Media24Media.com: जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

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जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संबंधों की स्वीकृति के बिना कोई व्यक्ति किसी की सेवा नहीं कर सकता। जब तक हम दूसरे व्यक्ति को अपना संबंधी नहीं मानते, तब तक उसके प्रति सेवाभाव विकसित नहीं होता। संबंध, संबंधी और संबंधों के प्रयोजन को समझने से ही उपकार एवं निरंतर सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने व्यक्त किए।

वे चेतना विकास मूल्य शिक्षा द्वारा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में आयोजित मध्यस्थ दर्शन सार सत्र के दौरान भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए 100 से अधिक जीवन विद्या अध्ययनार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

कोकडिया ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन सार सत्र का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मानव को समझदार बनने और जीवन को सही दृष्टि से जीने की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह सत्र मध्यस्थ दर्शन के 14 वाग्मयों और लगभग 3600 पृष्ठों के व्यापक ज्ञान का सार है, जिसे 15 दिवसीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाता है।

उन्होंने गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने अपना तन, मन और धन जीवन विद्या अध्ययन तथा मानवीय शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। वे जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं तथा मानव समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देशभर में छह से अधिक जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, गायत्री मंदिर तथा प्रज्ञा पीठों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोकडिया ने बताया कि सामाजिक एवं मानवीय कार्यों में कोई बाधा न आए, इस उद्देश्य से गणेश एवं अर्चना बागडिया ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इनका जीवन सादगी, सरलता और सज्जनता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन विद्या अध्ययन से परिचित कराने में गणेश बागडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रोफेसरगण एवं जीवन विद्या से जुड़े विभिन्न कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने डॉ. कलाम को इस अध्ययन पद्धति से अवगत कराया। बाद में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. कलाम स्वयं कानपुर स्थित मानवीय शिक्षा संस्कार केंद्र पहुंचे थे तथा जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को मानव जीवन में सुख और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

कार्यक्रम के दौरान बिठूर (कानपुर) में आयोजित अध्ययन शिविर का भी उल्लेख किया गया, जहां देशभर से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भीषण गर्मी और नौतपा के समय बिना पंखे एवं कूलर के सामान्य जीवनशैली अपनाते हुए अध्ययन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अभ्यास करते हुए यह अनुभव साझा किया कि सुख-दुख, गर्मी-ठंड जैसी अनुभूतियां हमारी मान्यताओं और प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक अध्ययनार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें एगेश्वरी साहु, ओमन साहु, रेखराज साहु, लक्ष्मी पटेल, हिमाचल पटेल, डॉ. शेषनारायण चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, लोकेश कोठारी, श्वेता जैन, हनी जैन, शीतल गोयल, रजनी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राजा अग्रवाल, रोहित शर्मा, संजय शर्मा,  उमा शर्मा, ममता बत्रा, विजय राज, रागेश्वर,  जय श्री, जयंती जैन, शिव नारायण, कल्पेश पटेल, डॉ. पायल पटेल, प्रतिमा, सुनीता जोशी, जितेंद्र, श्री कमलेश एवं अभिषेक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन विद्या अध्ययन, मानवीय शिक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में समझदारी आधारित जीवन पद्धति को बढ़ावा देना था।

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