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वंदे मातरम् शिविर का शुभारंभ: राष्ट्रीय एकता और युवा नेतृत्व को मिलेगा नया आयाम

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कोलकाता- भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन मेरा युवा भारत (MY Bharat), पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह द्वारा आयोजित पहला सात दिवसीय ‘वंदे मातरम् शिविर’ ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी, बारासात (कोलकाता) में प्रारंभ हुआ। यह शिविर 24 से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का स्मरण करना है। इस अमर रचना के स्रष्टा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हैं।

उद्घाटन समारोह में ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) संकर गंगोपाध्याय, MY Bharat पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के राज्य निदेशक देब कुमार चटर्जी, उपनिदेशक रिज़वी शहनाज़ रहमान, छात्र कल्याण अधिष्ठाता अनूप कुमार मैती तथा NSS अधिकारी माधब बंद्योपाध्याय उपस्थित रहे।

इस शिविर में गुजरात, मेघालय, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से आए 150 युवा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं। “एक गीत, एक भावना, एक राष्ट्र” विषय पर आधारित यह पहल राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति तथा भारत के संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास है। साथ ही, यह एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को सुदृढ़ करने हेतु विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को प्रोत्साहित करेगी।

शिविर के पहले दिन विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों का पंजीकरण किया गया, जिसके बाद परिचयात्मक सत्र और आपसी संवाद आयोजित हुए। उद्घाटन समारोह की शुरुआत गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी की NSS इकाई ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की सामूहिक प्रस्तुति दी।

समारोह का समापन NSS इकाई द्वारा ‘वंदे मातरम्’ विषय पर आधारित समूह नृत्य और राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ। शाम को आयोजित सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय परंपराओं की झलक प्रस्तुत की, जिसने भारत की “विविधता में एकता” की भावना को साकार किया।

सप्ताहभर चलने वाले इस शिविर के दौरान प्रतिभागी संवैधानिक एवं नागरिक मूल्यों, ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व, युवा नेतृत्व विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान गतिविधियों तथा युवाओं से जुड़े समसामयिक विषयों पर आयोजित सत्रों में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम जागरूक, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं के निर्माण के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संबंधों की स्वीकृति के बिना कोई व्यक्ति किसी की सेवा नहीं कर सकता। जब तक हम दूसरे व्यक्ति को अपना संबंधी नहीं मानते, तब तक उसके प्रति सेवाभाव विकसित नहीं होता। संबंध, संबंधी और संबंधों के प्रयोजन को समझने से ही उपकार एवं निरंतर सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने व्यक्त किए।

वे चेतना विकास मूल्य शिक्षा द्वारा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में आयोजित मध्यस्थ दर्शन सार सत्र के दौरान भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए 100 से अधिक जीवन विद्या अध्ययनार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

कोकडिया ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन सार सत्र का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मानव को समझदार बनने और जीवन को सही दृष्टि से जीने की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह सत्र मध्यस्थ दर्शन के 14 वाग्मयों और लगभग 3600 पृष्ठों के व्यापक ज्ञान का सार है, जिसे 15 दिवसीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाता है।

उन्होंने गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने अपना तन, मन और धन जीवन विद्या अध्ययन तथा मानवीय शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। वे जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं तथा मानव समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देशभर में छह से अधिक जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, गायत्री मंदिर तथा प्रज्ञा पीठों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोकडिया ने बताया कि सामाजिक एवं मानवीय कार्यों में कोई बाधा न आए, इस उद्देश्य से गणेश एवं अर्चना बागडिया ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इनका जीवन सादगी, सरलता और सज्जनता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन विद्या अध्ययन से परिचित कराने में गणेश बागडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रोफेसरगण एवं जीवन विद्या से जुड़े विभिन्न कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने डॉ. कलाम को इस अध्ययन पद्धति से अवगत कराया। बाद में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. कलाम स्वयं कानपुर स्थित मानवीय शिक्षा संस्कार केंद्र पहुंचे थे तथा जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को मानव जीवन में सुख और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

कार्यक्रम के दौरान बिठूर (कानपुर) में आयोजित अध्ययन शिविर का भी उल्लेख किया गया, जहां देशभर से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भीषण गर्मी और नौतपा के समय बिना पंखे एवं कूलर के सामान्य जीवनशैली अपनाते हुए अध्ययन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अभ्यास करते हुए यह अनुभव साझा किया कि सुख-दुख, गर्मी-ठंड जैसी अनुभूतियां हमारी मान्यताओं और प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक अध्ययनार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें एगेश्वरी साहु, ओमन साहु, रेखराज साहु, लक्ष्मी पटेल, हिमाचल पटेल, डॉ. शेषनारायण चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, लोकेश कोठारी, श्वेता जैन, हनी जैन, शीतल गोयल, रजनी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राजा अग्रवाल, रोहित शर्मा, संजय शर्मा,  उमा शर्मा, ममता बत्रा, विजय राज, रागेश्वर,  जय श्री, जयंती जैन, शिव नारायण, कल्पेश पटेल, डॉ. पायल पटेल, प्रतिमा, सुनीता जोशी, जितेंद्र, श्री कमलेश एवं अभिषेक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन विद्या अध्ययन, मानवीय शिक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में समझदारी आधारित जीवन पद्धति को बढ़ावा देना था।

ओडिशा के राज्यपाल ने युवा संगम फेज़-VI के गुजरात छात्र प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

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भुवनेश्वर- ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने युवा संगम फेज़-VI में भाग ले रहे गुजरात के छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद के नेतृत्व में 22 मई 2026 को ओडिशा पहुंचा था। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला द्वारा आयोजित इस शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत छात्रों का 25 मई को गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सांस्कृतिक समझ विकसित करने के महत्व और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस संवाद के दौरान छात्रों को नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन मिला।

अपने दौरे के दौरान छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और विकासात्मक विरासत को करीब से जाना। छात्रों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और मां समलेश्वरी मंदिर का भ्रमण कर राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझा। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात कर ओडिशा की प्रसिद्ध वस्त्र परंपरा के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों ने मुंडा जनजाति समुदाय के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक प्रस्तुतियों में भी भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया, जहां भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समरसता में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। छात्रों ने NIT राउरकेला FTBI लैब, राउरकेला स्टील प्लांट, हीराकुंड बांध और बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम का भी दौरा किया। इन यात्राओं के माध्यम से उन्हें ओडिशा की नवाचार क्षमता, औद्योगिक विकास, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और खेल अवसंरचना की जानकारी मिली।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भाग लिया और पौधारोपण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समझा।

30 मई 2026 को आयोजित समापन समारोह के साथ यह यात्रा संपन्न हुई। युवा संगम के तहत आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

युवा संगम चरण-VI: हरियाणा के विद्यार्थियों का त्रिपुरा दौरा, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

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त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू ने 26 मई 2026 को अगरतला स्थित लोक भवन में हरियाणा के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल ‘युवा संगम चरण-VI’ कार्यक्रम के तहत त्रिपुरा के दौरे पर आया हुआ था।

छात्रों का स्वागत और अनुभव

यह प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ने किया, सबसे पहले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला पहुंचा, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान छात्रों ने त्रिपुरा की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन की प्रमुख पहल और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस बातचीत से उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विविधता और संस्थागत ढांचे को समझने का अवसर मिला।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के तहत छात्रों ने त्रिपुरा के कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने राज्य की समृद्ध परंपराओं, विरासत और विकास यात्रा को नजदीक से जाना।

इसके अलावा, छात्रों ने त्रिपुरा के प्रसिद्ध मंदिरों का भी दर्शन किया, जहां उन्हें राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव हुआ।

‘युवा संगम’ पहल

Yuva Sangam Phase VI की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देना है।

यह कार्यक्रम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री का एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 15 जनवरी, 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) का दौरा किया। कैडेट्स के अनुशासन और प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्होंने उनकी सराहना की और कहा कि उनकी समन्वित परेड, बैंड प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ राष्ट्र की धड़कन को प्रतिबिंबित करती हैं।

मुख्यमंत्री ने साहसी और जिम्मेदार युवाओं के निर्माण में एनसीसी की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संगठन युवाओं में राष्ट्रवाद, एकता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे आजीवन मूल्यों का पोषण करता है। एनसीसी के समग्र प्रशिक्षण ढांचे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ शिविरों और विशेष राष्ट्रीय एकता शिविरों जैसी राष्ट्रीय एकीकरण पहलों के महत्व पर भी जोर दिया।

अपने समापन संबोधन में गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण पर विश्वास व्यक्त किया कि ‘आज के कैडेट्स ही कल के नेता हैं’, जो भारत की एकता, अखंडता और गरिमा के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए विभिन्न भूमिकाओं में राष्ट्र की सेवा करेंगे। उन्होंने युवाओं से कर्तव्य की प्रबल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है और विकसित भारत का निर्माण एक साझा मिशन है। उन्होंने राष्ट्र के गौरव और मातृभूमि की सेवा की भावना को बनाए रखने का आह्वान करते हुए अपने वक्तव्य का समापन किया।

दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ की समीक्षा की। इसके पश्चात केरल के थोडुपुझा स्थित न्यूमैन कॉलेज के कैडेट्स द्वारा एक प्रभावशाली बैंड प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। बाद में उन्होंने सामाजिक विषयों और राष्ट्रीय प्रगति को दर्शाने वाले ‘फ्लैग एरिया’ का भ्रमण किया। इसके उपरांत उन्होंने ‘हॉल ऑफ फेम’ का दौरा किया, जहाँ उन्हें एनसीसी के इतिहास और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। दौरे का समापन कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने क्रिसमस समारोह में भाग लिया, शांति, करुणा और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों पर दिया जोर

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) द्वारा आयोजित क्रिसमस समारोह में भाग लिया और क्रिसमस पर्व से पूर्व ईसाई समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दीं।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्रिसमस शांति, करुणा, विनम्रता और मानव सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का उत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिया गया प्रेम, सद्भाव और नैतिक साहस का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और यह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सह-अस्तित्व, करुणा और मानव गरिमा के सम्मान पर आधारित हैं।

भारत में ईसाई धर्म की दीर्घकालिक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईसाई समुदाय ने देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक यात्रा में शांत लेकिन महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुधार और मानव विकास के क्षेत्रों में ईसाई समुदाय द्वारा किए गए सतत कार्यों की सराहना की, जो देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुंचे हैं, और इसे राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग बताया।

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि झारखंड, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई ईसाई संगठनों के साथ निकटता से कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने अपने सांसद कार्यकाल के दौरान कोयंबटूर के एक चर्च में हर वर्ष क्रिसमस मनाने और वहां अनुभव किए गए आपसी सद्भाव और समझ की भावना को भी याद किया। साथ ही, उन्होंने तमिलनाडु के ऐतिहासिक व्यक्तित्व कॉन्स्टेंटाइन जोसेफ बेस्की (वीरमामुनिवर) का उल्लेख करते हुए तमिल साहित्य और संस्कृति में उनके योगदान को रेखांकित किया, जो भारत में ईसाई परंपरा के गहरे सांस्कृतिक समावेशन को दर्शाता है।

भारत की बहुलतावादी संस्कृति पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की एकता समानता में नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और साझा मूल्यों में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में शांति और सद्भाव का वातावरण है और किसी भी प्रकार के भय की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा से क्रिसमस की भावना की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार क्रिसमस विभिन्न आस्थाओं के लोगों को आनंद के साथ एकजुट करता है, उसी प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ देश की विविधता को संजोते हुए एकता का आह्वान करता है।

उपराष्ट्रपति ने सभी समुदायों से ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर रचनात्मक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने गरीबी उन्मूलन और साझा समृद्धि की दिशा में मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकास सामूहिक प्रयास से ही संभव है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया वर्ष 1944 से कार्यरत है और इसके द्वारा स्थापित विद्यालयों, महाविद्यालयों, अस्पतालों और परोपकारी संस्थानों का व्यापक नेटवर्क इसे आम नागरिकों के जीवन से गहराई से जोड़ता है।

इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस, कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आर्चबिशप एंड्रयूज़ थझथ, भारत में अपोस्टोलिक नुनसियो आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता की शपथ दिलाई

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस – 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकता प्रतिज्ञा भी दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह निर्णय लिया है कि इसे पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर सरदार पटेल ने अपने वकालत के पेशे को त्याग दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1928 के बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व कौशल की सच्ची झलक देखने को मिली, जब किसानों के साथ अन्याय के विरोध में आंदोलन छेड़ा गया। यह आंदोलन जो एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और ब्रिटिश शासन को किसानों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी और वे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के 562 रियासतों में विभाजन की चुनौती थी और यह प्रश्न उठता था कि इतनी बिखरी हुई रियासतों वाला देश एकजुट भारत कैसे बनेगा।अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल के अथक प्रयास, दृढ़ निश्चय और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों का विलय संभव हुआ और वर्तमान भारत का नक्शा आकार में आया। काठियावाड़, भोपाल, जूनागढ़, जोधपुर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी रियासतों ने अलग रहने की कोशिश की, लेकिन सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति ने उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का केवल एक अधूरा कार्य शेष रह गया था — कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर वह कार्य पूरा किया, जो सरदार पटेल का सपना था, और आज हमारे सामने वास्तविक रूप से एकीकृत भारत है।

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब देश के लोग तिरंगा फहरा रहे थे, तब सरदार पटेल नौसेना के युद्धपोत की निगरानी कर रहे थे। उस समय लक्षद्वीप पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठा था, और सरदार पटेल ने तत्काल नौसेना को वहाँ भेजकर तिरंगा फहरवाया, जिससे लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग बन गया।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न प्राप्त करने में 41 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल के योगदान के अनुरूप कोई भव्य स्मारक भी नहीं बनाया गया था। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने केवडिया में एक भव्य स्मारक — स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — बनाने का संकल्प लिया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर 2013 को रखी गई और केवल 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा तैयार हुई, जो आज पूरे देश की एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, और इस प्रतिमा के निर्माण में उपयोग किए गए लगभग 25,000 टन लोहे का संग्रह किसानों के उपकरणों को पिघलाकर किया गया। प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे का प्रयोग हुआ। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण कर चुके हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मार्ग पर चलकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की नींव रखी, उसी मार्ग पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केवडिया में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने सरदार पटेल को भव्य परेड के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष यह एकता परेड इसी भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी विशेष रूप से मनाए जा रहे हैं।अमित शाह ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक पूरे देश में सरदार पटेल के विचारों को विशेषकर युवाओं तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की प्रतिज्ञा ले रहे हैं, वही भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होंगे।

अमित शाह ने पटना में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस 2025 के आयोजन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया

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गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पटना, बिहार में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय एकता दिवस–2025 और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर होने वाले उत्सवों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश को एकजुट करने, आज के भारत की नींव रखने और एक अखंड राष्ट्र के निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ष 31 अक्टूबर को केवड़िया में सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के समक्ष आयोजित परेड में शामिल होते हैं। इस वर्ष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर विशेष आयोजन किया जा रहा है और गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि हर वर्ष 31 अक्टूबर को यह भव्य परेड आयोजित की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि यह परेड केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और राज्यों की पुलिस बलों के सम्मान में आयोजित की जाती है, जिससे देश की एकता और अखंडता के संकल्प को दोहराया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष “रन फॉर यूनिटी” कार्यक्रम को और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जो देशभर के सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलों, पुलिस थानों, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आयोजित होगा। इसके पश्चात् सभी नागरिक “राष्ट्रीय एकता प्रतिज्ञा” भी लेंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं। वे न केवल स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे, बल्कि महात्मा गांधी के साथ मिलकर उन्होंने आंदोलन को संगठित ढांचा भी प्रदान किया। उन्होंने बताया कि 1928 का बारडोली सत्याग्रह किसानों के शोषण के खिलाफ था और इसी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी थी।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय ब्रिटिशों ने भारत को 562 रियासतों में विभाजित कर दिया था, और पूरी दुनिया को यह असंभव लग रहा था कि इन रियासतों को एक देश में जोड़ा जा सके। लेकिन सरदार पटेल ने अपने अद्भुत कौशल और दूरदर्शिता से बहुत कम समय में इन सभी रियासतों का भारत में विलय कर आधुनिक भारत का नक्शा तैयार किया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने हैदराबाद, जूनागढ़, भोपाल, काठियावाड़, त्रावणकोर और जोधपुर जैसे राज्यों की जटिल समस्याओं का समाधान किया और पाकिस्तान की साजिशों को भी नाकाम किया। उन्होंने कहा कि जब 15 अगस्त 1947 को देश आज़ादी मना रहा था, तब सरदार पटेल नौसेना के अधिकारियों के साथ नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे, ताकि लक्षद्वीप भारत का हिस्सा बन सके।

गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल जैसे महान व्यक्तित्व को स्वतंत्रता के बाद भुलाने का प्रयास किया गया और उन्हें भारत रत्न मिलने में 41 वर्ष की देरी हुई। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने सरदार पटेल की स्मृति में “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” की परिकल्पना की और मात्र 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा निर्मित हुई।

इस प्रतिमा के निर्माण में देशभर के किसानों के औज़ारों से इकट्ठा किया गया लोहा प्रयोग हुआ। 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे से निर्मित यह प्रतिमा आज भारत की अभियांत्रिकी क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। अब तक 2.5 करोड़ से अधिक लोग यहाँ आ चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 15,000 लोग इस स्थल का भ्रमण करते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर की सुबह एकता नगर में आयोजित भव्य परेड में सलामी लेंगे। इस परेड में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस बलों, महिला पुलिस अधिकारियों, वीरता पदक प्राप्त जवानों और भारतीय वायुसेना की “सूर्य किरण” टीम का शानदार एयर शो शामिल होगा। 900 से अधिक कलाकार भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर प्रस्तुत करेंगे।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष 31 अक्टूबर को यह परेड आयोजित की जाएगी, जो युवाओं को प्रेरित करेगी और देश में एकता व अखंडता की भावना को और मजबूत करेगी।

उन्होंने अंत में कहा कि हमें मिलकर सरदार पटेल के आदर्शों पर चलकर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का सशक्त वातावरण निर्मित करना है।

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