Media24Media.com: आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को नई ताकत: नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की आधारशिला रखी गई

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आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को नई ताकत: नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की आधारशिला रखी गई

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नागपुर- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज नागपुर स्थित आयुध निर्माणी अंबाझरी में अत्याधुनिक 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा स्थापित की जा रही है और इसे देश की रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षमताओं को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि “जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की रक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।” उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भरता छोड़कर महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और सामग्रियों का स्वदेशी उत्पादन किया जा रहा है।

रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

प्रस्तावित एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। इसके माध्यम से रक्षा प्रणालियों, लड़ाकू विमानों, मिसाइल कार्यक्रमों, अंतरिक्ष अभियानों, रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए बड़े एवं जटिल एल्युमिनियम मिश्रधातु (Alloy) प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसे धातुओं की मांग करते हैं जो हल्के होने के साथ अत्यधिक मजबूत भी हों। यह नई सुविधा देश में ऐसे महत्वपूर्ण धातु उत्पादों के निर्माण की क्षमता विकसित करेगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों के साहस के साथ मजबूत स्वदेशी तकनीक का होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बड़ी सैन्य प्रणालियों की वास्तविक ताकत हजारों छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पुर्जों में छिपी होती है और यह परियोजना देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन जहां 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि:

  • 2014 में रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था।

  • 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

  • सरकार अगले कुछ वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

यंत्र इंडिया लिमिटेड की उपलब्धियां

रक्षा मंत्री ने कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमकरण के बाद स्थापित यंत्र इंडिया लिमिटेड आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

उन्होंने बताया कि:

  • OFB का उत्पादन 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया।

  • रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

  • इसमें YIL का योगदान 397 करोड़ रुपये रहा।

आधुनिक तकनीक और अनुसंधान पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई की सफलता के दो प्रमुख आधार हैं। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों से आधुनिक मशीनरी, नई तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निर्यातक देश बन रहा है और दुनिया भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं को पहचान रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद करेगी।



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