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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना

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नई दिल्ली- डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) आज राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से गति देने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था बन चुका है।

मेघालय के उमियाम स्थित NESAC के दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह केंद्र भारत-म्यांमार सीमा तथा पूर्वोत्तर के अंतरराज्यीय सीमाक्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संसाधन, सुशासन और अन्य तकनीक आधारित परियोजनाओं के माध्यम से अंतरिक्ष कार्यक्रम के लाभ आम लोगों तक पहुँचा रहा है।

इस अवसर पर NESAC के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने केंद्र की उपलब्धियों और वर्तमान कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केंद्र लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें 50 परियोजनाएँ हाल ही में पूर्ण हुई हैं तथा 78 परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। ये परियोजनाएँ कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भू-विज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय नियोजन, भू-सूचना विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, उपग्रह संचार, यूएवी (ड्रोन) अनुप्रयोग, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक विकासात्मक समाधानों में बदलने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यह संस्था वैज्ञानिक क्षमताओं और पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की विकासात्मक आकांक्षाओं के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरी है। राज्य सरकारों के साथ बढ़ते सहयोग से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी योजना निर्माण, प्रशासन, संसाधन प्रबंधन और जनसेवा का प्रभावी माध्यम बन रही है।

उन्होंने पूर्वोत्तर गन्ना एवं बांस विकास परिषद (NECBDC) तथा राज्य सरकारों के साथ NESAC के समन्वय को और मजबूत करने का आह्वान किया ताकि बांस संसाधनों की वैज्ञानिक मैपिंग का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे बांस मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ होगी, संसाधनों की बेहतर योजना बनेगी, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मंत्री ने NESAC की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक एवं स्थान-विशिष्ट बनाने पर भी जोर दिया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर प्रभावी सूचना उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने रामकृष्ण मिशन, चेरापूंजी द्वारा विकसित जल संचयन मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाने का सुझाव दिया, जिससे क्षेत्र की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC की जियोस्पेशियल तकनीक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने 'मंज़िल-एनई' (GeoTourism ManzilNE) डैशबोर्ड को और सशक्त बनाने तथा निजी पर्यटन क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का भी आह्वान किया, ताकि पूर्वोत्तर की प्राकृतिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत को तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने NESAC से केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, स्टार्टअप्स, निजी उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, व्यापक साझेदारी से वैज्ञानिक नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू कर क्षेत्र की विकासात्मक चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है, जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी समावेशी विकास के प्रमुख साधन बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NESAC अपनी अनुप्रयोग-आधारित परियोजनाओं और रणनीतिक पहलों के माध्यम से सुशासन, आपदा लचीलापन, सतत संसाधन प्रबंधन तथा तकनीक-सक्षम समृद्ध पूर्वोत्तर के निर्माण में भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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