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नारी शक्ति वंदन के संकल्प को मिला महिलाओं का व्यापक समर्थन

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राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित  कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान

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छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

रायपुर- हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।

राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।

राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।

महात्मा ज्योतिबा का विचार आज भी प्रासंगिक,उनकी जीवनी से मिलती है सीख-डॉ. पाटिल

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अभनपुर- शनिवार को पटेल समाज अभनपुर राज के तत्वाधान में अभनपुर के बस स्टैंड में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती हर्षोल्लास से मनाया गया। जिसमें जनप्रतिनिधियों सहित सर्वसमाज के समाज प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता भिलाई दुर्ग के अंतर्राष्ट्रीय कलाकार एवं साहित्यकार डाक्टर कृष्ण कुमार पाटिल रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन और विचारों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले ने अपना सारा जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उनके जीवन और आदर्श आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अभनपुर राज अध्यक्ष ईश्वर पटेल ने कहा महात्मा ज्योतिबा फुले ने समाज में सामाजिक चेतना व शिक्षा का लौ जलाकर देश में शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाया है। उनका संपूर्ण जीवन प्रेरणादायक है।

वहीं सभा को समाजसेवी ब्रह्मदेव पटेल, अनिल अग्रवाल, संतोष शुक्ला,भरत बैस,बरतराम पटेल, पतिराम पटेल,रानी पटेल, हेमलता पटेल, राधेलाल पटेल , सोमनाथ पटेल,नारायण सोनी,वेदव्यास तारक, गुरूपंच साहू व अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया।इस अवसर पर रक्तजांच व रक्तदान शिविर भी रखा गया। जिसमें लोगों ने रक्तजांच व रक्तदान भी किया। साथ ही पटेल समाज ने गर्मी से राहत पहुंचाने लोगो को शर्बत भी पिलाया । जिसे सभी ने सराहा।कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में डाक्टर मधुसूदन पटेल, अवधराम पटेल,कोमल पटेल,गोपेश पटेल, संजय पटेल,नेतु पटेल,केजू पटेल,बुधारू पटेल, सहित अन्य पदाधिकारियों ने अहम् भूमिका निभाई।इस अवसर पर बड़ी संख्या में पटेल समाज व अन्य समाज के लोग उपस्थित रहें।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबू जगजीवन राम की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबू जगजीवन राम ने अपना पूरा जीवन समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने देश के लिए उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा उनके योगदान को स्मरण करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा,

“पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। देश के लिए उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”

भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2025 विंटर इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरुआत की

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने अपने चार-सप्ताह लंबे इन-पर्सन विंटर इंटर्नशिप प्रोग्राम (WIP)-2025 का आयोजन किया, जो 15 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली में चल रहा है। इस कार्यक्रम में देश भर के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विभिन्न संस्थाओं के 1,485 आवेदकों में से चयनित 80 विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए NHRC, भारत के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि यह इंटर्नशिप भारत जैसे विविध राष्ट्र में सहकर्मी सीखने के लिए अद्वितीय मंच है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों पर सम्यक् दृष्टिकोण प्रदान करना है और इंटर्न्स से आग्रह किया कि वे इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन, कार्यस्थल और समुदाय में आत्मसात करें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकें।

अपने मुख्य भाषण में NHRC, भारत के महासचिव,भरत लाल ने युवाओं की मानवाधिकारों के क्षेत्र में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इंटर्न्स से कहा कि वे संवैधानिक और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित सहानुभूति और करुणा की भावना को विकसित करें और इस इंटर्नशिप का उपयोग अपनी दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और समावेशी, न्यायसंगत एवं समान समाज निर्माण की दिशा में काम करने के लिए करें।


कार्यक्रम का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए NHRC, भारत की संयुक्त सचिव, सैडिंगपुई चखछुआक ने बताया कि विषय विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों के अलावा इंटर्न्स समूह अनुसंधान परियोजनाओं, पुस्तक समीक्षा और भाषण प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे, जिससे उनके मानवाधिकार मुद्दों की समझ में वृद्धि होगी और नवोन्मेषी दृष्टिकोण विकसित होंगे।

NHRC, भारत के निदेशक, ले. कर्नल वीरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।


NHRC, भारत का 32वां स्थापना दिवस मनाया गया और कैदियों के मानवाधिकार पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में अपने 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘कैदियों के मानवाधिकार’ विषय पर एक कार्यक्रम और राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भारत के पूर्व राष्ट्रपति,राम नाथ कोविंद ने कहा कि मानवाधिकारों की आधुनिक व्याख्या से बहुत पहले ही हमारे ऋषि-महर्षियों और शास्त्रों में धर्म की रक्षा करने, करुणा के साथ कार्य करने और न्याय सुनिश्चित करने का संदेश था। यह नैतिक आधार आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है। यह याद दिलाता है कि मानवाधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक और आध्यात्मिक आवश्यकता है, जो भारतीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है।

राम नाथ कोविंद ने कहा कि भारत ने मानवाधिकारों का एक मजबूत और व्यापक ढांचा तैयार किया है। 1993 से अब तक NHRC ने स्वयं को विश्व के सबसे सम्मानित मानवाधिकार संस्थानों में विकसित किया है। 32वें स्थापना दिवस का आयोजन केवल एक संस्थागत मील का पत्थर नहीं, बल्कि संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के शाश्वत मूल्यों के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि का अवसर है। आयोग की जांच, सलाह, हस्तक्षेप और वकालत के माध्यम से उसने समाज के सबसे कमजोर लोगों की आवाज़ को सुना और मानवाधिकार के मुद्दों को शासन के केंद्र में लाया।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन दशकों में हुई प्रगति का जश्न मनाते हुए, हमें आधुनिक समय की जटिल चुनौतियों को भी पहचानना चाहिए। तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक बदलाव के इस युग में असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों जैसे ड्राइवर, सफाई कर्मचारी, निर्माण श्रमिक और प्रवासी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ये लोग हमारे शहर और समाज को चलाए रखते हैं, लेकिन अक्सर असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, अस्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा की अनुपस्थिति का सामना करते हैं। उनके श्रम की सुरक्षा और गरिमा हमारी प्रगति का मापदंड होना चाहिए।

राम नाथ कोविंद ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों और इससे होने वाले मानवाधिकार प्रभाव, जैसे पलायन और विस्थापन, पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति, चाहे उसकी स्थिति कैसी भी हो, पहचान, सुरक्षा और मूलभूत सेवाओं तक पहुंच का हकदार है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भी मानवाधिकार के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया और NHRC की सलाहों की सराहना की।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि कैदियों के मानवाधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। समाज के मूल्य का असली परीक्षण यह है कि यह सबसे कमजोर लोगों, विशेष रूप से हिरासत में रखे गए लोगों के साथ कैसे व्यवहार करता है। जेल अधिकारियों का पवित्र दायित्व है कि हर कैदी के साथ मूलभूत शिष्टाचार के साथ व्यवहार किया जाए। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि आयोग ‘कैदियों के मानवाधिकार’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, ताकि हमारी जेलें केवल बंदी गृह न होकर सुधार, पुनर्वास और आशा के केंद्र बनें। उन्होंने सभी हितधारकों और विशेष रूप से जेल अधिकारियों से आग्रह किया कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें हर कैदी को समाज में पुनः एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में शामिल होने का अवसर मिले।

राम नाथ कोविंद ने सरकारों के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने sanitation, electricity, healthcare, education और housing जैसी सुविधाओं के माध्यम से नागरिकों, विशेष रूप से समाज के निचले हिस्से में रहने वालों के जीवन में सुधार किया। उन्होंने पुराने कानूनों को हटाने और जीवन को आसान बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की पहल की भी सराहना की। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 2019 जैसी ऐतिहासिक पहलें यह दर्शाती हैं कि भारत हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान हमें याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी आते हैं। स्वतंत्रता का प्रयोग समाज के कल्याण के साथ संतुलित होना चाहिए। इसी दृष्टि से, मानवाधिकारों की रक्षा केवल NHRC का दायित्व नहीं बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने NHRC के स्थापना दिवस पर सभी से आग्रह किया कि हम एक अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण और समावेशी भारत बनाने के अपने संकल्प को दोहराएं।

इससे पहले, NHRC के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने आयोग के पिछले 32 वर्षों के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग ने अब तक 23 लाख से अधिक मामलों को देखा और लगभग 2,900 स्वयं संज्ञान मामले दर्ज किए। आयोग ने पीड़ितों को 263 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राहत दी। पिछले एक वर्ष में लगभग 73,000 शिकायतें और 100 से अधिक स्वयं संज्ञान मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 63 स्थल जांच की गई, 38,000 से अधिक मामले निपटाए गए और 200 मामलों में 9 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राहत की सिफारिश की गई।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने कहा कि NHRC ने 12 मुख्य समूहों का गठन किया है, जो विभिन्न मानवाधिकार विषयों पर विशेषज्ञ, NGO और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। इन समूहों ने सरकार की योजनाओं के मूल्यांकन और सुधार के लिए सिफारिशें तैयार की हैं।

NHRC सचिवालय, भरत लाल ने कहा कि आयोग ने भारतीय लोकतंत्र में मानवाधिकारों का रक्षक बनने का प्रयास किया है। आयोग की सबसे बड़ी ताकत इसकी नैतिक और नैतिक नेतृत्व क्षमता है। नागरिकों को शिकायत दर्ज करने और उनके प्रगति की ऑनलाइन जांच करने की सुविधा से न्याय प्रणाली और अधिक समावेशी और सुलभ बन गई है।

भरत लाल ने कहा कि NHRC का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय योगदान है। आयोग ने Global Alliance of NHRIs, Asia Pacific Forum और Commonwealth Forum of NHRIs में भाग लिया है। भारत को हाल ही में मानवाधिकार परिषद के लिए सातवीं बार निर्विरोध चुना गया है, जो भारत की मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

कार्यक्रम में NHRC के सदस्य, न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सरंगी और विजय भारती सायनी, DG (I) आनंद स्वरूप, रजिस्ट्रार (कानून) जोगिंदर सिंह, संयुक्त सचिव समीर कुमार, राज्य मानवाधिकार आयोगों और अन्य आयोगों के अध्यक्ष एवं सदस्य, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शैक्षणिक संस्थान, NGO, मानवाधिकार कार्यकर्ता, शोधकर्ता और वरिष्ठ जेल अधिकारी उपस्थित थे। आयोग ‘कैदियों के मानवाधिकार’ पर एक दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित कर रहा है।


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तीसरे ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप प्रोग्राम का समापन किया

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नई दिल्ली –राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने 2025-2026 के अपने तीसरे ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप प्रोग्राम (OSTI) का सफलतापूर्वक समापन किया। इस दो सप्ताह के प्रोग्राम में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 74 विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन 22 अगस्त, 2025 को भरत लाल, सचिवालय द्वारा किया गया था।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विजय भारती सैयानी, सदस्य, NHRC ने इंटर्न्स को दो सप्ताह की समृद्ध यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी और उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने आयोग की न्याय और समानता के क्षेत्र में भूमिका पर जोर देते हुए महिलाओं के अधिकार, बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, हिरासत में न्याय और वंचित समुदायों के सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में NHRC के महत्वपूर्ण कार्यों को उजागर किया।

सैयानी ने मनोविज्ञान, फोरेंसिक साइंस और व्यवसाय एवं मानवाधिकार जैसे विशेषज्ञ सत्रों की प्रभावशीलता की सराहना की। उन्होंने इंटर्न्स से आग्रह किया कि वे मानव गरिमा के सक्रिय रक्षक बनें, अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करें और व्यक्तिगत एवं पेशेवर दोनों क्षेत्रों में संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करें। उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और एक अधिक समावेशी तथा न्यायसंगत समाज बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, सैडिंगपुईी छकछुआक, संयुक्त सचिव, NHRC ने इंटर्नशिप रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान इंटर्न्स को NHRC सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज प्रतिनिधियों द्वारा मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर सत्रों में भाग लेने का अवसर मिला। इसके अलावा, इंटर्न्स को दिल्ली के तिहाड़ जेल, पुलिस स्टेशन और आशा किरण शेल्टर होम के वर्चुअल दौरे पर भी ले जाया गया, जिससे उन्हें सरकारी संस्थानों के कामकाज और मानवाधिकार संरक्षण के व्यावहारिक अनुभव को समझने का अवसर मिला। पुस्तक समीक्षा, समूह शोध परियोजना प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की गई।

समीर कुमार, संयुक्त सचिव, NHRC और ले. कर्नल वीरेंद्र सिंह, निदेशक, NHRC इस अवसर पर उपस्थित थे।

OSTI छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय कानून, भारत में मानवाधिकार चिंताओं और व्यावहारिक वकालत के तरीकों को सीखने का व्यावहारिक मंच प्रदान करता है। इस प्रोग्राम के माध्यम से, प्रतिभागी मानवाधिकारों के मुद्दों को समझने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्षम बनते हैं।


लोकसभा अध्यक्ष ने त्वरित न्याय के माध्यम से मानव सम्मान सुनिश्चित करने के लिए संवाद का आह्वान किया

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लोकसभा अध्यक्ष ने आज त्वरित न्याय के माध्यम से मानवीय गरिमा की सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी और प्रशासनिक प्रणालियों में अनेक बाधाएँ न्याय में देरी का कारण बनती हैं। इस सन्दर्भ में उन्होंने नागरिकों और विचारकों से सभी के लिए शीघ्र और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार करने का आह्वान किया।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में मानवता, समानता, न्याय, सामाजिक-आर्थिक अधिकारों और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को गहराई से समाहित किया। संवैधानिक अनुच्छेदों और संविधान सभा की बहसों, दोनों में मानवीय गरिमा पर विशेष बल दिया गया।

 बिरला ने ये टिप्पणियाँ आज नई दिल्ली में आयोजित 11वें डॉ. एल. एम. सिंघवी स्मृति व्याख्यान के दौरान कीं, जिसका विषय था "मानव गरिमा संविधान की आत्मा: 21वीं सदी में न्यायिक चिंतन"।

बिरला ने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के बीच आपसी सहयोग के महत्व पर बल दिया ताकि वे अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर बना सकें और सभी के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने उन विद्वानों की प्रशंसा की जिन्होंने भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत बनाने में अपनी विशेषज्ञता का योगदान दिया है। वर्तमान में चल रहे सुधारों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप अपने कानूनी ढाँचे को निरंतर विकसित कर रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय गरिमा और न्याय की रक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं और इनके लिए व्यापक सुधारों और समाधानों की आवश्यकता है।

पूर्व सांसद, विधिवेत्ता, राजनयिक और विद्वान डॉ. एल.एम. सिंघवी के जीवन और विरासत का जिक्र करते हुए, बिरला ने उनकी यात्रा को प्रेरणादायक बताया। डॉ. सिंघवी ने एक संवैधानिक विशेषज्ञ, विधिवेत्ता, लेखक और कवि के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया और एक ऐसी विरासत छोड़ी जो आज भी प्रेरणादायी है।बिरला ने न केवल भारत पर, बल्कि दुनिया भर के संविधान निर्माण में डॉ. सिंघवी के गहन प्रभाव को याद किया। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र, संस्कृति, ज्ञान, व्यापार और विदेशों में भारतीयों के सम्मान को बढ़ावा देने में डॉ. सिंघवी की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। बिरला ने कहा कि डॉ. सिंघवी का बहुमुखी व्यक्तित्व सभी भारतीयों को नवाचार करने, रचनात्मक रूप से सोचने और राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।


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