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आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

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10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस संवाद में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।

दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले रक्षा संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में सैन्य-से-सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा अन्य साझा हितों के क्षेत्र शामिल रहे।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की, ताकि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडलों ने Association of Southeast Asian Nations (आसियान) के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा मंचों के अंतर्गत सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने तथा व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की आगामी दिशा पर चर्चा के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था।

श्रीलंका दौरे के बाद कोलंबो से रवाना हुआ आईएनएस शारदा, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस शारदा (INS Sharda) 13 जून 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से अपने सफल बंदरगाह दौरे के बाद रवाना हो गया। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

इस दौरान भारतीय नौसेना और श्रीलंकाई नौसेना के बीच कई पेशेवर, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, समन्वय और सहयोग को नई ऊर्जा मिली।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

दौरे के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों को भारतीय नौसेना द्वारा छोटे हथियारों के संचालन, बुनियादी अग्निशमन, प्राथमिक उपचार तथा बचाव प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना था।

वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों की अहम मुलाकात

यात्रा के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर रियर एडमिरल जगथ कुमारा ने आईएनएस शारदा का दौरा किया और जहाज के अधिकारियों एवं चालक दल के साथ संवाद किया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

खेल और पेशेवर आदान-प्रदान से बढ़ी मित्रता

दौरे के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं, पेशेवर चर्चाएं और क्रॉस-डेक विजिट्स आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने दोनों नौसैनिक बलों के बीच पारस्परिक समझ, संचालन क्षमता और मित्रता को और मजबूत किया।

भारतीय उच्चायुक्त से की शिष्टाचार भेंट

कोलंबो प्रवास के दौरान आईएनएस शारदा के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इस बैठक में भारत-श्रीलंका संबंधों और समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

MAHASAGAR विजन को मिला बल

आईएनएस शारदा की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग और मित्रता का प्रतीक रही। साथ ही इसने MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और साझा विकास के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।

यह दौरा केवल एक नौसैनिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत–श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग मजबूत, IN–SLN DIVEX 2026 का सफल आयोजन

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भारत और श्रीलंका ने अपने बढ़ते समुद्री सहयोग को और मजबूत करते हुए IN–SLN DIVEX 2026 के चौथे संस्करण का सफल आयोजन किया। यह संयुक्त डाइविंग अभ्यास Colombo में 21 से 28 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुआ।

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू वेसल आईएनएस निरीक्षक के साथ दोनों देशों की नौसेनाओं के डाइविंग दलों ने हिस्सा लिया, जिससे आपसी तालमेल और पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

गहरे समुद्र में विशेष अभ्यास

यह अभ्यास जटिल पानी के भीतर संचालन (underwater operations) पर केंद्रित रहा। इसमें:

  • एडवांस डीप-सी डाइविंग अभ्यास

  • मिक्स्ड गैस डाइविंग ड्रिल्स

  • बंदरगाह और खुले समुद्र में गहन अभ्यास

विशेष रूप से, कोलंबो तट के पास द्वितीय विश्व युद्ध के जहाजों SS Worcester और SS Perseus के मलबे पर डाइविंग की गई।

बड़ी उपलब्धि

दोनों देशों के गोताखोरों ने 55 मीटर से अधिक गहराई तक सफल डाइव कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इससे:

  • अंडरवाटर सर्च और रेस्क्यू क्षमता मजबूत हुई

  • संयुक्त ऑपरेशन में समन्वय बेहतर हुआ

सहयोग और मित्रता

अभ्यास के दौरान:

  • संयुक्त बीच क्लीन-अप अभियान

  • मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं

  • योग सत्र

का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों के बीच मित्रता और विश्वास और गहरा हुआ।

श्रद्धांजलि और मानवीय पहल

INS निरीक्षक के कमांडिंग ऑफिसर ने IPKF मेमोरियल पर जाकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

साथ ही, भारत की आरोग्य मैत्री पहल के तहत श्रीलंका को BHISM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव) क्यूब्स सौंपे गए, जिससे आपदा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

व्यापक महत्व

यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है।

कुल मिलाकर, IN–SLN DIVEX 2026 भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी सहयोग का प्रतीक है।

आईएनएस सुदर्शिनी की मोरक्को यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न, समुद्री सहयोग को मिला नया बल

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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 18 अप्रैल 2026 को कैसाब्लांका मोरक्को की अपनी सफल और सार्थक बंदरगाह यात्रा पूरी कर आगे बढ़ गया। यह दौरा ‘लोकायन 26’ तैनाती के तहत भारत-मोरक्को समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण पर जोर

इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेशेवर बातचीत की, जिसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग को लेकर चर्चा हुई। भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने रॉयल मोरक्कन नौसैनिक विद्यालय के कैडेट्स के साथ क्रॉस-डेक विजिट और मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियों में भाग लिया।

राजनयिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत

इस यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, वहीं मोरक्को नौसेना की ओर से भी एक विशेष लंच का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने दोनों देशों के बीच पेशेवर और सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया।

वैश्विक मैत्री का संदेश

यह यात्रा भारत और मोरक्को के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों की पुष्टि करती है, जो साझा हितों और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं। अब आईएनएस सुदर्शिनी स्पेन के लास पाल्मास के लिए रवाना हो गया है, जहां वह ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश फैलाते हुए अपनी अगली यात्रा जारी रखेगा।

निष्कर्ष

आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा न केवल सैन्य सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की मित्रता और सद्भावना के संदेश को भी आगे बढ़ाती है।

आईएनएस सुनयना ने थाईलैंड से रवाना होकर समुद्री सहयोग को दिया नया आयाम

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फुकेट: INS Sunayna (आईओएस सागर) ने 17 अप्रैल 2026 को फुकेट, थाईलैंड से तीन दिवसीय ऑपरेशनल टर्नअराउंड (OTR) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रस्थान किया। यह मौजूदा तैनाती के दौरान उसका दूसरा पोर्ट कॉल था।

इस दौरान जहाज ने रॉयल थाई नौसेना के साथ कई पेशेवर, रणनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया, जिससे भारत और थाईलैंड के बीच नौसैनिक सहयोग और मजबूत हुआ।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने रियर एडमिरल सथापोर्न वाजरत से मुलाकात कर समुद्री सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र का आयोजन किया गया, जिससे आपसी संबंध और मजबूत हुए। साथ ही, जहाज पर आयोजित डेक रिसेप्शन में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भाग लिया, जहां समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा हुई।

पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) के दौरान एचटीएमएस क्लोंगयाई के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया, जिसमें संचार ड्रिल और फॉर्मेशन संचालन के जरिए दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी को दर्शाता है, जो ‘MAHASAGAR’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अब आईओएस सागर जकार्ता, इंडोनेशिया की ओर रवाना हो चुका है, जहां वह अपने अगले पोर्ट कॉल के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को और सशक्त करेगा।


INS त्रिकंड मोंबासा पहुंचा, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 7 अप्रैल 2026 को केन्या के मोंबासा बंदरगाह पहुंचा। यह दौरा दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में चल रही तैनाती के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। इस दौरान पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का केन्या दौरा भी हो रहा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पोर्ट कॉल के दौरान जहाज के क्रू द्वारा पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया जाएगा, साथ ही केन्या डिफेंस फोर्सेस को आवश्यक सामग्री भी सौंपी जाएगी। INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मोंबासा से प्रस्थान के बाद भारतीय और केन्याई नौसेना के बीच PASSEX (Passage Exercise) आयोजित किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय और संचालन क्षमता को और मजबूत किया जा सके। यह दौरा भारत के MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देता है।



INS त्रिकंड तंजानिया पहुँचा, भारत-तंजानिया समुद्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड 03 अप्रैल 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत तंजानिया के दार-एस-सलाम पहुँचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करना है।

इस पोर्ट कॉल के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें पेशेवर संवाद और तंजानिया नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण शामिल है, ताकि आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के तहत मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले और योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। जहाज पर एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा, जो आपसी सद्भाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा।

इस यात्रा के दौरान भारत से लाए गए आवश्यक सामग्रियों (क्रिटिकल स्टोर्स) को भी सौंपा जाएगा।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

INS त्रिकंड का यह दौरा भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टि के अनुरूप है।


INS त्रिकंड की मोज़ाम्बिक यात्रा संपन्न, भारत–मोज़ाम्बिक नौसैनिक सहयोग हुआ मजबूत

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भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिकंड ने 29 मार्च 2026 को मापुटो, मोज़ाम्बिक की अपनी पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरी की।

इस दौरान भारतीय नौसेना और मोज़ाम्बिक नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिससे आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को और मजबूती मिली।

भारत की ओर से मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) सामग्री मोज़ाम्बिक को सौंपी गई। इस अवसर पर मोज़ाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. उस्सेने हिलारियो इस्से, भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग सहित अन्य वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, मोज़ाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया।

INS त्रिकंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने मोज़ाम्बिक में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात की।

पोर्ट कॉल के समापन पर, जहाज ने मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियाँ कीं, जिसके बाद वह अपने निर्धारित ऑपरेशनल तैनाती के लिए आगे बढ़ा।

यह पोर्ट कॉल ‘महासागर’ (MAHASAGAR - क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) की भारत की नीति को दर्शाता है और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


आईएनएस तरंगिणी का त्रिंकोमाली पहुंचना, भारत–श्रीलंका नौसैनिक सहयोग को नई मजबूती

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Indian Navy का सेल प्रशिक्षण पोत INS Tarangini 27 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण यात्रा पर Trincomalee Harbour, Sri Lanka पहुँचा। पोत का स्वागत श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से किया गया। यह यात्रा हाल ही में Visakhapatnam में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में जहाज की भागीदारी के बाद की गई है।

पोर्ट कॉल के दौरान तरंगिणी के कमांडिंग ऑफिसर ने पूर्वी नौसैनिक क्षेत्र के उप-कमांडर कमोडोर हरिता जयादेवाथे से शिष्टाचार भेंट की और सेल प्रशिक्षण में सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। जहाज पर श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए परिचयात्मक भ्रमण का आयोजन किया गया। पोर्ट कॉल के दौरान सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की भी योजना बनाई गई है।

चयनित प्रशिक्षु अधिकारियों को, जो श्रीलंकाई नौसैनिक एवं समुद्री अकादमी से हैं, तरंगिणी पर कोलंबो तक की यात्रा के लिए सवार किया जाएगा। इस दौरान उन्हें सेल प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

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आईएनएस तरंगिणी की यह यात्रा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों और बढ़ते सहयोग को रेखांकित करती है।

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आईसीजी शिप ‘सार्थक’ का कुवैत पोर्ट में आगमन: भारत-कुवैत समुद्री सहयोग को मजबूती

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भारतीय तटरक्षक (ICG) की शिप सार्थक, जो स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) है, ने 9 दिसंबर 2025 को कुवैत के सुवाइक पोर्ट में अपना आगमन किया। यह पहली बंदरगाह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में इसके ओवरसीज डिप्लॉयमेंट (OSD) का हिस्सा है। इस यात्रा से भारत–कुवैत समुद्री सहयोग में नया अध्याय जुड़ता है और यह SAGAR (Security and Growth for All in the Region) दृष्टि के तहत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने के भारत के संकल्प को दर्शाता है।

चार-दिन के प्रवास के दौरान, शिप के चालक दल द्वारा कुवैत तटरक्षक और अन्य समुद्री हितधारकों के साथ पेशेवर सहभागिता की जाएगी। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेतृत्व से शिष्टाचार भेंट, प्रमुख समुद्री सुविधाओं के दौरे, और समान प्रशिक्षण गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, समुद्री खोज और बचाव, और समुद्री कानून प्रवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सांस्कृतिक और खेल आदान-प्रदान, जैसे संयुक्त योग सत्र और मैत्रीपूर्ण मैच, दोनों देशों की समुद्री सेनाओं के बीच पारस्परिक समझ और संबंधों को और मजबूत करेंगे।

आईसीजी शिप सार्थक का आगमन भारत के प्रधानमंत्री के कुवैत दौरे (दिसंबर 2024) के दौरान हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) के महत्व के समय हुआ। यह MoU भारत–कुवैत रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा और समुद्री सहयोग को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। शिप की यात्रा इन साझा उद्देश्यों को मजबूत करती है और दोनों पक्षों की संचालनिक समन्वय, इंटरऑपरेबिलिटी और सुरक्षित समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कुवैत यात्रा के बाद, आईसीजी शिप सार्थक अपनी OSD जारी रखते हुए ईरान और सऊदी अरब के बंदरगाहों का दौरा करेगी। ये सभी गतिविधियाँ भारत के पश्चिम एशिया में समुद्री सहयोग को सुदृढ़ बनाने, क्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण और साझा समुद्री शासन को बढ़ावा देने के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

मारोक्को नौसेना के रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन का भारत में आधिकारिक दौरा

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24 से 27 नवंबर 2025 तक भारत में आधिकारिक दौरे पर मौजूद रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन, मारोक्को नौसेना के इंस्पेक्टर, का उद्देश्य भारत और मारोक्को के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय नौसैनिक सहभागिता को बढ़ाना है। यह दौरा दोनों देशों के बढ़ते समुद्री साझेदारी और साझा हितों को दर्शाता है।

दौरान, रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी से द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में नौसैनिक सहभागिता को बढ़ाने, संरचित प्रशिक्षण आदान-प्रदान, और समुद्री क्षेत्र में सहयोग (Maritime Domain Awareness) को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। इसके बाद, रियर एडमिरल ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्प अर्पित किए।

अधिकारिक दौरे के दौरान रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण समुद्री प्रतिष्ठानों का भी दौरा किया, जिनमें इन्फॉर्मेशन फ्यूज़न सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR), वेपन एंड इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एंड इंजीनियरिंग एस्टैब्लिशमेंट (WESEE), तथा भारतीय नौसेना की साउदर्न नेवल कमांड, कोच्चि के प्रशिक्षण प्रतिष्ठान शामिल हैं।

यह दौरा भारत और मारोक्को के नौसैनिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सहयोग को गहरा करना और साझा समुद्री हितों को बढ़ावा देना है।




भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की अमेरिका यात्रा से भारत-अमेरिका समुद्री साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

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भारतीय नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 12 से 17 नवंबर 2025 तक संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर गए हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे और मजबूत समुद्री साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाना है, जो भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।


यात्रा के दौरान, एडमिरल त्रिपाठी अमेरिकी रक्षा विभाग (U.S. Department of War) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, कमांडर, यूनाइटेड स्टेट्स इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM), और एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर, कमांडर, यूनाइटेड स्टेट्स पैसिफिक फ्लीट (USPACFLT) सहित अमेरिकी नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे।

इन बैठकों का उद्देश्य चल रहे समुद्री सहयोग की समीक्षा, संचालन-स्तर के संबंधों को मजबूत करना, और दोनों नौसेनाओं के बीच सूचना साझा करने और समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता (Maritime Domain Awareness) के लिए तंत्रों को सुदृढ़ करना है।

यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी अमेरिकी नौसेना की प्रमुख संस्थाओं और संचालन कमांडों का भी दौरा करेंगे। इन बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समुद्री प्राथमिकताओं, बहुपक्षीय ढांचे जैसे MILAN और Combined Maritime Forces (CMF) जैसी पहलों में सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पारस्परिक विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित एक दीर्घकालिक समुद्री साझेदारी है। नौसेना प्रमुख की यह यात्रा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग को और गहरा करने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जिससे एक मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा दृष्टि को साकार किया जा सके।

आईएनएस सावित्री मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुंचा, भारत-मोज़ाम्बिक नौसेनाओं के बीच सहयोग को करेगा मजबूत

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भारतीय नौसेना का ऑफशोर पेट्रोल पोत (OPV) आईएनएस सावित्री हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी तैनाती के हिस्से के रूप में मोज़ाम्बिक के पोर्ट बेइरा पहुँचा। पोत का स्वागत मोज़ाम्बिक नौसेना के कर्मियों द्वारा गर्मजोशी और औपचारिकता के साथ किया गया, जो दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक संबंधों और सशक्त समुद्री सहयोग को दर्शाता है।

अपनी यात्रा के दौरान, दोनों नौसेनाओं के कर्मी संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान में भाग लेंगे, जिनका उद्देश्य पारस्परिक सहयोग और भविष्य की संयुक्त तैनातियों के लिए इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। प्रशिक्षण सत्रों में नेविगेशन, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी, VBSS अभ्यास, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन अभ्यास पर चर्चा और व्यावहारिक अनुभव शामिल होंगे।

पोत की सामुदायिक पहुंच गतिविधियों के तहत, आईएनएस सावित्री स्थानीय नागरिकों के लिए ओपन शिप विजिट आयोजित करेगा, जिससे उन्हें भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं और समृद्ध समुद्री परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, स्थानीय समुदाय के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया जाएगा, जिससे मित्रता और सद्भावना के संबंध और मजबूत होंगे।

यात्रा का समापन संयुक्त योग सत्रों और फुटसाल (इनडोर फुटबॉल) जैसे मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबलों के साथ होगा, जिससे दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच सौहार्द और टीम भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।

यह बंदरगाह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक विश्वसनीय और प्राथमिक सुरक्षा साझेदार (Preferred Security Partner) के रूप में पुनः स्थापित करती है।

भारतीय महासागर क्षेत्र में सहयोग और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करने हेतु ‘समुद्री सुरक्षा संगोष्ठी’ का सफल समापन

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समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला (Maritime Information Sharing Workshop – MISW 25) के अंतर्गत आयोजित समुद्री सुरक्षा संगोष्ठी का समापन 4 नवम्बर 2025 को हुआ। “भारतीय महासागर क्षेत्र में रीयल-टाइम समन्वय और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करना” विषय पर आधारित यह तीन दिवसीय कार्यशाला (3 से 5 नवम्बर 2025) IFC–IOR द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें 30 देशों के 57 से अधिक प्रतिनिधि, तथा IORA, DCoC/JA और BIMSTEC संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ उप नौसेनाध्यक्ष वाइस एडमिरल तरुण सोबती के उद्घाटन संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने भारतीय महासागर क्षेत्र में उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, पारस्परिकता और विश्वास-आधारित साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। इसके बाद सुशील मंसिंग खोपड़े, आईपीएस, अतिरिक्त महानिदेशक (नौवहन महानिदेशालय) ने मुख्य वक्ता के रूप में भारत की समुद्री पहलों और सहयोगात्मक सहभागिता व नियामक समन्वय के माध्यम से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने समुद्री सुरक्षा परिदृश्य को आकार देने वाले विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता, सूचना नेटवर्क की भूमिका, संचालनात्मक समन्वय, समुद्री कानून, उद्योग दृष्टिकोण, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराध जैसे मुद्दे शामिल थे। सत्रों में तकनीकी एकीकरण, डेटा पारस्परिकता और सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि एक मजबूत और संवेदनशील समुद्री सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सके।

कार्यक्रम का समापन रियर एडमिरल निर्भय बापना (CS NCO) के संबोधन से हुआ, जिन्होंने क्षेत्रीय सूचना साझाकरण ढांचों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सहयोग और निरंतर संवाद सुरक्षित और स्थिर समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

5 नवम्बर 2025 को IFC–IOR में एक टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTX) आयोजित की जाएगी, जिसमें सूचना साझाकरण, पारस्परिकता और समन्वित प्रतिक्रिया के सिद्धांतों का अभ्यास किया जाएगा। यह अभ्यास भारत में विकसित Maritime Analytical Tool for Regional Awareness (MANTRA) सॉफ्टवेयर पर आधारित होगा। प्रतिभागियों को समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, अनियमित मानव प्रवास और समुद्र में आपात स्थितियों जैसे काल्पनिक परिदृश्यों से निपटने का कार्य सौंपा जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य बहु-एजेंसी समन्वय, त्वरित सूचना साझाकरण, और संगठित प्रतिक्रिया योजना को सुदृढ़ करना है ताकि रीयल-टाइम सूचना साझाकरण के माध्यम से प्रभावी समुद्री सुरक्षा परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

INS Sutlej मॉरीशस में 18वीं संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण हेतु पोर्ट लुई पहुंचा

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भारतीय नौसेना और मॉरीशस के अधिकारियों के बीच समुद्री वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु 35,000 वर्ग समुद्री मील क्षेत्र में सर्वेक्षण शुरू

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का विशेष हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत INS Sutlej मॉरीशस के पोर्ट लुई में पहुंचा, ताकि 18वां संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण शुरू किया जा सके।

यह मिशन दोनों देशों के बीच हाइड्रोग्राफी पर लंबे समय से जारी द्विपक्षीय एमओयू के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसे इस साल के प्रारंभ में आयोजित 14वें संयुक्त समिति बैठक में हस्ताक्षरित किया गया था।

वर्तमान सर्वेक्षण मिशन लगभग 35,000 वर्ग समुद्री मील के विस्तृत क्षेत्र को कवर करेगा। क्षमता निर्माण प्रयासों के हिस्से के रूप में, मॉरीशस के विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी पोत पर सवार होंगे और हाइड्रोग्राफिक डेटा संग्रह और प्रसंस्करण में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

INS Sutlej का मॉरीशस में परिनियोजन दोनों देशों की उन्नत वैज्ञानिक सहयोग और रणनीतिक समुद्री संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का पुनःसत्यापन करता है। यह गहन समुद्री सहयोग को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य नेविगेशनल सुरक्षा, समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन और भारतीय महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।



केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओतियानो का भारत में औपचारिक दौरा

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केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओवोउर ओतियानो 28 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक भारत के औपचारिक दौरे पर हैं, जिसका उद्देश्य समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। 29 सितंबर 2025 को मेजर जनरल ओतियानो का स्वागत भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने साउथ ब्लॉक लॉन्स, नई दिल्ली में किया और उन्हें सम्मान रक्षक दस्ते के साथ गरिमामय स्वागत से सम्मानित किया गया। बैठक के दौरान समुद्री सहयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें संचालन, प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफिक गतिविधियाँ, बहुपक्षीय अभ्यास AIKEYME का संचालन, और भारत–केन्या ‘BAHARI’ Maritime Vision के तहत साझेदारी को सुदृढ़ करना शामिल था। मेजर जनरल ओतियानो ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

मेजर जनरल ओतियानो के कार्यक्रम में गुरुग्राम स्थित इंडियन ओशन रीजन के लिए इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) और कोच्चि में भारतीय नौसेना के दक्षिणी कमांड के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों का दौरा शामिल है, ताकि प्रशिक्षण सहयोग को बढ़ाया जा सके।

केन्या नौसेना भारतीय महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार बनी हुई है, जिसमें बहुपक्षीय अभ्यास AIKEYME, इंडियन ओशन नौसैनिक संगोष्ठी (IONS), गोवा Maritime Conclave और जिबूती कोड ऑफ कंडक्ट – जेद्दा संशोधन (DCoC-JA) में सक्रिय भागीदारी शामिल है।

मेजर जनरल पॉल ओतियानो का दौरा भारत–केन्या नौसेना संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो साझा हितों और भारतीय महासागर क्षेत्र में सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

साझेदारी को उजागर करते हुए, भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज – INS तीर, INS सुजाता, INS शार्दुल और ICGS सारथी ने हाल ही में मोंबासा, केन्या में पोर्ट कॉल किया, जो दक्षिण पश्चिमी भारतीय महासागर में उनकी लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती का हिस्सा था। इस दौरे में पेशेवर और सामाजिक बातचीत की श्रृंखला शामिल थी, जिसने द्विपक्षीय समुद्री सहभागिता को और गहरा किया।



मोम्बासा पहुँचा भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन, भारत-केन्या समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1TS) के जहाज़ – आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता, आईएनएस शार्दूल और आईसीजीएस सारथि ने 25 सितम्बर 2025 को केन्या के मोम्बासा बंदरगाह का दौरा किया। स्क्वाड्रन का केन्या नौसेना, रक्षा सलाहकार एवं भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

यह स्क्वाड्रन वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी के प्रशिक्षण परिनियोजन पर है। इससे पूर्व यह सेशेल्स, मॉरीशस, ला रेयूनियन और मोज़ाम्बिक का दौरा कर चुका है।

मोम्बासा प्रवास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पेशेवर एवं सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित होंगी, जिनमें संयुक्त प्रशिक्षण, समुद्री साझेदारी अभ्यास (MPX), पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX), संयुक्त योग सत्र, भारत और केन्या नौसेना बैंड का संयुक्त प्रदर्शन तथा सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम शामिल हैं।

1TS की यह यात्रा दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री साझेदारी और सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो “महा-सागर – क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति” की भावना को और प्रबल करता है।

भारत–श्रीलंका समुद्री सहयोग को नई दिशा: नौसेना प्रमुख की श्रीलंका यात्रा

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 एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, नौसेना प्रमुख, 22 से 25 सितम्बर 2025 तक चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका जा रहे हैं।इस दौरान नौसेना प्रमुख श्रीलंका के माननीय प्रधानमंत्री डॉ. हरीनी अमरासुरिया, वाइस एडमिरल कंचना बनागोड़ा से मुलाकात करेंगे तथा तीनों सेनाओं के प्रमुखों और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय चर्चाओं में भाग लेंगे। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, विशेषकर समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण तथा सहयोग को और मजबूत करने के नए अवसर तलाशने पर जोर रहेगा।

एडमिरल त्रिपाठी कोलंबो में आयोजित होने वाले गाले डायलॉग 2025 – 12वें अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलन में भी भाग लेंगे, जिसका विषय है “बदलते परिदृश्य में हिंद महासागर की समुद्री दृष्टि”।

भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच नियमित रूप से वार्षिक रक्षा वार्ता, स्टाफ टॉक्स और अन्य परिचालन गतिविधियों जैसे श्रीलंका–भारत नौसैनिक अभ्यास (SLINEX), पैसेज एक्सरसाइज, प्रशिक्षण और हाइड्रोग्राफी संबंधी आदान-प्रदान के माध्यम से संवाद होता है। इसके अतिरिक्त दोनों नौसेनाएँ बहुपक्षीय आयोजनों जैसे इंडियन ओशन नेवल सिंपोज़ियम, गाले डायलॉग, मिलन, गोवा समुद्री सम्मेलन/संगोष्ठी और कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में भी संयुक्त रूप से भाग लेती रही हैं।

नौसेना प्रमुख की यह यात्रा मित्रता के रिश्तों को और प्रगाढ़ बनाने, साझा रणनीतिक और समुद्री हितों के प्रमुख क्षेत्रों में समझ को बढ़ाने तथा “महासागर” की दृष्टि के अनुरूप सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से की जा रही है। यह यात्रा भारत–श्रीलंका के समय-परीक्षित संबंधों की पुष्टि करती है, जो आपसी सम्मान, समुद्री विश्वास और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति व स्थिरता की साझा दृष्टि पर आधारित हैं।

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