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12 वर्षों में बदली पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर, विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना ‘अष्टलक्ष्मी’

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। केंद्र सरकार की नीतियों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के चलते यह क्षेत्र अब देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में भी बड़ा विस्तार हुआ है।

सरकार के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को मिलाकर बने पूर्वोत्तर क्षेत्र को "अष्टलक्ष्मी" के नाम से जाना जाता है। भारतीय परंपरा में मां लक्ष्मी की आठ स्वरूपों की तरह ये आठ राज्य भी अपनी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आर्थिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं और देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर के विकास को मिली नई गति

वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई विशेष योजनाएं शुरू कीं। विकास मंत्रालय (MDoNER) के माध्यम से अब तक 3,746 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर 27,963 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।

PM-DevINE योजना बनी विकास का आधार

प्रधानमंत्री विकास पहल (PM-DevINE) योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 6,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, आजीविका, सामाजिक विकास और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने से जुड़े 48 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं।

NESIDS के जरिए मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS) के तहत सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया। इस योजना के तहत 70 सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 57 परियोजनाओं पर काम जारी है। वहीं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 1,234 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 376 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

एक्ट ईस्ट नीति से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय महत्व

केंद्र सरकार की "एक्ट ईस्ट नीति" ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना जैसे प्रयासों से व्यापार और संपर्क को नई दिशा मिली है।

मोरेह जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) विकसित किए गए हैं, जबकि सीमा हाटों के जरिए स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार

पूर्वोत्तर भारत में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई वर्ष 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई।

भारतमाला परियोजना के तहत 2,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 1,800 किलोमीटर से अधिक सड़कें पूरी हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 50,850 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे दूरदराज के गांवों को बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों से जोड़ा गया।

रेल संपर्क में आया क्रांतिकारी बदलाव

पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। रेलवे के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन 2,122 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,486 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले एक दशक में 1,900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें शुरू की गईं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेलवे ट्रैकों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है।

गुवाहाटी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूर्वोत्तर के लगभग 60 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

बोगीबील, भूपेन हजारिका सेतु और सेला टनल जैसी परियोजनाएं बनीं पहचान

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ और धीमाजी जिलों को जोड़ता है। वहीं भूपेन हजारिका सेतु (ढोला-सदिया पुल) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क को मजबूत किया है।

अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर निर्मित सेला टनल ने तवांग क्षेत्र को पूरे साल सड़क संपर्क उपलब्ध कराया है।

मणिपुर में निर्माणाधीन नोनी रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर ब्रिज बनने जा रहा है।


हवाई संपर्क में 78 प्रतिशत वृद्धि

UDAN योजना के तहत पूर्वोत्तर में हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां केवल 9 हवाई अड्डे थे, वहीं 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

पाकयोंग, तेजू और जोरहाट जैसे नए हवाई अड्डों के विकास के साथ लगभग 90 क्षेत्रीय हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी ने बदली तस्वीर

भारतनेट और डिजिटल भारत निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से दिसंबर 2025 तक 6,355 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं से जोड़ा गया।

इसके अलावा 3,718 मोबाइल टावर स्थापित कर 5,366 गांवों तक मोबाइल सेवाएं पहुंचाई गईं।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश

पूर्वोत्तर क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में 2,880 मेगावाट क्षमता वाली दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना और 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है।

नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड के तहत 1,656 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो सभी आठ राज्यों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी।

जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा नल का जल

जल जीवन मिशन के तहत अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम ने 100 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी तेजी से प्रगति हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन से बदला ग्रामीण जीवन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।

वर्ष 2014 से 2026 के बीच लगभग 57 लाख घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा में मजबूत हुआ ढांचा

गुवाहाटी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पूरी तरह कार्यरत है। इसके अलावा क्षेत्र में 12 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत अप्रैल 2026 तक 2.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं और 46 लाख से अधिक लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

शिक्षा क्षेत्र में 79 विश्वविद्यालय, 1,001 कॉलेज, 110 आईटीआई और 48 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन भी लगातार बढ़ा है।

आवास और बिजली से बदली ग्रामीण तस्वीर

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में मार्च 2026 तक 28 लाख से अधिक पक्के मकानों का निर्माण पूरा किया गया।

सौभाग्य योजना के अंतर्गत सभी आठ राज्यों में 100 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र में बढ़ी आय

पूर्वोत्तर में मत्स्य उत्पादन वर्ष 2014-15 के 4.03 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 6.78 लाख टन हो गया।

दूध उत्पादन 1,293.5 हजार टन से बढ़कर 1,739.9 हजार टन तक पहुंच गया है।

जैविक खेती, बांस उद्योग, अगरवुड उत्पादन और कृषि आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

विकसित भारत की दिशा में बढ़ता पूर्वोत्तर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। क्षेत्र अब केवल भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत आज "अष्टलक्ष्मी" के रूप में एक ऐसे क्षेत्र की पहचान बना चुका है, जो अधिक जुड़ा हुआ, आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ASEAN नौसेना प्रमुखों से मुलाकात

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MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 फरवरी 2026 को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में ASEAN के नौ सदस्य देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ संवाद किया। इस बैठक में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और महासागर क्षेत्र में सुरक्षा व विकास के लिए परस्पर और समग्र प्रगति (MAHASAGAR) के विज़न के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

MILAN अभ्यास में ASEAN की बड़ी भागीदारी

रक्षा मंत्री ने MILAN 2026 में ASEAN नौसेनाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास 1995 में केवल चार विदेशी नौसेनाओं से शुरू होकर फरवरी 2026 में 74 देशों की भागीदारी वाला सबसे बड़ा संस्करण बन गया है।

उन्होंने Indian Ocean Naval Symposium (IONS) – Conclave of Chiefs और International Fleet Review 2026 की भूमिका को इंडो-पैसिफिक साझेदारों के बीच विश्वास और ऑपरेशनल समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।

MILAN 2026 के समुद्री चरण (Sea Phase) में जटिल समुद्री अभ्यास जैसे:

  • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW)

  • वायु रक्षा

  • खोज और बचाव (Search & Rescue)
    पर भी चर्चा हुई।

भारत-ASEAN रणनीतिक दृष्टिकोण

राजनाथ सिंह ने ASEAN को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताया और कहा कि साझा सुरक्षा ही क्षेत्रीय समृद्धि का आधार है।

उन्होंने ASEAN साझेदारों को भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से लाभ उठाने का आमंत्रण दिया, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के कारण विकसित हुआ है।
उन्होंने INS विक्रांत और विशाखापट्टनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों को भारत के ‘बिल्डर नेवी’ में परिवर्तन का प्रतीक बताया।

संयुक्त गतिविधियों का प्रस्ताव

ASEAN प्रतिनिधियों ने भारत की क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) की भूमिका की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, विशेष रूप से:

  • ASEAN-India Defence Think-Tank Interaction

  • युवा नौसैनिक अधिकारियों के बीच सहयोग पहल
    ताकि दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता

बैठक का समापन स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो “Camaraderie, Cooperation, and Collaboration” (सौहार्द, सहयोग और समन्वय)—MILAN 2026 का आधिकारिक विषय—पर आधारित है।

सीमाओं की मजबूती, विकास की रफ्तार: बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन बना भारत की रणनीतिक रीढ़

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नई दिल्ली- हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तानों की तपती रेत और घने जंगलों तक, जहां सामान्य पहुंच कठिन है, वहां बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने अपने परिश्रम और साहस की अमिट छाप छोड़ी है। वर्ष 1960 में स्थापित BRO आज केवल एक निर्माण एजेंसी नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं का मूक प्रहरी और विकास का मजबूत स्तंभ बन चुका है।

‘श्रमेन सर्वं साध्यम्’ यानी कठोर परिश्रम से सब कुछ संभव है — इस मूल मंत्र के साथ BRO ने पिछले छह दशकों में देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है।

रिकॉर्ड उपलब्धियां और बढ़ता बजट

अब तक BRO देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में 64,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 1,179 पुलों, 7 सुरंगों और 22 हवाई पट्टियों का निर्माण कर चुका है।
वित्त वर्ष 2024–25 में BRO ने ₹16,690 करोड़ का अब तक का सबसे अधिक व्यय दर्ज किया, जबकि 2025–26 के लिए ₹17,900 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने इसके योगदान को देखते हुए बजट आवंटन भी बढ़ाया है।

सीमावर्ती राज्यों में रणनीतिक परियोजनाएं

अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पूर्वोत्तर राज्यों और राजस्थान तक BRO की परियोजनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं।

  • लद्दाख में अटल टनल, डीएस-डीबीओ रोड और शिंकू ला टनल जैसी परियोजनाएं सालभर संपर्क सुनिश्चित कर रही हैं।

  • अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल और नेचिफू टनल से तवांग क्षेत्र तक निर्बाध पहुंच संभव हुई है।

  • सिक्किम और जम्मू-कश्मीर में पुलों और सड़कों ने सैन्य और नागरिक आवाजाही को मजबूती दी है।

आपदा में भी सबसे आगे BRO

चाहे भूकंप हो, बाढ़ या हिमस्खलन — BRO आपदा के समय सबसे पहले टूटे संपर्क को बहाल करता है। ज़ोजिला, रोहतांग और सेला जैसे दर्रों को रिकॉर्ड समय में खोलना इसकी दक्षता का प्रमाण है। राहत और बचाव कार्यों में BRO की भूमिका जीवनरेखा साबित होती है।

पड़ोसी देशों में भी विकास का सेतु

BRO ने भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में सड़कें, पुल और हवाई अड्डे बनाकर भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और कूटनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है। अफगानिस्तान की दिलाराम–जरंज हाईवे परियोजना आज भी भारत की विकास कूटनीति का प्रतीक मानी जाती है।

भविष्य की तैयारी

आने वाले वर्षों में BRO सीमावर्ती इलाकों में 27,000 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों और कई सुरंगों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट जैसे उपक्रम भारत की रणनीतिक तैयारी को नई ऊंचाई देंगे।

निष्कर्ष

छह दशकों से अधिक समय से BRO ने यह सिद्ध किया है कि कठिन से कठिन भूभाग भी मजबूत इरादों के आगे झुक जाता है। BRO केवल सड़कें नहीं बनाता, बल्कि सुरक्षा, विकास और विश्वास की नींव रखता है।
भारत की सीमाओं पर खड़ा यह संगठन आज भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है — रास्ता मिलेगा, नहीं तो बनाया जाएगा।

भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती पर रवाना

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भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (First Training Squadron – 1TS) के जहाज — आईएनएस तिर, शार्दुल, सुजाता और आईसीजीएस सारथी — 110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (Integrated Officers’ Training Course – IOTC) के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती (Long Range Training Deployment – LRTD) पर प्रस्थान करेंगे।

इस तैनाती के तहत स्क्वाड्रन सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में बंदरगाह यात्राएं करेगा। इस तैनाती का उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को व्यापक परिचालन और अंतर-सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करना है, साथ ही भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा मुक्त, खुले और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र की परिकल्पना के अनुरूप दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की सतत समुद्री सहभागिता को सुदृढ़ करना है।

इन बंदरगाह यात्राओं के दौरान मेजबान नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ विभिन्न पेशेवर संवाद, प्रशिक्षण अभ्यास और सहयोगात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें संरचित प्रशिक्षण आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक विज़िट, विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद और संयुक्त समुद्री साझेदारी अभ्यास शामिल होंगे।

इन गतिविधियों का उद्देश्य आपसी संचालनात्मक समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी), पारस्परिक विश्वास और समझ को और अधिक मजबूत करना है, साथ ही समुद्र में श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में छह अंतरराष्ट्रीय अधिकारी प्रशिक्षु भी शामिल हैं, जो मित्र देशों के कार्मिकों के क्षमता निर्माण और व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति भारतीय नौसेना की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, इस तैनाती के लिए भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के कार्मिक भी जहाजों पर सवार हैं, जिससे तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और आपसी समन्वय को और अधिक मजबूती मिलेगी।

यह दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती प्रशिक्षण उत्कृष्टता पर भारतीय नौसेना के विशेष जोर को रेखांकित करती है, साथ ही क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए समुद्री कूटनीति, सद्भावना और सहयोगात्मक दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।



गुवाहाटी एयरपोर्ट का नया टर्मिनल: असम और पूर्वोत्तर के विकास का नया द्वार

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गुवाहाटी/नई दिल्ली- असम की कनेक्टिविटी, आर्थिक विस्तार और वैश्विक जुड़ाव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसे असम और पूरे पूर्वोत्तर के लिए “विकास और प्रगति का उत्सव” बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब विकास की रोशनी आम लोगों तक पहुंचती है, तो जीवन के हर मार्ग पर नई ऊंचाइयां छूने की शुरुआत होती है। उन्होंने असम की धरती से अपने गहरे जुड़ाव, यहां के लोगों के स्नेह और विशेष रूप से माताओं-बहनों के अपनत्व को अपनी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि आज असम के विकास में एक और नया अध्याय जुड़ रहा है।

भारत रत्न भूपेन हज़ारिका की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रह्मपुत्र के तट चमकेंगे, अंधकार की हर दीवार टूटेगी—और यह संकल्प आज साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ब्रह्मपुत्र की धारा कभी नहीं रुकती, वैसे ही केंद्र और राज्य सरकारों के नेतृत्व में असम में विकास की धारा भी निरंतर बह रही है।

प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले असम के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा के अनावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि बोरदोलोई जी ने असम की पहचान, भविष्य और हितों से कभी समझौता नहीं किया। उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को असम पर गर्व करना सिखाएगी।

आधुनिक कनेक्टिविटी, नए अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक हवाई अड्डे और उन्नत कनेक्टिविटी किसी भी राज्य के लिए नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। उन्होंने कहा कि जब असम में भव्य हाइवे और एयरपोर्ट बनते हैं, तो लोगों को यह भरोसा होता है कि अब असम के साथ वास्तविक न्याय हो रहा है। उन्होंने पिछली सरकारों पर असम और पूर्वोत्तर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों तक इस क्षेत्र को विकास से वंचित रखा गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में असम और पूर्वोत्तर में लाखों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं शुरू हुई हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि असम भारतीय न्याय संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है और 50 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज युवाओं को बिना रिश्वत और सिफारिश के नौकरियां मिल रही हैं।

संस्कृति और विकास का संगम

प्रधानमंत्री ने असम की संस्कृति के संरक्षण और प्रचार पर जोर देते हुए 13 अप्रैल 2023 को एक साथ 11 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा किए गए बिहू नृत्य को याद किया, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास असम को नई पहचान दिला रहे हैं।

नए टर्मिनल की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे गुवाहाटी और असम की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और सालाना 1.25 करोड़ से अधिक यात्री लाभान्वित होंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और मां कामाख्या के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल “विकास के साथ विरासत” के मंत्र का सजीव उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह देश का पहला प्रकृति-थीम आधारित एयरपोर्ट टर्मिनल है, जिसमें हरियाली, इनडोर फॉरेस्ट और असम की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। बांस के व्यापक उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बांस असम के जीवन का अभिन्न हिस्सा है और 2017 में बांस को ‘घास’ की श्रेणी में लाने के फैसले से आज यह भव्य संरचना संभव हो सकी है।

असम बनेगा भारत का ईस्टर्न गेटवे

प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों को बढ़ावा देता है, निवेशकों का भरोसा मजबूत करता है और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि आज असम असीम संभावनाओं की उड़ान भर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है और इसमें हर राज्य की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत असम आज भारत का ईस्टर्न गेटवे बन रहा है और ASEAN देशों से भारत को जोड़ने वाला सेतु बनकर उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र पर बने नए पुलों, रेलवे कनेक्टिविटी, वंदे भारत एक्सप्रेस, जलमार्गों और गंगा विलास क्रूज जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे असम की रणनीतिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जहां कभी हिंसा और पिछड़ापन था, वहां आज 4G-5G कनेक्टिविटी और विकास पहुंच रहा है।

नई शुरुआत का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर की पहचान और संस्कृति की रक्षा के साथ विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सतर्क और एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि असम का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नए टर्मिनल के उद्घाटन पर असमवासियों को बधाई दी और विश्वास जताया कि असम और पूरा पूर्वोत्तर विकसित भारत की यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

पृष्ठभूमि

करीब 1.4 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह नया एकीकृत टर्मिनल सालाना 1.3 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है। “बैंबू ऑर्किड्स” थीम पर आधारित इस टर्मिनल में पूर्वोत्तर के स्थानीय बांस, काजीरंगा से प्रेरित हरियाली, जपी आकृतियां, गैंडे के प्रतीक और ऑर्किड से प्रेरित स्तंभ शामिल हैं। अत्याधुनिक सुरक्षा, डिजी यात्रा, स्वचालित बैगेज हैंडलिंग और एआई आधारित संचालन इसे यात्रियों के लिए सुविधाजनक और भविष्य के अनुरूप बनाते हैं।

हिंद-प्रशांत में तैनात आईएनएस सह्याद्री ने फिलीपीन नौसेना संग समुद्री अभ्यास किया

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भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री ने मनीला, फिलीपींस में बंदरगाह चरण की तैनाती से पहले फिलीपीन नौसेना के साथ एक अभ्यास किया।

यह पोत वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन तैनाती पर है और मित्र देशों के साथ विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग ले रहा है, जिनमें मालाबार-2025, ऑसइंडेक्स-2025, जेमेक्स-25 तथा रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के साथ पहला द्विपक्षीय अभ्यास शामिल हैं।

अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं ने सामरिक संचार अभ्यास, नेविगेशन संचालन, विज़िट बोर्ड सर्च एंड सीज़र (VBSS) अभ्यास तथा उड़ान संचालन किए, जिससे पेशेवर तालमेल और पारस्परिक समझ को और मजबूत किया गया।

बंदरगाह चरण के दौरान कई पेशेवर आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक विज़िट और विषय विशेषज्ञों के बीच चर्चा आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएँ, संयुक्त योग सत्र और अनाथालय सहायता जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

आईएनएस सह्याद्री की यह यात्रा भारत की फिलीपींस के साथ बढ़ते संबंधों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और समुद्री क्षेत्र में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग को उजागर करती है। यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी तथा सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता के 15वें संस्करण का हनोई में आयोजन

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भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता (डीपीडी) का 15वां संस्करण आज, 10 नवंबर 2025 को हनोई में आयोजित हुआ। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल होआंग ज़ुआन चिएन ने की। दोनों पक्षों ने हाइड्रोग्राफी सहयोग, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों, बंदरगाह यात्राओं, जहाज दौरों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिपयार्ड उन्नयन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान, सैन्य चिकित्सा तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श भी किया।

वार्ता के दौरान, पनडुब्बी खोज, बचाव सहायता और सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त उद्यम, रक्षा उत्पादन के लिए उपकरणों की खरीद, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा उपकरणों की डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग और वियतनाम के रक्षा उद्योग के महा विभाग के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग के कार्यान्वयन व्यवस्था के अंतर्गत, दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया।

वार्ता के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की और डीपीडी से संबंधित प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। डीपीडी का 16वां संस्करण 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

रक्षा नीति वार्ता भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की समीक्षा और उसे दिशा देने का प्रमुख तंत्र है तथा यह भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टि वक्तव्य 2030 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा सचिव की वियतनाम यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में मलेशिया में होंगे शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 1 नवम्बर 2025 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित होने वाली 12वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में भाग लेंगे। वे इस मंच को ‘ADMM-Plus के 15 वर्षों पर चिंतन और आगे की राह तय करना’ विषय पर संबोधित करेंगे।

इस बैठक के दौरान, आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक का दूसरा संस्करण भी 31 अक्टूबर को मलेशिया की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा, जिसमें आसियान के सभी सदस्य देशों के रक्षा मंत्री भाग लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य भारत और आसियान सदस्य देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करना तथा “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” को आगे बढ़ाना है।

दो दिवसीय यात्रा के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भाग लेने वाले ADMM-Plus देशों के अपने समकक्षों और मलेशिया के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है।

ADMM (ASEAN Defence Ministers’ Meeting) आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के भीतर रक्षा परामर्श और सहयोग का सर्वोच्च तंत्र है। ADMM-Plus एक ऐसा मंच है जो आसियान सदस्य देशों — ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम — तथा उसके आठ संवाद भागीदारों — भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड — को सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एकजुट करता है।

भारत 1992 में आसियान का संवाद भागीदार बना था और पहली ADMM-Plus बैठक 12 अक्टूबर 2010 को हनोई, वियतनाम में आयोजित हुई थी। वर्ष 2017 से ADMM-Plus बैठकों का आयोजन प्रतिवर्ष किया जा रहा है ताकि आसियान और इसके साझेदार देशों के बीच रक्षा सहयोग को और सशक्त किया जा सके।

ADMM-Plus के ढांचे के तहत, भारत वर्तमान में 2024-2027 चक्र के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts Working Group on Counter Terrorism) का सह-अध्यक्ष है। इसके अतिरिक्त, आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (ASEAN-India Maritime Exercise) का दूसरा संस्करण वर्ष 2026 में आयोजित किया जाएगा।

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