Media24Media.com: राष्ट्रीय जलागम प्रबंधन दिशानिर्देशों पर एनआरएए की द्वितीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित

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राष्ट्रीय जलागम प्रबंधन दिशानिर्देशों पर एनआरएए की द्वितीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित

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भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के ज्ञान साझेदार राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने विश्व बैंक समर्थित "रीवार्ड (REWARD) कार्यक्रम" के अंतर्गत बेहतर जलागम प्रबंधन के लिए मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (NTG) पर द्वितीय राष्ट्रीय स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन 17–18 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में किया।

उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण, एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार तथा विभाग और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस परामर्श बैठक में जलागम विकास और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इनमें भूमि संसाधन विभाग, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण, विश्व बैंक, रीवार्ड कार्यक्रम से जुड़े राज्य (कर्नाटक और ओडिशा), एनआरएए के कंसोर्टियम साझेदार, नाबार्ड, आईसीएआर संस्थान तथा अन्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम के विश्व दिवस के अवसर पर नरेंद्र भूषण ने “मेरी मिट्टी, मेरा फ़र्ज़” शीर्षक से एक लघु फिल्म का शुभारंभ किया। यह फिल्म मिट्टी संरक्षण, क्षतिग्रस्त भू-दृश्यों के पुनर्स्थापन, वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास तथा जलागम प्रबंधन के माध्यम से सतत भविष्य सुनिश्चित करने के संदेश को समर्पित है।

अपने संबोधन में सचिव, भूमि संसाधन विभाग ने कहा कि जलागम प्रबंधन विज्ञान आधारित, जनभागीदारी पर आधारित तथा प्रशासनिक दृष्टि से सरल होना चाहिए। उन्होंने दिशानिर्देश तैयार करते समय वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल सघनता बढ़ाने, जल सुरक्षा एवं भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने, जलवायु लचीलापन विकसित करने तथा जलागम परिसंपत्तियों के रखरखाव जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों में सुझाए गए उपाय व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने योग्य होने चाहिए।

एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने पहली राष्ट्रीय परामर्श बैठक में प्राप्त सुझावों का उल्लेख करते हुए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, डेटा-आधारित दृष्टिकोण, अभिसरण (कन्वर्जेंस), पंचायती राज संस्थाओं की सहभागिता तथा परियोजना-उपरांत स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने चैटबॉट आधारित अनुप्रयोगों के एकीकरण, प्रौद्योगिकी-संचालित निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली, मजबूत निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) और राष्ट्रीय वेब पोर्टल विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (जलागम प्रबंधन) ने योजना निर्माण हेतु उच्च-रिज़ॉल्यूशन चित्र प्राप्त करने के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग, भूमि संसाधन सूची (LRI) एवं हाइड्रोलॉजी-लाइट दृष्टिकोण को अपनाने, राज्यों में संस्थागत एवं क्रियान्वयन तंत्र में सुधार तथा तकनीकी सेवा प्रदाताओं, संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी के माध्यम से जलागम परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक रखरखाव एवं स्थिरता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श का सुझाव दिया।

इस परामर्श बैठक का उद्देश्य मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर विचार-विमर्श करना तथा विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करते हुए देशभर में जलागम योजना, क्रियान्वयन, निगरानी और स्थिरता को मजबूत बनाना है। इन चर्चाओं से जलागम प्रशासन में सुधार और वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

बैठक के दौरान भूमि संसाधन सूची (LRI), हाइड्रोलॉजी, निर्णय सहायता प्रणाली (DSS), प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी एवं मूल्यांकन, सामुदायिक सहभागिता एवं सामाजिक संगठन, आजीविका संवर्धन, जलागम स्थिरता तथा रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित वेब पोर्टल विकास जैसे प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

इस कार्यक्रम में राज्यों तथा प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 विशेषज्ञों और व्यावसायिकों ने भाग लिया, जो देश में वैज्ञानिक एवं सतत जलागम प्रबंधन को आगे बढ़ाने के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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