Media24Media.com: 12 वर्षों में बदली पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर, विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना ‘अष्टलक्ष्मी’

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12 वर्षों में बदली पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर, विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना ‘अष्टलक्ष्मी’

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। केंद्र सरकार की नीतियों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के चलते यह क्षेत्र अब देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में भी बड़ा विस्तार हुआ है।

सरकार के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को मिलाकर बने पूर्वोत्तर क्षेत्र को "अष्टलक्ष्मी" के नाम से जाना जाता है। भारतीय परंपरा में मां लक्ष्मी की आठ स्वरूपों की तरह ये आठ राज्य भी अपनी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आर्थिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं और देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर के विकास को मिली नई गति

वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई विशेष योजनाएं शुरू कीं। विकास मंत्रालय (MDoNER) के माध्यम से अब तक 3,746 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर 27,963 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।

PM-DevINE योजना बनी विकास का आधार

प्रधानमंत्री विकास पहल (PM-DevINE) योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 6,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, आजीविका, सामाजिक विकास और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने से जुड़े 48 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं।

NESIDS के जरिए मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS) के तहत सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया। इस योजना के तहत 70 सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 57 परियोजनाओं पर काम जारी है। वहीं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 1,234 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 376 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

एक्ट ईस्ट नीति से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय महत्व

केंद्र सरकार की "एक्ट ईस्ट नीति" ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना जैसे प्रयासों से व्यापार और संपर्क को नई दिशा मिली है।

मोरेह जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) विकसित किए गए हैं, जबकि सीमा हाटों के जरिए स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार

पूर्वोत्तर भारत में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई वर्ष 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई।

भारतमाला परियोजना के तहत 2,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 1,800 किलोमीटर से अधिक सड़कें पूरी हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 50,850 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे दूरदराज के गांवों को बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों से जोड़ा गया।

रेल संपर्क में आया क्रांतिकारी बदलाव

पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। रेलवे के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन 2,122 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,486 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले एक दशक में 1,900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें शुरू की गईं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेलवे ट्रैकों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है।

गुवाहाटी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूर्वोत्तर के लगभग 60 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

बोगीबील, भूपेन हजारिका सेतु और सेला टनल जैसी परियोजनाएं बनीं पहचान

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ और धीमाजी जिलों को जोड़ता है। वहीं भूपेन हजारिका सेतु (ढोला-सदिया पुल) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क को मजबूत किया है।

अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर निर्मित सेला टनल ने तवांग क्षेत्र को पूरे साल सड़क संपर्क उपलब्ध कराया है।

मणिपुर में निर्माणाधीन नोनी रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर ब्रिज बनने जा रहा है।


हवाई संपर्क में 78 प्रतिशत वृद्धि

UDAN योजना के तहत पूर्वोत्तर में हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां केवल 9 हवाई अड्डे थे, वहीं 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

पाकयोंग, तेजू और जोरहाट जैसे नए हवाई अड्डों के विकास के साथ लगभग 90 क्षेत्रीय हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी ने बदली तस्वीर

भारतनेट और डिजिटल भारत निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से दिसंबर 2025 तक 6,355 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं से जोड़ा गया।

इसके अलावा 3,718 मोबाइल टावर स्थापित कर 5,366 गांवों तक मोबाइल सेवाएं पहुंचाई गईं।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश

पूर्वोत्तर क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में 2,880 मेगावाट क्षमता वाली दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना और 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है।

नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड के तहत 1,656 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो सभी आठ राज्यों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी।

जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा नल का जल

जल जीवन मिशन के तहत अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम ने 100 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी तेजी से प्रगति हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन से बदला ग्रामीण जीवन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।

वर्ष 2014 से 2026 के बीच लगभग 57 लाख घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा में मजबूत हुआ ढांचा

गुवाहाटी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पूरी तरह कार्यरत है। इसके अलावा क्षेत्र में 12 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत अप्रैल 2026 तक 2.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं और 46 लाख से अधिक लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

शिक्षा क्षेत्र में 79 विश्वविद्यालय, 1,001 कॉलेज, 110 आईटीआई और 48 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन भी लगातार बढ़ा है।

आवास और बिजली से बदली ग्रामीण तस्वीर

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में मार्च 2026 तक 28 लाख से अधिक पक्के मकानों का निर्माण पूरा किया गया।

सौभाग्य योजना के अंतर्गत सभी आठ राज्यों में 100 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र में बढ़ी आय

पूर्वोत्तर में मत्स्य उत्पादन वर्ष 2014-15 के 4.03 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 6.78 लाख टन हो गया।

दूध उत्पादन 1,293.5 हजार टन से बढ़कर 1,739.9 हजार टन तक पहुंच गया है।

जैविक खेती, बांस उद्योग, अगरवुड उत्पादन और कृषि आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

विकसित भारत की दिशा में बढ़ता पूर्वोत्तर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। क्षेत्र अब केवल भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत आज "अष्टलक्ष्मी" के रूप में एक ऐसे क्षेत्र की पहचान बना चुका है, जो अधिक जुड़ा हुआ, आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


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