Media24Media.com: भारत में वीआईपी संस्कृति लोकतंत्र और जनजीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय : उपराष्ट्रपति

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भारत में वीआईपी संस्कृति लोकतंत्र और जनजीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय : उपराष्ट्रपति

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भारत के उपराष्ट्रपति ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में "VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy" पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा के पूर्व सदस्य नाबाम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार द्वारा लिखी गई है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक में उठाया गया विषय भारत में लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक जीवन के मूल तत्वों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है तथा लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के बीच संबंधों में निहित होती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है, जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।

उपराष्ट्रपति ने महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान सुलभता, करुणा और जवाबदेही होती है। जो नेता जनता के प्रति सम्मानजनक और सहज उपलब्ध रहते हैं, वे लोगों का स्थायी विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं।

राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तक में उठाए गए विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से मेल खाते हैं, जिसमें सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि सेवा का माध्यम माना गया है। उन्होंने वीआईपी वाहनों पर लाल बत्ती की व्यवस्था समाप्त करने तथा हाल ही में नीट (NEET) परीक्षार्थियों को यातायात संबंधी असुविधा से बचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा अपने प्रस्थान में देरी किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कदम नागरिक-केंद्रित शासन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, "हर भारतीय विशेष है, हर भारतीय एक वीआईपी है।" उन्होंने आगे कहा कि "सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।"

उन्होंने पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तथा अन्य महान व्यक्तित्वों की सादगी और जनसेवा की भावना का उल्लेख किए जाने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि लेखकों ने अपने विश्लेषण को भारत की सभ्यतागत और बौद्धिक परंपराओं जैसे उपनिषदों, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और पंचतंत्र के संदर्भों से समृद्ध बनाया है।

उपराष्ट्रपति ने गणराज्य की मूल भावना को मजबूत करने के लिए समानता, कानून के समक्ष सभी की बराबरी, प्रत्येक नागरिक की गरिमा तथा विनम्रता और उत्तरदायित्व से प्रेरित लोकसेवा के मूल्यों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नेतृत्व की वास्तविक कसौटी जनता का विश्वास और समाज के प्रति उसकी सेवा होती है।

कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम तुकी, मेघालय से राज्यसभा के पूर्व सदस्य डब्ल्यू. आर. खारलुखी लेखक नाबाम रेबिया तथा सह-लेखक संदीप कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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