेट गवर्नेंस सिद्धांत और हितधारक सहभागिता रणनीतियाँ।

  • प्रो. संदीप गोयल, MDI गुड़गांव: फोरेंसिक अकाउंटिंग और वित्तीय निगरानी तंत्र का महत्व।

  • प्रो. ऋषभ अग्रवाल, ISB हैदराबाद: सार्वजनिक डेटा और AI के महत्व, और न्यायसंगत यूजर-चार्ज ढांचे का विकास।

इसके बाद राउंड-टेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिसमें यूजर-चार्ज ढांचे, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ICoAS की भूमिका पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विश्लेषण और थीम-वार सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

अंतिम दिन: पेशेवर विकास और नए अवसर

30 नवंबर को “Professional Evolution and New Growth Avenues” पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें उभरते क्षेत्रों और कार्यात्मक क्षेत्रों की चर्चा हुई, जहां ICoAS अधिकारी तकनीकी और आर्थिक विकास के संदर्भ में परिवर्तन ला सकते हैं।

शिविर के समापन में मुख्य सलाहकार लागत ने अधिकारियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, समर्पण और वित्तीय शासन सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का धन्यवाद मनमोहन सचदेवा, अतिरिक्त मुख्य सलाहकार लागत, ने किया और अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार रहने की प्रेरणा दी।


IICA–DGR द्वारा रक्षा अधिकारियों के लिए तृतीय निदेशक प्रमाणन कार्यक्रम का सफल समापन

No comments Document Thumbnail

भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने पुनर्वास महानिदेशालय (DGR), रक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी में कॉरपोरेट गवर्नेंस में निदेशकों के लिए प्रमाणन कार्यक्रम के तीसरे बैच का सफलतापूर्वक समापन 21 नवंबर 2025 को गुरुग्राम के मानेसर स्थित IICA परिसर में किया। यह दो सप्ताह का प्रमाणन कार्यक्रम तीनों सेनाओं के 30 वरिष्ठ अधिकारियों—सेवारत एवं हाल ही में सेवानिवृत्त हुए—को प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित किया गया था। अगस्त 2024 से अब तक संचालित तीन बैचों के माध्यम से कुल 90 विशिष्ट रक्षा अधिकारियों को कॉरपोरेट गवर्नेंस और स्वतंत्र निदेशक की भूमिका के लिए व्यापक ज्ञान प्रदान किया जा चुका है।

समापन सत्र व संबोधन

समापन समारोह में प्रतिष्ठित अतिथियों ने विचार साझा किए। IICA के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए प्रतिभागियों को दो सप्ताह के इस गहन कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। इस कार्यक्रम में 35 विशेष सत्र शामिल थे, जिनमें कॉरपोरेट गवर्नेंस रूपरेखाओं, नियामक प्रावधानों, वित्तीय प्रबंधन, ऑडिट समिति के कार्य, एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट, CSR और सतत शासन से संबंधित विषयों को सम्मिलित किया गया।

उन्होंने यह रेखांकित किया कि सैन्य अधिकारियों की रणनीतिक सोच, जोखिम मूल्यांकन का अनुभव, सुदृढ़ नैतिक ढांचा, तथा दबाव में निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता उन्हें कॉरपोरेट बोर्डरूम में स्वतंत्र व निष्पक्ष स्वर बनने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम बनाती है। उन्होंने DGR के साथ मजबूत सहयोग तथा कार्यक्रम उपरांत प्रतिभागियों के लिए IICA द्वारा सतत सीख एवं पेशेवर नेटवर्किंग सहायता की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।

भारत सरकार के पूर्व सचिव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सचिव और वर्तमान में अशोका विश्वविद्यालय के आइज़ैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी के डिस्टिंग्विश्ड फेलो, डॉ. के. पी. कृष्णन ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को कॉरपोरेट गवर्नेंस के मूलभूत सिद्धांतों एवं स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान किए। उनके अनुसार, स्वतंत्र निदेशक उन हितधारकों के संरक्षक होते हैं जिनकी निर्णय-निर्माण संस्थाओं में प्रत्यक्ष आवाज़ नहीं होती—विशेषकर अल्पसंख्यक शेयरधारक। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भूमिका में विभिन्न हितधारकों के प्रति फिड्यूशियरी दायित्व निभाते हुए "अधिकतमकरण" नहीं बल्कि "संतुलन" की भावना केंद्र में रहती है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के तीन दशक का सैन्य अनुभव—लोगों एवं संसाधनों के प्रबंधन में संतुलित और न्यायसंगत निर्णय—उन्हें स्वतंत्र निदेशक की भूमिका के लिए उपयुक्त रूप से तैयार करता है।

पूर्व सैनिक कल्याण विभाग की सचिव,सुकरिति लिखी ने मुख्य वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने IICA और DGR के बीच निरंतर सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने रक्षा कर्मियों की असाधारण नेतृत्व क्षमताओं को नागरिक कॉरपोरेट क्षेत्र में उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को शासन परिदृश्य और कॉरपोरेट अवसरों के व्यावहारिक पहलुओं पर मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान की, तथा बताया कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में दूरदर्शी, नैतिक और गतिशील बोर्ड सदस्यों की बढ़ती आवश्यकता इस प्रकार के सहयोग को और भी महत्वपूर्ण बनाती है।

कार्यक्रम की रूपरेखा

दो सप्ताह के इस गहन कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को कॉरपोरेट गवर्नेंस की अवधारणात्मक एवं नियामक समझ प्रदान करना था ताकि वे सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों के बोर्ड में प्रभावी योगदान दे सकें। विस्तृत पाठ्यक्रम में शामिल थे—

  • कॉरपोरेट गवर्नेंस सिद्धांत

  • बोर्ड संरचना और उसकी प्रभावशीलता

  • स्वतंत्र निदेशकों की भूमिकाएँ एवं उत्तरदायित्व

  • कंपनी अधिनियम 2013 और SEBI LODR विनियमों के प्रावधान

  • वित्तीय विवरण विश्लेषण

  • ऑडिट समिति के कार्य

  • एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट

  • कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) एवं ESG

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा कक्षा व्याख्यान, केस स्टडी आधारित चर्चाएँ, प्रैक्टिसिंग स्वतंत्र निदेशकों के साथ संवाद, तथा अनुभव आधारित शिक्षण पद्धतियाँ शामिल थीं। सैन्य तथा कॉरपोरेट संदर्भों के बीच समझ विकसित करने हेतु अनुभवी प्रैक्टिशनरों के सत्र भी आयोजित किए गए।

यह प्रमाणन प्रतिभागियों को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स’ डेटाबैंक (IDDB)—जो कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की पहल है और IICA द्वारा प्रबंधित है—में पंजीकरण के लिए सक्षम बनाता है। वर्तमान में IDDB में 35,000 से अधिक पंजीकृत स्वतंत्र निदेशक हैं, जिनमें 10,000 से अधिक महिलाएँ शामिल हैं, तथा 3,600 से अधिक कंपनियाँ इस प्रतिभा पूल का उपयोग कर रही हैं।

साझेदारी का महत्व

IICA–DGR की यह साझेदारी रक्षा कर्मियों के नेतृत्व कौशल को नागरिक कॉरपोरेट क्षेत्र में लाने और भारतीय कंपनियों में दक्ष एवं नैतिक बोर्ड सदस्यों की आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। यह कार्यक्रम सैन्य मूल्यों—विश्वास, सत्यनिष्ठा एवं रणनीतिक सोच—को कॉरपोरेट गवर्नेंस के मुख्य सिद्धांतों के साथ जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय डॉ. निरज गुप्ता, हेड–स्कूल ऑफ कॉरपोरेट गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी, IICA तथा डॉ. अनिंदिता चक्रवर्ती, प्रिंसिपल रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर सेक्रेटेरिएट, IICA द्वारा किया गया।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.