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इंदौर संभाग में जनजातीय कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, MoTA सचिव ने अधिकारियों को दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश

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इंदौर- जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग का व्यापक क्षेत्रीय दौरा कर जनजातीय कल्याण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय लाभार्थियों, विद्यार्थियों, महिला बुनकरों और स्थानीय उद्यमियों से सीधे संवाद कर योजनाओं के प्रभाव और चुनौतियों की जानकारी ली।

दौरे की शुरुआत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), मोरोद (PVTG), इंदौर से हुई। सचिव ने कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की तथा विद्यालय में संचालित डिजिटल स्मार्ट कक्षाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं। सचिव ने जनजातीय बच्चों, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद टीम ने महेश्वर, खरगोन स्थित बुनकर सुविधा केंद्र का दौरा किया। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े सहायता समूह के माध्यम से जनजातीय महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र पर प्रतिदिन करीब 1,000 से 2,000 साड़ियों का उत्पादन किया जाता है। TRIFED, स्वयं सहायता समूहों और जिला पंचायतों के सहयोग से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। सचिव ने महिला बुनकरों से बातचीत कर उनके कार्य, आय और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

सचिव ने आदि सेवा केंद्र, केरियाखेड़ी का भी निरीक्षण किया। यह केंद्र जनजातीय समुदाय के लिए एकल-खिड़की सुविधा केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां राशन कार्ड से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में पंजीयन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र पर आयोजित जन सुनवाई और शिकायत निवारण की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई।

दौरे के दौरान खरगोन जिले में एक जनजातीय होमस्टे का भी निरीक्षण किया गया। इसे स्थानीय जनजातीय परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। सचिव ने ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए पैदा हो रहे रोजगार और आय के अवसरों को समझा। होमस्टे संचालकों को प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

इसके बाद सचिव ने इंदौर स्थित सिकल सेल रोग के Center of Competence का दौरा किया और जनजातीय आबादी में सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए चल रही स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और उपचार सुविधाओं की समीक्षा की।

दौरे के अंत में इंदौर संभागायुक्त कार्यालय में योजनाओं की प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रंजना चोपड़ा ने की। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारी, राज्य जनजातीय कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान सचिव ने कलेक्टरों को MoTA की सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर शीघ्र संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समयबद्ध समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र जनजातीय परिवार और बस्ती तक पहुंचे।

पूरे दौरे ने जनजातीय कल्याण योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मध्य प्रदेश में ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ को बड़ी ताकत: 80 हजार से अधिक परिवारों को मिला पीएम आवास योजना का लाभ

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मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के तहत आज एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंदौर जिले के सांवेर में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 80 हजार से अधिक परिवारों को आवासीय लाभ प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

42 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति पत्र

प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के तहत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इसके लिए सरकार द्वारा लगभग 1,050 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में 38 हजार परिवारों ने अपने नए पक्के मकानों में गृह प्रवेश किया।

‘हर घर सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद का प्रतीक’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि नया घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।

आवास योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी है मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत राज्य में अब तक 10.39 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 9.08 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।

महिलाओं को भी मिल रहा सशक्तिकरण

योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मकान का स्वामित्व महिला सदस्य के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिया जाता है। इससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

1 करोड़ परिवारों के आवासीय सपनों को मिलेगा सहारा

PMAY-U 2.0 के तहत केंद्र सरकार देशभर के 1 करोड़ अतिरिक्त EWS, LIG और MIG परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। पात्र परिवारों को शहरी क्षेत्रों में घर बनाने, खरीदने या किराए पर लेने के लिए ₹2.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश में 80 हजार से अधिक परिवारों को PMAY-U का लाभ।

  • 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित।

  • ₹1,050 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान।

  • 38 हजार परिवारों ने नए पक्के घरों में किया गृह प्रवेश।

  • राज्य में अब तक 10.39 लाख आवास स्वीकृत, 9.08 लाख पूर्ण।

  • महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिए जा रहे घर।


महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इंदौर में सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की गतिविधियों की समीक्षा की

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इंदौर- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज सवित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान (SPNIWCD) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर भी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं संस्थान के निदेशक वलेटी प्रेमचंद, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा क्षेत्रीय केंद्र के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण से हुई। पंचवटी की अवधारणा के अनुरूप संस्थान परिसर में बरगद, पीपल, बेल, अशोक और आंवला के पांच पौधे लगाए गए।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने संस्थान द्वारा संचालित गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर वलेटी प्रेमचंद ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध अध्ययनों तथा बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) की गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से संचालित एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, जिसे पुनर्वास परिषद भारत (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं—सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य—महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण, संरक्षण तथा समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विभिन्न राज्यों और जिलों के प्रतिभागियों से नियमित रूप से फीडबैक लिया जाए। इससे योजनाओं की प्रभावशीलता, जमीनी स्तर पर उनके लाभ तथा क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों का उपयोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तथा जनोन्मुखी बनाने में किया जा सकता है।

एडवांस्ड डिप्लोमा इन चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग (ADCGC) पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय और समुदाय में मनोसामाजिक परामर्श सेवाओं की आवश्यकता है। यह पाठ्यक्रम प्रशिक्षित मनोसामाजिक परामर्शदाताओं की नई पीढ़ी तैयार करेगा, जो बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

उन्होंने संस्थान के बाल मार्गदर्शन केंद्र (CGC) द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने महाराष्ट्र के प्रतिभागियों के साथ “पोषण भी, पढ़ाई भी” राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रही उत्कृष्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आए सखी वन स्टॉप सेंटरों के प्रशिक्षुओं से भी बातचीत की। इस दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से जुड़े मामलों और केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सहायता सेवाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग जमीनी स्तर पर मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की समर्पण भावना तथा उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में भी महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

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