Media24Media.com: महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इंदौर में सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की

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महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इंदौर में सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की

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इंदौर- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं संस्थान के निदेशक वलेटी प्रेमचंद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा क्षेत्रीय केंद्र के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण से हुई। पंचवटी की अवधारणा के अनुरूप संस्थान परिसर में बरगद, पीपल, बेल, अशोक और आंवला के पांच पौधे लगाए गए।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर वलेटी प्रेमचंद ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध अध्ययनों तथा बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) की गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से संचालित एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, जिसे पुनर्वास परिषद भारत (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं—सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य—महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, संरक्षण तथा समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रतिभागियों से नियमित रूप से फीडबैक लिया जाए। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता, जमीनी स्तर पर उनके लाभ तथा क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों का उपयोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तथा जनोन्मुखी बनाने में किया जा सकता है।

एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय और समुदाय में मनोसामाजिक परामर्श सेवाओं की आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं की नई पीढ़ी तैयार करेगा, जो बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

उन्होंने संस्थान के बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र के प्रतिभागियों के साथ “पोषण भी, पढ़ाई भी” राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रही उत्कृष्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आए सखी वन स्टॉप सेंटरों के प्रशिक्षुओं से भी बातचीत की। इस दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से जुड़े मामलों और केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सहायता सेवाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग जमीनी स्तर पर मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की समर्पण भावना तथा उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

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