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निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 की तैयारी बैठक आयोजित, मानव और प्रकृति केंद्रित वैश्विक परिवर्तन पर जोर

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महासमुंद- जीवन विद्या अध्ययन आधारित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में देश-विदेश से आने वाले प्रतिभागियों के स्वागत, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय शिक्षा और वैश्विक मानव निर्माण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि जीवन विद्या का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि सर्व शुभ और सर्व मंगल के लिए समर्पित मानव का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानव और प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना पर आधारित है।

उन्होंने मानव मैत्री समिति बोडरा (धमतरी) के टोमन साहू के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि सम्मेलन में आने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को कॉपी, पेन, बैग, थाली और गिलास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे भोजन और पेयजल के लिए इन्हीं का उपयोग करें। इससे प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 5 से 6 डिस्पोजेबल कप एवं प्लेटों के उपयोग से होने वाले प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

कोकड़िया ने सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार एवं भारत सरकार के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या आधारित चेतना विकास मूल्य शिक्षा, कार्यशालाओं, पुस्तकों और शिविरों के माध्यम से इस विचारधारा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर मानवीय मूल्यों से युक्त समाज का निर्माण हो सके।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सम्मेलन की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का निर्णय इसलिए लिया, ताकि समाधान, समृद्धि और मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन शैली को समाज तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में सरदार मंजीत सिंह ने सभी जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए "सबके साथ, सबका विकास" की भावना को आगे बढ़ाने पर बल दिया। वहीं महावीर अग्रवाल ने उत्पादन कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित करने का सुझाव दिया, जिससे आत्मनिर्भरता और शुद्ध उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

चंद्रशेखर राठौड़ ने अभ्युदय संस्थान अछोटी के इतिहास, उद्देश्यों और वर्षभर किए गए जनहित कार्यों की जानकारी दी। अनिता शाह ने अभिभावक विद्यालय, चेतना विकास मूल्य शिक्षा, संस्कार और उत्सव की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बच्चों में संस्कारों के बीजारोपण की आवश्यकता बताई।

अंकित पोगुला ने सामाजिक परिवर्तन के लिए जीवन विद्या और मानवीय मूल्यों की शिक्षा को देश की अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की मांग की। वहीं मीना अंजनी अग्रवाल ने जीवन विद्या अध्ययन से समाज में आए सकारात्मक परिवर्तनों पर विशेष मंचीय कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की तैयारियों को लेकर प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, देशभर तथा विदेशों में संचालित जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों में भी तैयारियां तेज की जाएंगी।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही सामाजिक नैतिकता को मजबूत कर सकती है। यदि शिक्षा का मानवीकरण नहीं हुआ, तो समाज में अपराध, हिंसा और युद्ध जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती रहेंगी। इसलिए जीवन विद्या के माध्यम से मानव, समाज और प्रकृति के बीच संतुलित एवं शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मानवीय संविधान की समझ से ही मानव-मानव के बीच मतभेद होंगे समाप्त : गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- मध्यस्थ दर्शन आधारित मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या का अध्ययन मानव जीवन में मानवीय मूल्यों, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रभावी माध्यम है। जब तक मानवीय चरित्र की सही व्याख्या और समझ विकसित नहीं होगी, तब तक मानव-मानव के बीच मतभेद, देशों के बीच तनाव, टकराव और युद्ध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या की समझ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन शिविर को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या के प्रणेता पूज्य ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन मानव जीवन के मूल्यों, व्यवहार और चरित्र निर्माण की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन के लोकव्यापीकरण अभियान की अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

कोकड़िया ने बताया कि जीवन विद्या अध्ययन से प्रतिभागियों के व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने विद्यालयों में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों को कोकड़ी शासकीय विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण करने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं का आयोजन करने का आह्वान किया। साथ ही सभी को आगामी जीवन विद्या अध्ययन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

शिविर का प्रबोधन कर रहे अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सामाजिक परिवर्तन के लिए स्वयं में परिवर्तन लाने और जीवन विद्या अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन तथा मानवीयता पूर्ण आचरण को समृद्ध समाज की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम में अभ्युदय संस्थान, अछोटी की आयोजन समिति के सदस्य सरदार मंजीत सिंह एवं  डाली ने स्वावलंबन के 30 से अधिक व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी देते हुए उपयोगिता मूल्य और कला मूल्य आधारित जीवनशैली पर प्रकाश डाला।

अभिभावक विद्यालय, अछोटी के प्रभारी बलवंत भैयाजी ने श्रेष्ठ व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की संस्कृति को मानवीय जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।

युवा प्रकोष्ठ प्रभारी चंद्रशेखर राठौड़ ने युवाओं को चेतना विकास मूल्य शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था और परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य की स्थापना में जीवन विद्या अध्ययन की भूमिका स्पष्ट की।

समाजसेवी एवं आकाशवाणी रायपुर से जुड़ी शुभ्रा ठाकुर ने जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार, प्रकाशन और जनजागरण के प्रभावी तरीकों पर विचार रखते हुए मानवीय मूल्यों को परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को अभ्युदय संस्थान, अछोटी के शैक्षणिक भ्रमण के लिए भी आमंत्रित किया।

उत्सव परिसर, अभ्युदय संस्थान के उत्पादन आयाम प्रभारी महावीर अग्रवाल ने स्वावलंबन एवं शुद्ध उत्पादन के 50 से अधिक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए तथा संस्थान में एक वर्ष तक अध्ययन-अभ्यास करने वाले 17 से अधिक लक्ष्य फेलो के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मूल्यांकन सत्र में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के सदस्य एवं समाजसेवी संतोष कुमार साहू (रायतुम, पटेवा) ने समाज के सभी वर्गों से जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता की अपील की।

कार्यक्रम में धमतरी से हेमलाल, ताम्रध्वज साहू, रायपुर से डॉ. श्वेता, शिक्षक मुकेश साहू, कांकेर (चारामा) से डिगेश्वर साहू, बिहार से आदित्य मिश्रा, धमतरी से लक्ष्य फेलो लक्ष्मी साहू, गोढ़ी से पेनोरमा साहू, बालोद के सांकरी (उत्सवपारा) से गोपी निषाद सहित विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक युवा, लक्ष्य फेलो, शिक्षक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

यह संस्करण समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य शैली में तैयार किया गया है, जिसमें भाषा अधिक प्रवाहपूर्ण, संतुलित और पेशेवर रखी गई है।

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

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 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संबंधों की स्वीकृति के बिना कोई व्यक्ति किसी की सेवा नहीं कर सकता। जब तक हम दूसरे व्यक्ति को अपना संबंधी नहीं मानते, तब तक उसके प्रति सेवाभाव विकसित नहीं होता। संबंध, संबंधी और संबंधों के प्रयोजन को समझने से ही उपकार एवं निरंतर सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने व्यक्त किए।

वे चेतना विकास मूल्य शिक्षा द्वारा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में आयोजित मध्यस्थ दर्शन सार सत्र के दौरान भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए 100 से अधिक जीवन विद्या अध्ययनार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

कोकडिया ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन सार सत्र का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मानव को समझदार बनने और जीवन को सही दृष्टि से जीने की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह सत्र मध्यस्थ दर्शन के 14 वाग्मयों और लगभग 3600 पृष्ठों के व्यापक ज्ञान का सार है, जिसे 15 दिवसीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाता है।

उन्होंने गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने अपना तन, मन और धन जीवन विद्या अध्ययन तथा मानवीय शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। वे जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं तथा मानव समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देशभर में छह से अधिक जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, गायत्री मंदिर तथा प्रज्ञा पीठों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोकडिया ने बताया कि सामाजिक एवं मानवीय कार्यों में कोई बाधा न आए, इस उद्देश्य से गणेश एवं अर्चना बागडिया ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इनका जीवन सादगी, सरलता और सज्जनता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन विद्या अध्ययन से परिचित कराने में गणेश बागडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रोफेसरगण एवं जीवन विद्या से जुड़े विभिन्न कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने डॉ. कलाम को इस अध्ययन पद्धति से अवगत कराया। बाद में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. कलाम स्वयं कानपुर स्थित मानवीय शिक्षा संस्कार केंद्र पहुंचे थे तथा जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को मानव जीवन में सुख और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

कार्यक्रम के दौरान बिठूर (कानपुर) में आयोजित अध्ययन शिविर का भी उल्लेख किया गया, जहां देशभर से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भीषण गर्मी और नौतपा के समय बिना पंखे एवं कूलर के सामान्य जीवनशैली अपनाते हुए अध्ययन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अभ्यास करते हुए यह अनुभव साझा किया कि सुख-दुख, गर्मी-ठंड जैसी अनुभूतियां हमारी मान्यताओं और प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक अध्ययनार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें एगेश्वरी साहु, ओमन साहु, रेखराज साहु, लक्ष्मी पटेल, हिमाचल पटेल, डॉ. शेषनारायण चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, लोकेश कोठारी, श्वेता जैन, हनी जैन, शीतल गोयल, रजनी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राजा अग्रवाल, रोहित शर्मा, संजय शर्मा,  उमा शर्मा, ममता बत्रा, विजय राज, रागेश्वर,  जय श्री, जयंती जैन, शिव नारायण, कल्पेश पटेल, डॉ. पायल पटेल, प्रतिमा, सुनीता जोशी, जितेंद्र, श्री कमलेश एवं अभिषेक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन विद्या अध्ययन, मानवीय शिक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में समझदारी आधारित जीवन पद्धति को बढ़ावा देना था।

जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 : चेतना विकास, मूल्य शिक्षा और ग्राम स्वराज्य पर होगा वैश्विक मंथन

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अभ्युदय संस्थान में वर्ष 2026 में आयोजित होने जा रहे “जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन” को लेकर देश-विदेश के जीवन विद्या कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, किसानों एवं समाज सेवकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित चेतना विकास, मूल्य शिक्षा, परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था तथा शिक्षा के मानवीयकरण को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन की तैयारी हेतु आयोजित बैठक में अंतर्राष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सभा का संचालन किया, जबकि वरिष्ठ मार्गदर्शक एवं संरक्षक अंबा दीदी ने अध्यक्षता करते हुए हस्तमुक्त विधि से अतिथियों के स्वागत एवं विदाई की अपील की।

बैठक में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने सम्मेलन के भोजन प्रबंधन के लिए लगभग 6 क्विंटल “श्रीराम” धान का प्राकृतिक एवं जैविक चावल स्वप्रसन्नता पूर्वक दान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अभ्युदय संस्थान दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है तथा यहां आयोजित होने वाला यह सम्मेलन मानव केंद्रित शिक्षा और समृद्ध समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

सभा में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को छत्तीसगढ़ सहित भारत सरकार के स्कूली शिक्षा के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग का भी समर्थन किया गया। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अभिभावक विद्यालय, परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था, अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, आयुर्वेद, गौपालन, अक्षय एवं सौर ऊर्जा, स्किल इंडिया, निपुण भारत मिशन और सुखी-समृद्ध व्यक्ति से विश्व निर्माण जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में भारत के 22 राज्यों तथा विश्व के 11 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन के लिए भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, रक्षा मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित अनेक जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की तैयारी की जा रही है।

सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सरकारी शिक्षकों, किसानों, समाज सेवकों, व्यवसायियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा तन-मन-धन से सहयोग देने की घोषणा की गई है। अब तक 50 लाख रुपये से अधिक की सहयोग राशि एवं सामग्री एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी क्रम में मानव जागृति सेवा संस्थान से जुड़े शिक्षकों ने 50 हजार रुपये, मानव मैत्री समिति के शिक्षकों ने 25 हजार रुपये तथा अभ्युदय संस्थान से जुड़े शिक्षकों ने एक लाख रुपये सहयोग देने की घोषणा की है।

आयोजकों का कहना है कि “जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित मानवीय शिक्षा, समृद्ध परिवार, समृद्ध समाज और समृद्ध विश्व निर्माण का एक वैश्विक अभियान होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित चेतना विकास कार्यशाला सम्पन्न, जीवन विद्या पर दिया गया जोर

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महासमुंद- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रकाश में संकुल केंद्र खट्टा में आयोजित राज्य स्तरीय चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला में शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने शिक्षा के उद्देश्य, मानवीय मूल्यों और जीवन विद्या के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम के दौरान शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षा के विभिन्न आयामों जैसे—शिक्षा का उद्देश्य, जीवन विद्या अध्ययन, परिवार एवं समाज में मूल्य, प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर संवाद किया गया। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देती है।”

समापन सत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशारामस्वरूप दीवान ने कहा कि बच्चों में संस्कार और मूल्य विकसित करने के लिए माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन शिविर और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं को समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों एवं शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और शिक्षा में जीवन विद्या को शामिल करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की पहल से समाज में जागरूकता बढ़ेगी, पारिवारिक और सामाजिक समरसता मजबूत होगी तथा देशभक्ति की भावना विकसित होगी।

कार्यशाला के आयोजन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, अधिकारियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने इसे शिक्षा के मानवीयकरण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


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