Media24Media.com: श्रीलंका दौरे के बाद कोलंबो से रवाना हुआ आईएनएस शारदा, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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श्रीलंका दौरे के बाद कोलंबो से रवाना हुआ आईएनएस शारदा, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस शारदा (INS Sharda) 13 जून 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से अपने सफल बंदरगाह दौरे के बाद रवाना हो गया। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

इस दौरान भारतीय नौसेना और श्रीलंकाई नौसेना के बीच कई पेशेवर, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, समन्वय और सहयोग को नई ऊर्जा मिली।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

दौरे के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों को भारतीय नौसेना द्वारा छोटे हथियारों के संचालन, बुनियादी अग्निशमन, प्राथमिक उपचार तथा बचाव प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना था।

वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों की अहम मुलाकात

यात्रा के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर रियर एडमिरल जगथ कुमारा ने आईएनएस शारदा का दौरा किया और जहाज के अधिकारियों एवं चालक दल के साथ संवाद किया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

खेल और पेशेवर आदान-प्रदान से बढ़ी मित्रता

दौरे के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं, पेशेवर चर्चाएं और क्रॉस-डेक विजिट्स आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने दोनों नौसैनिक बलों के बीच पारस्परिक समझ, संचालन क्षमता और मित्रता को और मजबूत किया।

भारतीय उच्चायुक्त से की शिष्टाचार भेंट

कोलंबो प्रवास के दौरान आईएनएस शारदा के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इस बैठक में भारत-श्रीलंका संबंधों और समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

MAHASAGAR विजन को मिला बल

आईएनएस शारदा की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग और मित्रता का प्रतीक रही। साथ ही इसने MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और साझा विकास के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।

यह दौरा केवल एक नौसैनिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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