Media24Media.com: #HolisticEducation

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #HolisticEducation. Show all posts
Showing posts with label #HolisticEducation. Show all posts

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

No comments Document Thumbnail

 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया : गेंदलाल कोकडिया

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- संबंधों की स्वीकृति के बिना कोई व्यक्ति किसी की सेवा नहीं कर सकता। जब तक हम दूसरे व्यक्ति को अपना संबंधी नहीं मानते, तब तक उसके प्रति सेवाभाव विकसित नहीं होता। संबंध, संबंधी और संबंधों के प्रयोजन को समझने से ही उपकार एवं निरंतर सुख का मार्ग प्रशस्त होता है। यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने व्यक्त किए।

वे चेतना विकास मूल्य शिक्षा द्वारा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में आयोजित मध्यस्थ दर्शन सार सत्र के दौरान भारत के 20 से अधिक राज्यों से आए 100 से अधिक जीवन विद्या अध्ययनार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

कोकडिया ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन सार सत्र का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह मानव को समझदार बनने और जीवन को सही दृष्टि से जीने की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह सत्र मध्यस्थ दर्शन के 14 वाग्मयों और लगभग 3600 पृष्ठों के व्यापक ज्ञान का सार है, जिसे 15 दिवसीय पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाता है।

उन्होंने गणेश बागडिया एवं अर्चना बागडिया की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों ने अपना तन, मन और धन जीवन विद्या अध्ययन तथा मानवीय शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया है। वे जीवन विद्या अध्ययन के सच्चे धारक-वाहक हैं तथा मानव समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर देशभर में छह से अधिक जीवन विद्या अध्ययन केंद्र, गायत्री मंदिर तथा प्रज्ञा पीठों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोकडिया ने बताया कि सामाजिक एवं मानवीय कार्यों में कोई बाधा न आए, इस उद्देश्य से गणेश एवं अर्चना बागडिया ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इनका जीवन सादगी, सरलता और सज्जनता का प्रेरणादायी उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन विद्या अध्ययन से परिचित कराने में गणेश बागडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रोफेसरगण एवं जीवन विद्या से जुड़े विभिन्न कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उन्होंने डॉ. कलाम को इस अध्ययन पद्धति से अवगत कराया। बाद में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉ. कलाम स्वयं कानपुर स्थित मानवीय शिक्षा संस्कार केंद्र पहुंचे थे तथा जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा को मानव जीवन में सुख और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया था।

कार्यक्रम के दौरान बिठूर (कानपुर) में आयोजित अध्ययन शिविर का भी उल्लेख किया गया, जहां देशभर से आए लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भीषण गर्मी और नौतपा के समय बिना पंखे एवं कूलर के सामान्य जीवनशैली अपनाते हुए अध्ययन किया। प्रतिभागियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का अभ्यास करते हुए यह अनुभव साझा किया कि सुख-दुख, गर्मी-ठंड जैसी अनुभूतियां हमारी मान्यताओं और प्राथमिकताओं पर निर्भर करती हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक अध्ययनार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें एगेश्वरी साहु, ओमन साहु, रेखराज साहु, लक्ष्मी पटेल, हिमाचल पटेल, डॉ. शेषनारायण चंद्राकर, टिकेंद्र चंद्राकर, लोकेश कोठारी, श्वेता जैन, हनी जैन, शीतल गोयल, रजनी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राजा अग्रवाल, रोहित शर्मा, संजय शर्मा,  उमा शर्मा, ममता बत्रा, विजय राज, रागेश्वर,  जय श्री, जयंती जैन, शिव नारायण, कल्पेश पटेल, डॉ. पायल पटेल, प्रतिमा, सुनीता जोशी, जितेंद्र, श्री कमलेश एवं अभिषेक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य जीवन विद्या अध्ययन, मानवीय शिक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं मानव मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में समझदारी आधारित जीवन पद्धति को बढ़ावा देना था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित चेतना विकास कार्यशाला सम्पन्न, जीवन विद्या पर दिया गया जोर

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रकाश में संकुल केंद्र खट्टा में आयोजित राज्य स्तरीय चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला में शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने शिक्षा के उद्देश्य, मानवीय मूल्यों और जीवन विद्या के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम के दौरान शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षा के विभिन्न आयामों जैसे—शिक्षा का उद्देश्य, जीवन विद्या अध्ययन, परिवार एवं समाज में मूल्य, प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर संवाद किया गया। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देती है।”

समापन सत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशारामस्वरूप दीवान ने कहा कि बच्चों में संस्कार और मूल्य विकसित करने के लिए माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन शिविर और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं को समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों एवं शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और शिक्षा में जीवन विद्या को शामिल करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की पहल से समाज में जागरूकता बढ़ेगी, पारिवारिक और सामाजिक समरसता मजबूत होगी तथा देशभक्ति की भावना विकसित होगी।

कार्यशाला के आयोजन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, अधिकारियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने इसे शिक्षा के मानवीयकरण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.