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बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बाढ़ नियंत्रण को लेकर कान्फ्रेंस

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प्रदेश में 18 अगस्त को टेबल टॉप और 20 अगस्त को होगी मॉक एक्सरसाइज

रायपुर- भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ राज्य में बाढ़ आपदा प्रबंधन एवं पूर्व तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के सभी जिलों के आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति से निपटने और आवश्यक कार्यवाहियों के संचालन के लिए विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।

18 को टेबल टॉप और 20 अगस्त को मॉक एक्सरसाइज

कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राज्य के सभी जिलों में बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इसके ठीक बाद 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज का आयोजन होगा।

अधिकारियों को कार्यप्रणाली समझने के निर्देश

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान की जाने वाली सभी प्रक्रियाओं को भली-भांति समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक बाढ़ आपदा के समय त्वरित राहत व बचाव कार्य के लिए यह अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

विभिन्न विभागों की भूमिका पर चर्चा

बैठक के दौरान बाढ़ आपदा के समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और पशुपालन जैसे अंतर-विभागीय समन्वय से की जाने वाली कार्यवाहियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

इस उच्च स्तरीय बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा एवं SDRF के महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय), मंडल रेल प्रबंधक (रायपुर डिवीजन), NDRF कमांडेंट, स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, विज्ञान केंद्र, दूरसंचार, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के साथ-साथ राज्य शासन के पंचायत, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

एनडीएमए एवं एनडीआरएफ की संयुक्त बैठक सम्पन्न

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रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण( सीजीएसडीएमए) में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई।  

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मानसून अवधि की तैयारियों तथा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र के बारे में बताया। राज्य में बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली एवं भूस्खलन जैसी मौसमी आपदाओं की तैयारियों की समीक्षा की। राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली तथा समन्वय व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य त्वरित प्रतिक्रिया एवं समन्वय को और सुदृढ़ बनाने पर विचार किया गया। इसी तरह से पूर्व चेतावनी प्रणाली सचेत प्लेटफॉर्म एवं सेल ब्रॉडकास्ट आधारित अलर्ट प्रणाली की प्रभावी उपयोग की भी समीक्षा की गई। एनडीएमए के संयुक्त सलाहकार संजीव सही द्वारा राज्य में किये जा रहे आपदा प्रबंधन कार्यों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग पर प्रकाश डाला।

मॉक एक्सरसाइज, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता तथा संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा हुई। इसी तरह से आगामी मानसून अवधि के दौरान संवेदनशील जिलों में बेहतर समन्वय एवं त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने, पूर्व तैयारी को मजबूत करने तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

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प्रभावित परिवारों तक बिना विलंब राहत सामग्री एवं आवश्यक सहायता पहुँचाने को कहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर एवं जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त संसाधन एवं सहायता भी तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर राहत पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित नागरिकों के साथ खड़ी है तथा जनजीवन को शीघ्र सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना

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नई दिल्ली- डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) आज राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से गति देने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था बन चुका है।

मेघालय के उमियाम स्थित NESAC के दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह केंद्र भारत-म्यांमार सीमा तथा पूर्वोत्तर के अंतरराज्यीय सीमाक्षेत्रों की जियोस्पेशियल मैपिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संसाधन, सुशासन और अन्य तकनीक आधारित परियोजनाओं के माध्यम से अंतरिक्ष कार्यक्रम के लाभ आम लोगों तक पहुँचा रहा है।

इस अवसर पर NESAC के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने केंद्र की उपलब्धियों और वर्तमान कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केंद्र लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें 50 परियोजनाएँ हाल ही में पूर्ण हुई हैं तथा 78 परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। ये परियोजनाएँ कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भू-विज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय नियोजन, भू-सूचना विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, उपग्रह संचार, यूएवी (ड्रोन) अनुप्रयोग, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक विकासात्मक समाधानों में बदलने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। यह संस्था वैज्ञानिक क्षमताओं और पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की विकासात्मक आकांक्षाओं के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरी है। राज्य सरकारों के साथ बढ़ते सहयोग से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी योजना निर्माण, प्रशासन, संसाधन प्रबंधन और जनसेवा का प्रभावी माध्यम बन रही है।

उन्होंने पूर्वोत्तर गन्ना एवं बांस विकास परिषद (NECBDC) तथा राज्य सरकारों के साथ NESAC के समन्वय को और मजबूत करने का आह्वान किया ताकि बांस संसाधनों की वैज्ञानिक मैपिंग का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे बांस मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ होगी, संसाधनों की बेहतर योजना बनेगी, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मंत्री ने NESAC की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक एवं स्थान-विशिष्ट बनाने पर भी जोर दिया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर प्रभावी सूचना उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने रामकृष्ण मिशन, चेरापूंजी द्वारा विकसित जल संचयन मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाने का सुझाव दिया, जिससे क्षेत्र की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि NESAC की जियोस्पेशियल तकनीक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने 'मंज़िल-एनई' (GeoTourism ManzilNE) डैशबोर्ड को और सशक्त बनाने तथा निजी पर्यटन क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का भी आह्वान किया, ताकि पूर्वोत्तर की प्राकृतिक, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत को तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने NESAC से केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं, स्टार्टअप्स, निजी उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, व्यापक साझेदारी से वैज्ञानिक नवाचारों को बड़े पैमाने पर लागू कर क्षेत्र की विकासात्मक चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत देश के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है, जहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिकी समावेशी विकास के प्रमुख साधन बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NESAC अपनी अनुप्रयोग-आधारित परियोजनाओं और रणनीतिक पहलों के माध्यम से सुशासन, आपदा लचीलापन, सतत संसाधन प्रबंधन तथा तकनीक-सक्षम समृद्ध पूर्वोत्तर के निर्माण में भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: आकाशीय बिजली और डूबने से 3 लोगों की मौत, कई जिलों में हाई अलर्ट

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में मानसून अब आफत बनकर बरस रहा है। पिछले 24 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के कारण नदियाँ और नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ है।

इस बीच प्रदेश से दर्दनाक घटनाएँ भी सामने आई हैं। अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और डूबने की घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। इन हादसों के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है।

मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास न जाएँ तथा आकाशीय बिजली के समय खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रदेश के कई जिलों में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

मुख्य अपडेट

  • तीन लोगों की मौत आकाशीय बिजली और डूबने की अलग-अलग घटनाओं में।

  • कई जिलों में भारी बारिश, नदियाँ और नाले उफान पर।

  • जलभराव से जनजीवन प्रभावित, कई मार्गों पर आवागमन बाधित।

  • मौसम विभाग का भारी बारिश का अलर्ट जारी।

  • प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।


अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख भवनों का होगा सुरक्षा ऑडिट

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रायपुर- हाल ही में देश में हुई अग्नि दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यभर के सभी प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में संभावित हादसों को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए। साथ ही जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exits), फायर अलार्म सिस्टम, बिजली व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां बेहतर होंगी और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अग्नि सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी नई स्थिति रिपोर्ट

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से अग्नि सुरक्षा संबंधी तैयारियों और आधुनिकीकरण कार्यों पर नई स्थिति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अग्निशमन सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए 280 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत राज्यभर में नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, मौजूदा फायर स्टेशनों को सुदृढ़ किया जाएगा तथा अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन, बचाव उपकरण और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अग्निशमन विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने सरकार से इन योजनाओं की प्रगति, समय-सीमा और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्निशमन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

राज्य सरकार की इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

देशभर में 4 से 10 मई तक ‘फायर सेफ्टी वीक’ का आयोजन, स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा पर जोर

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4 मई से 10 मई 2026 तक देशभर में ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत की है। इस अभियान में सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय शामिल हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने “Fire Safety in Health Facilities” थीम के तहत शपथ दिलाई और कहा कि अस्पतालों व स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित फायर ऑडिट, प्रशिक्षण और आपातकालीन तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य कृष्ण एस. वात्सा ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए एक व्यवस्थित और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। वहीं अग्निशमन सेवाओं के महानिदेशक सुनील कुमार झा ने सुरक्षा मानकों के पालन, नियमित जांच और प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने “National Guidelines on Fire and Life Safety in Healthcare Facilities (2026)” भी जारी कीं। इन दिशानिर्देशों में जोखिम प्रबंधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आपातकालीन प्रतिक्रिया, प्रशिक्षण और जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

फायर सेफ्टी वीक के दौरान देशभर में मॉक ड्रिल, फायर ऑडिट, जागरूकता अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्रालय ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित और सतर्क स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने का आह्वान किया है।

आपदा प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 की घोषणा

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नई दिल्ली- आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में असाधारण योगदान और निस्वार्थ सेवा के लिए सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) को संस्थागत श्रेणी में तथा लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के को व्यक्तिगत श्रेणी में सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया गया है।

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थापित यह वार्षिक पुरस्कार देश में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित करने के उद्देश्य से दिया जाता है। यह पुरस्कार हर वर्ष 23 जनवरी, महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर घोषित किया जाता है।

आपदा प्रबंधन में देश ने किया उल्लेखनीय सुधार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों, शमन उपायों और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जानमाल के नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई है।

पुरस्कार 2026: चयन प्रक्रिया

वर्ष 2026 के लिए नामांकन 1 मई 2025 से आमंत्रित किए गए थे। इस पुरस्कार को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप देशभर से संस्थानों और व्यक्तियों की कुल 271 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। गहन मूल्यांकन के बाद विजेताओं का चयन किया गया।

व्यक्तिगत श्रेणी: लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के

भारतीय सेना की अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के ने वर्ष 2024 में केरल के वायनाड में आई बाढ़ और भूस्खलन के दौरान बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने नागरिक प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित निकासी, राहत सामग्री वितरण और आवश्यक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित की।

विपरीत मौसम और उच्च जोखिम की परिस्थितियों में उन्होंने कई साहसिक बचाव अभियानों का नेतृत्व करते हुए सैकड़ों नागरिकों की जान बचाई। उनके निर्देशन में चूरलमाला में 190 फीट लंबा बेली ब्रिज रिकॉर्ड समय में बनाया गया, जिससे दूरदराज के गांवों की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी बहाल हुई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने रात के समय केवल चार घंटे में एक अस्थायी पैदल पुल का निर्माण कर अभिनव इंजीनियरिंग समाधान प्रस्तुत किया।

लेफ्टिनेंट कर्नल शेल्के के नेतृत्व में 150 टन उपकरणों की तैनाती की गई, जिससे हजारों प्रभावित लोगों को समय पर राहत और पुनर्वास सहायता मिली। उन्होंने 2,300 से अधिक कर्मियों को आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय अभियानों का प्रशिक्षण भी दिया। उनका कार्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) में व्यावहारिक नेतृत्व और आपदा प्रबंधन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

संस्थागत श्रेणी: सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA)

वर्ष 2005 में स्थापित SSDMA ने सिक्किम में आपदा तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमताओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राधिकरण ने 1,185 प्रशिक्षित ‘आपदा मित्रों’ को तीन-स्तरीय ढांचे के तहत तैनात किया है—

  • ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन सहायक

  • ब्लॉक स्तर पर आपदा प्रबंधन पर्यवेक्षक

  • जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन समन्वयक

सभी ग्राम पंचायतों में आपदा प्रबंधन सहायक की तैनाती से सहभागितापूर्ण योजना, क्षमता निर्माण और पंचायत-स्तरीय समितियों को मजबूती मिली है।

2016 मंताम भूस्खलन और 2023 तीस्ता बाढ़ जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान SSDMA की रियल-टाइम समन्वय प्रणाली और प्रशिक्षित प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं ने 2,563 लोगों को सुरक्षित बचाने में अहम भूमिका निभाई और जानमाल के नुकसान को न्यूनतम किया।

SSDMA ने आपदा मित्र कार्यक्रम के माध्यम से एक समुदाय-केंद्रित, सतत और दोहराए जाने योग्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण मॉडल विकसित किया है, जो विशेष रूप से हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

निष्कर्ष

सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए चयनित ये दोनों विजेता देश में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में साहस, समर्पण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उनका कार्य न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि भविष्य की आपदा प्रबंधन नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा।


सी-डॉट को ‘सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन’ के लिए स्कॉच अवॉर्ड 2025, आपदा चेतावनी प्रणाली में देश को मिली बड़ी उपलब्धि

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नई दिल्ली- भारत सरकार के दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास के अग्रणी संस्थान सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) को उसकी स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (CBS) तकनीक के लिए प्रतिष्ठित “SKOCH Award-2025” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान “Resourcing Viksit Bharat” विषय पर आयोजित 104वें स्कॉच समिट के दौरान प्रदान किया गया।

स्कॉच अवॉर्ड देशभर में शासन और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सरकारी एवं निजी संस्थानों, परियोजनाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है। यह पुरस्कार वित्त, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली पहलों को मान्यता देता है।

C-DOT का सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन एक अत्याधुनिक आपदा एवं आपातकालीन चेतावनी मंच है, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS), रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) और भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जैसी संस्थाओं को एकीकृत करता है। यह प्लेटफॉर्म सभी मोबाइल ऑपरेटरों, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से त्वरित चेतावनी संदेश प्रसारित करता है।

यह स्वदेशी, किफायती और पूर्णतः स्वचालित प्रणाली भौगोलिक रूप से लक्षित (Geo-targeted), बहु-आपदा और 21 भाषाओं में बहुभाषी चेतावनी देने में सक्षम है, जिससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र की ‘Early Warnings for All (EW4All)’, आईटीयू के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है।

इस अवसर पर C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह सम्मान नागरिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक को समर्पित करने के C-DOT के संकल्प की पहचान है। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर जीवनरक्षक जानकारी पहुंचाकर सार्वजनिक सुरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाता है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी मजबूती प्रदान करती है और भारत को वैश्विक स्तर पर इस तकनीक के चुनिंदा प्रदाताओं में शामिल करती है।

C-DOT, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में C-DOT 5G, 6G, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य की तकनीकों पर कार्य कर रहा है।

यह पुरस्कार C-DOT के ईवीपी डॉ. पंकज डलेला ने प्राप्त किया।

एनडीआरएफ के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं, साहस और सेवा भावना की सराहना

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल के जांबाज जवानों को शुभकामनाएं दीं और उनके साहस, समर्पण तथा निस्वार्थ सेवा भावना की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा की हर घड़ी में एनडीआरएफ के जवान सबसे आगे रहकर मानव जीवन की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के पुरुष और महिला कर्मियों की पेशेवर दक्षता और अटूट संकल्प संकट के समय मजबूती से खड़े दिखाई देते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि जब भी कोई आपदा आती है, एनडीआरएफ के जवान अथक परिश्रम करते हुए लोगों की जान बचाते हैं, राहत पहुंचाते हैं और सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद की लौ जलाए रखते हैं। उनका कौशल और कर्तव्यनिष्ठा सेवा के सर्वोच्च मानकों का प्रतीक है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों के दौरान एनडीआरएफ ने आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बनाई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान अर्जित किया है।

प्रधानमंत्री ने एनडीआरएफ के सभी कर्मियों के योगदान को नमन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



राष्ट्रीय विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनकल्याण में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बहुआयामी भूमिका

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भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम नोडल मंत्रालयों/विभागों तथा केंद्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को अंतरिक्ष-आधारित इनपुट उपलब्ध कराता है, जिससे प्रभावी आपदा प्रबंधन और आपदा-रोधी क्षमता (डिज़ास्टर रेज़िलिएंस) का विकास हो सके। इसरो द्वारा विकसित राष्ट्रीय आपात प्रबंधन डेटाबेस (NDEM, संस्करण 5.0) गृह मंत्रालय (MHA) के एकीकृत आपात प्रतिक्रिया नियंत्रण कक्ष (ICR-ER) का हिस्सा है, जो आपातकालीन प्रतिक्रिया हेतु निर्णय समर्थन प्रदान करता है। आवश्यक जलवायु चरों (Essential Climate Variables) के सृजन के लिए भी उपग्रह डेटा का उपयोग किया जाता है। कृषि क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग फसल उत्पादन पूर्वानुमान, फसल निगरानी, कृषि-मौसम परामर्श, फसल बीमा कार्यक्रम, कृषि-डीएसएस (Krishi-DSS) आदि में किया जा रहा है।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, विशेषकर वैज्ञानिक अनुसंधान, में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का योगदान बहुआयामी है। तकनीकी प्रतिष्ठा से कहीं आगे, भारत के अंतरिक्ष विज्ञान मिशनों ने वैज्ञानिक ज्ञान के आधार को मूल रूप से समृद्ध किया है। ये कार्यक्रम अंतरिक्ष विज्ञान में अनुसंधान के लिए अमूल्य मंच प्रदान करते हैं। इस प्रकार अर्जित ज्ञान देश के अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों तक सीधे पहुँचता है, जिससे विशिष्ट प्रतिभाओं का पोषण होता है और वैज्ञानिक अन्वेषण का एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होता है। लागत-प्रभावी, स्वदेशी समाधानों के माध्यम से साकार किए गए समर्पित विज्ञान मिशनों में संलग्न होकर भारत वैश्विक विश्वसनीयता स्थापित करता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय वैज्ञानिक अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी रहें, नवाचार को आगे बढ़ाएँ और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करें।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने टेलीमेडिसिन, टेली-शिक्षा, ई-गवर्नेंस, ब्रॉडबैंड आदि को समर्थन देने वाली डिजिटल कनेक्टिविटी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत की उपग्रह नेविगेशन प्रणाली—नाविक (NavIC)—स्थिति, नेविगेशन और समय (PNT) सेवाएँ प्रदान कर रही है।

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तीव्र विस्तार के चरण में है, जो मिशन विश्वसनीयता, लागत-प्रभावशीलता, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निजी क्षेत्र की जिम्मेदार भागीदारी को बनाए रखने में सक्षम होगा। भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के अंतर्गत अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में संस्थागत संरेखण स्पष्ट रूप से परिभाषित है और यह निरंतर परिपक्व हो रहा है। हितधारकों के बीच समन्वय के सभी प्रयास विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। वित्तीय चुनौतियाँ सीमित हैं, क्योंकि भारत ने एक अत्यंत लागत-कुशल कार्यक्रम विकसित किया है, और निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए वित्तपोषण चैनल यह सुनिश्चित करते हैं कि विकास की आवश्यकताएँ पर्याप्त रूप से पूरी हों। इसरो के सतत अनुसंधान एवं विकास, स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं और सशक्त उद्योग साझेदारियों के चलते तकनीकी अंतर तेजी से कम हो रहे हैं और विश्वस्तरीय, विश्वसनीय प्रणालियाँ उपलब्ध हो रही हैं। वाणिज्यिक बाधाएँ भी सीमित हैं; भारत की सिद्ध मिशन सफलता दर और बढ़ती वैश्विक माँग भारतीय उद्योग को स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी स्पष्ट मानकों, परिपक्व नियामक तंत्र और जोखिम न्यूनतम करने हेतु इसरो के मार्गदर्शन से जिम्मेदारीपूर्वक आगे बढ़ रही है।

अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं तक समाज की दीर्घकालिक पहुँच का दृष्टिकोण भारत के स्थापित उपग्रह अवसंरचना और चल रही विस्तार योजनाओं को देखते हुए साकार होने योग्य है। वाणिज्यिक विकास की संभावनाएँ सशक्त हैं, क्योंकि भारत की अंतर्निहित लागत-लाभ और उभरती निजी क्षेत्र की क्षमताएँ मौजूद हैं। इन-स्पेस (IN-SPACe) ने भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए दशक-आधारित दृष्टि और रणनीति प्रस्तुत की है, जिसका मिशन भारत के लिए 44 अरब अमेरिकी डॉलर के बाज़ार अवसर—जिसमें 11 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात शामिल है—को साकार करना तथा सार्वजनिक, निजी और स्टार्ट-अप्स के सहयोग से ‘सम्पूर्ण राष्ट्र’ दृष्टिकोण वाला पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। इन-स्पेस ने निर्यात को बढ़ावा देने हेतु क्षमताओं को उत्प्रेरित किया है, जैसे— (i) माँग सृजन, (ii) पृथ्वी अवलोकन (EO) प्लेटफॉर्म, (iii) संचार प्लेटफॉर्म, (iv) नेविगेशन प्लेटफॉर्म, (v) अनुसंधान एवं विकास, (vi) प्रतिभा पूल का निर्माण, (vii) वित्त तक पहुँच और (viii) अंतरराष्ट्रीय समन्वय एवं सहयोग—ताकि हार्डवेयर, अंतरिक्ष-आधारित डेटा सेवाओं और उपग्रह उत्पादों का वैश्विक स्तर पर निर्यात हो सके। अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुचारु रूप से विस्तार पा रहा है और भारत को विज्ञान एवं अंतरिक्ष सहयोग में एक विश्वसनीय, निष्पक्ष और सक्षम साझेदार के रूप में देखा जाता है। भारत ने प्रमुख सहयोगात्मक मिशन—निसार (NISAR)—को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) अन्य प्रमुख देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और गहरा करने का मंच प्रदान करेगा। प्रक्षेपण यानों से लेकर उपग्रहों तक, महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करने वाले इसरो के प्रौद्योगिकी रोडमैप के चलते रणनीतिक स्वायत्तता पूर्णतः सुलभ है और बाहरी निर्भरता न्यूनतम रहेगी। रिमोट सेंसिंग, मौसम विज्ञान और नाविक अनुप्रयोगों की सिद्ध सफलता के कारण अंतरिक्ष-आधारित क्षमताएँ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं में और अधिक गहराई से एकीकृत होती रहेंगी।

इस दिशा में एक प्रमुख कदम भू-स्थानिक शासन (Geospatial Governance) है, जहाँ GIS मानचित्रों और उपग्रह-आधारित पृथ्वी अवलोकन का उपयोग सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए किया जाता है। इस प्रयास को और सुदृढ़ करने हेतु अंतरिक्ष विभाग ने 22 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय बैठक 2025 का आयोजन किया, जिसमें अनेक मंत्रालयों और सरकारी विभागों ने भाग लिया। इन संवादों से प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट डेटा आवश्यकताओं की पहचान करने में सहायता मिली। इससे इसरो को अधिक सटीक और समयबद्ध जानकारी प्रदान करने में मदद मिलती है, ताकि सरकारी निर्णय अधिक सूचित हों और विकास तेज़ तथा अधिक पारदर्शी बने। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में समावेशिता अंतर्निहित है, जहाँ अधिकांश डेटासेट और सेवाएँ किसानों, आपदा प्रबंधकों और जमीनी स्तर के योजनाकारों तक न्यूनतम बाधाओं के साथ पहुँच रही हैं। इसरो की वैश्विक रूप से मान्य लागत-कुशलता यह सुनिश्चित करती है कि क्षमताओं के विस्तार के साथ भी अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोग सुलभ बने रहें। यह पारिस्थितिकी तंत्र स्वाभाविक रूप से समावेशी है, जिसमें एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स पहले से ही आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल हैं और खुले खरीद ढाँचों से लाभान्वित हो रहे हैं। इसरो की मिशन योजना निरंतर जनकल्याण को प्राथमिकता देती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नई क्षमताएँ सीधे राष्ट्रीय विकास का समर्थन करें और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनी रहें।

अंतरिक्ष विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत सार्वजनिक उपक्रम—एम/एस एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड—वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य प्रस्तावों की संरचना, उद्योग एवं उपयोगकर्ता एजेंसियों के साथ साझेदारियों को प्रोत्साहित करने तथा अंतरिक्ष-व्युत्पन्न डेटा और सेवाओं तक लागत-प्रभावी पहुँच सक्षम बनाकर इन उद्देश्यों का समर्थन करता है, जिससे आर्थिक मॉडल टिकाऊ बने रहें।

अंतरिक्ष विभाग की वाणिज्यिक शाखा—एम/एस न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL)—नए प्रोजेक्ट्स और अनुप्रयोगों का निर्माण कर रही है, ताकि वे जनकल्याण लक्ष्यों और विकासात्मक शासन आवश्यकताओं के अनुरूप हों। अनुप्रयोगों पर न केवल उद्योग के लिए वाणिज्यिक रूप से लाभकारी होने के दृष्टिकोण से, बल्कि देश के आम नागरिक के सामाजिक-आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर भी कार्य किया जा रहा है।

उत्तराखंड में आपदा पूर्वानुमान होगा और सशक्त: डॉ. जितेंद्र सिंह ने किए तीन नए वेदर रडारों की घोषणा

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केंद्र सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि उत्तराखंड में सुरकंडा देवी, मुक्तेश्वर और लैंसडौन में पहले ही तीन वेदर रडार लगाए जा चुके हैं और जल्द ही हरिद्वार, पंतनगर और औली में तीन और रडार स्थापित किए जाएंगे। इससे राज्य की रियल-टाइम मौसम पूर्वानुमान क्षमता और मजबूत होगी।

"विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन" को संबोधित करते हुए पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपने भौगोलिक स्वरूप, हिमालयी पारिस्थितिकी और प्राकृतिक अनुभवों के कारण वैश्विक आपदा-रोधक चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद नरेश बंसल, एनडीएमए के सदस्य अग्रवाल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव नितीश कुमार झा, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कमल घनसाला, डीजी दुर्गेश पंत, एसडीएमए उपाध्यक्ष रोहिला सहित विशेषज्ञ, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा ने राज्य को आपदा प्रतिक्रिया और प्रशासन में विशिष्ट पहचान दी है। उन्होंने सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को याद किया, जिसे दो वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक पूरा किया गया था और जिसे वैश्विक आपदा प्रबंधन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में उत्तराखंड में हाइड्रो-मीटियोरोलॉजिकल आपदाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। 2013 की केदारनाथ आपदा और 2021 की चमोली घटना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से पीछे हटते ग्लेशियर, जीएलओएफ का बढ़ता जोखिम, हिमालयी पहाड़ों की नाजुकता, वनों की कटाई और प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में मौसम और आपदा-निगरानी बुनियादी ढांचे को बड़ी मात्रा में बढ़ाया है। राज्य में 33 मौसम वेधशालाएँ, रेडियो-सोंडे और रेडियो-विंड सिस्टम्स, 142 स्वचालित मौसम स्टेशन, 107 वर्षामापक यंत्र, जिला व ब्लॉक स्तर के मॉनिटरिंग सिस्टम तथा किसानों के लिए ऐप-आधारित चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है।

उन्होंने बताया कि तीन वेदर रडार पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं और तीन और जल्द स्थापित होंगे, जिससे पूर्वानुमान पद्धति और अधिक सटीक होगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि अचानक होने वाले क्लाउडबर्स्ट की परिस्थितियों को समझने के लिए भारत ने एक विशेष हिमालयी जलवायु अध्ययन कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने बताया कि "नाउकास्ट" प्रणाली—जो तीन घंटे पहले की भविष्यवाणी देती है—अब उत्तराखंड में भी व्यापक रूप से लागू की जा रही है।

उन्होंने एनडीएमए, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित उन्नत जंगल-आग मौसम सेवाओं का उल्लेख किया और इसे "पूरा-सरकार" और "पूरा-विज्ञान" मॉडल बताया।

कुछ क्षेत्रों में आईएमडी चेतावनियों की अनुपालना न होने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की एक घटना का उल्लेख किया जहाँ एक नए आईएएस अधिकारी ने आईएमडी रेड अलर्ट के बाद तुरंत हाईवे बंद कर बड़ी त्रासदी को टाल दिया।

उन्होंने कहा कि एनडीएमए, पर्यावरण मंत्रालय और शहरी विकास निकायों के भूमि उपयोग नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। नदी तटों और नई हाईवे के पास अवैध खनन को उन्होंने बेहद खतरनाक मानवजनित खतरा बताया।

डॉ. सिंह ने हिमालयी क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में कृषि-स्टार्टअप्स और सीएसआईआर आधारित वैल्यू-एडिशन मॉडलों की चर्चा की। जम्मू-कश्मीर के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे कई तकनीकी और प्रबंधन स्नातक निजी नौकरियाँ छोड़कर इन उद्यमों से जुड़े हैं। उन्होंने इसी मॉडल को उत्तराखंड में भी दोहराने की अपील की।

भारत की वैश्विक आपदा-रोधक क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब पड़ोसी देशों को तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के COP-26 में घोषित 2070 नेट ज़ीरो लक्ष्य की भी चर्चा की।

अंत में, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोजनकर्ताओं को विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी और कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर आपदा-नियंत्रण, जलवायु अनुकूलन और लचीले विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।


नई दिल्ली में APDIM के 10वें सत्र में समावेशी आपदा जोखिम डेटा शासन पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा

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समावेशी आपदा जोखिम डेटा शासन पर एशियाई और प्रशांत आपदा सूचना प्रबंधन केंद्र (APDIM) के 10वें सत्र का आयोजन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृहमंत्री तथा आपदा प्रबंधन राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किया। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य व विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तथा NDMA के सचिव  मनीष भारद्वाज भी शामिल थे।

उद्घाटन संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में, नित्यानंद राय ने क्षेत्रीय आपदा लचीलापन एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की अध्यक्षता में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत जोखिम आंकलन, भू-स्थानिक अनुप्रयोग, प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान, शीघ्र चेतावनी प्रसार, तथा जलवायु-लचीला अवसंरचना योजना जैसे क्षेत्रों में व्यापक क्षमता-विकास एजेंडे को आगे बढ़ाएगा।

क्षेत्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

भारत ने APDIM तथा एशिया–प्रशांत क्षेत्र के साझेदार देशों के साथ मिलकर आपदा एवं जलवायु जोखिमों को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ किया।
संयुक्त राष्ट्र एशिया एवं प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (UN ESCAP), APDIM तथा अन्य बहुपक्षीय संस्थानों के साथ भारत की साझेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु 10 सूत्रीय एजेंडे द्वारा निर्देशित है। यह एजेंडा स्थानीय स्तर पर निवेश, प्रौद्योगिकी का उपयोग, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के नेटवर्क को बढ़ावा देने, जोखिम डेटा को सुदृढ़ करने और क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने पर बल देता है।

सत्र के प्रमुख निष्कर्ष

सत्र का समापन एशिया–प्रशांत क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने और नवाचारपूर्ण रणनीतियों को लागू करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
बैठक के दौरान गवर्निंग काउंसिल की चर्चा का विशेष एजेंडा प्रस्तुत किया गया, जिसमें—

  • APDIM की पिछले वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा

  • वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित गतिविधियाँ

  • 2026–2030 की रणनीतिक कार्य योजना शामिल रहे।

इस बैठक के निष्कर्ष APDIM के समग्र कार्य कार्यक्रम का मार्गदर्शन करेंगे तथा सेंडाई फ्रेमवर्क और सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

प्रतिभागी देश एवं प्रतिनिधि

गवर्निंग काउंसिल के 10वें सत्र में निम्न सदस्य देशों के प्रतिनिधियों एवं प्रमुखों ने भाग लिया—
बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, कज़ाखस्तान, मंगोलिया और तुर्की, तथा ताजिकिस्तान के पर्यवेक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इसके अलावा,

  • स्टीफन कूपर, निदेशक (प्रशासन), UN ESCAP

  • लेटिज़िया रॉसानो, निदेशक, APDIM

  •  मोस्तफ़ा मोहांघेघ, वरिष्ठ समन्वयक, APDIM

  • तथा APDIM सचिवालय, ईरान और अन्य पर्यवेक्षक संगठनों के अधिकारी भी मौजूद थे।


सी-डॉट और NAM InfoCom ने मिशन क्रिटिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (MCX) विकास के लिए किया समझौता

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भारत की संचार तकनीक में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने NAM InfoCom Pvt. Ltd. के साथ मिशन क्रिटिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (MCX) समाधान के संयुक्त विकास के लिए समझौता किया। यह सहयोग सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए देश की स्वदेशी संचार अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

C-DOT के MCX एलायंस के तहत, देश में MCX इकोसिस्टम विकसित करने के लिए 10 विभिन्न संगठनों, विशेषकर स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी की जा रही है। इस साझेदारी का उद्देश्य पूर्ण रूप से स्वदेशी MCX समाधान विकसित करना है, जो मिशन क्रिटिकल पुश-टू-टॉक (MCPTT), मिशन क्रिटिकल डेटा (MCData), और मिशन क्रिटिकल वीडियो (MCVideo) सेवाओं का समर्थन करेगा।

NAM InfoCom द्वारा विकसित MC वीडियो समाधान, C-DOT के मौजूदा MCX सिस्टम के साथ सहज एकीकरण और इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करेगा। इस सहयोग में, C-DOT अपनी टेलीकॉम आर एंड डी और सिस्टम डिज़ाइन विशेषज्ञता प्रदान करेगा, जबकि NAM InfoCom सिस्टम इंटीग्रेशन, तैनाती और विभिन्न परिचालन परिदृश्यों के लिए अनुकूलन में योगदान देगा।

MC वीडियो समाधान की प्रमुख विशेषताएँ:

  • मल्टी-स्ट्रीम क्षमताओं का समर्थन

  • रिकॉर्डिंग फीचर

  • एक साथ कई समूह/वन-टू-वन वीडियो कॉल का समर्थन

  • 4G/5G नेटवर्क के तहत कम विलंब (low latency) और कम बैंडविड्थ

  • आपातकालीन और आपदा प्रबंधन, कानून और रक्षा संचालन में विशेष उपयोग

C-DOT के CEO डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत, C-DOT स्टार्टअप्स के माध्यम से स्वदेशी सहकारी तकनीकी विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है। यह पहल पहले प्रतिक्रिया देने वालों, रक्षा बलों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा संगठनों के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद और वास्तविक समय संचार समाधान सुनिश्चित करने का हिस्सा है।”

समझौते पर डॉ. राजकुमार उपाध्याय (CEO, C-DOT), शिखा Srivastava (EVP, C-DOT) और डी. अरुणन (Director, NAM InfoCom) की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

C-DOT के बारे में:

C-DOT भारत का प्रमुख टेलीकॉम R&D केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्नत संचार तकनीकों के डिज़ाइन, विकास और तैनाती में सक्रिय है। C-DOT ने C-DOT Collaborative Research Program (CCRP) शुरू किया है ताकि उद्योग, अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी में टेलीकॉम तकनीकों का विकास किया जा सके।

NAM InfoCom Pvt. Ltd. के बारे में:

NAM InfoCom संचार अवसंरचना, मिशन-क्रिटिकल प्लेटफॉर्म, सिस्टम इंटीग्रेशन और सरकारी, रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अनुकूलित IT समाधान में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनी है। कंपनी में कॉन्वर्सेशनल AI और AI-ड्रिवन संचार समाधानों में भी मजबूत क्षमताएँ हैं।


हिमाचल प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन अवसंरचना सुदृढ़ करने पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की बैठक

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और राज्य में मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा तैयारी अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर चर्चा की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश में डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना की गई है, जिससे प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

हाल के बादल फटने और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं के मद्देनज़र, मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों, विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में अतिरिक्त डॉप्लर रडार और स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) स्थापित करने का अनुरोध किया ताकि भविष्य में मौसम से संबंधित चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के इस सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार जलवायु लचीलापन और आपदा न्यूनीकरण के लिए राज्यों के प्रयासों को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय लगातार देश के मौसम विज्ञान नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, विशेषकर पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि आम जनता और स्थानीय प्रशासन तक समय पर मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सके।

प्रधानमंत्री मोदी की शासन नीति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से सहकारी संघवाद की भावना को निरंतर सशक्त किया है और हर राज्य को समान व न्यायसंगत सहयोग प्रदान किया है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या राजनीतिक दल से संबंधित हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण राज्यों की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ कर उन्हें स्थानीय स्तर पर उभरती चुनौतियों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाना है।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि डॉप्लर रडार और AWS जैसे उन्नत मौसम संबंधी उपकरण न केवल आपदा तैयारी में बल्कि कृषि, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन अवसंरचनाओं के विस्तार में पूर्ण सहयोग देगी ताकि संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया जा सके और जन सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच वैज्ञानिक ढांचे को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिससे हिमाचल प्रदेश में विकास जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनेगा। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य प्राधिकरणों के बीच घनिष्ठ समन्वय हिमाचल प्रदेश की चरम मौसम घटनाओं से निपटने की क्षमता को और बढ़ाएगा।

बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा के लिए कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक आयोजित

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भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने समिति को जानकारी दी कि दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी पर बना अवदाब पिछले छह घंटों में लगभग 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है और 25 अक्तूबर 2025 को प्रातः 11:30 बजे यह चेन्नई (तमिलनाडु) से लगभग 950 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 960 किमी दक्षिणपूर्व, काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) से 970 किमी दक्षिणपूर्व और गोपालपुर (ओडिशा) से 1030 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित था।

यह प्रणाली लगभग पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 26 अक्तूबर तक एक गहरे अवदाब में और 27 अक्तूबर की सुबह तक दक्षिणपश्चिम व उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह उत्तरपश्चिम और फिर उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 28 अक्तूबर की सुबह तक एक भीषण चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्तूबर की शाम या रात को आंध्र प्रदेश तट (मछलीपट्टनम और कालिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के आसपास) से 90–100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (110 किमी प्रति घंटे की तेज़ झोंकों सहित) से टकराने की संभावना है।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी के मुख्य सचिवों और ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने समिति को बताया कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा हेतु सभी तैयारियाँ की जा चुकी हैं। आवश्यक राहत शिविर, निकासी की व्यवस्था और NDRF व SDRF की टीमें तत्पर रखी गई हैं। जिला नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और लगातार निगरानी कर रहे हैं।

मछुआरों को 26 अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक दक्षिणपश्चिम व मध्य बंगाल की खाड़ी, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यानम (पुडुचेरी) और ओडिशा तट के समीप समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। जो मछुआरे समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत तट पर लौटने के लिए कहा गया है।

बैठक में भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्रालयों / विभागों ने बताया कि सभी मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) लागू हैं, आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं और चक्रवात के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तैयार हैं और 26 अक्तूबर से तैनात की जाएंगी। अतिरिक्त टीमें भी स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल की बचाव और राहत टीमें अपने जहाजों और विमानों सहित तैयार हैं। भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक 900 से अधिक नौकाओं को सुरक्षित तट तक पहुँचाया है और शेष को भी सतर्क कर दिया गया है। गृह सचिव ने बताया कि गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों और एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।

कैबिनेट सचिव ने तैयारियों की समीक्षा करते हुए जोर दिया कि लक्ष्य शून्य जनहानि का होना चाहिए और संपत्ति तथा अवसंरचना को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। किसी प्रकार की क्षति होने पर आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

बैठक में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के मुख्य सचिव, ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, मत्स्य, विद्युत, दूरसंचार, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग विभागों के सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव, सदस्य और प्रमुख, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल के अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय मौसम विभाग और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कर्नाटक और महाराष्ट्र को SDRF की दूसरी किस्त के रूप में 1,950.80 करोड़ रुपये जारी — केंद्र सरकार द्वारा बाढ़ और आपदा राहत में समर्थन

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 2025-26 के लिए केंद्र द्वारा SDRF की दूसरी किस्त के तहत 1,950.80 करोड़ रुपये कर्नाटक और महाराष्ट्र को अग्रिम जारी करने को मंजूरी दी है। इसमें से कर्नाटक के लिए 384.40 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र के लिए 1,566.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि इन राज्यों में इस वर्ष की दक्षिण-पश्चिम मानसून में अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत प्रदान की जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, केंद्र सरकार बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों को सम्पूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस वर्ष, केंद्र ने पहले ही 27 राज्यों को SDRF के तहत 13,603.20 करोड़ रुपये और 15 राज्यों को NDRF के तहत 2,189.28 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) से 21 राज्यों को 4,571.30 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (NDMF) से 09 राज्यों को 372.09 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से प्रभावित राज्यों को सभी लॉजिस्टिक सहायता, जिसमें आवश्यक NDRF टीमें, सेना की टीमें और वायु सेना का समर्थन शामिल है, भी प्रदान किया है। इस वर्ष की मानसून में, 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में 199 NDRF टीमों को बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया।

केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने होशियारपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा

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केंद्रीय राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास,सावित्री ठाकुर ने पंजाब के होशियारपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जहाँ उन्होंने स्थिति का अवलोकन किया और प्रभावित किसानों, छोटे व्यवसायियों तथा ग्रामीणों से बातचीत की।

अपने दौरे के दौरान उन्होंने गंधुवाल, फाटकुल्ला, अब्दुल्लापुर, हालेड़ जनार्दन, सालोवाल, मोतला, कौलियां-418, मेहताबपुर में किसान प्रतिनिधिमंडलों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने बीस नदी पर स्थित राडा ब्रिज (मेंडेरीया) का निरीक्षण भी किया।सावित्री ठाकुर ने लोगों को आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राहत और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

सावित्री ठाकुर ने बताया कि सरकार ने पहले ही पीएम-किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त 26 सितंबर को पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए जारी की है, ताकि बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके।

दौरे का समापन करते हुए उन्होंने जोर दिया कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रयास जारी रखेगी और इस क्षेत्र में बाढ़ संबंधी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए काम करेगी।



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